भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के सौजन्य से अनुसूचित जाति उप-योजना (SCSP) के अंतर्गत “खरीफ फसलों के लिए उत्तम प्रबंधन पद्धतियाँ” विषय पर कृषक प्रशिक्षण एवं कृषि आदान वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम 7 सितंबर 2026 को उत्तर प्रदेश के बुलन्दशहर जिले के खुर्जा ब्लॉक स्थित भाईपुर (खुर्जा) बु. शहर में मौर्या फार्म हाऊस पर आयोजित हुआ। इस अवसर पर डॉ संदीप कुमार लाल की अध्यक्षता में मेरीखेती किसान पंचायत सितंबर 2026 का भी आयोजन हुआ। किसान पंचायत के माध्यम से किसानों को एक साझा मंच मिला, जहां उन्होंने खेती से संबंधित अपने अनुभव, समस्याएं और सुझाव एक-दूसरे के साथ साझा किए।
कार्यक्रम में भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली से जुड़े कृषि वैज्ञानिकों एवं विशेषज्ञों ने किसानों को खरीफ मौसम की प्रमुख फसलों के वैज्ञानिक प्रबंधन के बारे में जानकारी दी। प्रशिक्षण के दौरान किसानों को फसल की बुवाई से लेकर कटाई तक अपनाई जाने वाली विभिन्न तकनीकों के बारे में समझाया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि फसल की सही समय पर बुवाई, गुणवत्तापूर्ण बीज का चयन, संतुलित उर्वरक का प्रयोग, सिंचाई प्रबंधन और खरपतवार नियंत्रण जैसी व्यवस्थाएं उत्पादन बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। किसानों को यह भी बताया गया कि वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर खेती की लागत को नियंत्रित करने के साथ-साथ मिट्टी की उर्वरता और फसल की गुणवत्ता को बेहतर बनाया जा सकता है।
यह आयोजन अनुसूचित जाति उप-योजना (SCSP) के अंतर्गत किया गया, जिसका उद्देश्य कृषि क्षेत्र में किसानों को तकनीकी जानकारी और आवश्यक कृषि संसाधनों तक बेहतर पहुंच उपलब्ध कराना है। कार्यक्रम के दौरान किसानों को कृषि आदानों का वितरण भी किया गया। विशेषज्ञों ने किसानों को इन कृषि आदानों के उचित एवं वैज्ञानिक उपयोग की जानकारी दी, ताकि उनका अधिकतम लाभ फसल उत्पादन में मिल सके। कार्यक्रम में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि केवल कृषि आदान उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है, बल्कि किसानों को उनके सही उपयोग, मात्रा और समय की जानकारी होना भी आवश्यक है। इसी उद्देश्य से प्रशिक्षण और आदान वितरण को एक साथ जोड़ा गया।
कार्यक्रम में SCSP के नोडल अधिकारी श्री एस.के. लाल जी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उनके साथ कृषि वैज्ञानिकों एवं विशेषज्ञों ने भी कार्यक्रम में भाग लिया और किसानों से सीधे संवाद किया। उन्होंने किसानों को कृषि क्षेत्र में उपलब्ध वैज्ञानिक तकनीकों का अधिक से अधिक लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में किसानों की समस्याओं और खेती से जुड़ी व्यावहारिक चुनौतियों को भी सुना गया। किसानों ने फसल उत्पादन, कृषि आदानों, मौसम, रोग एवं कीट प्रबंधन तथा खेती की लागत से संबंधित विषयों पर विशेषज्ञों से जानकारी प्राप्त की। इस तरह कार्यक्रम किसानों और कृषि वैज्ञानिकों के बीच संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम बना।
प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य विषय खरीफ फसलों के लिए उत्तम प्रबंधन पद्धतियां रहा। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को बताया कि खरीफ मौसम में मौसम की परिस्थितियां फसल उत्पादन को काफी प्रभावित करती हैं। ऐसे में किसान को फसल की जरूरत के अनुसार सिंचाई, पोषक तत्व प्रबंधन और कीट-रोग नियंत्रण की रणनीति अपनानी चाहिए। वैज्ञानिकों ने किसानों को फसल की स्थिति की नियमित निगरानी करने और समस्या दिखाई देने पर समय रहते उचित उपाय करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि बिना आवश्यकता के रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का प्रयोग करने के बजाय वैज्ञानिक सलाह के आधार पर इनका उपयोग करना किसानों के लिए अधिक लाभकारी हो सकता है। इससे खेती की लागत कम करने और पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलती है।
कार्यक्रम में खुर्जा ब्लॉक और आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए। हरकेश, मनोहर, योगेश, अभिजीत, बलवीर, बिल्लू, कुमरपाल, दिलीप, राजाराम, ताराचंद, रोहतास, साहिब सिंह, नेत्रपाल, जग्गा प्रधान जी, डामिल कुमार और मदनलाल जी सहित लालपुर, अखत्यारपुर और आसपास के गांवों के प्रगतिशील किसानों ने कार्यक्रम में अपनी सहभागिता दर्ज कराई। किसानों ने प्रशिक्षण के दौरान कृषि वैज्ञानिकों द्वारा दी गई जानकारी को ध्यानपूर्वक सुना और खेती से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की। किसानों की भागीदारी से कार्यक्रम को अधिक व्यावहारिक स्वरूप मिला, क्योंकि किसानों ने अपने खेतों में आने वाली वास्तविक समस्याओं और अनुभवों को विशेषज्ञों के साथ साझा किया।
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