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किसानों के लिए खुशखबरी: प्रधानमंत्री धन-धान्य योजना से बढ़ेगी फसल की आमदनी

Published on: 16-Oct-2025
Updated on: 16-Oct-2025

किसानों की आय बढ़ाने की नई पहल: देश के 100 जिलों में लागू होगी प्रधानमंत्री धन-धान्य योजना


देश में किसानों की आमदनी को दोगुना करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने एक और ऐतिहासिक कदम उठाया है। प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना को देश के 100 पिछड़े और कम उत्पादकता वाले जिलों में लागू किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में नई दिल्ली स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (पूसा) में आयोजित एक विशेष समारोह के दौरान इस महत्वाकांक्षी योजना का शुभारंभ किया। इस योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को एकीकृत लाभ प्रदान करना और कृषि क्षेत्र में सतत विकास को प्रोत्साहित करना है।


धन-धान्य योजना के अंतर्गत 11 मंत्रालयों की 36 उप-योजनाओं को एक ही मंच पर लाया गया है, ताकि किसानों को हर स्तर पर समग्र सहायता मिल सके। यह योजना विशेष रूप से उन जिलों के लिए बनाई गई है जहां कृषि उत्पादकता कम है और किसानों की आय औसत से नीचे है। सरकार का लक्ष्य है कि इन जिलों में कृषि से जुड़ी बुनियादी सुविधाओं जैसे सिंचाई, भंडारण, विपणन और वित्तीय सहायता को मजबूत किया जाए।


प्रधानमंत्री ने दलहन आत्मनिर्भरता मिशन और 1,100 ग्रामीण परियोजनाओं का किया शुभारंभ

प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर दलहन आत्मनिर्भरता मिशन की भी शुरुआत की, जिसका उद्देश्य भारत को दाल उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना है। इस पहल के तहत देश में दालों का उत्पादन बढ़ाया जाएगा ताकि आयात पर निर्भरता घटे और किसानों को बेहतर दाम प्राप्त हों।

इसके अलावा, प्रधानमंत्री ने कृषि अवसंरचना कोष, पशुपालन, मत्स्य पालन और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र से जुड़ी लगभग 1,100 परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इन परियोजनाओं के तहत ग्रामीण भारत में कोल्ड स्टोरेज, प्रोसेसिंग यूनिट, गोदाम और वेयरहाउस जैसी आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इन योजनाओं में कुल 42,000 करोड़ रुपए से अधिक का निवेश किया जा रहा है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन और आय में वृद्धि होगी।

धन-धान्य योजना पर कितना खर्च करेगी सरकार?

प्रधानमंत्री ने बताया कि सरकार ने कृषि क्षेत्र में 35,440 करोड़ रुपए की परियोजनाओं को स्वीकृति दी है। इनमें से प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के लिए 24,000 करोड़ रुपए, जबकि दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के लिए 11,440 करोड़ रुपए का बजट निर्धारित किया गया है। इसके साथ ही कृषि, मत्स्य पालन, पशुपालन और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में 5,450 करोड़ रुपए से अधिक की परियोजनाओं का उद्घाटन किया गया और 815 करोड़ रुपए की अतिरिक्त परियोजनाओं का शिलान्यास किया गया है। यह निवेश न केवल कृषि क्षेत्र को सशक्त करेगा बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति प्रदान करेगा।

किसानों के लिए सरकार की मौजूदा राहतें और लाभकारी कदम

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसानों को सस्ता और सुलभ इनपुट देने के लिए सरकार ने कई ऐतिहासिक निर्णय लिए हैं। उदाहरण के तौर पर, यूरिया की एक बोरी 266 रुपए और डीएपी की बोरी 1,350 रुपए में उपलब्ध कराई जा रही है। इसके अलावा, कृषि यंत्रों पर जीएसटी घटाया गया है, जिससे किसानों को आधुनिक उपकरण सस्ते दामों पर मिल सकें।

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) योजना के तहत अब तक 3.90 लाख करोड़ रुपए सीधे किसानों के खातों में ट्रांसफर किए जा चुके हैं। वहीं किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के माध्यम से वर्ष 2024-25 में 10 लाख करोड़ रुपए से अधिक का ऋण और 1.62 लाख करोड़ रुपए की ब्याज सब्सिडी प्रदान की गई है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों को 1.83 लाख करोड़ रुपए से अधिक का मुआवजा भी दिया जा चुका है। ये सभी कदम किसानों की आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में निर्णायक साबित हो रहे हैं।

क्या है प्रधानमंत्री धन-धान्य योजना और इसका उद्देश्य?

