पूसा कृषि वैज्ञानिकों की एडवाइजरी इस हफ्ते जारी : इन फसलों के लिए आवश्यक जानकारी

0

पूसा कृषि वैज्ञानिकों की एडवाइजरी इस हफ्ते जारी : धान, मक्का व सब्जियों की फसल के लिए उपयोगी जानकारी

समय-समय पर भारतीय कृषि मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले कृषि वैज्ञानिक, अपनी एडवाइजरी के जरिए भारत के किसानों को फायदा पहुंचाने का कार्य बखूबी करते रहते हैं। इसी कड़ी में, इस सप्ताह के लिए इन्होंने अपनी एक नई एडवाइजरी जारी कर दी है।

इस एडवाइजरी में बताई गई सलाह को जानने से पहले, आप यह समझ लें कि वैज्ञानिकों के द्वारा जारी की गई एडवाइजरी पूर्णतया किसानों के फायदे के लिए ही की जाती है और इसका सही तरीके से पालन करने पर आप की फ़सल की उत्पादकता और यील्ड बहुत ही तेजी से ग्रोथ करती हुई दिखाई देगी।

दिल्ली में स्थित पूसा इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (Pusa Institute Of Technology, DSEU Pusa campus) के द्वारा जारी की गई एडवाइजरी में कहा गया है कि, जिस समय धान की रोपाई की जाए उस समय, एक पंक्ति और दूसरी पंक्ति के बीच 20 सेंटीमीटर की दूरी रखनी चाहिए और दो छोटे पौधों के बीच की दूरी 10 सेंटीमीटर से अधिक होनी चाहिए।

इस एडवाइजरी के अनुसार कहा गया है कि, जिन किसानों ने अपनी फसल का रोपण बारिश की पहली श्रंखला में ही कर दिया था, वह अपनी फसलों की निराई गुड़ाई का कार्य जल्दी से जल्दी करने की कोशिश करें, क्योंकि, इसमें देरी हो जाने पर फसल की जितनी अनुमानित उत्पादकता होगी, वास्तविक उत्पादकता उससे काफी कम प्राप्त हो सकती हैं।

यह बात तो आप जानते ही हैं, कि भारत की मिट्टी में कई जगहों पर नाइट्रोजन की कमी देखी जाती है और इसी की पूर्ति करने के लिए, भारत सरकार सॉइल हेल्थ कार्ड (Soil Health Card) के जरिए किसानों को समय-समय पर यूरिया की सप्लाई करती रहती है।

सब्सिडी पर मिलने वाले यूरिया को बहुत ही सीमित मात्रा में इस्तेमाल करना चाहिए, यदि आपने अपने खेतों में एक बार नाइट्रोजन की मात्रा का छिड़काव कर दिया है, तो अति शीघ्र दूसरे छिड़काव की तैयारी भी कर लें।

ये भी पढ़ें: किसानों को भरपूर डीएपी, यूरिया और एसएसपी खाद देने जा रही है ये सरकार

इस समय यह ध्यान रखें कि बारिश आने में और यूरिया के छिड़काव के बीच में थोड़े समय का अंतराल होना अनिवार्य है, क्योंकि यदि यूरिया के छिड़काव के तुरंत बाद ही बारिश आ जाती है, तो बारिश के पानी के द्वारा पूरे न्यूट्रिएंट्स को बहाकर ले जाया जा सकता है, जिससे कि आप की मेहनत और पैसा दोनों ही बर्बाद हो सकते हैं।

यदि आपकी फ़सल समय से पहले पक कर तैयार हो चुकी है, तो उनके उचित प्रबंधन का भी ध्यान रखें।

ये भी पढ़ें: धान की खेती की रोपाई के बाद करें देखभाल, हो जाएंगे मालामाल

सॉइल हेल्थ कार्ड के द्वारा बताई गई माइक्रोन्यूट्रिएंट्स की कमी को दूर करने के लिए उसी के अनुसार नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश और जिंक सल्फेट को मिलाना चाहिए

यदि एक औसत निकाला जाए तो आपको अपने खेत में प्रति हेक्टेयर के अनुसार 100 किलोग्राम नाइट्रोजन, 60 किलोग्राम फास्फोरस और 40 किलोग्राम पोटाश का इस्तेमाल करना चाहिए।

