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किसान भाई केंद्र सरकार के पीएम चैट बोर्ड का कैसे उपयोग करें और इसके क्या लाभ हैं ?

किसान भाई केंद्र सरकार के पीएम चैट बोर्ड का कैसे उपयोग करें और इसके क्या लाभ हैं ?

किसान भाइयों की सहायता के लिए सरकार की तरफ से पीएम किसान चैट बोर्ड की शुरुआत की गई थी। इसकी सहायता से किसान बहुत सारी जानकारी हांसिल कर सकते हैं। किसानों की सहायता के लिए विभिन्न योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिनके अंतर्गत किसान भाइयों को बहुत सारी उपयोगी जानकारी दी जाती है। 

केंद्र सरकार ने किसान भाइयों की सहायता करने के लिए पीएम किसान चैट बोर्ड का आरंभ किया था। ये एक भाषा मॉडल है, जो कि कृषकों को पीएम किसान योजना के विषय में जानकारी और सहयोग प्रदान करता है। इस चैटबॉट के माध्यम से किसान भाई अपने आवेदन की स्थिति, भुगतान विवरण, अपात्रता की स्थिति और योजना से संबंधित अन्य नवीन अपडेट हांसिल कर सकते हैं।

चैट बोर्ड का कैसे उपयोग करें ?

पीएम किसान चैट बोर्ड का उपयोग करना अत्यंत आसान है। किसान भाई पीएम किसान मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से या फिर सीधे तौर पर इसकी वेबसाइट पर जाकर इसे एक्सेस कर सकते हैं। पीएम किसान मोबाइल एप्लिकेशन में चैटबॉट को "किसान-eमित्र" के तौर पर जाना जाता है। किसान भाई "किसान-e मित्र" टैब पर जाकर चैटबॉट से बात करना चालू कर सकते हैं। चैटबॉट से मदद लेने के लिए किसान अपनी भाषा का चयन कर सकते हैं। इसके बाद वह अपने सवाल पूछ सकते हैं। 

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चैट बोर्ड की ये कुछ खास बातें हैं 

पीएम किसान चैट बोर्ड हिंदी, अंग्रेजी समेत 5 भाषाओं में उपलब्ध है। ये किसानों को उनके आवेदन की स्थिति, भुगतान विवरण, अपात्रता की स्थिति और योजना-संबंधित अन्य अपडेट प्राप्त करने में सहायता करता है। इसके अतिरिक्त ये किसानों को योजना के विषय में जानकारी प्रदान करता है। जैसे कि पात्रता मानदंड, आवेदन प्रक्रिया और भुगतान की शर्तें। पीएम किसान चैट बोर्ड किसानों के लिए अत्यंत आवश्यक साधन है। इससे किसानों को योजना के बारे में जानकारी और मदद मिलती है। ये बोर्ड 24x7 मौजूद है और ये बहुत स्पीड से काम करता है।

सॉफ्टवेयर इंजीनियर की नौकरी छोड़ बने सफल किसान की पीएम मोदी ने की सराहना

सॉफ्टवेयर इंजीनियर की नौकरी छोड़ बने सफल किसान की पीएम मोदी ने की सराहना

आज के समय में सरकार व किसान स्वयं अपनी आय को दोगुना करने के लिए विभिन्न कोशिशें कर रहे हैं। इसकी वजह से किसान फिलहाल परंपरागत खेती के साथ-साथ खेती की नवीन तकनीकों को अपनाने लगे हैं, परिणाम स्वरूप उन्हें अच्छा-खासा मुनाफा भी हांसिल हो रहा है। तेलंगाना के करीमनगर के किसान ने भी इसी प्रकार की मिश्रित खेती को अपनाकर अपनी आमदनी को लगभग दोगुना किया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी करीमनगर के किसान की इन कोशिशों और परिश्रम की सराहना की। साथ ही, कहा कि आप भी खेती में संभावनाओं का काफी सशक्त उदाहरण हैं। दरअसल, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 18 जनवरी 2023 को विकसित भारत संकल्प यात्रा के लाभार्थियों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से वार्तालाप की है। इस कार्यक्रम में भारत भर से विकसित भारत संकल्प यात्रा के हजारों लाभार्थी शम्मिलित हुए हैं। इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री, सांसद, विधायक और स्थानीय स्तर के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।

बीटेक स्नातक कृषक एम मल्लिकार्जुन रेड्डी की प्रतिवर्ष आय

प्रधानमंत्री मोदी से वार्तालाप करते हुए करीमनगर, तेलंगाना के किसान एम मल्लिकार्जुन रेड्डी ने बताया कि वह पशुपालन और बागवानी फसलों की खेती कर रहे हैं। कृषक रेड्डी बीटेक से स्नातक हैं और खेती से पहले वह एक सॉफ्टवेयर कंपनी में कार्य किया करते थे। किसान ने अपनी यात्रा के विषय में बताया कि शिक्षा ने उन्हें एक बेहतर किसान बनने में सहायता की है। वह एक एकीकृत पद्धति का अनुसरण कर रहे हैं, इसके अंतर्गत वह पशुपालन, बागवानी और प्राकृतिक खेती कर रहे हैं।

