अरहर की फसल को रोगों से बचाएं

Published on: 20-Nov-2019

अरहर मनुष्यों को ही नहीं वरन कीटों को भी खूब भाती है। अरहर की खेती को सुरक्षित रखने के लिए अरहर के कीट, बीमारियों की समझ और समय से नियंत्रण बेहद आवश्यक है।

 

फली भेदक कीट      arhar keet 

 फलियों में सूराख करके उसके दाने खा जाता है। इससे बचाव के लिए मोनोक्रोटोफास 36 ईसी  एक हजार मिली लीटर प्रति हैक्टेयर या फिर साइपरमैथरिन 20 ईसी का 400 मिली लीटर मात्रा का पानी में घोलकर छिड़काव करें। जैविक उपचार के लिए एनपीवी 350 एलई प्रति हैक्टेयर की दर से छिड़काव करें। पौधे की पत्ती जब सिकुड़ी दिखें तो समझ लेना चाहिए कि पत्ती लपेटक का प्रभाव है। अरहर के इस कीट की रोकथाम के लिए मोनोक्रोटोफास 36 ईसी की 800 मिली लीटर मात्रा का छिड़काव करें।

फली मक्खी

  arhar makhi

फली के अंदर दाने को खाती है। इससे बचाव के लिए मोनोक्रोटोफास या डाईमिथोएट कीटनाशक का छिड़काव फूल आने की अवस्था पर करना चाहिए।

उकठा रोग

  Uktha rog 1

अरहर का प्रमुख रोग है। यह फ्यूजेरियम नामक फफूंद से पनता है। यह पूरी फसल को चौपट कर सकता है। यह पौधे को पोषक तत्व एवं पानी का संचार रोक देता है। इस रोग के बाचाव के लिए कार्बन्डाजिम या थीरम से 3 ग्राम प्रति किलोग्राम की दर से बीज को उपचारित करके बोना चाहिए। इसके अलावा जिस खेत में यह रोग एक बार आ जाए उसमें तीन साल तक अरहर नहीं लगानी चाहिए। खड़ी फसल पर रोग संक्रमण दिखे तो तत्काल फफूंदनाशक का छिड़काव करें।

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