आज के समय में देश के किसान ऐसी फसलों की तलाश में रहते हैं, जिनसे कम लागत में अधिक मुनाफा प्राप्त किया जा सके। इसी क्रम में गन्ने की खेती किसानों के लिए एक भरोसेमंद और लाभकारी विकल्प बनकर उभरती है। गन्ने की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसकी मांग पूरे वर्ष बनी रहती है, क्योंकि इससे चीनी, गुड़, शक्कर, एथेनॉल जैसे कई महत्वपूर्ण उत्पाद तैयार किए जाते हैं। यही कारण है कि बाजार में गन्ने का भाव अपेक्षाकृत स्थिर रहता है। यदि किसान बसंत काल में उन्नत किस्मों का चयन कर गन्ने की बुवाई करते हैं, तो वे 600 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक की बंपर उपज प्राप्त कर सकते हैं। विशेष रूप से COJ 94141, COJ 86600 और COJ 862081 जैसी किस्में बसंत कालीन खेती के लिए बेहद उपयुक्त मानी जाती हैं।
COJ 94141 गन्ने की किस्म किसानों के लिए लाभ का सौदा साबित हो सकती है। इस किस्म की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह लाल सड़न जैसी खतरनाक बीमारी के प्रति काफी हद तक प्रतिरोधी होती है, जिससे फसल सुरक्षित रहती है और उत्पादन पर नकारात्मक असर नहीं पड़ता। यह किस्म अच्छी बढ़वार करती है और सामान्य देखभाल में भी प्रति एकड़ लगभग 300–320 क्विंटल तक उपज देने की क्षमता रखती है। इसके अलावा इस किस्म की पत्तियां आसानी से अलग हो जाती हैं, जिससे गन्ने की छिलाई और कटाई में किसानों को कम मेहनत करनी पड़ती है। यही कारण है कि यह किस्म छोटे और मध्यम किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है।
COJ 86600 गन्ने की किस्म विशेष रूप से उत्तर प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों के किसानों के लिए एक बेहतरीन विकल्प मानी जाती है। यह किस्म मध्यम से देर से पकने वाली श्रेणी में आती है और अनुकूल परिस्थितियों में 400 से 600 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज देने में सक्षम है। इस किस्म की मांग चीनी मिलों में अच्छी रहती है, जिससे किसानों को अपने उत्पाद का उचित मूल्य मिल जाता है। बेहतर रस मात्रा और संतुलित मिठास के कारण यह किस्म उद्योगों के लिए भी पसंदीदा है। सही समय पर बुवाई और देखभाल करने पर यह किस्म किसानों को स्थिर और भरोसेमंद आय प्रदान कर सकती है।
COJ 862081 गन्ने की किस्म को उच्च उत्पादन देने वाली उन्नत किस्मों में गिना जाता है। जिन किसानों का उद्देश्य अधिकतम उपज प्राप्त करना है, उनके लिए यह किस्म एक बेहतर विकल्प साबित हो सकती है। इस किस्म से 400 से 600 क्विंटल प्रति एकड़ तक उत्पादन संभव है, जो इसे अन्य किस्मों की तुलना में अधिक लाभकारी बनाता है। इसकी बढ़वार तेज होती है और यह विभिन्न मिट्टी एवं जलवायु परिस्थितियों में भी अच्छा प्रदर्शन करती है। COJ 94141 और COJ 86600 की तुलना में यह किस्म अधिक उत्पादन देने की क्षमता रखती है, इसलिए बड़े स्तर पर खेती करने वाले किसानों के लिए यह विशेष रूप से उपयोगी मानी जाती है।
गन्ने की खेती वर्ष में मुख्य रूप से दो बार की जाती है – एक बार शरद काल में और दूसरी बार बसंत काल में। हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार बसंत काल को गन्ने की बुवाई के लिए सबसे उपयुक्त समय माना जाता है। इस मौसम में तापमान और नमी अंकुरण के लिए अनुकूल होते हैं, जिससे गन्ने की फसल अच्छी तरह विकसित होती है। मजबूत जड़ प्रणाली और बेहतर टिलरिंग के कारण फसल का विकास संतुलित रहता है और अंततः उत्पादन में वृद्धि होती है। यही वजह है कि बसंत काल में बोया गया गन्ना किसानों को बेहतर उपज और मुनाफा दिलाने में मदद करता है।
यदि किसान बसंत काल में इन उन्नत किस्मों की बुवाई करने के बाद समय पर सिंचाई, निराई-गुड़ाई और संतुलित मात्रा में खाद एवं उर्वरकों का प्रयोग करते हैं, तो वे आसानी से 600 क्विंटल तक का उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। साथ ही कीट एवं रोग नियंत्रण पर ध्यान देकर फसल को सुरक्षित रखा जा सकता है। बाजार में इन किस्मों की अच्छी मांग होने के कारण किसानों को बेहतर मूल्य भी मिल जाता है, जिससे उनकी वार्षिक आय में उल्लेखनीय वृद्धि होती है। सही योजना और तकनीकी जानकारी के साथ गन्ने की खेती किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकती है।
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