बरसात की वजह से खराब हुई धान की तैयार फसल, किसानों ने मांगा मुआवजा

Published on: 20-Oct-2022

भारी बरसात की वजह से किसानों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। महाराष्ट्र के कई जिलों में इस साल सामान्य से कई गुना ज्यादा बरसात हुई है, जिसके कारण किसानों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। जरुरत से ज्यादा बरसात की वजह से किसानों की खरीफ की फसलें चौपट हो गईं हैं। महाराष्ट्र राज्य में ज्यादातर सोयाबीन, कपास, मक्का और धान की फसलों को भारी नुकसान हुआ है। इस साल महाराष्ट्र के पालघर जिले में भारी बरसात हुई है, जिसके कारण धान का एक बहुत बड़ा रकबा बर्बाद हो गया है। अगर सरकारी आंकड़ों पर गौर करें तो इस साल भारी बरसात की वजह से जिलें में धान का 75 हजार हेक्टेयर का रकबा प्रभावित हुआ है। जिले के किसानों ने दिवाली के पहले सरकार से धान की फसल को हुए नुकसान की भरपाई करने की मांग की है। पालघर जिला जीआई टैग वाला कोलम चावल का उत्पादन करने के लिए प्रसिद्ध है।

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अगर कोलम धान की बात करें तो धान की यह किस्म पालघर जिले के वाडा तहसील में उगाई जाती है। इस धान की खेती में अच्छा ख़ासा मुनाफा होने के कारण ज्यादातर किसान इसकी खेती करते हैं। वाडा कोलम को सरकार द्वारा जीआई (जियोग्राफिकल इंडिकेशन) टैग दिया गया है। अगर इस धान की बाजार कीमत की बात करें तो यह धान मंडियों में 60-70 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से आसानी से बिक जाती है। घरेलू बाजार के साथ-साथ इस चावल की विदेशों में भी भारी मांग है, जिसके कारण यह चावल बड़ी मात्रा में निर्यात भी होता है। पालघर जिले के बहुत सारे किसान चावल की खेती पर पूर्ण रुप से निर्भर हैं, इसलिए किसानों ने चावल की खेती बर्बाद होने का बाद सरकार से नुकसान की भरपाई करने की मांग की है। धान की फसल के साथ-साथ भारी बरसात के कारण अन्य फसलें भी बड़ी मात्रा में प्रभावित हुई हैं, जिनमें सोयाबीन और कपास का नाम सबसे ऊपर है। सोयाबीन की फसल तैयार होने के बाद बरसात के कारण फिर से भीग गई है, जिसके कारण फसल के सड़ने की संभावना बढ़ गई है। इन फसलों के साथ ही भारी बरसात के कारण अंगूर की खेती भी बुरी तरह से प्रभावित हुई है।

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