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फसल की कटाई के आधुनिक यंत्र

फसल की कटाई के आधुनिक यंत्र

जैसे जैसे किसान की खेती की जोत छोटी होती जा रही है उसी तरह से आजकल नए नए कृषि यन्त्र भी बाजार में आ रहे हैं. अभी रबी की फसल खेतों में शान से लहलहा रही है, किसान अपनी फसल के रंग और आकार को देख कर ही फसल के उत्पादन का अंदाज लगा लेता है. अभी किसान की रबी की फसल की कटाई मार्च से शुरू हो जाएगी और जैसा की सभी की फसल की कटाई इसी समय होती है तो जाहिर सी बात है मजदूरों की कमी किसान को होती है. कहते हैं न कि "आवश्यकता अविष्कार कि जननी है" तो किसानों कि इसी आवश्यकता को पूरा करने के लिए हमारे कृषि वैज्ञानिक रात दिन मेहनत कर रहे हैं. जब किसान अपने पूरे खेत कि जुताई बुबाई बैलों से नहीं कर पाता था तो ट्रेक्टर आया और जब खेत में फसल की कटाई समय से नहीं हो रही थी तो उसके लिए फसल कटाई के लिए मशीन भी बाजार में आ गई. आज हम इन्हीं मशीनों के बारे में चर्चा करेंगें:

रीपर बाइंडर (Reaper Binder):

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रीपर बाइंडर मशीन इंजन द्वारा चलती है और इसको चलाना भी आसान होता है. इससे किसान कम डीजल खर्चा में ज्यादा काम कर सकता है तथा इससे उसको भूसा भी पूरा मिल जाता है तथा किसान को फसल को इकठ्ठा करने में भी दिक्कत नहीं होती है क्यों की इसको रीपर काटने के साथ साथ उसकी पूरै भी बना देती है. 

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इससे किसानों को मजदूरों की समस्या से कुछ हद तक छुटकारा मिल जाता है. आजकल खेती में कुशल मजदूरों की बहुत ही समस्या है. कई बार किसान की पाकी हुई फसल मजदूर न मिलने की वजह से काफी नुकसान होता है. इस नुकसान से बचने के लिए ये छोटी कटाई मशीन बहुत ही काम की मशीन है.

हाथ का रीपर:

हाथ से काटने वाला रीपर भी आता है लेकिन वो फसल के पूरै नहीं बनता है वो एक साइड में कटी हुई फसल को डालता जाता है. बाद में उसे मजदूरों की सहायता से पूरै बना दिया जाता है. कंबाइन हार्वेस्टर मशीन: यह मशीन बहुत महँगी होती है तथा ये बड़े किसानों के लिए उपयोगी है. छोटे किसान इसको किराये पर लेकर भी अपनी फसल की कटाई करा सकते हैं. इससे कम समय में ज्यादा काम किया जा सकता है. ये फसल को ज्यादा ऊपर से काटती है जिससे बाद में इसके तूरे से भूसा बनाया जा सकता है. इसमें किसान अपनी फसल को समय से लाकर बाजार में ले जा सकता है. इसमें कम समय में किसान की फसल भूसे से अलग हो जाती है. कंबाइन हार्वेस्टर मशीन की ज्यादा जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें.

स्ट्रा-रीपर (Straw Reaper) या भूसा बनाने वाली मशीन:

