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खरबूज

तरबूज और खरबूज की अगेती खेती के फायदे

तरबूज और खरबूज की अगेती खेती के फायदे

साल 2020 जाने को है और हम 2021 का स्वागत करने को तैयार बैठे हैं. 2020 में हमने बहुत ही अलग तरह का डर, दुविधा और बंधन महसूस किया. लेकिन कहते हैं ना अंत भला तो सब भला...अभी कोरोना की वैक्सीन भी आ गई है कुछ समय में लगनी भी शुरू हो जाएगी. कोरोना में सारी इंडस्ट्री चौपट हो गई थी लेकिन हमारी कृषि को अर्थव्यवस्था की धुरी ऐसे ही नहीं कहा जाता है, कृषि ने हमारे अन्न के भण्डार भरे और इस दौर में भी अपनी चमक बिखेरी. आज हम बात करते है तरबूज और खरबूज जैसी फसलों की अगेती खेती की.आजकल किसानों की आमदनी बढ़ाने की बात सरकार कर रही है लेकिन कोई भी सरकार आपको घर बैठा कर आपकी आमदनी नहीं बढ़ा सकती है उसके लिए खुद किसान को आगे आना पड़ेगा तथा अपनी खेती को पुराने तरीकों की अपेक्षा नई तकनीक से खेती करनी होगी तभी आपकी आमदनी बढ़ सकती है. गर्मी के दिनों में तरबूज एक अत्यन्त लोकप्रिय फल एवं सब्जी मानी जाती है. इसके फल पकने पर काफी मीठे एवं स्वादिष्ट होते हैं. इसकी खेती पूरे भारत वर्ष में की जाती है. इसकी खेती मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, पंजाब, हरियाणा एवं राजस्थान में की जाती है| यदि कृषक तरबूज और खरबूज की स्थानीय किस्मों की जगह उन्नत प्रजाति और वैज्ञानिक तकनीक से खेती करें, तो इसकी फसल से अच्छी तथा गुणवतापूर्ण उपज प्राप्त की जा सकती है.इसके फलों के सेवन से “लू’ नहीं लगती है तथा गर्मी से राहत मिलती है

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अगेती तरबूज और खरबूज की तैयारी

जिन किसान भाइयों के खेत आलू और सरसों से खाली होने वाले हैं उनमे वो ककड़ी, तरबूज और खरबूज जैसी फसल लगा सकते हैं. इसके दो तरीके हैं या तो आप खेत के खाली होने का इंतज़ार करो या उससे पहले ही अपनी फसल की तैयारी कर दें.ये फसल बहुत कम समय में तैयार होकर आपको मुनाफा दे सकती है. तरबूज और खरबूज

अगेती फसल तैयार करने के तरीके

आपको जितने खेत में तरबूज और खरबूज की फसल लगानी है उसके लिए उतने बीज के हिसाब से आप अपने किसी कवर एरिया में लगा सकते है. आप गोबर की बनी हुई खाद और मिट्टी को मिला कर प्लास्टिक या थर्माकोल के गिलास में भर के उसमें बीज डाल कर किसी गर्म और कवर एरिया में लगा सकते हैं. इसमें ध्यान रखने वाली बात है की जब तक आपका खेत खाली हो तब तक आपके पौधे 20 से 30 दिन के हो जाने चाहिए. जैसे ही आपका खेत खाली हो आप खेत को तैयार करके उन पौधों को खेत में रोपित कर दें आपकी फसल सबसे पहले बाजार में आ जाएगी और इसका मूल्य भी अच्छा मिलेगा.

खेत की तैयारी

तरबूज और खरबूज अगर आपका खेत आलू से खाली हुआ है तो उसमे आपको बहुत विशेष तैयारी की जरुरत नहीं होती है आप सीधे खेत की पलेवा करके उसमे देसी हल या हेरों से जुताई करके उसमे पटेला/सुहागा लगा के समतल बना के उसमे पहले से तैयार पौधे रोपित कर दें और हल्का पानी लगा दें. और अगर आपका खेत सरसों से खाली हुआ है तो आपको उसकी अच्छे से जुताई करनी होती है तथा खेत की पलेवा करके वही तरीके से उसको तैयार करके पौधे रोपित करने हैं. इसके खेत को बहुत ज्यादा खाद और पानी की जरूरत नहीं होती है. लेकिन खेत में पानी निकासी की उपयुक्त व्यवस्था होनी चाहिए. जिससे की पौधे की ग्रोथ सही से हो. फिर भी खाद और पानी की जरूरत मिट्टी के हिसाब से तय की जाती है. तरबूज के लिए यमुना और गंगा जैसी नदियों के किनारे पर भी किया जाता है. इसके लिए रेतीली और दोमट मिट्टी दोनों ही मुफीद होती है. इसके खेत में गोबर की बनी हुई खाद डाल कर अच्छे से खेत में मिला देनी चाहिए इससे हमारी फसल जल्दी और अच्छी तैयार होती है. सरसों के खेत में हमें थोड़ा ज्यादा खाद पर ध्यान देना होता है जबकि आलू के खेत में पहले से ही प्रचुर मात्रा में खाद होता है.

खाद की व्यवस्था

अच्छी मात्रा में गोबर की बनी हुई खाद को जमीन में भली-भांति मिला देना चाहिए. यह खाद खेत में डालकर तैयारी के समय मिला देना चाहिए तथा ट्रेक्टर से 3 - 4 जोत लगा देनी चाहिए .70 से 80 कि.ग्रा. नाइट्रोजन प्रति हैक्टर देना चाहिए तथा फास्फेट व पोटाश की मात्रा 40-50 कि.ग्रा. प्रति हैक्टर की हिसाब से देनी चाहिए. फास्फेट व पोटाश तथा नाइट्रोजन की आधी मात्रा को भूमि की तैयारी के समय मिलाना चाहिए तथा शेष नाइट्रोजन की मात्रा को बुवाई के 25-30 दिन के बाद देना चाहिए. जैसा की हम ऊपर बता चुके हैं, खाद उर्वरकों की मात्रा भूमि की उर्वरा शक्ति के ऊपर निर्भर करती है. उर्वरा शक्ति भूमि में अधिक हो तो उर्वरक व खाद की मात्रा कम की जा सकती है.

उपयुक्त जलवायु

इसकी खेती के लिए गर्म और औसत आर्द्रता वाले क्षेत्र सर्वोत्तम होते हैं. इसके  बीज के जमाव और पौधों के बढ़वार के समय लगभग 25 से 32 डिग्री सेल्सियस तापमान अच्छा रहता है. इसके फल को जितनी गर्मी मिलती है उतना ही ये मीठा और लाल होता है. तो इसके फल को अच्छी गर्मी में भी नुकसान नहीं होता है. इसको बारिश के मौसम से पहले खेत से फसल को तोड़ लेना चाहिए. बारिश शुरू होने पर ये खुद से ही ख़तम हो जाता है.