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बतादें, कि इस पद्धति का विशेष फायदा उनको होने वाली नियमित दैनिक आमदनी है। वह औषधीय खेती भी करते हैं और पांच स्त्रोतो से आमदनी भी हांसिल कर रहे हैं। पूर्व में वह पारंपरिक एकल पद्धति से खेती करने पर हर साल 6 लाख रुपये की आय करते थे। साथ ही, वर्तमान में एकीकृत पद्धति से वह हर साल 12 लाख रुपये की कमाई कर रहे हैं, जो उनकी विगत आमदनी से भी दोगुना है।

कृषक रेड्डी को उपराष्ट्रपति द्वारा भी सम्मानित किया जा चुका है

किसान रेड्डी को आईसीएआर समेत बहुत सारे संस्थाओं एवं पूर्व उपराष्ट्रपति श्री वेंकैया नायडू द्वारा भी सम्मानित व पुरुस्कृत किया जा चुका है। वह एकीकृत और प्राकृतिक खेती का प्रचार-प्रसार भी खूब कर रहे हैं। साथ ही, आसपास के क्षेत्रों में कृषकों को प्रशिक्षण भी प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, किसान क्रेडिट कार्ड, ड्रिप सिंचाई सब्सिडी और फसल बीमा का फायदा उठाया है। प्रधानमंत्री ने उनसे केसीसी पर लिए गए ऋण पर अपनी ब्याज दर की जांच-परख करने के लिए कहा है। क्योंकि, केंद्र सरकार और राज्य सरकार ब्याज अनुदान प्रदान करती है।

देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए है इस फसल की खेती जरूरी विदेश मंत्री ने कहा

देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए है इस फसल की खेती जरूरी विदेश मंत्री ने कहा

वर्ष 2023 को संयुक्त राष्ट्र द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पोषक अनाज वर्ष घोषित किया गया है। केन्द्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर की मानें तो संयुक्त राष्ट्र ने यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर लिया है। हाल ही में केंद्रीय कृषि और कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और विदेश मंत्री डॉक्टर सुब्रह्मण्यम जयशंकर की अध्यक्षता में अंतर्राष्ट्रीय पोषक अनाज वर्ष के प्रीलॉन्च के उत्सव को मनाया गया। इसमें मिलेट के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने के बारे में बात की गई है।


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विदेश मंत्री के अनुसार मिलेट (MILLET) की खेती करने से ना सिर्फ देश आत्मनिर्भर बनेगा बल्कि इससे वैश्विक खाद्य समस्या का जोखिम भी कम होगा। इसके अलावा अगर किसानों के दृष्टिकोण से देखा जाए तो ये किसानों को आत्मनिर्भर बनाएगा और विकेंद्रीकरण उत्पादन में भी इससे फायदा होगा।

क्या है मिलेट और क्यों बढ़ रही है वैश्विक बाजार में मांग

मिलेट (MILLETS) को जिस नाम से हम जानते हैं, वह है बाजरा। जी हां छोटे छोटे दाने वाला यह अनाज आजकल बहुत लोकप्रिय हो रहा है। ऐसे में सोचने वाली बात है, कि मिलेट के अचानक से लोकप्रिय होने का कारण क्या है। कोविड-19 के दौरान वैश्विक खाद संकट एक बार फिर से सामने आ गया था, और ऐसे में बाजरा एक ऐसा अनाज है, जो कम पानी और विषम परिस्थितियों में भी उगाया जा सकता है। इसके अलावा कोविड-19 से लोग अपने स्वास्थ्य को लेकर भी काफी सजग हो गए हैं, और बाजरे को हमेशा से ही स्वास्थ्य के लिए अच्छा माना गया है। इसीलिए जिस तरह से जलवायु परिवर्तन हो रहा है उस को ध्यान में रखते हुए कुछ इस तरह की ही खेती की ओर हमें ध्यान देना चाहिए ताकि हम देश और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खाद्य सुरक्षा के बारे में पहल कर सकें।


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क्या है मिलेट के पोषक तत्व

मिलेट में पाए जाने वाले पोषक तत्व के बारे में बात की जाए तो लिस्ट काफी लंबी है, इसमें आपको भरपूर मात्रा में फाइबर, कैल्शियम, आयरन, फास्फोरस, मैग्नीशियम, पोटेशियम, विटामिन बी-6 और केराटिन भी पाया जाता है।

क्या गुण बनाते हैं मिलेट को खास

पहले से ही मिलेट को कई अलग-अलग तरह के नामों से जाना जाता है, इसे ‘भविष्य की फसल’ या फिर ‘चमत्कारी अनाज’ भी कहा गया है। उसका कारण है कि मिलेट में पोषक तत्व तो होते ही हैं साथ ही विषम परिस्थितियों और कम लागत में भी उससे उत्पादन होने के कारण इसे खास माना गया है। अगर किसी किसान के पास सिंचाई आदि की सुविधाएं नहीं है, तब भी वह मिलेट की खेती कर सकता है।