स्ट्रा-रीपर या आप कह सकते हैं की भूसा बनाने वाली मशीन छोटे और बड़े दोनों किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. जो किसान कंबाइन हार्वेस्टर मशीन से खेत को भूसा न बनने की वजह से कटवाने से डरते थे अब वो भी कंबाइन हार्वेस्टर से अपनी फसल कटवाने लगे हैं. क्यों की अब स्ट्रा-रीपर से भूसा बनाना आसान हो गया है. चूँकि किसान पशु भी पालते हैं और इसके लिए उन्हें भूसा भी चाहिए. तो भूसा की जरूरत रखने वाले किसानों के लिये तो हाथ से फसल कटवाना मजबूरी भी थी लेकिन जो किसान पशु नहीं पालते हैं,  वो कंबाइन मशीन से फसल कटवाने के इच्छुक भी थे लेकिन वो परेशान भी भी कम नहीं थे. क्योंकि कम्बाइन मशीन 30 से 35 सेंटीमीटर ऊपर से ही गेहूं की बालियों को काटती है इसलिए मशीन से कटवाने पर अनाज के नुकसान होने का खतरा रहता है. कम्बाइन मशीन नीचे गिरी हुई बालियों को उठा नहीं पाती है. ऐसे में भूसा बनाने वाली मशीन लोगों के लिये वरदान साबित हो रही है. इससे फसल कटवाने पर किसानों कई प्रकार का फायदा होता है. पहली बात तो ये कि उन्हें गेहूं के दानों के साथ साथ भूसा भी मिल जाता है. इससे पशुओं के लिये चारे की समस्या खड़ी नहीं होती. दूसरा जो दाना मशीन से खेत में रह जाता है उसको ये मशीन उठा लेती है. जिसको की किसान अपने पशु के दाने के रूप में प्रयोग कर लेता है क्योंकि इसमें मिटटी आने की सम्भावना रहती है.

कटर थ्रेसर (Cutter Thresher):

अगर हम कटर थ्रेसर की बात करें तो इसने भी किसानों की जिंदगी बहुत आसान कर दी है. जब किसान हाथ से फसल कटवाते थे तो अनाज को अलग करने के लिए फसल की मिडाई करने के लिए बैल या ट्रेक्टर चला के अनाज को अलग किया जाता था. उसके बाद थ्रेसर से करने लगे. 40 क्विंटल अनाज निकालने में 15 घंटे का समय लग जाता था जो की एक बड़े किसान के लिए बहुत ही मेहनत का काम था. उसके बाद कटर थ्रेसर आया जो की बहुत ही जल्दी अनाज और भूसा अलग कर देता है. आज के समय में कटर थ्रेसर बहुत ही उपयोगी मशीनरी बनी हुई है। 

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चारा काटने की मशीन:

पशुपालन और खेती दोनों एक दूसरे के पूरक हैं. किसान खेती के साथ साथ पशु पालन भी करता है. खेती से उसके पशुओं का चारा भी आ जाता है और उसके लिए पैसे कमाने का दूसरा जरिया भी बन जाता है. पुराने समय में चारा काटने के लिए किसान को बहुत मेहनत करनी पड़ती थी. कम से कम 3  आदमी चारा काटने की मशीन को चलाने के लिए चाहिए होते थे. लेकिन अब किसान ने भी इसका समाधान ढूंढ लिया और आज एक ही आदमी 10 - 15 पशुओं का चारा काट देता है वो भी 10 से 15 मिनट में.

चारा काटने की मशीन कैसे काम करती है:

चारा काटने की मशीन को दो आदमी उसके चक्र को हत्था के द्वारा घुमाते हैं तथा एक उसमें चारा डालने का काम करता है. यह बहुत ही मेहनत वाला काम है. इसमें किसान को बहुत समय लगता था और मेहनत भी बहुत होती थी.

इंजन से चलाने वाली मशीन:

इस मशीन को इंजन या बिजली से भी चलाया जा सकता है. इससे सिर्फ एक आदमी की आवश्यकता होती है वही आदमी अकेला ४ आदमी के बराबर काम कर लेता है. नीचे दिए वीडियो में देखें अंत में  हम कह सकते हैं की "Technology is a great servant, but a bad master." मशीनीकरण को हम अपने भले के लिए प्रयोग करें तो अच्छा है अन्यथा इसके दुष्परिणाम भी हम को ही झेलने पड़ते हैं. जैसे की खड़ी फसल को कटवाने के अपने फायदे है तो कुछ नुकसान भी हैं. अगर हम फसल के अवशेष का भूसा बनवा लेते हैं तो ये हमारे लिए लाभदायक है और अगर हम इसके अवशेषों को जलाते हैं तो ये प्रक्रिया हमारी बहुत ही उपजाऊ जमीन को भी बंजर बनाने में बहुत ज्यादा समय नहीं लेती है. आप अपने कमेंट करके हमें जरूर बताएं, अगर आपको किसी अन्य विषय पर भी जानकारी चाहिए. आप हमारे WhatsApp  ग्रुप में भी जुड़ सकते हैं. कृपया हमें linkedin , youtube , twitter पर भी आप फॉलो कर सकते हैं.

