घर पर करें बीजों का उपचार, सस्ती तकनीक से कमाएं अच्छा मुनाफा

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एक किसान होने के नाते यह बात तो आप समझते ही हैं कि किसी भी प्रकार की फसल के उत्पादन के लिए सही बीज का चुनाव बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है और यदि बात करें सब्जी उत्पादन की तो इनमें तो बीज का महत्व सबसे ज्यादा होता है।

स्वस्थ और उन्नत बीज ही अच्छी सब्जी का उत्पादन कर सकता है, इसीलिए कृषि वैज्ञानिकों के द्वारा आपको हमेशा सलाह दी जाती है कि बीज को बोने से पहले अनुशंसित कीटनाशी या जीवाणु नाशी बीज का ही इस्तेमाल करना चाहिए।

इसके अलावा कृषि वैज्ञानिकों के द्वारा समय समय पर किसान भाइयों को बीज के उपचार की भी सलाह दी जाती है।

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आज हम आपको बताएंगे ऐसे ही कुछ बीज-उपचार करने के तरीके, जिनकी मदद से आप घर पर ही अपने साधारण से बीज को कई रसायनिक पदार्थों से तैयार होने वाले लैब के बीज से भी अच्छा बना सकते है।

बीज उपचार करने का सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि इसे स्टोर करना काफी आसान हो जाता है और सस्ता होने के साथ ही कई मृदा जनित रोगों से छुटकारा पाया जा सकता है।

यह बात तो किसान भाई जानते ही होंगे कि फसलों में मुख्यतः दो प्रकार के बीज जनित रोग होते है, जिनमें कुछ रोग अंतः जनित होते हैं, जबकि कुछ बीज बाह्य जनित होते है।अंतः जनित रोगों में आलू में लगने वाला अल्टरनेरिया और प्याज में लगने वाली अंगमारी जैसी बीमारियों को गिना जा सकता है।

बीज उपचार करने की भौतिक विधियां प्राचीन काल से ही काफी प्रचलित है। इसकी एक साधारण सी विधि यह होती है कि बीज को सूर्य की धूप में गर्म करना चाहिए, जिससे कि उसके भ्रूण में यदि कोई रोग कारक है तो उसे आसानी से नष्ट किया जा सकता है।

इस विधि में सबसे पहले पानी में 3 से 4 घंटे तक बीज को भिगोया जाता है और फिर 5 से 6 घंटे तक तेज धूप में रखा जाता है।

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दूसरी साधारण विधि के अंतर्गत गर्म जल की सहायता से बीजों का उपचार किया जाता है। बीजों को पानी में मिलाकर उसे 50 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर 20 से 25 मिनट तक गर्म किया जाता है, जिससे कि उसके रोग नष्ट हो जाते है।

इस विधि का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें बीज के अंकुरण पर कोई भी विपरीत प्रभाव नहीं पड़ता है, जैसे कि यदि आप आलू के बीच को 50 डिग्री सेल्सियस पर गर्म करते हैं तो इसमें लगने वाला अल्टरनेरिया रोग पूरी तरीके से नष्ट हो सकता है।

बीज उपचार की एक और साधारण विधि गरम हवा के द्वारा की जाती है, मुख्यतया टमाटर के बीजों के लिए इसका इस्तेमाल होता है। इस विधि में टमाटर के बीज को 5 से 6 घंटे तक 30 डिग्री सेल्सियस पर रखा जाता है, जिससे कि इसमें लगने वाले फाइटोप्थोरा इंफेक्शन का असर कम हो जाता है। इससे अधिक डिग्री सेल्सियस पर गर्म करने पर इस में लगने वाला मोजेक रोग का पूरी तरीके से निपटान किया जा सकता है।

इसके अलावा कृषि वैज्ञानिक विकिरण विधि के द्वारा बीज उपचार करते है, जिसमें अलग-अलग समय पर बीजों के अंदर से पराबैगनी और एक्स किरणों की अलग-अलग तीव्रता गुजारी जाती है। इस विधि का फायदा यह होता है कि इसमें बीज के चारों तरफ एक संरक्षक कवच बन जाता है, जो कि बीज में भविष्य में होने वाले संक्रमण को भी रोकने में सहायता प्रदान करता है।

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इसके अलावा सभी किसान भाई अपने घर पर फफूंदनाशक दवाओं की मदद से मटर, भिंडी, बैंगन और मिर्ची जैसी फलदार सब्जियों की उत्पादकता को बढ़ा सकते है।

इसके लिए एक बड़ी बाल्टी में पानी और फफूंदनाशक दवा की उपयुक्त मात्रा मिलाई जाती है, इसे थोड़ी देर घोला जाता है,जिसके बाद इसे मिट्टी के घड़े में डालकर 10 मिनट तक रख दिया जाता है। इस प्रकार तैयार बीजों को निकालकर उन्हें आसानी से खेत में बोया जा सकता है।

हाल ही में यह विधि आलू, अदरक और हल्दी जैसी फसलों के लिए भी कारगर साबित हुई है।

इसके अलावा फफूंद नाशक दवा की मदद से ही स्लरी विधि के तहत बीज उपचार किया जा सकता है, इस विधि में एक केमिकल कवकनाशी की निर्धारित मात्रा मिलाकर उससे गाढ़ा पेस्ट बनाया जाता है, जिसे बीज की मात्रा के साथ अच्छी तरीके से मिलाया जाता है। इस मिले हुए पेस्ट और बीज के मिश्रण को खेत में आसानी से बोया जा सकता है।

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सभी किसान भाई अपने खेतों में जैविक बीज उपचार का इस्तेमाल भी कर सकते है, इसके लिए एक जैव नियंत्रक जैसे कि एजोटोबेक्टर को 4 से 5 ग्राम मात्रा को अपने बीजों के साथ मिला दिया जाता है, सबसे पहले आपको थोड़ी सी पानी की मात्रा लेनी होगी और उसमें लगभग दो सौ ग्राम कल्चर मिलाकर एक लुगदी तैयार करनी होगी। इस तैयार लुगदी और बोये जाने वाले बीजों को एक त्रिपाल की मदद से अच्छी तरह मिला सकते है और फिर इन्हें किसी पेड़ की ठंडी छाया में सुखाकर बुवाई के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

हम आशा करते है कि हमारे किसान भाइयों को जैविक और रासायनिक विधि से अपने बीजों के उपचार करने के तरीके की जानकारी मिल गई होगी। यह बात आपको ध्यान रखनी होगी कि महंगे बीज खरीदने की तुलना में, बीज उपचार एक कम लागत वाली तकनीक है और इसे आसानी से अपने घर पर भी किया जा सकता है। वैज्ञानिकों की राय के अनुसार इससे आपकी फ़सल उत्पादन में लगभग 15 से 20% तक मुनाफा हो सकता है।

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