उन्नत किस्में

तरबूज और खरबूज इसकी फसल से अच्छी उपज लेने के लिए किसानों को तरबूज और खरबूज की स्थानीय किस्मों का चयन करना चाहिए. किसान अपने एरिया के हिसाब से ही किस्मों का चयन करें. कुछ उन्नत किस्में इस प्रकार हैं.
  • सुगर बेबी
  • दुर्गापुर केसर
  • अर्को मानिक
  • दुर्गापुर मीठा
  • काशी पीताम्बर
  • पूसा वेदना
  • न्यू हेम्पशायर मिडगट
  • बुबाई का समय
उत्तर भारत के मैदानी क्षेत्रों में तरबूज की बुवाई 10 से 20 फरवरी के बीच में की जाती है, जबकि नदियों के किनारे इसकी बुवाई नवम्बर से जनवरी के बीच में की जाती है. दक्षिणी-पश्चिमी राजस्थान में मतीरा जाति के तरबूज की बुवाई जुलाई महीने में की जाती है| जबकि दक्षिण भारत में इसकी बुवाई अगस्त से लेकर जनवरी तक करते हैं. आप कह सकते हैं की भारत में वर्ष भर कहीं न कहीं इसकी बुवाई के लिए समय उपयुक्त होता है.

बीज की मात्रा

एक हेक्टेयर क्षेत्रफल के लिए 3.5 से 4 किलोग्राम बीज पर्याप्त होता है. बाकि ये बीज की प्रजाति पर भी निर्भर करता है.

बुवाई की विधि

तरबूज की बुवाई मेड़ों पर 2.5 से 3.0 मीटर की दूरी पर 40 से 50 सेंटीमीटर चौड़ी नाली बनाकर करते हैं. इन नालियों के दोनों किनारों पर 60 सेंटीमीटर की दूरी पर 2 से 3 बीज बोते हैं. यह दूरी मृदा की उर्वरता एवं प्रजाति के अनुसार घट बढ़ सकती है. नदियों के किनारे 60 X 60 X 60 सेंटीमीटर क्षेत्रफल वाले गड्डे बनाकर उसमें 1:1:1 के अनुपात में मिट्टी, गोबर की खाद तथा बालू का मिश्रण भरकर थाल को भर दे तत्पश्चात् प्रत्येक थाल में दो बीज लगादें | अंकुरण के 10 से 15 दिन बाद एक जगह पर 1 से 2 स्वस्थ पौधों को छोड़कर बाकि को निकाल देना चाहिए.

खाद एवं उर्वरक

इसकी उत्तम खेती के लिए 65 किलोग्राम नाइट्रोजन, 56 किलोग्राम फास्फोरस तथा 40 किलोग्राम पोटाश प्रति हेक्टेयर की दर से अवश्य दी जानी चाहिए| नत्रजन की आधी मात्रा तथा फास्फोरस एवं पोटाश की पूरी मात्रा खेत में नालियाँ या थाले बनाते समय देते हैं| नत्रजन की आधी मात्रा दो बराबर भागों में बाँटकर खड़ी फसल में जड़ों के पास गुड़ाई के समय तथा पुनः 45 दिन बाद छिड़ककर देना चाहिए| सिंचाई प्रबंधन

सिंचाई प्रबंधन

यदि तरबूज की खेती नदियों के कछारों में की जाती है, तब सिंचाई की आवश्यकता नहीं पड़ती क्योंकि पौधों की जड़ें बालू के नीचे उपलब्ध पानी को शोषित करती रहती हैं| जब मैदानी भागों में इसकी खेती की जाती है, तो सिंचाई 7 से 10 दिन के अन्तराल पर करते हैं क्योकि गर्मी में इसको सिचांई की आवश्यकता होती है. जब तरबूज आकार में पूरी तरह से बढ़ जाते हैं, सिंचाई बन्द कर देते हैं, क्योंकि फल पकते समय खेत में पानी अधिक होने से फल में मिठास कम हो जाती है और फल फटने लगते हैं.

खरपतवार की रोकथाम

तरबूज के जमाव से लेकर प्रथम 25 दिनों तक खरपतवार फसल को ज्यादा नुकसान पहुंचाते हैं. इससे पौधे की वृद्धि पर प्रतिकूल असर पड़ता है और पौधे की बढ़वार रुक जाती है.अतः खेत से कम से कम दो बार खरपतवार निकालना चाहिए. अच्छा रहे की आप खरपतवार निकलने के लिए निराई गुड़ाई का सहारा लें और अगर ये संभव नहीं है तो आप रासायनिक खरपतवारनाशी के रूप में बूटाक्लोर रसायन 2 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से बीज बुआई के तुरन्त बाद छिड़काव करते हैं. खरपतवार निकालने के बाद खेत की गुड़ाई करके जड़ों के पास मिट्टी चढ़ाते हैं जिससे पौधों का विकास तेजी से होता है.

प्रमुख रोग एवं रोकथाम

मृदुरोमिल आसिता- जब तापमान 20 से 22 डिग्री सेंटीग्रेट हो, तब यह रोग तेजी से फैलता है| उत्तरी भारत में इस रोग का प्रकोप अधिक है. इस रोग का मुख्य लक्षण पत्तियों पर कोणीय धब्बे जो शिराओं द्वारा होते हैं. अधिक आर्द्रता होने पर पत्ती के निचली सतह पर मृदुरोमिल कवक की वृद्धि दिखाई देती है. रोकथाम- इसकी रोकथाम के लिए मैंकोजेब 0.20 प्रतिशत (2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी) घोल से पहले सुरक्षा के रूप में छिड़काव बीमारी दिखने तुरन्त करना चाहिए| यदि पौधों पर बीमारी के लक्षण दिखाई दे रहे हो तो मेटल एक्सिल 8 प्रतिशत + मैन्कोजेब 64 प्रतिशत डब्लू वी पी, 25 प्रतिशत दवा का छिड़काव 7 दिन के अन्तराल पर 3 से 4 बार करना चाहिए. पूरी तरह रोगग्रस्त लताओं को निकाल कर जला देना चाहिए तथा बीज उत्पादन के लिए गर्मी की फसल से बीज उत्पादन करें. तरबूज बड नेक्रोसिस- यह रोग रस द्रव्य एवं थ्रिप्स कीट द्वारा फैलता है. रोग ग्रस्त पौधों में क्राउन से अत्यधिक कल्ले निकलते हैं और तना सामान्य से कड़ा और ऊपर उठा हुआ दिखाई देता है, पत्तियाँ विकृत हो जाती हैं. उसमें असामान्य वृद्धि होती है तथा फूल भी टेढ़े-मेढे एवं हरे हो जाते हैं. रोकथाम- इस रोग से बचाव हेतु रोग रोधी किस्म की बुवाई करें तथा रोगी पौधों को उखाड़कर नष्ट कर दे. बीज अथवा पौधों को इमिडाक्लोप्रिड 0.3 मिलीलीटर दवा 1 लीटर पानी में घोलकर रोपाई या बुआई से पहले 10 मिनट तक उपचारित करें| पौध जमाव के 10 से 15 दिन के बाद से नीम या पुंगगामिया के रस का छिड़काव 3 प्रतिशत की दर से 15 दिन के अन्तराल पर करना चाहिए.