पर्यावरण के लिए भी है चमत्कारी

जैसा कि बताया जा चुका है, कि मिलेट की खेती में पानी तो कम लगता ही है साथ ही इसकी खेती में कार्बन उत्सर्जन भी कम होता है। जो सुरक्षित वातावरण बनाए रखने के लिए लाभकारी है। यही कारण है कि भारत में बहुत से राज्य एक से अधिक मिलेट की नस्लों का उत्पादन करते हैं।

इससे जुड़े स्टार्टअप को दी जा रही है आर्थिक सहायता

इसके उत्पादन को बढ़ाने के लिए जो भी स्टार्टअप काम कर रहे हैं, उनको सरकार की तरफ से सहायता भी दी जा रही है। आंकड़ों की मानें तो लगभग 500 से ज्यादा स्टार्टअप इसके उत्पादन के लिए काम कर रहे हैं, जिनमें से 250 स्टार्टअप को भारतीय मिलेट अनुसंधान की तरफ से चयनित किया गया है। उसमें से 70 के करीब स्टार्टअप्स को 6 करोड़ से ज्यादा का इन्वेस्टमेंट दिया जा चुका है।


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पिछले काफी सालों से यह अनाज लोगों की थाली से गायब रहा था और इसका असर आजकल लोगों के स्वास्थ्य पर सीधे तौर पर देखा जा सकता है। अब धीरे ही सही लेकिन लोगों का ध्यान इसकी ओर फिर से आकर्षित हो रहा है।
इस खाद्य उत्पाद का बढ़ सकता है भाव प्रभावित हो सकता है घरेलु बजट

इस खाद्य उत्पाद का बढ़ सकता है भाव प्रभावित हो सकता है घरेलु बजट

यूक्रेन व रूस युद्ध की वजह से अर्थव्यवस्था बेहद प्रभावित हो रही है। दुनिया इन दिनों आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रही है, जो देश समृद्धशाली नहीं हैं, वह महामारी तथा ईंधन के बढ़ते मूल्यों से चिंताग्रस्त हैं। यूक्रेन युद्ध की वजह से गेहूं समान आवश्यक खाद्य उत्पादों के भंडारण को काफी प्रभावित किया है। जिससे गेहूं के भाव में वृध्दि की संभावना है। बतादें कि रूस के विरुद्ध पश्चिमी प्रतिबंधों ने समस्त देशों हेतु व्यापार विकल्पों को कम कर दिया है। इसका सीधा प्रभाव सर्वाधिक दुर्बल लोगों पर देखने को मिल रहा है। आधुनीकरण के साथ नवीन बाजार एवं नवीन अर्थव्यवस्थाएं भी सामने आ रही हैं। वैश्विक अर्थव्यवस्था (Global Economy) यूक्रेन युद्ध एवं रूस पर प्रतिबंधों की वजह से बेहद ही संकट की घड़ी का सामना कर रही है। इसी वजह से विश्व की खाद्यान आपूर्ति एवं व्यवसाय का ढांचा ध्वस्त हो चुका है। बतादें कि इसी वजह से आधारभूत उत्पादों का भी भाव तीव्रता से बढ़ रहा है, जिसमें ईंधन, भोजन एवं उर्वरक इत्यादि शामिल हैं। साथ ही, खाद्य सुरक्षा पर भी प्रतिकूल प्रभाव देखने को मिल रहा है। ऐसे में निश्चित रूप से गेंहू के भाव में वृध्दि होगी, यदि गेहूं के भाव में बढ़ोत्तरी आयी तो लोगों का घरेलू बजट खराब हो सकता है। दरअसल, यूक्रेन युद्ध की वजह से वैश्विक अर्थव्यवस्था बहुत बड़ी समस्या के घेरे में आ गयी है, जो कि पूर्व से ही अमेरिका और यूनाइडेट किंग्डम (United Kingdom) के खराब संबंधों व कोरोना महामारी जैसी चुनौतियों के कारण प्रभावित हो चुकी है।


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हालाँकि, अब भारत ने जी20 में अपना परचम लहरा दिया है। बतादें कि भारत ३० नवंबर २०२३ तक भारत १९ सर्वाधिक धनी देशों व यूरोपीय संघ के समूह का नेतृत्व करेगा। यह सकल विश्व उत्पाद का ८५ फीसद एवं वैश्विक जनसँख्या का ६० फीसद हिस्सा है। ऐसे दौर में जब विश्व बदलाव की ओर बढ़ रहा है, विश्व के सर्वाधिक धनी एवं राजनीतिक दृष्टिकोण से सर्वाधिक शक्तिशाली देशों के समूह का अध्यक्ष होने की वजह से भारत के समक्ष विभिन्न अवसरों के साथ चुनौतियों का भी सामना करना पड़ेगा।

