26 अगस्त से देश के कई राज्यों में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, झारखंड और उसके आसपास बने निम्न दबाव क्षेत्र के प्रभाव से पूर्वी उत्तर प्रदेश, पूर्वी मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। इन राज्यों के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ कुछ स्थानों पर भारी बारिश होने की चेतावनी जारी की गई है।
उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के लोगों को अगले कुछ दिनों तक मौसम पर नजर रखने की सलाह दी गई है। खासकर निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को जलभराव और अचानक बाढ़ जैसी परिस्थितियों से सतर्क रहने की जरूरत है। बारिश का यह दौर कृषि कार्यों और सामान्य जनजीवन को भी प्रभावित कर सकता है।
मौसम विभाग ने पूर्वी मध्य प्रदेश के कई जिलों में फ्लैश फ्लड रिस्क की चेतावनी दी है। रीवा, सतना, छतरपुर, टीकमगढ़ और पन्ना में अचानक बाढ़ का खतरा बना हुआ है। वहीं पश्चिमी मध्य प्रदेश के भिंड और दतिया में भी ऐसी स्थिति पैदा हो सकती है।
पूर्वी उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर, वाराणसी, प्रयागराज, जौनपुर, चित्रकूट, कौशांबी, प्रतापगढ़, बांदा, रायबरेली, अमेठी, कानपुर नगर, कानपुर देहात और उन्नाव में सतही जलभराव तथा अचानक बाढ़ जैसी स्थिति का जोखिम बताया गया है। भारी बारिश की स्थिति में नदियों, नालों और निचले इलाकों के आसपास अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत होगी।
पूर्वी उत्तर प्रदेश में 26 और 27 अगस्त को कुछ स्थानों पर भारी बारिश होने की संभावना है। बिहार में भी 26 अगस्त को कई इलाकों में बारिश हो सकती है। इसके बाद 27 से 31 अगस्त के बीच राज्य के कुछ हिस्सों में बारिश का दौर बना रहने का अनुमान है। झारखंड में भी 29 अगस्त तक भारी बारिश की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं।
लगातार बारिश के कारण ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जलभराव की समस्या बढ़ सकती है। सड़कों पर पानी जमा होने से यातायात प्रभावित होने की संभावना भी बनी रहेगी। प्रशासन और स्थानीय लोगों को निचले इलाकों में जल निकासी की व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
पूर्वी मध्य प्रदेश में 29 अगस्त तक कई स्थानों पर बारिश होने का अनुमान है। छत्तीसगढ़ में भी 31 अगस्त तक बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है। राज्य में 26 से 29 अगस्त के बीच कुछ स्थानों पर भारी बारिश की संभावना जताई गई है।
लगातार बारिश के कारण खेतों में पानी जमा होने और ग्रामीण इलाकों में आवाजाही प्रभावित होने का खतरा है। किसानों को फसलों में अतिरिक्त पानी जमा नहीं होने देने के लिए खेतों की नालियों और जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त रखने की सलाह दी गई है। विशेष रूप से धान, मक्का, दलहन और सब्जियों की फसलों को जलभराव से बचाना जरूरी होगा।
दिल्ली-NCR में 26 अगस्त को आसमान सामान्य तौर पर बादलों से घिरा रह सकता है। सुबह से दोपहर के बीच कुछ स्थानों पर बहुत हल्की से हल्की बारिश होने की संभावना है। अधिकतम तापमान 32 से 34 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 25 से 27 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है।
27 अगस्त को भी दिल्ली में बादल छाए रहने और दोपहर के आसपास हल्की बारिश की संभावना है। इस दिन अधिकतम तापमान 34 से 36 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। 28 अगस्त को आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे और तापमान 35 से 37 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है। फिलहाल दिल्ली में भारी बारिश की स्थिति नहीं बताई गई है।
उत्तराखंड में 26 अगस्त को कई स्थानों पर बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग ने 26 अगस्त के बाद 30 और 31 अगस्त को भी भारी बारिश के दौर की संभावना जताई है। हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर-लद्दाख में इस अवधि के दौरान कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।
पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में भी बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना है। झारखंड, पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 26 अगस्त के बाद कई इलाकों में बारिश हो सकती है। ओडिशा में 28 से 31 अगस्त के बीच कई स्थानों पर बारिश और कुछ क्षेत्रों में भारी से बहुत भारी बारिश की आशंका है।
अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय में बारिश का दौर जारी रह सकता है। वहीं नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 29 और 30 अगस्त को कुछ स्थानों पर बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। पश्चिमी भारत में कोंकण और गोवा में 31 अगस्त तक कई स्थानों पर बारिश हो सकती है। गुजरात, सौराष्ट्र और कच्छ में भी 26 अगस्त के बाद कुछ इलाकों में बारिश की संभावना है।
मध्य महाराष्ट्र में 26 अगस्त तक भारी बारिश हो सकती है। दक्षिण भारत में बारिश की गतिविधियां अपेक्षाकृत कम रहने का अनुमान है, हालांकि तटीय कर्नाटक में 31 अगस्त तक कई स्थानों पर बारिश हो सकती है। केरल और माहे में 28 अगस्त तक व्यापक बारिश के बाद 29 से 31 अगस्त के बीच कुछ स्थानों पर बारिश जारी रह सकती है।
बारिश के इस दौर में किसानों को खेतों से अतिरिक्त पानी निकालने की व्यवस्था पहले से सुनिश्चित करने की सलाह दी गई है। उत्तर प्रदेश में अरहर, मक्का, मूंगफली, तिल, धान और सब्जियों के खेतों में जलभराव नहीं होने देना जरूरी है। बिहार में बारिश के दौरान खाद और कीटनाशकों का छिड़काव टालना बेहतर रहेगा। मध्य प्रदेश और विदर्भ में सोयाबीन, कपास, मक्का, गन्ना, दलहन और सब्जियों के खेतों में जल निकासी बनाए रखने की जरूरत है।
छत्तीसगढ़ में धान, मक्का, दलहन और सब्जियों को अतिरिक्त पानी से बचाना चाहिए। तेज हवा की आशंका वाले इलाकों में सब्जियों और छोटे फलदार पौधों को सहारा दें। कटी हुई उपज को सुरक्षित, सूखे और ढके हुए स्थान पर रखें। लगातार बारिश के बीच किसान मौसम की स्थिति के अनुसार ही कृषि कार्य करें और स्थानीय प्रशासन तथा मौसम विभाग की सलाह का पालन करें।
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