प्रधानमंत्री धन-धान्य योजना को 16 जुलाई 2025 को मंजूरी दी गई थी और यह योजना 6 वर्षों तक लागू रहेगी। इसका उद्देश्य देश के 100 पिछड़े जिलों में कृषि उत्पादकता और किसानों की आय को बढ़ाना है। योजना के तहत किसानों को बेहतर सिंचाई सुविधाएं, भंडारण व्यवस्था, सुलभ ऋण और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

इस योजना के अंतर्गत 11 मंत्रालयों की 36 योजनाओं को एकीकृत किया गया है, जिससे किसानों को हर तरह का लाभ एक ही प्लेटफॉर्म से मिल सके। अनुमान है कि इस योजना से 1.7 करोड़ से अधिक किसानों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।

धन-धान्य योजना का फोकस किन प्रमुख क्षेत्रों पर रहेगा

  1. कृषि उत्पादकता में वृद्धि: किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले बीज, उन्नत तकनीक और वैज्ञानिक सलाह प्रदान कर उत्पादन बढ़ाना।
  2. फसल विविधीकरण को प्रोत्साहन: बाजार की मांग और जलवायु के अनुसार लाभदायक फसलों की खेती को बढ़ावा देना।
  3. भंडारण और कोल्ड स्टोरेज सुविधाएं: पंचायत और ब्लॉक स्तर पर आधुनिक गोदाम और कोल्ड स्टोरेज यूनिट स्थापित करना।
  4. सिंचाई नेटवर्क का विस्तार: छोटे और सीमांत किसानों के लिए ड्रिप और स्प्रिंकलर आधारित सूक्ष्म सिंचाई तकनीक को बढ़ावा देना।
  5. सुलभ कृषि ऋण उपलब्ध कराना: किसानों को अल्पकालिक और दीर्घकालिक ऋण की आसान व समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करना।

किन जिलों को किया गया है धन-धान्य योजना में शामिल

इस योजना के तहत देश के 100 पिछड़े जिलों को चुना गया है। इनमें सबसे अधिक 12 जिले उत्तर प्रदेश से हैं — महोबा, हमीरपुर, बांदा, चित्रकूट, जालौन, झांसी, ललितपुर, उन्नाव, प्रयागराज, प्रतापगढ़, श्रावस्ती और सोनभद्र।

इसके अलावा राजस्थान के 8 जिले — बाड़मेर, जैसलमेर, नागौर, जोधपुर, बीकानेर, पाली, जालोर और चूरू शामिल हैं। वहीं महाराष्ट्र (9 जिले), मध्य प्रदेश (8 जिले) और बिहार (7 जिले) को भी इसमें जोड़ा गया है। साथ ही पूर्वोत्तर, पहाड़ी और आदिवासी बहुल जिलों को भी इस योजना में विशेष प्राथमिकता दी गई है, ताकि वहां के किसानों को समान अवसर मिल सके।

हर जिले में बनेगी “धन-धान्य जिला समिति”

हर चयनित जिले में एक धन-धान्य जिला समिति का गठन किया जाएगा, जिसमें जिला प्रशासन, प्रगतिशील किसान, कृषि वैज्ञानिक और विभागीय अधिकारी शामिल होंगे। यह समिति स्थानीय स्तर पर योजना की प्रगति की निगरानी करेगी।

राज्य स्तर पर संचालन समूह और राष्ट्रीय स्तर पर उच्च स्तरीय निगरानी समिति योजना के कार्यान्वयन पर नजर रखेगी। योजना का उद्देश्य खेती की लागत घटाना, उत्पादकता बढ़ाना और किसानों की आमदनी में निरंतर सुधार लाना है।

PM Dhan Dhanya Krishi Yojana: राजस्थान में कृषि सुधारों की उपलब्धियां

राजस्थान में कृषि अवसंरचना को मजबूत करने के लिए अब तक 23 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सूक्ष्म सिंचाई संयंत्र स्थापित किए गए हैं। राज्य में 35,368 फार्म पाउंड, 7,903 डिग्गियां और 98,753 पाइपलाइन इकाइयां तैयार की गई हैं। इसके अलावा 97,000 से अधिक किसानों को कृषि यंत्रों की खरीद पर 546 करोड़ रुपए का अनुदान दिया गया है।

फसल बीमा योजना के तहत अब तक 5,965 करोड़ रुपए का मुआवजा किसानों को दिया जा चुका है। इन सभी प्रयासों के माध्यम से राज्य में कृषि उत्पादकता, जल उपयोग दक्षता और किसानों की आर्थिक स्थिति में बड़ा सुधार आया है।

धन-धान्य योजना से बदलेगा ग्रामीण भारत का भविष्य

प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना और दलहन आत्मनिर्भरता मिशन भारत के कृषि क्षेत्र को आत्मनिर्भर, आधुनिक और टिकाऊ बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगे। इन योजनाओं से न केवल कृषि उत्पादकता बढ़ेगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और रोजगार के नए अवसर भी उत्पन्न होंगे।

सरकार का यह कदम किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने, कृषि में तकनीकी हस्तक्षेप बढ़ाने और भारत को एक कृषि-प्रधान, आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाने की दिशा में बड़ा परिवर्तनकारी प्रयास है।

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