भूमि की तैयारी के लिए आधुनिक कृषि यंत्र पावर हैरो (Power Harrow)

भूमि की तैयारी के लिए आधुनिक कृषि यंत्र पावर हैरो (Power Harrow)

किसान भाइयों को एक फसल पकने के बाद दूसरी फसल के लिए खेत को तैयार करना होता है। उस समय खेत की मिट्टी सख्त हो जाती है और पूर्व फसल के अंश रह जाते हैं और खरपतवार भी होता है। इन सबको कम्पोस्ट खाद बनाने और मिट्टी पलटने के लिए कृषि यंत्र हैरो(Harrow) का  इस्तेमाल किया जाता है। ट्रैक्टर चालित यंत्र हैरो खेत की मिट्टी को इस तरह से पलटता है कि खेत में मौजूद कूड़ा-कचड़ा व हरियाली जमीन में दब जाती है। जो जैविक खाद में परिवर्तित हो जाती हैं। इससे खेत को उपजाऊ बनाने में मदद मिलती है। आइये जानते हैं कि हैरो किस तरह से खेत को तैयार करने का काम करना है और खेती के लिए कितना उपयोगी है।

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नई फसल के लिए खेत को तैयार करने के लिए पहले बैलों के बीचे गहरी जुताई करने वाले हल का प्रयोग किया जाता था। इससे खेत की कई बार जुताई करनी होती थी। उसकी खरपतवार हटाने के लिए मजदूरों को लगाना होता था और उसके बाद खेत की मिट्टी को महीन करने के लिए यानी ढेले फोड़ने के लिए पाटा चलाना पड़ता था। इसमे किसान भाइयों का समय अधिक लगता था और मेहनत भी अधिक करनी होती थी। खास बात यह है कि फसल कटाई के बाद अप्रैल,मई व जून की भीषण गर्मी की प्रचण्ड धूप में किसान भाइयों को पसीना बहाना पड़ता था। लेकिन अब हैरो नामक कृषि यंत्र ने किसानों की इन सारी समस्याओं का हल निकाल लिया है। कृषि यंत्र हैरो

कहां-कहां काम कर सकता है हैरो(Harrow)

जुताई के अन्य यंत्र जहां सामान्य एवं मुलायम मिट्टी वाले खेतों को तैयार करने के काम में आते हैं, वहीं हैरो सख्त जमीन व पथरीली जमीन, अधिक खरपतवार वाली जमीन में आसानी से काम करता है। इसकी डिस्क यानी वर्टिकल टाइन आसानी से सख्त से सख्त मिट्टी को काट कर पलट देती है। साथ ही जमीन में चाहे ही कितनी भी अधिक खरपतवार हो उसे जमीन में दबा देती है। किसान भाइयों मिट्टी पलटने से जहां जैविक खाद का लाभ मिलता है वहीं इसको खुला छोड़ने से जमीन लगने वाली व्याधियां व कीट भी नष्ट हो जाते हैं। इससे अगली फसल में अच्छा उत्पादन भी मिलता है।

क्यारियां व बाग-बगीचा बनाने के काम आता है हैरो(Harrow)

खेत की जुताई के साथ नर्सरी के लिए क्यारियों या बैड बनाने के काम में हैरो का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा सख्त जमीन की जुताई में सक्षम होने के कारण हैरो का इस्तेमाल बाग-बगीचा लगाने के लिए भी जमीन को तैयार करने में किया जाता है।

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हैरों(Harrow) के खेती से जुड़े मुख्य काम

हैरो विभिन्न धारदार कटिंग पहियों, डिस्क या टाइन के सेट को कहा जाता है। अब पहियों व कांटे जैसे स्पाइक वाले हैरो(Harrow) भी आ गये हैं। इस हैरों से खेत में क्या-क्या काम होते हैं, जानिये
  1. हैरो(Harrow) मिट्टी को पलटने का काम सबसे पहले करता है।
  2. हैरो(Harrow) खेत की पूर्व फसल के अवशेष व खरपतवार को जमीन में दबा देता है, जो खाद बन जाती है
  3. यदि नई फसल को नुकसान देने वाली सामग्री खेत में होती है उसको खेत से बाहर निकालने का भी काम हैरो करता है
  4. हैरो(Harrow) मिट्टी की गहरी जुताई करने के साथ उसके ढेलों को फोड़ने का भी काम करता है।
  5. हैरो(Harrow) जमीन की ऊपरी सतह को चिकनी व उपजाऊ बनाने का काम करता है
कृषि यंत्र हैरो