फल तुड़ाई

तरबूज में तुड़ाई बहुत महत्वपूर्ण होती है. तरबूज के फल का आकार एवं डंठल के रंग को देखकर उसके पकने की स्थिति का पता लगाना बड़ा मुश्किल है.अच्छी प्रकार पके हुए फलों की पहचान निम्न प्रकार से की जाती है| जमीन से सटे हुए फल के भाग में रंग परिवर्तन देखकर किया जाता है. पके फले को थपथपाने से धबधब की आवाज आती है, तो फल पका होता है. इसके अलावा यदि फल से लगी हुई प्ररोह पूरी तरह सूख जाय तो फल पका होता है. पके हुए फल को दबाने पर कुरमुरा एवं फटने जैसा अनुभव हो तो भी फल पका माना जाता है. जो तरबूज की खेती करते हैं वो तरबूज को देख कर भी पता लगा लेते हैं की इसका तुड़ाई का समय हो गया है. फलों को तोड़कर ठण्डे स्थान पर एकत्र करना चाहिए. दूर के बाजारों में फल को भेजते समय कई सतहों में ट्रक में रखते हैं और प्रत्येक सतह के बाद धान की पुआल रखते हैं. इससे फल आपस में रगड़कर नष्ट नहीं होते हैं और तरबूजों की ताजगी बनी रहती है. गर्मी के दिनों में सामान्य तापमान पर फल को 10 दिनों तक आसानी से रखा जा सकता है. अगर आपको किसी खेती के बारे में विस्तृत जानकारी चाहिए तो आप हमें अपने प्रश्न भी भेज सकते है.
ताइवानी तरबूज व खरबूज के फलों से किसान कमा रहे लाखों में मुनाफा

ताइवानी तरबूज व खरबूज के फलों से किसान कमा रहे लाखों में मुनाफा

आजकल ताइवानी तरबूज व खरबूज का उत्पादन करके किसान लाखों रुपये की आमदनी कर रहे हैं। बिहार राज्य के कैमूर निवासी किसान इस फसल के माध्यम से प्रत्येक चार माह के अंदर 50 से 60 लाख रुपये की आमदनी अर्जित कर लेते हैं। इसलिए अन्य किसान भी उनसे खेती के तरीके और विधियों के बारे में प्रशिक्षण लेने हेतु आ रहे हैं। खेती किसानी द्वारा भारतीय लाखों रूपये का मुनाफा अर्जित करते हैं। आपको बतादें, कि धान, गेहूं, मक्का के साथ और भी फसलों का उत्पादन कर लाखों रुपये की आय करते हैं। साथ ही, प्राकृतिक आपदाएं जैसे बारिश, बाढ़ एवं सूखा इत्यादि किसानों की फसलों में बेहद हानि पहुँचाते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, किसानों को पारंपरिक खेती से हटकर के अन्य आधुनिक एवं मुनाफादायी फसलों की तरफ रुख करने की आवश्यकता है। क्योंकि वर्तमान दौर में किसान खेती किसानी के नवीन एवं आधुनिक विधि व तरीका अपनाएँ तो किसान लाखों में मुनाफा कमा सकते हैं। इसी प्रकार की फसल के अंतर्गत ताइवानी तरबूज एवं खरबूज भी आता है। जो किसानों को कम खर्च के जरिये मोटा लाभ दिलाने में सहायक साबित होता है।

बिहार राज्य के उत्पादक लाखों में कमा रहे हैं

बिहार राज्य में कैमूर जनपद के डारीडीह निवासी मुन्ना सिंह द्वारा ताइवानी तरबूज व खरबूज का उत्पादन किया जा रहा है। आपको बतादें, कि मुन्ना सिंह 20 एकड़ भूमि पर ताईवान तरबूज व खरबूज का उत्पादन करते हैं। मुन्ना सिंह ने मीडिया के जरिये कहा है, कि 3 से 4 माह के अंतर्गत फसल से 50 से 60 लाख रुपये तक का लाभ लिया जाता है। लेकिन किसानों को काफी समझदारी व जागरुकता के साथ कार्य करने की आवश्यकता है।
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इन फलों से कितना मुनाफा और कितना खर्च आता है

जैसा कि उपरोक्त में हमने आपको बताया कि मुन्ना सिंह जी ताइवानी तरबूज और खरबूज का उत्पादन करके लाखों रुपये का मुनाफा कमा रहे हैं। अगर हम उत्पादन में किए जाने वाले खर्च के विषय में बात करें तो एक एकड़ में उत्पादन करने में लगभग एक लाख रूपये का खर्च होता है। यदि उत्पादन की बात करें तो एक एकड़ भूमि में उत्पादन से तकरीबन 3 से 4 लाख रुपये तक का मुनाफा हाँसिल हो जाता है। मुन्ना सिंह के मुताबिक, इन फलों बाजार में भाव 40 से लेकर 70 रुपये प्रतिकिलो तक रहता है।

मुन्ना सिंह काफी लोगों को रोजगार के अवसर प्रदान करते हैं

विशेष बात यह है, कि मुन्ना सिंह खेती के माध्यम से स्वयं के साथ-साथ अन्य लोगों को भी रोजगार के अवसर प्रदान कर रहे हैं। मुन्ना सिंह ने 40 लोगों को रोजगार दिया हुआ है। हालांकि इन 40 लोगों में 5 से 6 व्यक्तियों को ही निर्धारित सैलरी प्रदान की जाती है। इनके अतिरिक्त लोगों को 300 से 400 रुपये दिहाड़ी के आधार पर प्रदान किया जाता है। मुन्ना सिंह इन सबके अलावा बहुत सारे लोगों रोजगार के अवसर उपलब्ध करा रहे हैं।
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ताइवान तरबूज एवं खरबूज के फायदे

ताइवान तरबूज व खरबूज स्वास्थ्य हेतु भी अत्यंत लाभदायक माना जाता है। इन फलों का सेवन करने से रोग प्रतिरोधक क्षमता काफी बेहतर होती है। साथ ही, पाचनतंत्र भी अच्छा होता है। आजकल अधिकाँश लोगों में ब्लड प्रेशर की दिक्कत बनी रहती है, जिसको नियंत्रित करने में यह फल काफी सहायक साबित होते हैं। ताइवानी तरबूज एवं खरबूज त्वचा के लिए भी बेहद फायदेमंद होते हैं।
किसान कुलविंदर परंपरागत खेती की बजाए खरबूजे की खेती शुरू कर बना मालामाल

किसान कुलविंदर परंपरागत खेती की बजाए खरबूजे की खेती शुरू कर बना मालामाल

पंजाब के इस किसान ने अपने घर की परंपरागत खेती छोड़कर खरबूज की खेती करना शुरू किया है। आज वह लोगों के लिए एक नजीर बन चुके हैं। पंजाब के मानसा जनपद के रहने वाले एस. कुलविंदर सिंह ने अपनी बीए की पढाई समाप्त करने के उपरांत खेती करने के बारे में सोचा। उन्होंने पारंपरिक खेती को छोड़ खरबूजे की खेती चालू की और आज उनका खरबूजे का व्यवसाय एक बड़े पैमाने पर पहुंच गया है।

कृषि की तकनीक के विषय में जाना

आपको बतादें, कि शुरुआती दौर में कुलविंदर सिंह पारंपरिक फसलों का ही उत्पादन किया करते थे। परंतु, वक्त के साथ उन्होंने विगत 6-7 वर्षों से सब्जी की खेती की तरफ अपना रुख किया। इसके पश्चात उन्होंने खरबूजे की खेती आरंभ की। खरबूज की खेती के संबंध में बहुत सारी तकनीकी जानकारियां वह कृषि विश्वविद्यालय, लुधियाना के विशेषज्ञों और प्रगतिशील किसानों के जरिए से लिया करते थे।