रूस यूक्रेन युद्ध के संबंध में पीएम मोदी ने क्या कहा

भारत को काफी तात्कालिक समस्याओं से निपटना होगा उनमें यूक्रेन युद्ध को बंद करने हेतु भारत की अध्यक्षता का प्रयोग करना आवश्यक होगा। जी२० समूह के अध्यक्ष के तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पहले संबोधन में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को अपनी पुनः सलाह देते हुए कहा कि आज का दौर व युग लड़ाई झगडे या युद्ध का नहीं है। बतादें कि युद्ध के कारण खाद्यान संबंधित चुनौती बढ़ गयी है।

वसुधैव कुटुम्बकम बना अस्थायी खंबा

फिलहाल, जी२० अध्यक्ष का अध्यक्ष होने के नाते भारत सही ढंग से ताकत का उपयोग कर पायेगा। शिखर सम्मेलन के साथ-साथ शेरपाओं की समानांतर बैठक की मेजबानी भारत करेगा एवं वित्त मंत्रियों एवं विश्वभर के देशों के रिजर्व बैंकों के प्रमुखों की बैठकों में हिस्सा लेगा। इसमें भारत विश्व के आर्थिक शासन में बेहतरीन परिवर्तन की बात करेगा। विश्व बैंक व आईएमएफ की भाँति ब्रिटेन वुड्स संस्थान पर भी भारत स्वयं के पद का प्रयोग कर पायेगा। भारत उन देशों को शक्ति प्रदान करेगा जो कि वैश्विक आर्थिक शासन को बेहतर बनाने के साथ भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सकारात्मक परिवर्तन हेतु भी दबाव बना सकता है। अनुमानुसार अगले वर्ष चीन को पीछे छोड़ भारत विश्व का सर्वाधिक जनसँख्या वाला देश बन जाएगा।
केंद्र सरकार ने 'खोपरा' नारियल के न्यूनतम समर्थन मूल्य को दी मंजूरी

केंद्र सरकार ने 'खोपरा' नारियल के न्यूनतम समर्थन मूल्य को दी मंजूरी

भारत सरकार देश के किसानों की आय को बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी कड़ी में राज्य तथा केंद्र सरकारें आए दिन कृषि नीति और कानून में किसान हितैषी बदलाव करती रहती हैं। ताकि किसानों को फायदा हो और वह अपने पैरों पर खड़ी रह सकें। हाल ही में भारत सरकार की कैबिनेट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए मिलिंग खोपरा (नारियल) के न्यूनतम समर्थन मूल्य में 270 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोत्तरी की है। इसी के साथ सरकार ने घोषणा की है, कि अब बॉल खोपरा के न्यूनतम समर्थन मूल्य में भी 750 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ोत्तरी की गई है। सरकार की इस घोषणा से नारियल उत्पादक किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है। न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोत्तरी किए जानें से किसान भाई नारियल की खेती के लिए प्रोत्साहित होंगे। जिससे नारियल की खेती का रकबा बढ़ाने में मदद मिलेगी। अगर इस खेती से किसानों को अच्छी आमदनी होने लगती है, तो नारियल का प्रसंस्करण बिजनेस को बढ़ाने में भी किसान आगे आ सकते हैं।

न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाने के बाद अब इस कीमत पर बिकेगा नारियल

सरकार ने कहा है, कि नारियल का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाने के बाद अब मिलिंग खोपरा 10,860 रुपये क्विंटल के भाव पर बिकेगा। नारियल की इस किस्म पर 270 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोत्तरी की गई है। जब कि बॉल खोपरा नारियल 11,750 रुपये प्रति क्विंटल के भाव बिकेगा। इस नारियल पर 750 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोत्तरी की गई है। न्यूनतम समर्थन मूल्य के बढ़ने से नारियल के किसानों का मुनाफा बढ़ने की पूरी संभावना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने कहा है, कि नारियल की कीमतों का निर्धारण कृषि लागत एवं मूल्य आयोग की सिफारिश पर किया गया है। साथ ही, कीमतों के निर्धारण में प्रमुख नारियल उत्पादक राज्यों के सुझावों पर भी गौर किया गया है। नारियल की खेती गेहूं, चावल और सब्जियों से ज्यादा मुनाफे वाली खेती होती है। यदि किसान वैज्ञानिक तकनीकों के जरिए नारियल की खेती करें, तो इस खेती से किसान बंपर कमाई कर सकते हैं। नारियल की खेती में एक बार रोपाई करने के बाद आगामी 80 सालों तक इसकी फसल ली जा सकती है। साथ ही, नारियल के बाग में खाली पड़ी जमीन में काली मिर्च, इलायची या दूसरी मसाला फसलों की खेती करके अतिरिक्त आय भी अर्जित की जा सकती है।


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इन दिनों भारत के साथ ही विदेशी बाजारों में साबुत नारियल तथा नारियल के तेल की जबरदस्त मांग है। साथ ही, इसकी मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे भविष्य में किसानों के पास इस खेती से अच्छी कमाई करने का मौका होगा।
यह राज्य कर रहा है मिलेट्स के क्षेत्रफल में दोगुनी बढ़ोत्तरी