चार प्रकार के हैरो(Harrow) होते हैं

खेती को कई बार जुताई करने, पाटा चलाने, खरपतवार नियंत्रण करने के अलग-अलग कामों के लिए अलग-अलग प्रकार के हैरों(Harrow) का इस्तेमाल किया जाता है। खेती की आवश्यकता को देखते हुए परम्परागत कार्यों के लिए हैरो को चार भागों में विभाजित किया गया है, जो इस प्रकार हैं:-
  1. डिस्क हैरो: हल्की जुताई, मिट्टी के ढेलों को तोड़ने तथा खेत की मिट्टी को भुरभुरी बनाने के लिए सबसे अच्छा माना जाता है।
  2. स्प्रिंग टूथ हैरो: यह हैरो जुताई के बाद ढेले तोड़ने तथा उनको ऊपर लाने ताकि पाटा से आसानी से टूट सकें जैसे काम के लिए उपयोगी होता है।
  3. चेन डिस्क हैरो: यह हैरो खेतों में खाद फैलाने और खरपतवार को एकत्रित करने के लिए सबसे अच्छा माना जाता है।
  4. लीवर हैरो या स्पाइक टूथ हैरो: बोये हुए खेत में उचित जमाव या हल्की वर्षा पड़ी हुई पपड़ी को तोड़ने के काम में आता है। इसका प्रयोग लाइन में या छिड़काव कर बोई फसल के छह-सात इंच तक बढ़ने के समय आसानी से किया जा सकता है।
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पहले ये हैरो बैलों से खिंचवा कर खेतों की तैयारी का काम कराया जाता था लेकिन अब ट्रैक्टर के पीछे हैरो को लगाकर काम किया जाता है। जो कम समय में अच्छा खेत तैयार करता है।

रोटरी पावर हैरो(Rotary Power Harrow) है सबसे अधिक लोकप्रिय

वर्तमान समय में हैरों के काफी संशोधन किये गये हैं और पारम्परिक हैरो की जगह पर रोटरी पॉवर हैरो यानी पॉवर हैरो(Power Harrow) आ गया है। यह पॉवर हैरो कम समय में बहुत अच्छा काम करता है। 50 हॉर्स पॉवर के ट्रैक्टर से चलने वाले इस हैरो से जहां मिट्टी पलटाने से लेकर खेत को बुवाई के लिए बहुत जल्दी तैयार करने में मदद मिलती है।

हैरों(Harrow) की कुछ खास जानकारियां

  1. हैरो की अनेक किस्में होतीं हैं । इन किस्मों में सिंगल टाइन सेट, डबल टाइन सेट या मल्टी टाइन सेट वाले हैरो शामिल हैं। इनके प्रयोग को देखते हुए इनकी टाइन में कटिंग वाले टाइन, सेमी कटिंग वाले टाइन, स्पाइक आदि को लगाया जाता है।
  2. हैरो का वजन 400 किलो से लेकर 2000 किलो तक होता है। ये छह ब्लेड से लेकर 28 ब्लेड वाले होते हैं। इनकी चौड़ाई एक मीटर से लेकर पांच मीटर तक की होती है। इसके अलावा ये 35 हॉर्स पावर से लेकर 100 हार्स पावर तक के होते हैं।

कृषि यंत्र हैरो

हैरो(Harrow)की कीमत

हैरो(Harrow) की कीमत उनकी लम्बाई, चौड़ाई व वजन, ब्लेडों की संख्या, व हॉर्स पॉवर आदि पर निर्भर करती है। वैसे यह अनुमान लगाया जाता है कि हैरो की कीमत उनके काम करने की क्षमता उपयोगिता के अनुसार 50,000 से लेकर 1.5 लाख रुपये तक होती है।
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हैरों(Harrow) की विशेषताएं

