किसान भाई गेंहू की इन तीन किस्मों की खेती से प्रति हेक्टेयर 70 से 75 क्विंटल तक उत्पादन उठा सकते हैं

By: MeriKheti
Published on: 27-Oct-2023

गेहूं की इन तीन बेहतरीन प्रजातियाँ HD 3406 (उन्नत एचडी 2967), HD-3385, HI 1634 (पूसा अहिल्या) की खेती कर किसान भाई प्रति हेक्टेयर भूमि से 74 क्विंटल तक उत्पादन हांसिल कर सकते हैं। भारत एक कृषि प्रधान देश होने के साथ-साथ दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक देश है। साथ ही, भारत में हरियाणा, यूपी, मध्य प्रदेश और पंजाब में गेहूं की खेती विशेष रूप से होती है। बहुत सारे राज्यों के कृषकों ने रबी सीजन की मुख्य फसल गेहूं की बिजाई चालू भी कर दी है। यदि आप एक कृषक हैं और गेहूं की ऐसी प्रजातियों की खोज में हैं, जिनकी खेती से ज्यादा उत्पादन हांसिल किया जा सके। दरअसल, मेरीखेती के इस लेख में आज हम आपको गेहूं की उन तीन ऐसी प्रजातियों के विषय में जानकारी देंगे, जिनकी खेती कर आप प्रति हेक्टेयर 74 क्विंटल तक उत्पादन हांसिल कर सकते हैं। आपकी जानकारी के लिए बातादें, कि गेहूं की इन तीन उन्नत किस्मों HD 3406 ( उन्नत एचडी 2967), HD-3385, HI 1634 (पूसा अहिल्या) शम्मिलित हैं।

गेहूं की किस्म एचडी 3406 (उन्नत एचडी 2967)

गेहूं की शानदार किस्म एचडी 3406 (उन्नत एचडी 2967) का उत्पादन हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान (कोटा और उदयपुर संभाग को छोड़कर), पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश (झांसी संभाग को छोड़कर), जम्मू-कश्मीर के जम्मू और कठुआ जनपद, ऊना जिला और हिमाचल प्रदेश की पोंटा घाटी और उत्तराखंड के तराई वाले क्षेत्रों के किसान सुगमता से कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त इस किस्म की औसत उत्पादन क्षमता 54.73 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। वहीं, अधिकतम उत्पादन क्षमता 64.05 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक है। वहीं, गेहूं की उन्नत किस्म एचडी 3406 (उन्नत एचडी 2967) रतुआ रोग प्रतिरोधी किस्म है। दरअसल, यह पर्ण/भूरा रतुआ रोग और धारीदार/पीला रतुआ रोग के प्रति रोग प्रतिरोधी है। साथ ही, इसमें गेहूं के झुलसा रोग और करनाल बंट को लेकर प्रतिरोध का स्तर भी शानदार पाया जाता है।

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गेहूं की एचडी-3385 किस्म

गेहूं की एचडी-3385 किस्म को भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान पूसा दिल्ली के द्वारा तैयार किया गया है, जो 123-147 दिन में पककर तैयार हो जाती है। एचडी-3385 किस्म की औसत पैदावार 62.1 क्विंटल/हेक्टेयर है एवं अधिकतम उत्पादन 73.4 क्विंटल/हेक्टेयर है। एचडी-3385 किस्म में विभिन्न प्रकार के रोग नहीं लगते हैं। दरअसल, यह किस्म धारीदार रतुआ, पत्ती रतुआ, करनाल बंट, पाउडरी मिल्ड्यू गेहूं के झुलसा रोग और फ्लैग स्मट रोग के प्रतिरोधी हैं। साथ ही, गेहूं की यह किस्म उत्तर पश्चिमी और उत्तर पूर्वी मैदानी इलाकों के लिए उपयुक्त है।

गेहूं की किस्म HI 1634 (पूसा अहिल्या)/ और HI 1634 (पूसा अहिल्या)

गेहूं की किस्म HI 1634 (पूसा अहिल्या) को भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान इंदौर द्वारा तैयार किया गया है। भारत के मध्य क्षेत्र गुजरात, छत्तीसगढ़,मध्य प्रदेश, राजस्थान (कोटा और उदयपुर संभाग) और उत्तर प्रदेश (झांसी संभाग) के किसान सुगमता से इस किस्म की खेती कर सकते हैं। हालांकि, अन्य प्रदेशों में भी इस किस्म का उत्पादन होता है। यदि औसत उत्पादन क्षमता की बात की जाए तो 51.6 क्विंटल/ हेक्टेयर है। वहीं, अधिकतम उत्पादन क्षमता 70.6 क्विंटल/हेक्टेयर है।

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