यूपी के किसानों को बड़ी राहत, GPS से होगी गन्ना ढुलाई की निगरानी

Published on: 02-Sep-2026
Updated on: 02-Sep-2026

यूपी में गन्ना क्रय केंद्रों से लेकर चीनी मिलों तक वाहनों की लाइव ट्रैकिंग होगी 

उत्तर प्रदेश में गन्ना किसानों के हित में योगी सरकार लगातार नई पहल कर रही है। किसानों को समय पर गन्ने का भुगतान सुनिश्चित करने के साथ अब गन्ना परिवहन व्यवस्था को भी डिजिटल तकनीक से जोड़ने की तैयारी की जा रही है। प्रदेश में गन्ना क्रय केंद्रों से लेकर चीनी मिलों तक गन्ना पहुंचाने वाले वाहनों की जीपीएस के माध्यम से लाइव ट्रैकिंग की जाएगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य गन्ने की ढुलाई में पारदर्शिता बढ़ाना और किसानों को होने वाले नुकसान को कम करना है। सरकार की इस पहल से प्रदेश के लाखों गन्ना किसानों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।

गन्ना परिवहन व्यवस्था होगी पूरी तरह डिजिटल

प्रदेश के गन्ना आयुक्त मिनिस्ती एस के अनुसार, गन्ना आपूर्ति श्रृंखला को डिजिटल तकनीक से जोड़ने की दिशा में व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम पर विचार किया जा रहा है। इसके तहत गन्ना क्रय केंद्रों से चीनी मिल गेट तक गन्ना ले जाने वाले वाहनों को जीपीएस आधारित निगरानी प्रणाली से जोड़ा जाएगा। इसके लिए एक केंद्रीय कंट्रोल रूम स्थापित करने की योजना है। यहां से अधिकारी गन्ने से लदे वाहनों की आवाजाही पर 24 घंटे नजर रख सकेंगे। इससे यह पता लगाना आसान होगा कि वाहन निर्धारित मार्ग पर चल रहा है या नहीं और गन्ना समय पर मिल तक पहुंच रहा है या नहीं।

केंद्रीय कंट्रोल रूम से होगी 24 घंटे निगरानी

नई व्यवस्था में केंद्रीय कंट्रोल रूम की अहम भूमिका होगी। यहां तैनात अधिकारी जीपीएस के माध्यम से गन्ना ढुलाई करने वाले वाहनों की रियल-टाइम लोकेशन देख सकेंगे। यदि कोई वाहन निर्धारित मार्ग से हटता है, अनावश्यक रूप से रुकता है या लंबे समय तक किसी स्थान पर ठहरता है तो इसकी जानकारी निगरानी व्यवस्था के माध्यम से मिल सकेगी। इससे परिवहन प्रक्रिया में होने वाली अनियमितताओं पर तत्काल नजर रखी जा सकेगी। सरकार का मानना है कि डिजिटल निगरानी से गन्ना आपूर्ति व्यवस्था अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और जवाबदेह बनेगी।

गन्ना कटाई के बाद 24 घंटे में मिल तक पहुंचाने पर जोर

गन्ना आयुक्त ने बताया कि खेत से गन्ने की कटाई के बाद उसे चीनी मिल तक पहुंचाने में देरी होने से किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है। लंबे समय तक खेत या रास्ते में पड़े रहने के कारण गन्ने में नमी कम हो सकती है और उसका वजन प्रभावित हो सकता है। प्रस्तावित व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम के जरिए कटाई के बाद गन्ने को 24 घंटे के भीतर चीनी मिल तक पहुंचाने पर जोर दिया जाएगा। समयबद्ध परिवहन से गन्ने की ताजगी बनाए रखने और उसकी गुणवत्ता को बेहतर रखने में मदद मिलेगी।