यह राज्य कर रहा है मिलेट्स के क्षेत्रफल में दोगुनी बढ़ोत्तरी

साल 2023 में उत्तर प्रदेश सरकार मिलेट्स के क्षेत्रफल को बढ़ाएगी। प्रदेश सरकार इस रकबे को 11 लाख हेक्टेयर से बढ़ाकर 25 लाख तक करेगी। राज्य सरकार ने अपने स्तर से तैयारियों का शुभारंभ क्र दिया है। आने वाले साल 2023 को दुनिया मिलेट्स वर्ष के रूप में मनाएगी। मिलेट्स वर्ष मनाए जाने की पहल एवं इसकी शुरुआत में भारत सरकार की अहम भूमिका रही है। भारत में मिलेट्स का उत्पादन अन्य सभी देशों से अधिक होता है। देश का मोटा अनाज पूरी दुनिया में अपना एक विशेष स्थान रखता है। इसी वजह से भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी मोटे अनाज को उत्सव के तौर पर मनाकर देश की प्रसिद्ध को दुनियाभर में फैलाना चाहते हैं। कुछ ही दिन पहले मोदी जी ने दिल्ली में आयोजित हुए एक कार्यक्रम में मोटे अनाज का बना हुआ खाना खाया था। भारत के विभिन्न राज्यों में मोटा अनाज का उत्पादन बड़े पैमाने पर किया जाता है। मिलेट्स इयर आने की वजह से उत्तर प्रदेश राज्य में मोटे अनाज के उत्पादन का क्षेत्रफल बाद गया है।

उत्तर प्रदेश राज्य कितने हैक्टेयर में करेगा मोटे अनाज का उत्पादन

खबरों के मुताबिक, प्रदेश के मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र ने मिलेट्स इयर के संबंध में राज्य के कृषि विभाग के अधिकारीयों को बुलाकर इस विषय पर बैठक की है। इस बैठक में जिस मुख्य विषय पर चर्चा की गयी वह यह था, कि वर्तमान में 11 लाख हेक्टेयर में मोटे अनाज का उत्पादन हो रहा है। इसको साल 2023 में 25 लाख हेक्टेयर तक बढ़ाया जाए। हालाँकि लक्ष्य थोड़ा ज्यादा बड़ा है, विभाग के अधिकारी पहले से ही इस बात के लिए तैयारी में जुट जाएँ।


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उत्तर प्रदेश सरकार ने कितना लक्ष्य तय किया है

राज्य सरकार द्वारा अधीनस्थों को आगामी वर्ष में मोटे अनाज का क्षेत्रफल दोगुने से ज्यादा वृद्धि का आदेश दिया है। बतादें, कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मोटे अनाज से संबंधित पहल को बेहद ही गहनता पूर्वक लिया गया है। साथ ही, इस विषय के लिए उत्तर प्रदेश सरकार भी काफी गंभीरता दिखा रही है। उत्तर प्रदेश में सिंचित क्षेत्रफल का इलाका 86 फीसद हैं। बतादें, कि इस रकबे में दलहन, तिलहन, धान, गेहूं का उत्पादन किया जाता जाती है।

कहाँ से खरीदेगी सरकार बीज

कृषि विभाग के अधिकारियों को निर्देेश दिया गया है, कि कर्नाटक एवं आंध्र प्रदेश आदि राज्यों के अधिकारियों से संपर्क साधें। राज्य में बुआई हेतु मोटे अनाज के बीज की बेहतरीन व्यवस्था की जाए। सबसे पहली बार 18 जनपदों में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर बाजरा खरीदा जा रहा है।

उत्तर प्रदेश में कितना किया जायेगा अनाज का उत्पादन

उत्तर प्रदेश के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, देश में मोटे अनाज की मुख्य फसलें जिनका अच्छा उत्पादन भी होता है, वह ज्वार एवं बाजरा हैं। महाराष्ट्र राजस्थान, उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर बाजरा का उत्पादन किया जाता है। क्षेत्रफलानुसार बात की जाए तो उत्तर प्रदेश 9 .04 लाख हेक्टेयर, महाराष्ट्र में 6.88, राजस्थान में 43.48 लाख हेक्टेयर में बाजरे का उत्पादन किया जाता है। वहीं, उत्तर प्रदेश राज्य की पैदावार प्रति हेक्टेयर 2156 किलो ग्राम है। राजस्थान का उत्पादन प्रति हेक्टेयर 1049 किलोग्राम एवं महाराष्ट्र की पैदावार की बात करें तो 955 किलो ग्राम है।

ज्वार के उत्पादन का क्षेत्रफल कितना बढ़ा है

राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र एवं कर्नाटक में ज्वार का अच्छा खासा उत्पादन होता है। क्षेत्रफल के तौर पर कर्नाटक प्रति हेक्टेयर प्रति क्विंटल पैदावार के मामले में अव्वल स्थान है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा ज्वार की पैदावार बढ़ाने के लिए काफी जोर दे रही है। उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2022 में 1.71 लाख हेक्टेयर उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। लेकिन वर्ष 2023 में इसको 1.71 लाख हैक्टेयर से बढ़ाकर 2.24 लाख हेक्टेयर तक पहुँचा दिया है। इसी प्रकार सावां व कोदो का रकबा भी पहले से दोगुना कर दिया गया है।
केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण राज्य मंत्री ने कृषि भवन में ''पीएम किसान चैटबॉट'' (किसान ई-मित्र) का अनावरण किया

केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण राज्य मंत्री ने कृषि भवन में ''पीएम किसान चैटबॉट'' (किसान ई-मित्र) का अनावरण किया

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्यमंत्री द्वारा कृषि भवन में "PM Kisan AI Chatbot (Kisan e-Mitra)" को लॉन्च करते हुए कहा है, कि किसानों को होने वाली असुविधाओं का निराकरण करने के लिए यह बेहद कारगर सिद्ध होगा। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री कैलाश चौधरी ने आज AI Chatbot लॉन्च किया, जो प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का भाग है। AI Chatbot का उद्घाटन पीएम-किसान योजना को ज्यादा प्रभावी बनाने एवं किसानों को उनके सवालों का त्वरित, स्पष्ट एवं सही उत्तर देने में एक महत्वपूर्ण कदम है। बतादें, कि इस दौरान राज्य मंत्री कैलाश चौधरी ने कहा है, कि कृषि क्षेत्र को तकनीक से जोड़ने का यह महत्वपूर्ण कदम कृषकों के जीवन में व्यापक बदलाव लाने वाला है। कृषि राज्य मंत्री ने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अच्छे शासन के अंतर्गत तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा देने का आह्वान किया है। दरअसल, आज की गई कार्रवाई इसमें कामयाब होगी। ड्रोन के जरिए से खेती करने की तकनीक का प्रभाव है, जिससे युवा कृषि की ओर आकर्षित हो रहे हैं। यही वजह है कि भारत के कृषि क्षेत्र में नए-नए उद्यम चालू हो रहे हैं।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री ने क्या कहा है

केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण राज्य मंत्री ने राज्य के अधिकारियों से कहा है, कि वह किसानों को AI चैटबॉट का इस्तेमाल करने के लिए प्रशिक्षण दें। बतादें, कि समुचित निगरानी रखें एवं प्रारंभिक दौर में आने वाली किल्लतों का तुरंत प्रभाव से समाधान करें। उन्होंने इस कवायद को मौसम, फसल नुकसान, मृदा की स्थिति, बैंक भुगतान इत्यादि से जोड़ने पर विशेष जोर दिया।

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AI Chatbot शीघ्र 22 भाषाओं में उपलब्ध होगा

AI Chatbot को पीएम-किसान शिकायत प्रबंधन प्रणाली में शुरू करने का उद्देश्य किसानों को एक सुगम और सरल प्लेटफार्म देना है। AI Chatbot अपने विकास के प्रथम चरण में किसानों को उनके आवेदन की स्थिति, भुगतान विवरण, अपात्रता की स्थिति एवं अन्य योजना-संबंधी अपडेट प्राप्त करने में मदद करेगा। पीएम-किसान लाभार्थियों की भाषाई एवं क्षेत्रीय विविधता को पूरा करते हुए AI Chatbot को पीएम-किसान मोबाइल एप में भाषिनी के साथ एकीकृत किया गया है। दरअसल, वर्तमान में चैटबॉट छह भाषाओं में मौजूद है, जिनमें अंग्रेजी, हिंदी, बंगाली, उड़िया एवं तमिल शम्मिलित हैं। शीघ्र ही यह देश की 22 भाषाओं में उपलब्ध होगा।
मोदी जी ने पीएम किसान सम्मान निधि की सहायता राशि दोगुनी करने का ऐलान किया

मोदी जी ने पीएम किसान सम्मान निधि की सहायता राशि दोगुनी करने का ऐलान किया

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के अंतर्गत केंद्र सरकार ने एक बड़ा निर्णय लिया है। दरअसल, किसानों को इस योजना में वार्षिक 6,000 रुपये तक प्रदान किए जाते हैं। साथ ही, वर्तमान में किस्त की इस धनराशि को दोगुना कर दिया गया है। चलिए ऐसे में जानते हैं, कि किन किसानों को पीएम किसान योजना का यह फायदा मिलेगा। केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना में एक काफी बड़ा बदलाव करने का ऐलान किया है। पीएम किसान सम्मान निधि योजना के अंतर्गत देश के किसानों की आर्थिक तौर पर मदद करने के लिए वार्षिक 6,000 रुपये तक देती हैं। परंतु, केंद्र सरकार ने हाल ही में राजस्थान के किसानों के लिए इस योजना की धनराशि में बढ़ोतरी कर 12,000 रुपये वार्षिक देने का वादा किया है। जानकारी के लिए बतादें, कि बीते कल मतलब कि 20 नवंबर, 2023 के दिन राजस्थान के हनुमानगढ़ में पीएम मोदी ने चुनावी जनसभा में कहा कि "राजस्थान बीजेपी ने किसानों से एमएसपी/MSP पर फसल खरीदने का निर्णय किया है। साथ ही, उन्हें बोनस भी प्रदान करेगी। राजस्थान बीजेपी ने किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के माध्यम से 12,000 रुपये तक देने का फैसला भी किया है।"

