मशरूम की कृषि योग्य किस्में, तापमान, उर्वरक, लागत और आय की जानकारी

Published on: 12-May-2024

कृषकों के लिए मशरूम की खेती एक बेहतरीन आय का स्त्रोत है। मशरूम की खेती करने के लिए कम भूमि, पानी और समय की जरूरत होती है। अन्य कृषि उत्पादों के मुकाबले में मशरूम की खेती करने में लागत कम आती है और अच्छी आमदनी हांसिल की जा सकती है।

भारतीय किसान वर्तमान में पारंपरिक खेती से हटकर गैर पारंपरिक खेती की तरफ अपना रुझान कर रहे हैं और इसमें सफलता भी प्राप्त कर रहे हैं। अधिकांश किसान सब्जियों की खेती करना ज्यादा पंसद करते हैं। क्योंकि, इनसे कम समय में अधिक कमाई की जा सकती है। इनमें से एक मशरूम की खेती भी है। 

मशरूम एक अत्यंत लाभकारी खेती है

कृषकों के लिए मशरूम की खेती एक अत्यंत लाभकारी और व्यापक व्यवसाय है। मशरूम की खेती करने के लिए कम भूमि, पानी और समय की जरूरत पड़ती है। 

अन्य कृषि उत्पादों के मुकाबले में मशरूम की खेती करने में खर्चा कम आता है और बेहतरीन आय अर्जित की जा सकती है। मशरूम में विभिन्न तरह के पोषक तत्व, विटामिन्स, खनिज और प्रोटीन्स की भरपूर मात्रा पाई जाती है, जो हमारे स्वास्थ्य के लिए अत्यंत फायदेमंद है। 

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मशरूम की कृषि योग्य कितनी किस्में हैं?

मशरूम की खेती करने से पूर्व आपको इसकी उन प्रजातियों का चयन करना चाहिए, जिससे कम वक्त में आपकी अच्छी-खासी आय हो सके। इसके अतिरिक्त, आपको इसकी खेती करने से पूर्व अपने नजदीकी बाजार की मांग के अनुरूप मशरूम की पैदावार करनी चाहिए। 

आपकी जानकारी के लिए बतादें, कि संपूर्ण विश्व में मशरूम की कृषियोग्य 70 प्रजातियाँ विघमान हैं। लेकिन, भारत में सफेद बटर मशरूम, शिटाके मशरूम, ढींगरी (ऑयस्टर) मशरूम, पैडीस्ट्रा मशरूम और दूधिया मशरूम किस्मों को उगाया जाता है। इनकी खेती करके किसान अच्छा और मोटा मुनाफा कमा रहे हैं। 

मशरूम की खेती के लिए उचित तापमान और खाद 

मशरूम की खेती करने के लिए किसानों को निश्चित तापमान का भी ख्याल रखना होता है। इसकी फसल लगाने के लिए 15 से 17 डिग्री सेल्सियस का तापमान काफी शानदार माना जाता है। 

इसकी खेती के लिए फूस के छप्परों का एक सेट निर्मित किया जाता है। साथ ही, इसके नीचे कंपोस्ट खाद का बेड बनाया जाता है। अब इसमें मशरूम के बीज डालकर इसकी खेती की जाती है। 

किसान इसकी खाद को तैयार करने के लिए गेहूं का भूसा, नीम की खली, पोटाश, यूरिया, चोकर और पानी को मिलाकर एक से डेढ़ माह तक सड़ाते हैं। 

जब इसके लिए खाद तैयार होती है, तो मोटी मोटी बेड बनाकर इसमें मशरूम के बीजों को रोपा जाता है। बीज बुवाई के उपरांत इसको ढ़क दिया जाता है और इसके लगभग एक महीने पश्चात मशरूम निकलना शुरू हो जाते हैं।

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मशरूम की खेती से लाखों में होगी आय

किसान भाइयों यदि आप मोटी आय करना चाहते हैं, तो मशरूम की खेती एक शानदार विकल्प माना जाता है। इसकी खेती के लिए कृषकों को लंबे-चौड़े खेत की आवश्यकता नहीं पड़ती है। 

बतादें, कि एक कमरा ही इसके लिए पर्याप्त होता है। कम खर्च और कम जगह के उपरांत भी किसान इसकी खेती करके कुल खर्च का तीन गुना तक सुगमता से कमा सकते हैं। 

एक कमरे में मशरूम की खेती करने पर 50 से 60 हजार रुपए का खर्चा आता है और इससे 3 से 4 लाख रुपए की सुगमता से आय से हो जाती है।

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