मेरीखेती ने मई माह की किसान पंचायत का आयोजन किया

Published on: 23-May-2024
Updated on: 23-May-2024

मेरीखेती हर माह किसान और कृषि वैज्ञानिकों के परस्पर संवाद के लिए मेरीखेती किसान पंचायत का आयोजन करती है। 

मई महीने की मासिक किसान पंचायत का आयोजन मोहन चौधरी की अध्यक्षता में गांव नया नगला, जिला हाथरस (उत्तर प्रदेश) में किया गया। 

इस मासिक किसान पंचायत में वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ सी.बी सिंह, डॉ लक्ष्मीकांत और डॉ पी.के सिंह जैसे अनुभवी वैज्ञानिक और सैकड़ों की संख्या में किसान मौजूद रहे। 

किसान पंचायत की चर्चा का मुख्य विषय मिलेट्स यानी मोटे अनाज की फसलों का उत्पादन और मुनाफा रहा।

डॉ सी.बी. सिंह ने मोटे अनाज का परिचय बताते हुए कहा कि मोटे अनाज पारंपरिक रूप से देश के अल्प संसाधन वाले कृषि-जलवायु क्षेत्रों में उगाए जाते हैं। 

कृषि-जलवायु क्षेत्र, फसलों और किस्मों की एक निश्चित श्रेणी के लिये उपयुक्त प्रमुख जलवायु के संदर्भ में भूमि की एक इकाई है। 

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ज्वार, बाजरा, मक्का, जौ, फिंगर (Finger) बाजरा और अन्य कुटकी (Small Millets) जैसे कोदो (Kodo), फॉक्सटेल (Foxtail) , प्रोसो (Proso) और बार्नयार्ड (Barnyard) एक साथ मोटे अनाज कहलाते हैं। 

ज्वार, बाजरा, मक्का और छोटे बाजरा (बार्नयार्ड बाजरा, प्रोसो बाजरा, कोदो बाजरा और फॉक्सटेल बाजरा) को पोषक-अनाज भी कहा जाता है।

डॉ लक्ष्मीकांत ने मोटे अनाज का महत्व बताते हुए कहा कि मोटे अनाज पोषक तत्वों से भरपूर सामग्री के लिये जाने जाते हैं और इसमें सूखा सहिष्णु, प्रकाश-असंवेदनशीलता और जलवायु परिवर्तन के प्रति अनुकूलन आदि जैसी विशेषताएँ विद्यमान होती हैं। 

ये फसलें खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में और एक आशाजनक निर्यात योग्य वस्तु के रूप में भी अच्छी संभावनाएँ प्रदान करती हैं। 

मानव उपभोग के लिये भोजन, पशु और मुर्गीयों के लिये चारा और खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के लिये सूखा प्रवण क्षेत्रों में उनकी खेती, ईंधन और औद्योगिक उपयोग के रूप में इनका उपयोग सामान्य है।

डॉ पी.के ने किसानों को श्री अन्न के विषय में जानकारी देते हुए कहा कि मिलेट्स यानी मोटे अनाज पौष्टिक मूल्य कुपोषण से निपटने के लिये एक उत्कृष्ट उपकरण के रूप में कार्य करता है। 

यह अल्प वर्षा वाले क्षेत्रों में रोजगार-सृजन में सहायता करता है। जहाँ अन्य वैकल्पिक फसलें सीमित हैं और इन फसलों का उपयोग आकस्मिक फसल के रूप में किया जाता है। 

कर्नाटक, राजस्थान, पुद्दुचेरी, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश आदि श्री अन्न यानी मोटे अनाज के उत्पादक राज्य हैं।

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