गुणवत्ता युक्त किस्मों पर होगा काम, गेहूं की उच्च क्वालिटी किस्म हो रही तैयार : डा. ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह

Published on: 02-Sep-2022

करनाल स्थित राष्ट्रीय गेहूं अनुसंधान संस्थान (Indian Institute of Wheat and Barley Research (IIWBR)) की पांच किस्मों को मध्यप्रदेश के ग्वालियर में अनुमोदित किया गया है। करनाल संस्थान की 5 किस्मों का अनुमोदन पहली बार हुआ है। यह जानकारी संस्थान के निदेशक डा. ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने दी। उन्होंने बताया कि आने वाले साल में गेहूं उत्पादन का टारगेट 12 मिलियन एमटी का है। बाजार में कंपनियों की आवश्यकता को पूरा करने के लिए देश के वैज्ञानिक तैयार हैं। करनाल में बंटास बीमारी से मुक्त जौ (Barley) बनाने की दिशा में अनुसंधान हो रहा हैं। अब उत्पादन से अधिक गुणवत्ता पर ध्यान दिया जाएगा। राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय ग्वालियर (मध्य प्रदेश) एवं -भारतीय गेहूँ एवं जो अनुसंधान संस्थान, करनाल के संयुक्त तत्वाधान में अखिल भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधानकर्ताओं की 61 वीं संगोष्ठी का आयोजन ग्वालियर (मध्य प्रदेश) में किया गया। देश के विभिन्न क्षेत्रों से गेहूँ और जौ के वैज्ञानिकों ने इसमें भाग लिया। 2021-22 के दौरान हुई प्रगति की समीक्षा करने और 2022-23 के लिए अनुसंधान गतिविधियों खाका तैयार करने के लिए यह बैठक आयोजित की गई। इस कार्यशाला के एक विशेष सत्र के दौरान भारतीय गेहूँ एवं जो अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. ज्ञानेन्द्र प्रताप सिंह ने प्रजाति पहचान समिति [वेराइटल आइडेंटिफिकेशन कमेटी (वीआईसी)] की अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। इस कमेटी की अध्यक्षता डॉ टी.आर. शर्मा, उप-महानिदेशक (फसल विज्ञान), भाकृअनुप, नई दिल्ली ने की। समिति ने सभी 27 प्रस्तावों (1 क्षेत्रफल विस्तार सहित) पर विचार किया और सर्वसम्मति से उनमें से 24 को मंजूरी दी गई। उत्तर पश्चिमी मैदानी क्षेत्र के लिए कुल 9 किस्मों की पहचानी गई तथा एक किस्म का क्षेत्र विस्तार किया गया। गेहूं की किस्मों में उच्च उर्वरता एवं अगेती बुवाई के लिए डीबीडब्ल्यू 370, डीबीडब्ल्यू 371, डीबीडब्ल्यू 372, पीवीडब्ल्यू 872, सिंचित एवं समय से बुवाई के लिए पीबीडब्ल्यू 826, सीमित सिंचाई एवं समय से बुवाई के लिए एचडी 3369, एचआई 1653, एचआई 1654 तथा जैव प्रोद्योगिकी के एमएबीबी तकनीक से विकसित एचडी 3406 (सिंचित दशा - समय से बुवाई) की भी पहचान की गयी।

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गेहूं की अच्छी फसल तैयार करने के लिए जरूरी खाद के प्रकार वहीं भाकृअनुप-भारतीय गेहूँ एवं जौ अनुसंधान संस्थान, करनाल द्वारा विकसित डीबीडब्ल्यू 303 को मध्य क्षेत्र में उच्च उर्वरता अगेती बुआई के लिए क्षेत्रफल विस्तार के लिए प्रस्तावित किया गया है। तीन दिनों तक चले इस संगोष्ठी में देश- विदेश से लगभग 400 प्रतिभागियों ने भाग लिया और इस कार्यक्रम को और सुदृढ़ बनाने पर मंथन किया। किसानों के लिए गेहूँ की उच्च गुणवत्ता वाली किस्मों के तेजी से विकास के लिए और गहनता से कार्य करने की आवश्यकता पर बल दिया गया साथ ही निर्यात के मानदंडों के अनुरूप गेहूँ उत्पादन को बढ़ावा देने तथा किसानों को जागरूक करने पर बल दिया गया।

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