प्रगति मिशन योजना: आधुनिक तकनीक से बदलेगी भारतीय खेती की तस्वीर

Published on: 12-Jul-2026

खेती को तकनीक से जोड़ने की राष्ट्रीय पहल

भारत में कृषि को अधिक आधुनिक, टिकाऊ और लाभकारी बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने एक नई और महत्वाकांक्षी पहल ‘प्रगति’ (PRAGATI) मिशन की शुरुआत की है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा लॉन्च किए गए इस मिशन का लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीक आधारित कृषि सेवाओं का विस्तार करना है। 

इसके तहत देशभर में 20 हजार ग्रामीण युवाओं को कृषि-उद्यमी के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा, जो लगभग 20 लाख छोटे और सीमांत किसानों तक आधुनिक कृषि सेवाएं पहुंचाएंगे। सरकार का मानना है कि यह पहल खेती में नई तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देने के साथ-साथ किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाएगी। यह मिशन कृषि क्षेत्र में नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

किसानों की आय बढ़ाने पर सरकार का विशेष फोकस

कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा, जब गांव समृद्ध होंगे और किसान आर्थिक रूप से मजबूत बनेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य केवल कृषि उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि खेती की लागत कम करना और किसानों की आय में स्थायी वृद्धि सुनिश्चित करना है। 

इसके लिए फसल विविधीकरण, मूल्य संवर्धन (वैल्यू एडिशन), कृषि उत्पादों की प्रोसेसिंग और कृषि आधारित उद्यमिता को बढ़ावा दिया जाएगा। सरकार चाहती है कि छोटे और सीमांत किसान भी आधुनिक तकनीकों और बेहतर बाजार व्यवस्था का लाभ उठाकर अपनी आमदनी बढ़ा सकें। इसी सोच के साथ कृषि को रोजगार और उद्यम के नए अवसरों से जोड़ने की रणनीति तैयार की गई है।

पहले चरण में आठ प्रमुख राज्यों में होगा विस्तार

प्रगति मिशन का पहला चरण देश के प्रमुख कृषि राज्यों में लागू किया जाएगा। इनमें मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, असम और झारखंड शामिल हैं। इन राज्यों में प्रशिक्षित कृषि-उद्यमी गांव स्तर पर किसानों के लिए आधुनिक कृषि सेवाओं का केंद्र बनेंगे। 

वे किसानों को मिट्टी परीक्षण, उन्नत खेती की तकनीकों, कृषि मशीनरी के उपयोग, डिजिटल कृषि सलाह और मौसम आधारित खेती की जानकारी उपलब्ध कराएंगे। 

इसके अलावा किसानों को बैंकिंग सेवाओं, सरकारी योजनाओं और वित्तीय संस्थानों से जोड़ने के साथ-साथ बेहतर बाजार तक पहुंच दिलाने में भी सहायता करेंगे। इससे किसानों को एक ही स्थान पर कई आवश्यक सेवाएं मिलने की सुविधा विकसित होगी।

नई तकनीकों और वैज्ञानिक खेती को मिलेगा बढ़ावा

सरकार का मानना है, कि बदलते समय में केवल पारंपरिक खेती के भरोसे किसानों की आय में अपेक्षित वृद्धि संभव नहीं है। इसी कारण प्रगति मिशन के तहत ड्रोन तकनीक, डिजिटल कृषि परामर्श, वैज्ञानिक खेती, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन और आधुनिक कृषि उपकरणों के उपयोग पर विशेष जोर दिया जाएगा। किसानों को फसल प्रबंधन, सिंचाई, उर्वरकों के संतुलित उपयोग और रोग नियंत्रण से जुड़ी वैज्ञानिक जानकारी भी उपलब्ध कराई जाएगी। 

इसके अलावा जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए टिकाऊ खेती और संसाधनों के बेहतर उपयोग पर भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। सरकार का उद्देश्य तकनीक के माध्यम से खेती को अधिक उत्पादक, किफायती और पर्यावरण के अनुकूल बनाना है।