पारंपरिक फसलों के मुकाबले अधिक फायदा मिला

कुलविंदर ने सर्वप्रथम वर्ष 2021 में अपने एक एकड़ के खेत में खरबूजे की खेती आरंभ की। तरबूज की खेती की शुरुआत में उन्हें बहुत सारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। इस फसल में कभी पीला धब्बा रोग तो कभी फल मक्खी का आकस्मिक आक्रमण हो जाता था। हालांकि, इन चुनौतियों के बावजूद भी खरबूजे की खेती से उनको पारंपरिक फसलों के मुकाबले अधिक मुनाफा मिला। इस वजह से उन्होंने खरबूजे की खेती को सुचारू रखने का सोचा। प्रथम बार के कड़वे अनुभव के उपरांत उनको दूसरी बार बेहद अच्छी सफलता अर्जित हई।

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कृषि विशेषज्ञों की सलाहनुसार ही किया उत्पादन

वह आज खरबूज की खेती आधा एकड़ से चालू कर अपने 17 एकड़ की कुल भूमि पर आधुनिक तकनीक अपनाकर खेती कर लोगों के सामने सफलता की एक कहानी रच दी। इसके चलते उन्होंने पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, लुधियाना द्वारा निर्मित पीएयू फल मक्खी जाल का उपयोग किया और पीले धब्बे की बीमारी को नियंत्रण के लिए प्रचंड सिंचाई से दूरी बनाई। वह वक्त-वक्त पर अपनी उपज को बेहतर करने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञों से सलाह भी लेते रहते हैं।

कुलविंदर खरबूज की खेती से मोटा मुनाफा उठा रहे हैं

कुलविंदर ने अपने गांव में खरबूजे की अच्छी मार्केटिंग के लिए समीपवर्ती गांवों के किसानों को भी खरबूजे की खेती करने के लिए बढ़ोत्तरी की। खरबूजे की खेती का रकबा अच्छा होने की वजह से व्यापारी सीधे उनके खेतों से फसल की खरीदारी करने लगे और सभी कृषकों को आमदनी भी अच्छी होने लगी। कुलविंदर के मुताबिक, आज वह खरबूजे की खेती से प्रति एकड़ 80 से 90 हजार रुपये की आमदनी कर रहे हैं।
युबारी किंग मेलन की कीमत जान आपके होश उड़ जाएँगे, सिर्फ अमीर लोग ही इसका सेवन करते हैं

युबारी किंग मेलन की कीमत जान आपके होश उड़ जाएँगे, सिर्फ अमीर लोग ही इसका सेवन करते हैं

युबारी किंग की खेती करना किसानों के लिए काफी फायदेमंद है। इसकी खेती वर्षों भर की जाती है। बतादें, कि इसकी पैदावार अक्टूबर से मार्च महीने के मध्य होती है। साथ ही, इसकी खेती भी अलग ढ़ंग से की जाती है। इसके खेत में भिन्न प्रकार के उर्वरकों का भी उपयोग किया जाता है। इसकी वजह से युबारी किंग काफी दिनों तक खराब नहीं होता है। खरबूज का सेवन करना हर किसी को पसंद है। इसमें पोटेशियम बेहद ही ज्यादा मात्रा में पाया जाता है। इसका सेवन करने से ब्लड प्रेशर नियंत्रण में रहता है। इसके साथ ही हार्ट से जुड़ी बहुत सारी बीमारियां भी ठीक हो जाती हैं। यही कारण है, कि बाजार में इसकी सदैव माँग बनी रहती है। अप्रैल से लेकर मई महीने तक यह बाजार में बड़ी सहजता से प्राप्त हो जाता है। ऐसे वक्त इसकी कीमत 50 से 60 रुपये किलो होता है। परंतु, आज हम खरबूज की एक ऐसी प्रजातियों के विषय में बात करेंगे, जिसकी गिनती विश्व के सर्वाधिक महंगे फ्रूट में की जाती है। इसकी कीमत हजारों में नहीं बल्कि लाखों में होती है। इतनी कीमत में आप बहुत सारी लग्जरी कार खरीद लेंगे।

इस फ्रूट का नाम युबारी कैसे पड़ा है

आपकी जानकारी के लिए बतादें, कि आज हम जिस खरबूज के विषय में बात कर रहे हैं, उसका नाम युबारी किंग है। ऐसा कहा जाता है, कि यह विश्व का सबसे महंगा फल है। यह एक प्रकार का जापानी खरबूज है। इसकी खेती सिर्फ जापान में ही की जाती है। युबारी मेलन की खेती जापान के होकैडो द्वीप पर स्थित युबारी शहर में ही की जाती है। केवल इसी के चलते इसका नाम युबारी मेलन पड़ा। जानकारों का कहना है, कि युबारी शहर का तापमान इस फल के लिए काफी अच्छा होता है।

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युबारी किंग को भारत के लगभग 30 तोले सोने की कीमत पर बेचा गया

युबारी शहर में दिन एवं रात के तापमान में काफी ज्यादा अंतराल होता है, जो कि युबारी मेलन के लिए ‘अमृत’ का कार्य करता है। ऐसा कहा जाता है, कि दिन एवं रात के तापमान में जितना अधिक अंतर होगा, खरबूज उतना ही ज्यादा मीठा और स्वादिष्ट होगा। युबारी किंग की सबसे बड़ी खास बात यह है, कि इसकी बिक्री नहीं की जाती है। दरअसल, युबारी किंग की नीलामी की जाती है। साल 2022 में एक युबारी किंग की नीलामी 20 लाख रुपये में की गई थी। साथ ही, साल 2021 में 18 लाख रुपये में इस फ्रूट की बिक्री की गई थी। इसका एक मतलब यह हुआ कि भारत में एक युबारी किंग की कीमत के अंदर 30 तोला सोना आसानी से खरीद सकते हैं।

युबारी मेलन का केवल अमीर लोग ही सेवन करते हैं

युबारी किंग एक संक्रमण रोधी फल होता है। ऐसी स्थिति में इसका सेवन करने से शारीरिक रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है। इसमें पोटेशियम के अतिरिक्त विटामिन सी,फोस्फोरस, विटामिन ए एवं कैल्शियम भी पाया जाता है। यही कारण है कि इसकी बाजार में काफी ज्यादा माँग है। परंतु, दुनिया के अमीर लोग ही इसका सेवन करते हैं। किसान युबारी मेलन से ना सिर्फ अपनी आजीविका चला सकते हैं। साथ ही, सेहत के लिए भी काफी बेहतरीन होते हैं।
क्यों है मार्च का महीना, सब्जियों का खजाना : पूरा ब्यौरा ( Vegetables to Sow in the Month of March in Hindi)

क्यों है मार्च का महीना, सब्जियों का खजाना : पूरा ब्यौरा ( Vegetables to Sow in the Month of March in Hindi)

मार्च का महीना किसानों के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है। किसान इस महीने विभिन्न प्रकार की सब्जियों की बुवाई करते है तथा धन की उच्च दर पर प्राप्ति करते हैं। इस महीने किसान तरह तरह की सब्जियों की बुवाई करते है जैसे: खीरा, ककड़ी, करेला, लौकी, तुरई, पेठा, खरबूजे, तरबूजे, भिंडी, ग्वारफल्ली आदि। मार्च के महीने में बोई जाने वाली सब्जियों की जानकारी:

खीरे की फसल कि पूर्ण जानकारी ( Cucumber crop complete information) in Hindi

खीरे की सब्जियों की टोकरी Cucumber crop खीरे की खेती के लिए खेतों में आपको क्यारियां बनानी होती है। इसकी बुवाई लाइन में ही करें।  लाइन की दूरी 1.5 मीटर रखें और पौधे की दूरी 1 मीटर। बुवाई के बाद 20 से 25 दिन बाद गुड़ाई करना चाहिए। खेत में सफाई रखें और तापमान बढ़ने पर हर सप्ताह हल्की सिंचाई करे, खेत से खरपतवार हटाते रहें।

