देश के सोयाबीन बाजार में पिछले दो कारोबारी दिनों के दौरान करीब 190 से 200 रुपये प्रति क्विंटल तक की तेजी दर्ज की गई है। मंडियों में बढ़ी खरीदारी, किसानों द्वारा सीमित मात्रा में बिक्री और वैश्विक बाजार से मिले सकारात्मक संकेतों ने सोयाबीन की कीमतों को मजबूती प्रदान की है। व्यापारियों के अनुसार इस समय बाजार का माहौल तेजी वाला बना हुआ है और अधिकांश खरीदार आगे की संभावित मांग को देखते हुए सक्रिय रूप से खरीदारी कर रहे हैं। किसानों द्वारा अधिक कीमतों की उम्मीद में फिलहाल कम मात्रा में माल बाजार में लाने से भी आपूर्ति सीमित बनी हुई है। यही कारण है कि मंडियों में सोयाबीन के भाव लगातार सुधर रहे हैं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही स्थिति अगले कुछ दिनों तक बनी रहती है तो कीमतों में और अधिक सुधार देखने को मिल सकता है।
मंडी बाजार की रिपोर्ट के अनुसार जुलाई वायदा की तुलना में अगस्त और सितंबर डिलीवरी वाले सौदों में लगभग 190 से 200 रुपये प्रति क्विंटल तक का सुधार दर्ज किया गया है। यह तेजी केवल हाजिर बाजार तक सीमित नहीं है बल्कि वायदा बाजार में भी खरीदारों का भरोसा बढ़ता दिखाई दे रहा है। व्यापारियों का कहना है कि वर्तमान समय में उद्योगों की मांग अच्छी बनी हुई है जबकि किसानों की ओर से बिकवाली अपेक्षाकृत कम हो रही है। सीमित आपूर्ति के कारण बाजार में उपलब्ध स्टॉक तेजी से घट रहा है और इसका सीधा असर कीमतों पर दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसानों की बिकवाली इसी प्रकार नियंत्रित रहती है तो आने वाले समय में वायदा बाजार और हाजिर बाजार दोनों में सोयाबीन के भाव मजबूत बने रह सकते हैं।
देश के प्रमुख सोयाबीन उत्पादक राज्यों की मंडियों में इस समय अलग-अलग भाव देखने को मिल रहे हैं। मध्य प्रदेश के जीरापुर (राजगढ़) मंडी में सोयाबीन का उच्चतम भाव 6,520 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया, जबकि खंडवा की मुंडी मंडी में सामान्य सोयाबीन 5,700 रुपये प्रति क्विंटल तक बिका। सागर जिले की गढ़ाकोटा मंडी में 6,325 रुपये प्रति क्विंटल तथा इंदौर मंडी में 6,800 रुपये प्रति क्विंटल तक के भाव दर्ज किए गए। वहीं खंडवा की मुंडी मंडी में पीले सोयाबीन का उच्चतम भाव 6,400 रुपये प्रति क्विंटल रहा। गुजरात के राजकोट जिले की धोराजी मंडी में पीले सोयाबीन का भाव 7,255 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंचा, जबकि अमरेली जिले की बगसरा मंडी में विशेष गुणवत्ता वाले पीले सोयाबीन का उच्चतम भाव 13,700 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया। गुणवत्ता, मांग और स्थानीय उपलब्धता के अनुसार मंडियों में भावों में अंतर देखा जा रहा है।
सोयाबीन बाजार में तेजी की सबसे बड़ी वजहों में से एक पुरानी फसल का घटता स्टॉक भी है। उपलब्ध बाजार आंकड़ों के अनुसार पिछले वर्ष की तुलना में पुरानी फसल का स्टॉक लगभग 13.8 प्रतिशत कम रह गया है। इससे तेल मिलों और प्रोसेसिंग उद्योगों के सामने कच्चे माल की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ गई है। नई फसल के बाजार में आने में अभी समय है, इसलिए उद्योग अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए उपलब्ध स्टॉक की खरीद तेजी से कर रहे हैं। बढ़ती औद्योगिक मांग और सीमित उपलब्धता के कारण बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है, जिससे सोयाबीन के दामों को लगातार समर्थन मिल रहा है। यदि नई फसल आने तक स्टॉक की स्थिति कमजोर बनी रहती है तो कीमतों में और मजबूती आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