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना में कितने रुपए मिलेंगे

दरअसल, राजस्थान में आजकल सियासी सरगर्मियां चरम सीमा पर हैं। क्योंकि विधानसभा चुनाव पास आते जा रहे हैं। इसी कड़ी में पीएम मोदी ने सोमवार को राजस्थान राज्य का दौरा किया एवं किसानों के लिए विभिन्न घोषणाऐं की। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने कृषकों को कर्ज में डुबो दिया। आगे उन्होंने कहा कि कपास की लाखों हेक्टेयर फसल जो कि बर्बाद हुई हैं, कांग्रेस को उसका जवाब देना पड़ेगा। साथ ही, उन्होंने यह भी बताया कि जिन्होंने किसान को ठगा है, उन्हें छोड़ा नहीं जाएगा। इसी क्रम में राजस्थान भाजपा ने निर्णय लिया है, कि राज्य के किसानों की फसल की MSP पर खरीद करेंगे। इसके साथ-साथ किसानों को बोनस भी प्रदान करेगी। पीएम मोदी ने यह भी कहा कि किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना में मिलने वाली धनराशि को बढ़ाकर 12,000 रुपये तक कर दिया जाएगा।

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किसानों को सस्ती खाद प्रदान करने हेतु सरकार करोड़ों खर्च कर रही है

राजस्थान की चुनावी रैली में पीएम मोदी ने यह भी कहा कि किसानों की सहायता के लिए सरकार सदैव उनके साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि कृषकों के लिए सस्ती खाद हेतु केंद्र सरकार के द्वारा करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं। जिससे कि किसान को सस्ती खाद प्राप्त हो सके एवं खाद के लिए उन्हें कहीं और न भटकना पड़े। उन्होंने आगे कहा कि विश्वभर में यूरिया की एक बोरी की कीमत तकरीबन 3,000 रुपये तक मिलती है। लेकिन, वहीं भारत में यूरिया की एक बोरी की कीमत सरकार के द्वारा 300 रुपये से भी कम भाव पर किसानों को मुहैय्या करवाई जाती हैं।
पीएम मोदी से एथेनॉल निर्माताओं ने की एथेनॉल के खरीद भाव को बढ़ाने की मांग

पीएम मोदी से एथेनॉल निर्माताओं ने की एथेनॉल के खरीद भाव को बढ़ाने की मांग

एथेनॉल निर्माताओं ने अनाज एवं मक्के से निर्मित एथेनॉल के खरीद मूल्य में इजाफा करने के लिए पेट्रोलियम प्राकृतिक गैस मंत्रालय एवं प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजा है। एथेनॉल विशेष रूप से क्षतिग्रस्त अनाज एवं मक्के से तैयार हो रहा है। भारत में दो स्त्रोतो से एथेनॉल तैयार किया जाता है। इनमें से एक गन्ना एवं दूसरा अनाज (चावल मक्का) हैं।

एथेनॉल के खरीद मूल्य में बढ़ोतरी की मांग 

एथेनॉल निर्माताओं के मुताबिक, अनाज (चावल) से तैयार होने वाले एथेनॉल का खरीद भाव 69.54 एवं मक्के से निर्मित एथेनॉल का खरीद मूल्य 76.80 रुपये प्रति लीटर किया जाए। ऐसा करने पर नवंबर माह से शुरू हो रहे 2023-24 के एथेनॉल आपूर्ति साल में लगातार आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी।

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एथेनॉल के बढ़ते उत्पादन से पेट्रोल के दाम में होगी गिरावट, महंगाई पर रोक लगाने की तैयारी साल 2022-23 में क्षतिग्रस्त अनाज से निर्मित एथेनॉल का खरीद मूल्य 64 रुपये प्रति लीटर एवं मक्के से निर्मित एथेनॉल का खरीद भाव 66.07 रुपये प्रति लीटर निर्धारित किया गया था। एथेनॉल निर्माताओं ने खरीद मूल्य में इजाफा करने की मांग तब की, जब केंद्र सरकार ने गन्ने से निर्मित होने वाले एथेनॉल का खरीद मूल्य घोषित नहीं किया। सामान्य तौर पर यह नवंबर माह के आरंभ में घोषित हो जाता है। वही दूसरी तरफ भारतीय खाद्य निगम ने अतिरिक्त चावल की आपूर्ति बरकरार नहीं रखी हैं।

जीईएमए ने की फीडकॉस्ट के भाव निर्धारित करने की मांग 

अनाज एथेनॉल निर्माता एसोसिएशन (जीईएमए) ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं पेट्रोलियम मंत्री श्री हरदीप पुरी से मांग की है, कि आज के समय में खुले बाजार में मौजूद फीडस्टॉक (क्षतिग्रस्त अनाज और मक्के) के खर्च के आधार पर लागत मूल्य निर्धारित किया जाए।

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तेल विपणन कंपनियों को कितना एथनॉल मुहैय्या करवाया गया है 

एथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2023-24 में तेल विपणन कंपनियों को 2.9 अरब लीटर अनाज आधारित एथेनॉल उपलब्ध करवाया गया है। इसमें क्षतिग्रस्त अनाज (टूटे हुए चावल) की भागेदारी 54 प्रतिशत, एफसीआई से अनुदान प्रदान की गई आपूर्ति की 15 फीसद और मक्के की भागीदारी 31% प्रतिशत रही। तेल विपणन कंपनियों ने एथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2023-24 में 15 प्रतिशत सम्मिश्रण एथेनॉल के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए 8.25 अरब लीटर एथेनॉल की आपूर्ति की निविदा जारी की है। इसके अंदर 2.9 अरब लीटर एथेनॉल की आपूर्ति अनाज आधारित स्रोतों से होती है। वहीं, शेष बची आपूर्ति गन्ना आधारित शीरे से होती है। अनाज आधारित एथेनॉल के निर्माताओं ने कहा है, कि संपूर्ण वर्ष के लिए गन्ना आधारित एथेनॉल को खरीदने का मूल्य निर्धारित किया जा सकता है। इसकी वजह यह है, कि गन्ने के भाव स्थिर रहते हैं। हालांकि, अनाज आधारित एथेनॉल के भाव प्रतिदिन के आधार पर निर्धारित होते हैं। बहुत बार आपूर्ति मांग के चलते घंटे के आधार पर भी निर्धारित होते हैं।
इस योजना को शुरू कर प्रधानमंत्री मोदी ने महिला किसानों का किया सशक्तिकरण

इस योजना को शुरू कर प्रधानमंत्री मोदी ने महिला किसानों का किया सशक्तिकरण

प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में ड्रोन दीदी योजना की शुरुआत की है। पीएम मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विकसित भारत संकल्प यात्रा के लाभार्थियों से वार्तालाप की।  किसानों के हित के लिए सरकार की तरफ से बहुत सारी योजनाएं जारी की जा रही हैं। साथ ही, कृषि क्षेत्र में महिलाओं की हिस्सेदारी बड़े इसके लिए भी सरकार कार्य कर रही है। आज के विकसित भारत संकल्प यात्रा के अंतर्गत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विकसित भारत संकल्प यात्रा के लाभार्थियों से वार्तालाप की है। इसी दौरान प्रधानमंत्री महिला किसान ड्रोन केंद्र का शुभारंभ किया गया। ड्रोन दीदी योजना के अंतर्गत 1261 करोड़ रुपये के समकुल खर्च के साथ महिलाओं को 15 हजार ड्रोन बांटे जाएंगे।

पीएम मोदी प्राकृतिक एवं सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के नजरिए की नई आकांक्षा पैदा हुई है

पीएम मोदी का कहना है, कि सरकार की ओर से लोगों की जरूरतों को पहचानने एवं उन्हें उनके अधिकार प्रदान करने के प्राकृतिक न्याय-सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के नजरिए की नवीन आकांक्षा पैदा हुई है। इसके साथ ही करोड़ों लोगों के अंदर उपेक्षा की भावना समाप्त हुई है। पीएम का कहना है, कि स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर करने के लिए चल रहे अभियान को ड्रोन दीदी के माध्यम से ज्यादा मजबूती मिलेगी। इससे आमदनी के अतिरिक्त साधन उपलब्ध होंगे। इससे कृषकों को बेहद ही कम कीमत पर ड्रोन जैसी अत्याधुनिक तकनीक मिल सकेगी, जिसके सहयोग से समय के साथ-साथ दवा एवं उर्वरकों की भी बचत होगी।

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कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने महिलाओं को ड्रोन उपलब्ध कराने को लेकर क्या कहा 

इसके साथ ही, कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा है, कि महिलाओं को 15 हजार ड्रोन उपलब्ध किए जाएंगे। दरअसल, इन ड्रोन दीदी के माध्यम से महिलाओं का सशक्तिकरण भी होगा और वह आत्मनिर्भर भी बनेंगी, रोजगार सृजन से उनकी आजीविका शानदार होगी। इसके साथ ही खेती में ड्रोन का उपयोग बढने से खेती भी काफी उन्नत बनेगी। स्वयं सहायता समूहों से संबंधित बहनों की क्षमता बढ़ाने एवं आजीविका को शानदार करने के लिए ड्रोन दीदी कार्यक्रम की कल्पना बेहद ही ज्यादा शानदार है। उन्होंने कहा है, कि पेस्टीसाइड, यूरिया और डीएपी का जब खेतों में छिड़काव होता है, तो शरीर पर इसका काफी दुष्प्रभाव पड़ता है। इसके अतिरिक्त इस दौरान कहीं पर ज्यादा तो कहीं पर कम छिड़काव जैसा असंतुलन भी बना रहता है। हालाँकि, कि जब ड्रोन का उपयोग बढ़ेगा तो शरीर पर दुष्प्रभाव कम देखने को मिलेगा। वहीं, उर्वरक की खपत भी काफी हद तक कम हो जाएगी।