ककड़ी की फ़सल की पूर्ण जानकारी ( Cucumber crop complete information) in Hindi

ककड़ी सब्जियां की बेल kakdi ki kheti ककड़ी की फसल आप किसी भी उपजाऊ जमीन पर उगा सकते हैं।ककड़ी की बुवाई के लिए मार्च का समय बहुत ही फायदेमंद होता है। या सिर्फ 1 एकड़ भूमि में 1 किलो ग्राम बीज के आधार पर उगना शुरू हो जाती है। खेत को आपको तीन से चार बार जोतना होता है ,उसके बाद आपको खेतों में गोबर की खाद डालनी होती है। ककड़ी की बीजों को किसान 2 मीटर चौड़ी क्यारियों में किनारे किनारे पर लगाते है। इनकी दूरी लगभग 60 सेंटीमीटर होती है।

करेले की फ़सल की पूर्ण जानकारी ( Bitter gourd crop complete information) in Hindi

karele ki kheti करेले की खेती दोमट मिट्टी में की जाती है। करेले को आप दो तरह से बो सकते हैं। पहले बीच से दूसरा पौधों द्वारा ,आपको करेले की खेती के लिए दो से तीन दिन की जरूरत पढ़ती है। इसकी बीच की दूरियों को 2.5 से लेकर 5 मीटर तक की दूरी पर रखना चाहिए।किसान करेले के बीज को बोने से पहले  लगभग 24 घंटा पानी में डूबा कर रखते हैं। ताकि उसके अंकुरण जल्दी से फूट सके। पहली जुताई किसान हल द्वारा करते हैं उसके बाद किसान तीन से चार बार हैरो या कल्टीवेटर द्वारा खेत की जुताई करते हैं।

लौकी की फ़सल की पूर्ण जानकारी ( Gourd crop complete information) in Hindi

lauki ki kheti लौकी की खेती आप हर तरह की मिट्टी में कर सकते हैं लेकिन दोमट मिट्टी इसके लिए बहुत ही उपयोगी है। लौकी की खेती करने से पहले आपको इसके बीज को 24 घंटे पानी में डूबा कर रखना है अंकुरण आने तक, एक हेक्टेयर में आपको 4.5 किलोग्राम बीज की आवश्यकता पड़ती है।

तुरई फसल की पूर्ण जानकारी ( Full details of turai crop) in Hindi

turai ki fasal तोरई की फसल को हल्की दोमट मिट्टी में लगाना चाहिए। किसानों द्वारा प्राप्त जानकारियों से यह पता चला है।कि नदियों के किनारे वाली भूमि पर खेती करना बहुत ही अच्छा होता है। खेती करने से पहले जमीन को अच्छे से जोत लेना चाहिए। पहले हल द्वारा उसके बाद दो से तीन बार हैरो या कल्टीवेटर  से जुताई करना चाहिए। एक हेक्टेयर भूमि में कम से कम 4 से 5 किलोग्राम बीज की आवश्यकता होती है।

पेठा फसल की पूर्ण जानकारी( Complete information about Petha crop)

पेठा सब्जियों की बेल Petha crop पेठा यानी कद्दू को दोमट मिट्टी में बोना बहुत ही  फायदेमंद होता है। पेठा की खेती के लिए दो से तीन बार कल्टीवेटर से जुताई करें। मिट्टियों को भुरभुरा बनाएं तथा खेतों की अच्छे ढंग से जुताई करें। एक हेक्टेयर में लगभग 7 से 8 किलोग्राम बीज की आवश्यकता पड़ती है। ये भी पढ़े: छत पर उगाएं सेहतमंद सब्जियां

खरबूजे की फसल (melon crop) in Hindi

melon crop मार्च के महीने में खरबूजा बहुत ही फायदेमंद तथा पसंदीदा फलों में से एक है। किसान इसकी खेती नदी तट पर करते हैं। खेती करने से पहले बालू में एक थाला बनाते हैं और बीज बोने से थोड़ी देर पहले खेत को अपने हल के जरिए जोतते हैं। खरबूजे की फसल बोने के बाद इसकी सिंचाई को कम से कम 2 या 3 दिन बाद से करना शुरू कर देना चाहिए।

तरबूजे की फसल ( watermelon crop) in Hindi

watermelon crop गर्मी में तरबूज को बहुत ही शौक से खाया जाता है।तरबूज में पानी की मात्रा बहुत ही ज्यादा होती है, इसको खाने से आप ताजगी का अनुभव करते हैं। इस फसल में लागत बहुत कम लगती है लेकिन मुनाफा उससे कई गुना होता है। तरबूज की फसल बहुत ही कम समय में उग जाती है, जिससे किसानों को काफी मुनाफा भी मिलता है। लेकिन इस बात का ध्यान रखें ,कि तरबूज में कीट और रोग का प्रकोप काफी बड़ा रहता है। किसानों को चाहिए कि वैज्ञानिकों के मुताबिक तरबूज की फसलों की देखरेख करें। तरबूज की फसलें 75 से 90 दिनों के अंदर पूर्ण रुप से तैयार हो जाती है।

भिंडी की फसल( okra harvest) in Hindi

भिंडी सब्जियां bhindi ki kheti किसान भिंडी की फसल फरवरी से मार्च के दरमियान जोतना शुरू कर देते हैं। भिंडी की खेती हर तरह की मिट्टी में की जाती है। खेती से पूर्व दो तीन बार खेतों की जुताई करें। जिससे मिट्टियों में भुरभुरा पन आ जाए, जमीन को समतल कर दे। खेतों में लगभग 15 से 20 दिन पहले इनकी निराई-गुड़ाई करें। खरपतवार नियंत्रण रहे इसके लिए कई प्रकार का रासायनिक प्रयोग भी किसान करते हैं।

ग्वार फली की फसल( guar pod crop) in Hindi

गुआर सब्जियों की फसल guar ki kheti ग्वार फली किसानों कि आय का बहुत महत्वपूर्ण साधन होता है। किसान ग्वार फली का इस्तेमाल हरी खाद ,हरा चारा ,हरी फली , दानों आदि के लिए करते है। ग्वार फली में प्रोटीन तथा फाइबर का बहुत ही अच्छा स्त्रोत होता है। इनके अच्छे स्त्रोत के कारण इनको पशुओं के चारे के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है। जिससे पशुओं को विभिन्न प्रकार के प्रोटीन की प्राप्ति हो सके। किसान ग्वार फली की खेती दो मौसम में करते हैं पहला बहुत गर्मी के मौसम में तथा दूसरा  बारिश के मौसम में। ग्वार फली की बुवाई किसान मार्च के महीने में 15 से लेकर 25 तारीख के बीच खेती करना शुरू कर देते हैं। ग्वार फली की फसलें 60 से 90 दिन के अंदर पूर्ण रूप से तैयार हो जाती है तथा यहां कटाई के लायक़ हो जाती हैं। ग्वार फली में बहुत तरह के पौष्टिक तत्व भी मौजूद होते हैं इनका उपयोग विभिन्न प्रकार की सब्जियों को बनाने तथा सलातो के रूप में किया जाता है। हम उम्मीद करते हैं कि आपको हमारी इस पोस्ट द्वारा मार्च के महीने में उगाई जाने वाली सब्जियों की पूर्ण जानकारी पसंद आई होगी। आपने इन सब्जियों के विभिन्न प्रकार के लाभ को जान लिया होगा। यदि आप हमारी दी गई जानकारी से संतुष्ट हैं तो आप हमारी इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा सोशल मीडिया पर शेयर करें धन्यवाद।
कम पैसे में मोटी कमाई, जानें खरबूजे की खेती करने का सही तरीका