कृषि से जुड़े विविध क्षेत्रों में मिलेंगे नए अवसर

प्रगति मिशन केवल फसल उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि किसानों की अतिरिक्त आय बढ़ाने के लिए उन्हें कृषि से जुड़े अन्य क्षेत्रों से भी जोड़ा जाएगा। इसके अंतर्गत बागवानी, पशुपालन, मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन और अन्य कृषि आधारित गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। कृषि-उद्यमी किसानों को इन क्षेत्रों में प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता और बाजार संपर्क उपलब्ध कराने में सहयोग करेंगे। 

इससे किसानों को आय के नए स्रोत विकसित करने का अवसर मिलेगा और खेती पर पूरी तरह निर्भर रहने की मजबूरी कम होगी। सरकार का मानना है कि बहुआयामी कृषि मॉडल अपनाने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था अधिक मजबूत और आत्मनिर्भर बन सकेगी।

महिला कृषि-उद्यमियों की बढ़ेगी भागीदारी

प्रगति मिशन की एक महत्वपूर्ण विशेषता महिला सशक्तिकरण पर विशेष ध्यान देना है। सरकार बड़ी संख्या में कृषि सखी और महिला कृषि-उद्यमियों को इस कार्यक्रम से जोड़ने की योजना बना रही है। प्रशिक्षित महिलाएं गांवों में आधुनिक खेती की तकनीकों, डिजिटल सेवाओं और सरकारी योजनाओं की जानकारी किसानों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। इससे न केवल महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ेगी, बल्कि ग्रामीण समाज में उनकी नेतृत्व क्षमता भी मजबूत होगी। महिला कृषि-उद्यमियों के माध्यम से नई तकनीकों का तेजी से प्रसार होने और ग्रामीण विकास को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

निजी और वैश्विक संस्थाओं का मिलेगा सहयोग

प्रगति मिशन को भारत में निजी क्षेत्र के सहयोग से शुरू किए गए सबसे बड़े कृषि-उद्यमिता कार्यक्रमों में शामिल किया जा रहा है। इस पहल में पेप्सिको फाउंडेशन, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया फाउंडेशन (SBIF), गेट्स फाउंडेशन, IDH, हीफर इंटरनेशनल, एनवायरनमेंटल डिफेंस फंड (EDF), ग्लोबल एग्री एंटरप्रेन्योरशिप अकादमी, SAFIA, एग्री एंटरप्रेन्योर ग्रोथ फाउंडेशन (AEGF) और ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया फाउंडेशन (TRIF) जैसी संस्थाएं भागीदार हैं। ये संगठन प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग, डिजिटल सेवाएं, वित्तीय समावेशन और बाजार संपर्क जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने में सहयोग करेंगे। सरकार का विश्वास है कि सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की साझेदारी से इस मिशन के लक्ष्य अधिक प्रभावी ढंग से पूरे किए जा सकेंगे।

टिकाऊ खेती और बेहतर भविष्य की ओर कदम

प्रगति मिशन एग्री-एंटरप्रेन्योर ग्रोथ फाउंडेशन (AEGF) के पूर्व अनुभवों पर आधारित है। वर्तमान में कार्यरत 26 हजार से अधिक कृषि-उद्यमियों के नेटवर्क का विस्तार करते हुए 20 हजार नए कृषि-उद्यमी तैयार किए जाएंगे। सरकार का लक्ष्य है कि इस मिशन के माध्यम से 20 लाख से अधिक लघु एवं सीमांत किसानों तक आधुनिक कृषि सेवाएं पहुंचाई जाएं। साथ ही कम से कम 20 प्रतिशत किसानों को पुनर्योजी (रेजेनेरेटिव) कृषि पद्धतियां अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। 

सरकार ने किसानों की आय में लगभग 30 प्रतिशत वृद्धि और धान, मक्का तथा आलू जैसी प्रमुख फसलों की उत्पादकता में 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके अतिरिक्त किसानों को औपचारिक बैंकिंग सेवाओं, वित्तीय साक्षरता और डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने पर भी विशेष जोर रहेगा, ताकि भारतीय कृषि भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप अधिक टिकाऊ, लाभकारी और जलवायु अनुकूल बन सके।

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