अनधिकृत ठहराव और हेराफेरी पर लगेगी रोक

गन्ना ढुलाई के दौरान वाहनों के अनावश्यक रुकने या निर्धारित मार्ग से हटने जैसी समस्याओं पर नई तकनीक से नियंत्रण पाया जा सकेगा। लाइव ट्रैकिंग के जरिए अधिकारियों को वाहन की वास्तविक स्थिति की जानकारी लगातार मिलती रहेगी। इससे अनधिकृत ठहराव और किसी भी तरह की हेराफेरी की संभावना कम होगी। साथ ही परिवहन व्यवस्था में जवाबदेही तय करना भी आसान होगा। गन्ने की आपूर्ति श्रृंखला में पारदर्शिता बढ़ने से चीनी मिलों और किसानों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होने की उम्मीद है।

प्राकृतिक वजन बरकरार रहने से किसानों को फायदा

गन्ने की कटाई के बाद जितनी जल्दी उसे मिल तक पहुंचाया जाता है, उतना ही उसकी ताजगी और प्राकृतिक वजन बनाए रखने में मदद मिलती है। धूप और हवा के लंबे संपर्क में रहने से गन्ना सूख सकता है, जिसका असर उसके वजन पर पड़ सकता है। समयबद्ध परिवहन से इस समस्या को कम किया जा सकेगा। इससे किसानों को वजन में होने वाली संभावित कटौती और उससे जुड़े वित्तीय नुकसान से राहत मिलने की उम्मीद है। इस तरह जीपीएस आधारित निगरानी केवल परिवहन व्यवस्था को बेहतर नहीं करेगी, बल्कि किसानों की आय और हितों की सुरक्षा में भी सहायक हो सकती है।

48 लाख गन्ना किसान परिवारों को मिलेगा लाभ

उत्तर प्रदेश देश के प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में शामिल है और प्रदेश में बड़ी संख्या में किसान गन्ने की खेती पर निर्भर हैं। सरकार के अनुसार, समय पर गन्ने की आपूर्ति और भुगतान की बेहतर व्यवस्था से प्रदेश के करीब 48 लाख गन्ना किसान परिवारों को आर्थिक मजबूती मिल सकती है। गन्ना किसानों की आय और भुगतान व्यवस्था मजबूत होने का सकारात्मक असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। सरकार का मानना है कि गन्ना क्षेत्र को मजबूत बनाकर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को व्यापक स्तर पर गति दी जा सकती है।

2025-26 पेराई सत्र में 30,831.81 करोड़ रुपये का भुगतान

योगी सरकार की ओर से गन्ना किसानों को समयबद्ध और नियमित भुगतान पर भी जोर दिया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पेराई सत्र 2025-26 में अब तक गन्ना किसानों को 30,831.81 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। सरकार का दावा है कि किसानों के गन्ना मूल्य भुगतान को प्राथमिकता दी जा रही है। भुगतान व्यवस्था में सुधार के साथ यदि परिवहन प्रक्रिया भी डिजिटल और पारदर्शी होती है, तो किसानों को गन्ना बेचने से लेकर भुगतान प्राप्त करने तक की पूरी प्रक्रिया में राहत मिल सकती है।

गन्ना क्षेत्र से अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई मजबूती

गन्ना किसानों के हित में उठाए जा रहे कदमों को प्रदेश की अर्थव्यवस्था से भी जोड़कर देखा जा रहा है। समय पर गन्ना मिलों तक पहुंचेगा, किसानों को उनके उत्पादन का बेहतर मूल्य और समय पर भुगतान मिलेगा तथा चीनी उद्योग की आपूर्ति श्रृंखला अधिक प्रभावी होगी तो इसका सकारात्मक असर पूरे क्षेत्र पर पड़ सकता है। सरकार का लक्ष्य उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को एक ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाना है और इस लक्ष्य में गन्ना किसानों की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जा रही है। जीपीएस आधारित परिवहन व्यवस्था इसी दिशा में तकनीक के इस्तेमाल से पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने वाली महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकती है।

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