कम पैसे में मोटी कमाई, जानें खरबूजे की खेती करने का सही तरीका

गर्मियों के सीजन में सबसे ज्यादा पसंद किये जाने फलों में से एक खरबूजा भी है. कई तरह के रोगों से बचाने वाले खरबूजे की खेती से किसान मोटी कमाई कर सकते हैं. पंजाब, यूपी, हरियाणा, महाराष्ट्र, एमपी और राजस्थान जैसे कई राज्यों में खरबूजे की खेती की जाती है. लेकिन इन राज्यों में खरबूजे का सबसे ज्यादा उत्पादन किया जाता है. अगर खरबूजे की खेती करने की तकनीक आधुनिक हो और बड़े पैमाने पर हो, तो किसान इससे अच्छी खासी मोटी कमाई कर सकते हैं. हालांकि केंद्र और राज्य दोनों ही सरकार किसानों को कृषि कार्यों में खेती और कृषि यंत्रों पर सब्सिडी देती है. अब ज्यादातर लोग नौकरी चाकरी छोड़कर कहती की ओर रुख कर रहे हैं. ऐसे में खरबूजे की खेती करना उनके लिए काफी फायदेमंद हो सकती है.

खरबूजे की खेती करने का सही तरीका

रबी सीजन के बाद जायद सीजन में खरबूजे की खेती बड़े पैमाने में की जाती है. क्योंकि रबी सीजन के बाद फसलें काट दी जाती हैं, और खेत खाली हो जाते हैं. जिसमें खरबूजे की बागवानी करके लाखों कमाए जा सकते हैं. गर्मियों में खरबूज खूब बिकते हैं, ऐसे में खाली पड़ी जमीन का भी इस्तेमाल हो जाता है. 

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गर्मी के मौसम में खरबूजे की खेती लगभग एक हेक्टेयर के खेत में करीब दो सौ से ढ़ाई सौ क्विंटल का उत्पादन मिल सकता है. जिससे किसान इसकी एक बार की फसल से चार से पांच लाख का मुनाफा कमा सकते हैं. इतना ही नहीं सरकार की तरफ से खरबूजे के बीज पर 35 फीसद अनुदान दिया जाता है. अगर आप भी खरबूजे की खेती करके मोटी कमाई करना चाहते हैं, तो पहले इससे जुड़ी सभी जानकारी को जान लें, जो आपके काम आ सकती है.

जानिए खरबूजे का इस्तेमाल

खरबूजे को कद्दूवर्गीय फसल कहा जाता है. इसे नगदी फसल के रूप में उगाया जाता है. ये बेल के रूप में विकास करता है. खरबूजा खाने में मीठा और स्वादिष्ट होता है. इसे सलाज या इसका जूस भी पिया जा सकता है. गर्मियों में इस फल को खाने से हाइड्रेशन मिलता है. खरबूजे में 90 फीसद पानी होता है और 9 फीसद कार्बोहाइड्रेट होता है.

पौष्टिक तत्वों से भरपूर खरबूजे के बीज

खरबूजे के बीज कई तरह के पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं. खरबूजे में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, फैट, फाइबर अच्छी मात्रा में मौजूद होते हैं. इन पोषक तत्वों के अलावा खरबूजे के बीज में और भी पोषक तत्व होते हैं, जिनमें कैल्शियम, जिंक, आयरन, मैग्नीशियम और विटामिन ए, बी भी होता है. 

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जानिए खरबूजे की किस्में

पूसा शरबती

इस किस्म के खरबूजे के छिलके का रंग गुलाबी होता है. इसकी एक बेल पर चार से पांच फल लगते हैं. इसका छिलका जालीदार और गूदा मोटा होता है.

पंजाब सुनहरी

इस तरह के किस्म के खरबूजे की बेल की लम्बाई ज्यादा होती है. यह पकने में हल्के पीले रंग का नजर आता है. इसके एक फल का वजन आधे किलो से ज्यादा होता है.

पूसा मधुरस

इस किस्म के खरबूजे गोल और गहरे ग्रे रंग के होते हैं. इसके एक फल का वजन 600 ग्राम से ज्यादा होता है. एक बेल पर कम से कम 5 से 6 खरबूजे निकलते हैं.

आईवीएमएम 3

इस किस्म के खरबूजे धारीदार और पकने के पीले रंग के हो जाते हैं. यह काफी मीठे भी होते हैं.

हरा मधु

  • इस किस्म के खरबूजे का भार कम से कम एक किलो तक होता है.  यह काफी मीठा और मोटे गूदेदार होता है.
  • वैसे देखा जाए तो खरबूजे की कई तरह की किस्में होती हैं जो ज्यादा उत्पादन देने में सक्षम होती हैं.

खेती के लिए मिट्टी, समय और मौसम

अगर आप खरबूजे की खेती करना चाहते हैं, तो इसके लिए हल्की रेतीली मिट्टी अच्छी होती है. इसके अलावा इसकी जमीन अच्छी जल निकास वाली होनी चाहिए. जायद के सीजन में खरबूजे की फसल सबसे अच्छो होती है. इस दौरान पौधों को पर्याप्त मात्रा उपयुक्त जलवायु मिल जाती है. खरबूजे के बीजों को अंकुरित होने के लिए शुरुआत 25 से 30 डिग्री टेम्प्रेचर की जरूरत होती है. जानकारी के लिए बता दें कि, खरबूजे के पौधे को बढ़ने के लिए 30 से 45 डिग्री टेम्प्रेचर की जरूरत होती है. 

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खेती के लिए कैसी हो तैयारी?

खरबूजे की खेती करने से पहले खेत की जुताई जरूरी होती है. जिसके बाद खेत को सींचा जाता है. जिसके कुछ दिनों के बाद जमीन को समतल करने के लिए पाटा किया जाता है. जिसके बाद बीजों की बुवाई करने के लिए क्यारियां बना ली जाती हैं. फिर इनमें जैविक और रसायनिक खाद का इस्तेमाल अच्छे से किया जाता है.

कितनी हो उर्वरक की मात्रा?

शुरुआत में 2 सौ से ढ़ाई सौ क्विंटल पुरानी गोबर की खाद को प्रति हेक्टेयर के किसाब से खेत में डाला जाना चाहिए. वहीं रासायनिक खाद में 60 किलो फास्फोरस, 40 किलो पोटाश और 30 किलो नाइट्रोजन की मात्रा का इस्तेमाल प्रति हेक्टेयर नालियों और क्यारियों मैं करना होता है. जब भी पौधे में फूल आने लगे तो, उस समय करीब 20 किलो यूरिया का इस्तेमाल किया जाना चाहिए.