घरेलू बाजार की तेजी के पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजार की मजबूती भी एक महत्वपूर्ण कारण है। शिकागो बोर्ड ऑफ ट्रेड (CBOT) पर सोयाबीन वायदा में हाल के दिनों में सुधार देखने को मिला है, जिससे वैश्विक बाजार का माहौल सकारात्मक बना है। इसके अलावा अर्जेंटीना में मौसम की अनिश्चितता और उत्पादन को लेकर बनी चिंताओं ने वैश्विक आपूर्ति पर असर पड़ने की आशंका बढ़ा दी है। दूसरी ओर ब्राजील से सोयाबीन निर्यात की गति में बदलाव और विश्व स्तर पर खाद्य तेलों की मांग में सुधार ने भी कीमतों को समर्थन दिया है। डॉलर इंडेक्स में उतार-चढ़ाव के बावजूद वैश्विक तिलहन बाजार में खरीदारी का रुझान बना हुआ है, जिसका सीधा प्रभाव भारतीय बाजार पर भी देखने को मिल रहा है।
सोयाबीन की कीमतों में तेजी का एक प्रमुख कारण सोया तेल और सोया खली के बाजार में आई मजबूती भी है। हाल के दिनों में इन दोनों उत्पादों की कीमतों में सुधार दर्ज किया गया है, जिससे क्रशिंग उद्योग की लाभप्रदता बेहतर हुई है। जब प्रोसेसरों को तेल और खली की बिक्री से बेहतर मार्जिन मिलने लगता है, तब वे अधिक मात्रा में सोयाबीन खरीदने के लिए तैयार रहते हैं। इसी कारण बाजार में प्रोसेसरों की सक्रिय खरीदारी बढ़ी है। इससे किसानों को भी बेहतर भाव मिलने लगे हैं और बाजार में सकारात्मक माहौल बना हुआ है। उद्योग जगत का मानना है कि यदि सोया तेल और सोया खली की मांग इसी प्रकार बनी रहती है तो सोयाबीन की कीमतों को आगे भी अच्छा समर्थन मिलता रहेगा।
हालांकि वर्तमान समय में बाजार का रुख तेजी वाला दिखाई दे रहा है, लेकिन आने वाले महीनों में कई ऐसे कारक हैं जो कीमतों की दिशा तय करेंगे। सबसे महत्वपूर्ण भूमिका इस वर्ष के मानसून की प्रगति निभाएगी। यदि समय पर और पर्याप्त वर्षा होती है तो नई फसल का उत्पादन अच्छा रहने की संभावना बढ़ जाएगी, जिससे आगे चलकर बाजार में आपूर्ति बढ़ सकती है। वहीं यदि मौसम प्रतिकूल रहता है या फसल उत्पादन प्रभावित होता है तो कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले बदलाव, वैश्विक मांग, निर्यात की स्थिति और घरेलू तेल उद्योग की खरीदारी भी आने वाले समय में सोयाबीन बाजार की चाल निर्धारित करेंगे।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है, कि वर्तमान परिस्थितियों में सोयाबीन बाजार में सकारात्मक माहौल बना हुआ है, लेकिन किसानों और व्यापारियों को केवल तेजी के अनुमान के आधार पर निर्णय लेने से बचना चाहिए। मंडी भावों में प्रतिदिन मांग और आपूर्ति के अनुसार उतार-चढ़ाव होता रहता है। इसलिए बिक्री या खरीद का निर्णय लेने से पहले स्थानीय मंडी के ताजा भावों की जानकारी अवश्य प्राप्त करें। ऊपर दिए गए सभी भाव विभिन्न मंडियों के उच्चतम बाजार भाव हैं, और वास्तविक लेनदेन गुणवत्ता, नमी, साफ-सफाई तथा स्थानीय मांग के आधार पर अलग-अलग हो सकते हैं। यदि वैश्विक बाजार की मजबूती, सीमित घरेलू स्टॉक और उद्योगों की खरीदारी का मौजूदा रुझान जारी रहता है तो निकट अवधि में सोयाबीन की कीमतों में और सुधार की संभावना बनी रह सकती है। वहीं किसानों के लिए यह समय बाजार की गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए रखने और सोच-समझकर विपणन रणनीति अपनाने का है।