जो किसान भाई अपनी खेत की सेहत का ध्यान रखते हैं, अपने मन मुताबिक फसल लेना चाहते हैं, कम समय, कम लागत में अधिक मुनाफा देने वाली खेती करना चाहते हैं, वे कृषि यंत्रों का सहारा लेते हैं। इन कृषि यंत्रों में सबसे पहले हैरो का इस्तेमाल किया जाता है। पॉवर हैरो एक बार में ही मिट्टी जुताई, ढेले फोड़ने पाटा चलाने का काम करता है। पॉवर हैरो या अन्य हैरो में वर्टिकल टाइन के कई सेट लगे होते हैं।  पॉवर हैरो(Power Harrow) के टाइन का पहला सेट खेत की मिट्टी को पलटने का काम करता है तो दूसरा सेट उस मिट्टी के ढेले को फोड़ने और उसे महीन बनाने का करता है। हैरो(Harrow) का प्रयोग करने से खेत की जमीन समतल ही हो जाती है। गहरी जुताई के कारण खेत में नमी अधिक समय तक रहती है । इससे बीजों का अंकुरन अच्छी तरह से हो सकता है। इस तरह से हैरो(Harrow) से एक या दो बार की जुताई से खेत बुवाई के लिए तैयार हो जाता है। खेत में नर्सरी लगाने के लिए हैरो की एक ही जुताई काफी होती है। उसके बाद खाद प्रबंधन करके बुवाई शुरू कर दी जाती है।

हैरो(Harrow) की खरीद पर कितनी सब्सिडी(Subsidy) मिलती है

सरकार द्वारा कृषि यंत्रों के उपयोग करके फसल को बढ़ाने तथा किसान भाइयों की आमदनी बढ़ाने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रहीं है। इन योजनाओं में कृषि यंत्रों की खरीद पर सब्सिडी(Subsidy) भी दिया जाना शामिल है।
  1. यह सब्सिडी(Subsidy) गरीब व दलित किसानों व छोटे काश्त वो किसानों को अलग-अलग तरह से दी जाती है।
  2. प्रत्येक राज्य ने अपने राज्य के किसानों की सुविधा के लिए सब्सिडी(Subsidy) के अलग-अलग नियम व कानून बना रखे हैं। इन नियमों व कानूनों के बारे में जानकार या सम्बन्धित विभाग के अधिकारियों से पूरी प्रक्रिया को जानकर आवेदन करके उसका लाभ प्राप्त करें।
  3. हैरो(Harrow) की खरीद के बारे में जानकार लोगों का अनुमान है कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के किसानों और महिला किसान को हैरो की खरीद पर 63 हजार रुपये की सब्सिडी(Subsidy) मिलती है। इसके अलावा सामान्य किसानों को हैरो(Harrow) की खरीद पर 50,000 रुपये की सब्सिडी(Subsidy) मिलती है। विस्तृत जानकारी विभागीय अधिकारियों से प्राप्त करें।

किराये पर भी चलाकर उठा सकते हैं लाभ

कृषि यंत्र काफी महंगे होते हैं और हमारे देश में छोटी काश्त वाले किसानों की संख्या अधिक है, जो इन महंगे कृषि यंत्रों को आसानी से नहीं खरीद सकते हैं। इनकी खरीद के लिए सरकार द्वारा लाभ दिये जाने के लिए शर्तें  भी ऐसी होती हैं जो अधिकांश किसान पूरी नहीं कर पाते हैं। इसके बावजूद उन्हें इन कृषि यंत्रों की सेवाओं की जरूरत होती है। इसके लिए सरकार ने भी सेवा केन्द्र खोल रखे हैं जहां किराये पर कृषि यंत्रों की सेवाएं ली जा सकतीं हैं। इसके साथ ही कुछ हमारे किसान भाई भी अपनी क्षमता के अनुसार कृषि यंत्रों को खरीद कर उन्हें किराये पर चला कर लाभ कमाते हैं। जहां हैरो के मालिक को किराया मिलता है वहीं सेवाएं लेने वाले किसानों को जल्दी व बिना मेहनत के खेत तैयार करने का लाभ मिलता है।
फसलों की कटाई और सफाई के लिए उपयोगी 4 कृषि यंत्रों की विशेषताऐं और लाभ