क्या है बुवाई का सही तरीका

खरबूजे की खेती में बीजों की रुपाई और पौधा दोनों का इस्तेमाल किया जा सकता है. अगर खेत एक हेक्टेयर है तो उसके लिए के से डेढ़ किलो बीजों की जरूरत होती है. शुरुआत में बीजों को बिमारियों का खतरा कम होता है. इन्हें क्यारियों या नालियों किसी में भी बो सकते हैं. बीजों की बुवाई करते वक्त दो फिट की दूरी रखें. उसके बाद तलक तकनीक से खेत की सिंचाई करें. फरवरी के महीने में खरबूजे के बीजों की रुपाई की जाती है. हफ्ते में दो सिंचाई और बारिश के सीजन में जरूरत के हिसाब से सिंचाई की जरूरत खरबूजे की खेती में होती है.

कैसे करें तुड़ाई?

खरबूजे की तुड़ाई इस बात पर भी निर्भर करती है, कि उसकी किस्म कौन सी है. खरबूजे के फल बुवाई के ढ़ाई से तीन महीने बाद तैयार हो जाते हैं. अगर खरबूजे का फल 90 फीसद पक गया है तो उसे तुरंत तोड़ लें. 

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खेती पर कितना आएगा खर्च?

एक हेक्टेयर खरबूजे की खेती पर कितना खर्च होगा, यह जान लेना वभी जरूरी है.

  • खेती का खर्च एक हजार रुपये.
  • दो से तीन किलो बीज का खर्च करीब तीन हजार रुपये.
  • खेत की तैयारी, रोपाई और खाद का खर्च करीब छह हजार रुपये.
  • मजदूरी और खरबूजा तुड़ाई का खर्च करीब तीन हजार रुपये.
  • कीटनाशक का खर्च करीब 13 से 15 हजार रुपये.

क्या मिलेगा फायदा?

एक हेक्टेयर के खेत में खेती करने से करीब दो सौ से ढ़ाई सौ क्विंटल का उत्पादन होता है.बाजार में खरबूजा 15 से 30 रुपये प्रति किलो बिकता है. इसकी फसल से एक बार में करीब ढ़ाई से चार लाख तक कमाई की जा सकती है. इसके अलावा इसके बीजों को बेचकर भी कमाई की जा सकती है. करीब 6 क्विंटल बीजों का उत्पादन 15 हजार रुपये क्विंटल तक बिकता है. इसकी आय में खर्चे को हटाने के बाद भी अच्छा खासा मुनाफा होता है.

विश्व के इन सबसे महंगे फलों की कीमत जानकर होश उड़ जाएंगे

विश्व के इन सबसे महंगे फलों की कीमत जानकर होश उड़ जाएंगे

आज हम दुनिया के सबसे महंगे फलों के बारे में चर्चा करने जा रहे हैं। इनमें शामिल युबारी मेलन के संबंध में कहा जाता है, कि यह दुनिया का सर्वाधिक महंगा फल है। बतादें कि युबारी मेलन यह खरबूजे की एक प्रजाति है। दरअसल, साल 2014 में एक जोड़े युबारी मेलन की नीलामी 26000 डॉलर मतलब कि 16,64, 533 रुपये में नीलामी हुई थी। वैसे तो केला अमरूद और आम जैसे फलों की खेती प्रत्येक देश में की जाती है। यदि इनकी कीमतों को देखा जाए तो यह लगभग समस्त देशों में तकरीबन एक जैसी ही रहती हैं। परंतु, कुछ फल ऐसे भी हैं, जिनकी खेती समस्त देशों में नहीं की जाती है। किसी विशेष प्रकार की मृदा औऱ जलवायु में ही उन फलों की खेती की जा सकती है। विशेष बात यह है, कि यह फल लाखों रुपये में बेचे जाते हैं। ऐसे में किसान भाई इनका उत्पादन करके बेहतरीन आमदनी अर्जित कर सकते हैं। साथ ही, जल्दी अमीर भी हो सकते हैं। अब आज हम आपको दुनिया के कुछ इसी प्रकार के अजूबे फलों के विषय में जानकारी देंगे। जिनके विषय में जानकर आप हैरान हो जाएंगे।

लॉस्ट गार्डेन ऑफ हेलिगन पाइनएप्पल्स

लॉस्ट गार्डेन ऑफ हेलिगन पाइनएप्पल्स अनानास की एक प्रजाति है। कहा जाता है, कि यह विश्व का सबसे महंगा अनानास है। एक लॉस्ट गार्डेन ऑफ हेलिगन पाइनएप्पल्स की कीमत एक लाख रुपये के आसपास होती है। इसकी खेती काफी बेहतरीन तरीके से की जाती है। जानकारी के लिए बतादें कि उर्वरक के तौर पर पुआल और घोड़े के लीद का इस्तेमाल किया जाता है।

युबारी मेलन

कहा जाता है, कि यह विश्व का सबसे महंगा फल है। यह खरबूजे की एक प्रजाति है। साल 2014 में एक जोड़े युबारी मेलन को 26000 डॉलर यानि 16,64, 533 रुपये में बेका गया था। विशेष बात यह है, कि इस खरबूजे का उत्पादन साप्पोरो के पास होक्काइडो द्वीप में किया जाता है। यह एक हाइब्रिड खरबूज है। जापान में लोग युबारी मेलन को उपहार स्वरुप भी देते हैं। यह भी पढ़ें: कम पैसे में मोटी कमाई, जानें खरबूजे की खेती करने का सही तरीका

रूबी रोमन ग्रेप्स

रूबी रोमन ग्रेप्स की खेती की शुरुआत 2008 में हुई थी। जापान के इशिकावा प्रीफेक्चर में किसानों ने इसकी खेती चालू की थी। परंतु, फिलहाल जापान के दूसरे भागों में भी किसान रूबी रोमन ग्रेप्स अंगूर की खेती कर रहे हैं। कहा जाता है, कि यह विश्व का सबसे महंगा अंगूर है। केवल एक गुच्छे की कीमत 50 हजार रुपये से भी ज्यादा होती है। साल 2016 में 9 लाख रूपए में इसके एक गुच्छे की नीलामी हुई थी।

टाइयो नो टमैगो

टाइयो नो टमैगो आम की एक प्रजाति है। जापान के मियाजाकी शहर में किसानों ने सर्वप्रथम इसकी खेती करनी चालू की थी। परंतु, फिलहाल भारत, फिलीपींस, बांग्लादेश और थाईलैंड में भी इसकी खेती की जा रही है। इसके एक फल का वजन 350 ग्राम तक होता है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में एक किलो टाइयो नो टमैगो की कीमत 2 लाख 70 हजार रुपये है। इस प्रजाति के आम में 15 प्रतिशत तक चीनी होती है।
बेमौसम बारिश का असर आम लोगों को 'मैंगो पार्टी' से दूर कर सकता है

बेमौसम बारिश का असर आम लोगों को 'मैंगो पार्टी' से दूर कर सकता है

मई का महीना चालू हो गया है। लेकिन गर्मी का कोई ज्यादा प्रभाव देखने को नहीं मिल रहा है। इसके पीछे की वजह रुक-रुक कर होती बारिश है। अब ऐसी स्थिति में लीची, तरबूज, खरबूज एवं आम जैसे गर्मियों के फलों पर इसका सीधा प्रभाव पड़ेगा। इनका इतना भाव बढ़ जाऐगा जो इन्हें आम आदमी के बजट से बाहर कर देगा। गर्मियों का असली आनंद तो तब ही आता है, जब पीले-पीले आम व लाल-लाल तरबूज आपकी थाली में मौजूद हों। साथ ही, परिवार के सभी जन एक साथ बैठकर ‘मैंगो पार्टी’ कर खूब आनंद करें। वहीं, यदि आप कभी जामा मस्जिद की तरफ चले गए तो ‘मोहब्बत का शरबत’ का लुफ्त उठाकर आऐं। परंतु, इस वर्ष क्या यह सब कुछ आम आदमी की पहुंच से परेह हो जाएगा। आजकल मई माह में हो रही बेमौसम वर्षा से तो इसी का भय सता रहा है। मई का माह शुरू होने से भी पूर्व देशभर में रुक-रुक बरसात हो रही है। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार, आगामी दिनों में भी बारिश होने की आशंका है। ऐसी स्थिति में इसका प्रभाव फल और सब्जी की फसलों पर दिखना आम बात है, जो कि आगामी दिनों में इनकी कीमतों को बढ़ा सकती है। यह भी पढ़ें : मिर्जा गालिब से लेकर बॉलीवुड के कई अभिनेता इस 200 साल पुराने दशहरी आम के पेड़ को देखने पहुँचे हैं

