मिल गई किसानों की समृद्धि की संजीवनी बूटी, दवाई के साथ कमाई, भारी सब्सिडी दे रही है सरकार

Published on: 06-Nov-2022

भारत एक कृषि प्रधान देश है। कृषि प्रधान देश होने के बावजुद भारत के किसानों की आय बेहतर नहीं हो पाती। प्रधानमंत्री भी किसानों की आय को लेकर हर संभव प्रयास कर रहे हैं, जिसका लाभ किसानों को भी मिल रहा है। केंद्र सरकार किसानों के लिए बहुत सारी योजना चला रही है, ताकि किसान की आय को बढाया जा सके। इसी दिशा में जड़ी बूटी की खेती करने वाले किसानों के लिए सरकार एक खास योजना लेकर आई है। सरकार ऐसे किसानों को 75% की सब्सिडी देगी। पूरी दुनिया आज भारत की आयुर्वेद विज्ञान, जड़ी-बूटियां और आयुष पद्धतियों को अपना रही है। इसका कारण यह है कि देश-विदेश में औषधीय पौधे और जड़ी-बूटियों की मांग तेजी से बढ़ती जा रही है। जाहिर है, यह भारत के किसानों के लिए सुनहरा मौका है, क्योंकि भारत की धरती औषधीय पौधे या जड़ी-बूटियों की खेती के लिये सबसे उपयुक्त है। यहां पौराणिक काल से ही जड़ी-बूटियों के भंडार मौजूद रहे हैं। ये भी देखें: रोज़मेरी – सुगंधित पौधे की खेती (Rosemary Aromatic Plant Cultivation Info in Hindi) किसानों को औषधीय खेती के प्रति प्रोत्साहित करने के लिये केंद्र और राज्य सरकार मिलकर कई योजनाओं पर काम कर रही हैं। इन योजनाओं के तहत किसानों को अलग-अलग जड़ी-बूटियां उगाने के लिये 75 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाता है। भारत में औषधीय पौधों और जड़ी-बूटियों का उत्पादन बढ़ाने के लिये राष्ट्रीय आयुष मिशन (एनएएम; National AYUSH Mission - NAM) एक योजना चला रही है। इस योजना के तहत 140 जड़ी-बूटियां और हर्बल प्लांट्स की खेती के लिये किसानों को अलग-अलग हिसाब से सब्सिडी प्रदान की जाती है। इस योजना के तहत आवेदन करने वाले लाभार्थी किसानों को औषधीय पौधों की खेती की लागत पर 30 प्रतिशत से लेकर 50 और 75 फीसदी तक आर्थिक अनुदान दिया जा रहा है। आयुष मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत औषधीय पौधों और जड़ी-बूटी उत्‍पादन के लिये करीब 59,350 से ज्यादा किसानों को आर्थिक सहायता मिल चुकी है।

बड़े काम का ई-चरक ऐप

राष्ट्रीय आयुष मिशन पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा दे रहा है। साथ ही यह किसानों को भी कम लागत में औषधीय खेती करने के लिये प्रोत्साहित करता है ताकि किसानों की आय बढ़ सके। योजना के तहत आर्थिक अनुदान का तो प्रावधान है ही, खेती के साथ-साथ उत्पाद को बाजार तक पहुंचाने में भी सरकार इन किसानों की मदद करती है।

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भारत में ज्यादातर किसान औषधीय पौधों की खेती के लिये दवा कंपनियों के साथ कांट्रेक्ट करते हैं। दरअसल औषधीय पौधों की उपज और इनकी बिक्री के बाजार की जानकारी ना होने के कारण किसान कांट्रेक्ट फार्मिंग करना पसंद करते हैं। अब किसान चाहें तो ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिये भी जड़ी-बूटियों की खरीद-बिक्री कर सकते हैं। इसके लिये केंद्र सरकार ने ई-चरक मोबाइल एपलिकेशन भी लॉन्च किया है। इस ऐप का कमाल यह है कि अब किसान सीधे ई-चरक ऐप से आसानी से जड़ी-बूटियों की खरीदारी और बिक्री कर सकते हैं। जाहिर है, भारत की परंपरागत जड़ी-बूटी की खेती कर के किसान प्रधानमंत्री मोदी का वह सपना पूरा कर सकते हैं, जिसमें उन्होंने किसानों की ये दोगुनी करने की बात कही थी।

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