जानें कीकर के पेड़ की लकड़ी, पत्ती और छाल की अद्भुत विशेषताओं के बारे में

Published on: 10-May-2023

कीकर की खेती से किसानों को काफी अच्छी आमदनी हो सकती है। कीकर के पेड़ का इस्तेमाल ईधन, औषधीय तौर पर किया जाता है। इसकी लकड़ी बाजार में बेहतरीन कीमतों पर बिक जाती है। भारत एक कृषि प्रधान देश है। यहां की अधिकांश जनसँख्या खेती किसानी पर निर्भर होती है। किसान खेती में विभिन्न प्रयोगों के माध्यम से भी अच्छा खासा कमा लेते हैं। भारत के भिन्न-भिन्न राज्यों में किसान विभिन्न प्रकार के पेड़, पौधों की खेती करते हैं। इसी कड़ी में हम आपको ऐसे ही आज नई तरह की खेती के विषय में जानने का प्रयास करेंगे। जोकि किसानों के लिए काफी फायदे का सौदा साबित हो सकता है। कीकर फार्मिंग एक ऐसी ही खेती है, जिसकी बुवाई करके किसान भाई मोटी आमदनी कर सकते हैं।

कीकर से कितने वर्ष में कमाई होनी शुरू हो जाती है

कीकर की खेती रेतीली मृदा और दोमट मृदा वाले क्षेत्र में होती है। इसे शुष्क और अर्ध शुष्क इलाकों में किया जाता है। जिन स्थानों पर तापमान ज्यादा होता है। वहां कीकर की फार्मिंग भी बेहतरीन होती है। प्रमुख बात यह है, कि 5 से 6 वर्ष में ही किसान पेड़ से आमदनी करना चालू कर देंगे। विशेष बात यह है, कि किसान यदि चाहें तो कीकड़ के पेड़ से ही बीज लाकर इसकी बुवाई कर सकते हैं। साथ ही, नर्सरी से भी कीकड़ की पौध खरीदकर प्राप्त कर सकते हैं। ये भी पढ़े: इस फार्मिंग के जरिये एक स्थान पर विभिन्न फसल उगा सकते हैं

कीकर का पेड़ बीमारियों से बचाने के लिए भी लाभकारी है

कीकड़ के पेड़ के विभिन्न औषधीय गुण हैं। इसका इस्तेमाल बहुत सारी बीमारियों से बचाव करने के लिए भी किया जाता है। यह एंटीऑक्सिडेंट्स, एंटी-इंफ्लेमेटरी यौगिकों एवं एंटीमाइक्रोबियल होता है। इसकी छाल एवं पत्तियां विभिन्न बीमारियों से बचाव करने में काम आती हैं। लूज मोशन, बुखार आना, डायबिटीज और इम्यून सिस्टम को बढ़ाने के लिए कीकर का पेड़ बड़े काम की चीज है।

कीकर की पत्तियां और छाल पशुओं के लिए काफी फायदेमंद है

कीकर की फली, छाल और पत्तियों का इस्तेमाल पशुओं के चारे के तौर पर किया जाता है। फाइबर, प्रोटीन और बाकी पोषक तत्व होने की वजह से यह पशुओं के लिए अत्यंत लाभकारी है। इसके सेवन से पशुओं की दुग्ध उत्पादन क्षमता बढ़ जाती है। लकड़ियों का इस्तेमाल फर्नीचर बनाने एवं ईंधन के रूप मेें किया जाता है। एक और विशेषता यह है, कि इसकी लकड़ी पर दीमक का प्रभाव देखने को नहीं मिलता है। दीमक प्रतिरोधी होने की वजह से ये लकड़ी बाजार में अच्छी कीमतों पर बेची जाती है।

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