पोटाश (Potash) का इस्तेमाल मुख्यतया फर्टिलाइजर के रूप में किया जाता है और इसका इस्तेमाल फसल के थोड़े से बड़े होने के बाद ही करना चाहिए, छोटे पौधों में इसका इस्तेमाल करने से उनकी ग्रोथ में रुकावट भी पैदा हो सकती है।

इस समय मक्का, फूल गोभी, बैंगन और मिर्च इत्यादि की खेती करने का वक्त भी शुरू हो चुका है।

यदि आप मक्का की खेती करना चाहते हैं, तो पूसा के वैज्ञानिकों के द्वारा बताई गई हाइब्रिड किस्में एएच-401 और एएच- 58 के साथ ही पूसा कम्पोसिट- 4 का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। बुवाई के दौरान आपको ध्यान रखना होगा कि प्रति हेक्टेयर के अनुसार 20 किलोग्राम तक के बीज का ही इस्तेमाल करना चाहिए।

मक्का की खेती में पंक्ति के बीच में दूरी को 70 से 80 सेंटीमीटर के बीच में रखना चाहिए और जैसे ही मक्का की पौध जमीन से थोड़ी सी बाहर निकले, तो साथ में उगे खरपतवार को खत्म करने के लिए एट्राजिन (Atrazine) नाम के एक खरपतवार नाशी का इस्तेमाल कर सकते हैं।

ये भी पढ़ें:  किसान भाई ध्यान दें, खरीफ की फसलों की बुवाई के लिए नई एडवाइजरी जारी

यदि आप मिर्च, फूलगोभी और बैंगन की तैयार पौध का इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो अपने खेत में एक बार हार्वेस्टर के इस्तेमाल के बाद में उथली हुई क्यारियों पर ही इनकी पौध को लगाना चाहिए।

इस समय किसान भाइयों को ध्यान रखना चाहिए, कि खेत में ज्यादा पानी को रुकने ना दें। यदि थोड़ा भी ज्यादा पानी रह गया हो, तो तुरंत उसको खेत से बाहर निकालने का प्रयास करें, क्योंकि आजकल नर्सरी में तैयार की गई पौध पहले के जैसे नहीं बनाई जाती और उनमें हाइब्रिड गुणों का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे कि हानिकारक कीट और बीमारियां लग सकती हैं।

इसके अलावा पूसा के वैज्ञानिकों ने एक और खास एडवाइजरी जारी की है, जिसमें उन्होंने बताया है कि बदलते वक्त के साथ ही आपके द्वारा उगाई गई पालक, चौलाई और भिंडी जैसी फसलों पर होपर अटैक होने की संभावनाएं भी बढ़ती जाएगी।

इसलिए यदि आपने अभी तक बीज नहीं बोयें हैं, तो किसी भी सर्टिफाइड सेंटर से ही बीजों को खरीदें और उन्हें पूरी तरीके से उपचारित करके ही अपने खेत में इस्तेमाल करें।

ये भी पढ़ें:  ऐसे मिले धान का ज्ञान, समझें गन्ना-बाजरा का माजरा, चखें दमदार मक्का का छक्का

इस समय उगाई जाने वाली धनिया और पालक जैसी फसलों में माइट और होपर की निगरानी पर पूरा ध्यान दें।

यदि आपको पता चलता है कि आप के खेत में माइट जैसे हानिकारक जीव पाए जाते हैं (जो कि आप की खेती का नुकसान कर सकते हैं), तो इसके निदान के लिए फॉस्माइट (FOSMITE) का इस्तेमाल कर सकते हैं। यह ध्यान रहे कि फॉस्माइट का इस्तेमाल केवल मौसम साफ होने पर ही करें और 1 लीटर पानी में 2 मिलीलीटर से ज्यादा फॉसमाइट को ना मिलाएं।

आशा करते हैं कि हमारे प्लेटफार्म Merikheti.com के माध्यम से आपको भारतीय कृषि वैज्ञानिकों के द्वारा जारी की गई एडवाइजरी के बारे में पूरी जानकारी मिल चुकी होगी और अति शीघ्र ही आप इस एडवाइजरी का पूरी तरह से पालन करते हुए अपनी फसल की अच्छी ग्रोथ को प्राप्त कर सकेंगे।

Leave A Reply

Your email address will not be published.

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. AcceptRead More