उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए राहत भरी खबर है। उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) ने निजी नलकूपों के बिजली कनेक्शन की प्रक्रिया को पहले से अधिक आसान, पारदर्शी और किसान हितैषी बनाने के लिए नई व्यवस्था लागू की है। इस फैसले से अब किसानों को बिजली कनेक्शन लेने के दौरान अनावश्यक देरी और बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने जैसी परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा। नई व्यवस्था का उद्देश्य कनेक्शन प्रक्रिया को सरल बनाना और किसानों को समय पर सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराना है।
यूपीपीसीएल के चेयरमैन डॉ. आशीष गोयल ने प्रदेश के सभी बिजली वितरण निगमों के प्रबंध निदेशकों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि निजी नलकूप बिजली कनेक्शनों से जुड़ी नई व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी, तेज और उपभोक्ता हितों के अनुरूप हो, ताकि किसानों को बिना किसी अनावश्यक बाधा के बिजली कनेक्शन मिल सके।
अब तक निजी नलकूपों के बिजली कनेक्शन के दौरान कई आवश्यक निर्माण सामग्रियों की समय पर उपलब्धता नहीं होने से किसानों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। क्रॉस आर्म होल्डिंग क्लैम्प, स्टे क्लैम्प, एफ-ब्रैकेट, 11 केवी टीपीएमओ सेट, थ्री-फेज फ्यूज सेट, टॉप टी-ऑफ क्लैम्प, एमएस नट-बोल्ट, एलटी शैकल इंसुलेटर, डी-क्लैम्प, डेंजर बोर्ड, बार्ब्ड वायर, स्टोन पैड और एक्सएलपीई आर्मर्ड केबल जैसी सामग्रियों की कमी के कारण कई बार बिजली कनेक्शन का कार्य लंबे समय तक लंबित रहता था। किसानों को इन सामग्रियों के लिए अलग-अलग कार्यालयों के कई चक्कर लगाने पड़ते थे, जिससे समय और पैसे दोनों की हानि होती थी।
इस समस्या के समाधान के लिए यूपीपीसीएल ने दो महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। पहला, निजी नलकूप कनेक्शन के लिए आवश्यक निर्माण सामग्री की किट यथासंभव एक साथ उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा, जिससे किसानों को अलग-अलग सामग्री लेने के लिए बार-बार भंडार कार्यालय नहीं जाना पड़े। दूसरा, जिन निर्माण सामग्रियों की आपूर्ति निगम द्वारा नहीं की जाएगी, उनका शुल्क किसानों से धन-मांग पत्र (टीसी) के माध्यम से नहीं लिया जाएगा। इससे किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी कम होगा।
नई व्यवस्था के तहत निजी नलकूप बिजली कनेक्शन के लिए तैयार किए जाने वाले स्टीमेट में आवश्यक निर्माण सामग्रियों का पूरा विवरण अनिवार्य रूप से दर्ज किया जाएगा। हालांकि इन सामग्रियों की कीमत स्टीमेट में शामिल नहीं की जाएगी, लेकिन किसानों की सुविधा के लिए उनकी अनुमानित मात्रा और संभावित लागत का उल्लेख अवश्य किया जाएगा। इससे किसानों को पहले से ही यह जानकारी मिल जाएगी कि किन सामग्रियों की आवश्यकता होगी और उन पर कितना खर्च आ सकता है।
यदि किसी स्थिति में निगम आवश्यक निर्माण सामग्री उपलब्ध नहीं करा पाता है, तो किसान अधिकृत लाइन निर्माण एजेंसी के माध्यम से अपने खर्च पर इन सामग्रियों की व्यवस्था कर सकेंगे। हालांकि बिजली कनेक्शन को चालू करने से पहले विभाग संबंधित निर्माण सामग्री की गुणवत्ता और तकनीकी मानकों की पूरी जांच करेगा, ताकि सुरक्षा और गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता न हो।
यूपीपीसीएल ने यह भी निर्देश दिए हैं कि लाइन निर्माण के दौरान विद्युत पोल, स्टे, ग्राउटिंग तथा अन्य सभी निर्माण कार्य निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुसार ही किए जाएं। इसके साथ ही किसानों को जारी किए जाने वाले धन-मांग पत्र (टीसी) के साथ सभी नियम एवं शर्तें भी संलग्न की जाएंगी, जिससे पूरी प्रक्रिया अधिक स्पष्ट, पारदर्शी और उपभोक्ता-अनुकूल बन सके।
यूपीपीसीएल के अनुसार इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य किसानों को अनावश्यक भागदौड़ और देरी से राहत देना, निजी नलकूपों के विद्युतीकरण की प्रक्रिया में तेजी लाना तथा निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना है। इससे किसानों को समय पर बिजली कनेक्शन मिलने में आसानी होगी, सिंचाई व्यवस्था मजबूत होगी और कृषि कार्य अधिक प्रभावी ढंग से किए जा सकेंगे। परिणामस्वरूप प्रदेश में कृषि उत्पादन बढ़ाने और किसानों की आय में सुधार लाने में भी यह पहल महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
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