भैंस पालन से भी किसान कमा सकते हैं बड़ा मुनाफा

0

भारत को कृषि प्रधान देश कहते हैं. देश के किसान कृषि के साथ साथ सामान रूप से पशुपालन भी करते हैं. कहा भी जाता है कि कृषि और पशुपालन एक दुसरे का पूरक होता है. पशुपालन से जहाँ एक ओर दुग्ध उत्पादन होता है, वहीं किसानी खेती के लिए सबसे बेहतर खाद भी प्राप्त किया जाता है. गाँव में लगभग सभी किसान खेती के साथ ही पशुपालन भी करते है. दुधारू पशुओं को हर घर में देखा जा सकता है.

पशुपालन अब डेयरी व्यवसाय का रूप ले चूका है. गाय, भैंस, भेड, बकरी डेयरी व्यवसाय के लिए पाला जाता है. लेकिन दूध देने की क्षमता के आधार पर भैंस पालन (buffallo rearing) को ज्यादा अच्छा माना जाता है.

ये भी पढ़ें: भेड़, बकरी, सुअर और मुर्गी पालन के लिए मिलेगी 50% सब्सिडी, जानिए पूरी जानकारी

गांव में रहने वाले लोग भैंस पालन का व्यवसाय कर बढ़िया मुनाफा कमा सकते हैं.


भैंस पालन के लिए सबसे जरूरी है की भैंसों का सही चुनाव किया जाए. जो किसान भैंस पालन करना चाहते हैं और अपनी आर्थिक स्थिति सुधारना चाहते हैं वैसे लोगों के लिए यह जानना जरूरी है कि किस नस्ल की भैंस को पाला जाए जिससे ज्यादा से ज्यादा दूध का उत्पादन हो सके.

दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में भारत का स्थान अव्वल है. देश के ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि और किसानी के साथ-साथ पशुपालन भी एक मुख्य कार्य है. हजारों की संख्या में ग्रामीण, पशुपालन से अपना जीवन यापन करते हैं. पशु विशेषज्ञों की माने तो दुधारू जानवरों में सबसे ज्यादा दूध देने की क्षमता भैस में होती है, इसी के कारण किसान कम मेहनत में ज्यादा दूध उत्पादन के लिए ज्यादातर भैंस पालन को बेहतर समझते हैं. लेकिन, यहां सबसे ज्यादा जरूरी होता है कि भैंस के किन नस्लों का चुनाव किया जाए जिनकी दूध उत्पादकता की क्षमता सबसे अधिक हो.

दुग्ध उत्पादन पर ही पशुपालक के आर्थिक समृद्धि निर्भर करती है. अगर दूध देने की क्षमता कम होगी तो स्वाभाविक है की बिजनेस ठप हो जाएगा या फिर घाटे में चलेगा. इसी के कारण हम यहां किसान भाइयों को भैंस की नस्ल के बारे में बता रहे हैं जिनको घर लाकर आप ज्यादा से ज्यादा मुनाफा कमा सकते हैं.

ये भी पढ़ें: आप खेती में स्टार्टअप शुरू करना चाहते है, तो सरकार आपकी करेगी मदद

भैंस के किस नस्ल का चुनाव करें ?

मुर्रा नस्ल :

दुनिया में सबसे ज्यादा दुधारू भैंस में मुर्रा नस्ल को माना जाता है. मुर्रा नस्ल की भैंस 1 दिन में 13 से 15 लीटर तक दूध दे सकती है. लेकिन मुर्रा भैंस का पालन करने वाले पशुपालकों की उसके खानपान पर क्या ध्यान देना पड़ता है.

मेहसाना नस्ल :

मेहसाना नस्ल की भैंस भी अच्छी प्रजाति का भैंस माना जाता है. यह 20 से 30 लीटर तक दूध देने की क्षमता रखती है. गुजरात और महाराष्ट्र में मेहसाना भैंस का बड़ी मात्रा में पालन किया जाता है.

पंढरपुरी भैंस और सुरती नस्ल की भैस :

महाराष्ट्र में पाए जाने वाली भैंस की नस्ल पंढरपुरी अपने दूध देने के क्षमता के कारण ही जानी जाती है. वही सुरती नस्ल की भैंस भी दूध क्षमता में बेहतर होती है. यह दोनों भैंस 1 साल में 1400 लीटर से 1600 लीटर दूध देती है.

जाफराबादी, संभलपुरी भैंस, नीली-रावी भैंस टोड़ा भैंस, साथकनारा भैंस :

डेयरी व्यवसाय करने वाले किसानों के लिए जाफराबादी संबलपुरी बैंड नीली-रावी भैंस, टोड़ा भैंस और साथकनारा भैंस अच्छी नस्ल की भैंसों में मानी जाती है. इन नस्ल की भैंस सालाना 1500 लीटर से 2000 लीटर तक दूध उत्पादन की क्षमता रखती है.

 

Leave A Reply

Your email address will not be published.

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. AcceptRead More