मध्य प्रदेश में अच्छी मानसूनी बारिश के बाद धान की रोपाई का कार्य तेजी से शुरू हो गया है। कृषि विभाग किसानों को पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ आधुनिक कृषि यंत्रों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। जबलपुर जिले के पाटन क्षेत्र के ग्राम उजरोड में एक किसान के खेत में पैडी ट्रांसप्लांटर मशीन से धान की रोपाई का सफल प्रदर्शन किया गया, जिसे देखने के लिए कृषि अधिकारी भी पहुंचे।
अधिकारियों के अनुसार पैडी ट्रांसप्लांटर मशीन पारंपरिक हाथ से रोपाई करने की तुलना में अधिक प्रभावी है। यह मशीन कम समय में बड़े क्षेत्र में धान की रोपाई कर सकती है, जिससे किसानों की मजदूरों पर निर्भरता घटती है। साथ ही रोपाई की गुणवत्ता में सुधार होने से फसल का विकास भी बेहतर होता है।
पैडी ट्रांसप्लांटर का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह पौधों को समान दूरी पर लगाती है। इससे खेत में कतारें व्यवस्थित रहती हैं और खरपतवार नियंत्रण, सिंचाई तथा अन्य कृषि कार्य आसानी से किए जा सकते हैं। पौधों को पर्याप्त धूप और पोषण मिलने से उनकी वृद्धि अधिक स्वस्थ तरीके से होती है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि इस मशीन से 18 से 21 दिन की कम उम्र वाली नर्सरी की रोपाई की जाती है। कम उम्र की पौध खेत में जल्दी स्थापित होकर अधिक कंसे विकसित करती है, जिससे प्रति पौधा अधिक बालियां निकलने की संभावना बढ़ जाती है। यही कारण है कि आधुनिक रोपाई तकनीक से उत्पादन में वृद्धि देखने को मिलती है।
कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार पारंपरिक तरीके से धान की रोपाई कराने में प्रति एकड़ लगभग 6,000 से 7,000 रुपये तक खर्च आता है। वहीं पैडी ट्रांसप्लांटर मशीन से यही कार्य करीब 3,000 रुपये प्रति एकड़ में पूरा हो जाता है। इस तरह किसान रोपाई की लागत में लगभग 50 प्रतिशत तक बचत कर सकते हैं।
मध्य प्रदेश सरकार कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा देने के लिए पैडी ट्रांसप्लांटर मशीन की खरीद पर अधिकतम 5 लाख रुपये तक का अनुदान उपलब्ध करा रही है। मशीन की बाजार कीमत लगभग 14.40 लाख रुपये बताई गई है। इस योजना का उद्देश्य छोटे और मध्यम किसानों को भी आधुनिक कृषि उपकरणों तक पहुंच उपलब्ध कराना है।
अनुदान प्राप्त करने के लिए किसानों को कृषि अभियांत्रिकी विभाग के ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन करना होता है। आवेदन के साथ आवश्यक दस्तावेज जमा करने और निर्धारित पात्रता शर्तों का पालन करना अनिवार्य है। आवेदन स्वीकृत होने के बाद सरकार द्वारा निर्धारित नियमों के अनुसार सब्सिडी की राशि प्रदान की जाती है।
कृषि अधिकारियों का मानना है कि पैडी ट्रांसप्लांटर जैसी आधुनिक तकनीकें धान की खेती को अधिक लाभकारी बना सकती हैं। इससे श्रमिकों की कमी की समस्या कम होगी, खेती की लागत घटेगी और उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। ग्राम उजरोड में इस तकनीक की सफलता के बाद आसपास के कई किसानों ने भी इसे अपनाने में रुचि दिखाई है, जिससे भविष्य में आधुनिक धान रोपाई को और अधिक बढ़ावा मिलने की संभावना है।
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