इन फलों पर पड़ेगा बेमौसम बारिश का प्रभाव

खरबूज, लीची, आम और तरबूज गर्मियों के ऐसे फल हैं, जिनकी जितनी सिंचाई की आवश्यकता होती है, उतनी ही गर्मी की भी। उत्तर भारत के विभिन्न इलाके विशेषकर के गंगा एवं यमुना के तटीय क्षेत्र इन फलों की खेती के लिए सर्वाधिक अच्छे माने जाते हैं। यहां पर वर्षा होने की वजह से तापमान में नरमी आती है। इसके चलते इनकी मिठास में भी कुछ कमी रह सकती है। केवल यही नहीं मई माह तक बाजार में इन फलों का आना चालू जाता है। उत्तर प्रदेश के मेरठ का रटौल, महिलाबाद का दशहरी आम तो वहीं बिहार के मुज्जफरपुर की लीचियाँ बाजार पहुँचने लगती हैं। वर्तमान में यह बाजार में थोड़ी कम मात्रा में पहुँच पा रही है। इतना ही नहीं इनका स्वाद तक लुप्त हो चुका है। तो उधर इनके भावों में आसमानी उछाल देखने को मिल रहा है। फल विक्रेताओं के बताने के अनुसार, यदि अगर इसी प्रकार से गर्मी का प्रभाव कम रहा तो अच्छी गुणवत्ता में इन फलों को बाजार तक पहुँचाने में अधिक विलंभ होगा, जो इनकी कीमतों को भी बढ़ा सकती है।

फलों के साथ सब्जियों को भी काफी हानि

बारिश का प्रभाव फलों पर होने के साथ-साथ आम लोगों की थाली में रहने वाली लौकी, भिंडी और प्याज जैसी सब्जियों पर भी देखने को मिल रहा है। महाराष्ट्र एवं कर्नाटक की भाँति प्याज के बड़े उत्पादक प्रदेशों में इस बारिश के चलते खेतों में जलभराव हो गया है। इसकी वजह से प्याज की फसल चौपट हो चुकी है। केवल इतना ही नहीं भिंडी, लौकी और टमाटर पर भी इसका अच्छा खासा प्रभाव देखने को मिला है। किसानों ने भी सरकार से सहायता करने की माँग भी की है।
युवा किसान ने मिसाल पेश की सिर्फ 2 महीने में ही इस फसल से कमाए लाखों

युवा किसान ने मिसाल पेश की सिर्फ 2 महीने में ही इस फसल से कमाए लाखों

आजकल किसान आधुनिकता और मशीनीकरण की तरफ अग्रसर होते नजर आ रहे हैं। ऐसा ही कारनामा कर दिखाया है 27 वर्षीय युवा किसान जिसका नाम शिव शर्मा है। जानकारी के लिए बतादें गुर कि वह अशोकनगर जनपद में मौजूद गांव मढ़खेड़ा का मूल निवासी है। उसने तीन वर्ष पूर्व एक किसान से बीज खरीदकर खरबूजे की खेती करना शुरू किया था। मध्य प्रदेश के एक युवा किसान ने अन्य किसानों के समक्ष एक मिसाल पेश की है। इसने खरबूजे की खेती से केवल 2 माह के अंदर ही लाखों रुपये की आमदनी कर ली है। इसके इस हुनर एवं काबिलियत से आसपास के किसान भाई बेहद प्रभावित हुए हैं। ऐसी स्थिति में बाकी युवक भी इस किसान से खरबूजे की खेती करने का तरीका और गुर सीख रहे हैं। विशेष बात यह है, कि इस किसान ने 45 से ज्यादा लोगों को रोजगार भी प्रदान कर रखा है। दरअसल, जब इस युवा किसान ने खरबूजे की खेती चालू की थी, तब लोग काफी मजाक उड़ाया करते थे। परंतु, फिलहाल आमदनी होनी शुरू हुई तो सभी लोग चुप हो चुके हैं। दैनिक भास्कर की खबरों के अनुसार, 27 वर्षीय इस युवा किसान का नाम शिव शर्मा है। वह अशोकनगर जनपद के अंतर्गत गांव मढ़खेड़ा का मूल निवासी है। उसने तीन वर्ष पूर्व एक किसान से बीज लेकर खरबूजे की खेती चालू की थी। देखते ही देखते वह खरबूजे की खेती में निपुड़ और सशक्त खिलाड़ी बन गया है। उसने प्रारंभ में 35 बीघे में खरबूज की खेती की थी। इससे उसको लाखों रुपये की आमदनी हुई थी। इससे शिव शर्मा का और ज्यादा आत्मविश्वास बढ़ा। अगले वर्ष शिव शर्मा ने 50 बीघे भूमि में खरबूज की खेती शुरू की, जिससे उनको काफी ज्यादा आमदनी हुई।

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बाजार में कितने रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा खरबूजे का बीज

यही कारण है, कि इस वर्ष शिव शर्मा ने 120 बीघे जमीन में खरबूजे की खेती की है। इससे उन्होंने मात्र 2 माह के अंदर ही लागत को हटाकर 18 लाख रुपये का फायदा हुआ है। उनके खेत में आज भी 50 मजदूर प्रतिदिन कार्य करते हैं। विशेष बात यह है, कि शिव शर्मा खरबूज के बीज का व्यवसाय करता है। उसने बताया है, कि एक बीघे से लगभग एक क्विटंल खरबूज के बीज प्राप्त हो जाते हैं। बीज के अतिरिक्त खरबूज की बिक्री भी होती है। उसने कहा है, कि खरबूज से बीज निकालने के उपरांत फल को फेंक दिया जाता है। अभी बाजार में 25 हजार रुपये प्रति क्विंटल खरबूजे का बीज बेचा जा रहा है।

हाथरस खरबूजे से बीज निकालने वाला सर्वोच्च केंद्र है

शिव शर्मा के मुताबिक, 24 वर्ष की आयु में उन्होंने खरबूजे की खेती चालू की थी। तब दोस्तों ने उसका काफी मजाक उड़ाया था। हालांकि, उसने हिम्मत नहीं हारी एवं अपना कार्य जारी रखा था। बतादें, कि उत्तर प्रदेश के हाथरस में खरबूजे से बीज निकालने का सर्वोच्च केंद्र है। परंतु, अशोकनगर से भी हाथरस खरबूजे के बीज की आपूर्ति होती है। शिव शर्मा का कहना है, कि अभी उसके यहां प्रतिदिन 200 से 250 लोग खरबूज खरीदने हेतु आते हैं।