फसलों की कटाई और सफाई के लिए उपयोगी 4 कृषि यंत्रों की विशेषताऐं और लाभ

वर्तमान की बात करें तो किसानों के खेतों में रबी की फसलें लहला रही हैं और जल्द ही इनकी कटाई की प्रक्रिया प्रारंभ हो जाएगी। ऐसे में किसानों को राहत दिलाने के लिए हम 4 कृषि यंत्रों (4 Farm Machinery ) की जानकारी देने जा रहे हैं। इनका उपयोग करके किसान फसल अवशेषों से भूसा बनाने का कार्य सहजता से कर सकते हैं। इन यंत्रों से किसानों की लागत भी कम आएगी। साथ ही, कटाई का कार्य भी शीघ्रता से हो सकेगा।

फसलों की कटाई के लिए उपयोगी 4 कृषि यंत्र

  • स्ट्रॉ रीपर मशीन 
  • रीपर बाइंडर मशीन 
  • कंबाइन हार्वेस्टर मशीन 
  • मल्टीक्रॉप थ्रेशर मशीन 

स्ट्रॉ रीपर मशीन 

स्ट्रॉ रीपर एक ऐसी कटाई मशीन है, जो एक ही बार में पुआल को काटती है, थ्रेस करती है एवं साफ करती है। स्ट्रॉ रीपर को ट्रैक्टरों के साथ जोडक़र इस्तेमाल किया जाता है। इसके इस्तेमाल से ईंधन की खपत काफी कम होती है। इस यंत्र पर कई राज्य सरकारों की तरफ से सब्सिडी का फायदा भी किसानों को प्रदान किया जाता है।

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विशेषताएं और लाभ

स्ट्रॉ रीपर मशीन की कीमत बहुत ज्यादा नहीं होती है, इसलिए इस कृषि यंत्र को छोटे और बड़े, दोनों किसान सुगमता से इस्तेमाल कर सकते हैं। इस मशीन के उपयोग से फसल काटने पर कई तरह के फायदे किसानों को मिलते हैं, जैसे गेहूं के दानों के साथ-साथ भूसा भी मिल जाता है। यह भूसा पशुओं के चारे के काम में आता है। इसके अतिरिक्त जो दाना मशीन से खेत में रह जाता है, उसको ये मशीन सहजता से उठा लेती है। जिसको किसान अपने पशुओं के लिए दाने के रूप में प्रयोग कर लेते हैं।

रीपर बाइंडर मशीन 

रीपर बाइंडर मशीन का इस्तेमाल फसल की कटाई के लिए किया जाता है। यह मशीन फसल की कटाई करने के साथ – साथ रस्सियों से उनका बंडल भी बनाती है। रीपर बाइंडर की मदद से 5 – 7 से. मी. ऊँची फसल की कटाई आसानी से की जा सकती है। इस यंत्र की सबसे बड़ी खासियत यह है, कि इस मशीन से गेहूं, जौ, धान, जेई और अन्य फसलों की आसानी से कटाई कर बंडल बना सकते है।

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विशेषताएं और लाभ 

रीपर बाइंडर के इस्तेमाल से फसल कटाई का काम आसानी से पूरा किया जा सकता है। इसके इस्तेमाल से धन, समय और मजदूरी सभी की बचत होती है। रीपर बाइंडर मशीन एक घंटे में एक एकड़ जमीन पर खड़ी फसल को काट सकती है। इस मशीन के इस्तेमाल से फसल कटाई के अतिरिक्त उनका बंडल भी निर्मित किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त सबसे बड़ी विशेषता है, कि इसका उपयोग बारिश के मौसम में भी किया जा सकता है। फसल के अतिरिक्त खेतों में उगने वाली झाडियों की भी सहजता से कटाई की जा सकती है। रीपर बाइंडर को एक स्थान से दूसरे स्थान पर लेकर जाना आसान होता है। 

कंबाइन हार्वेस्टर मशीन 

कंबाइन हार्वेस्टर मशीन से एक साथ कटाई तथा सफाई का कार्य किया जा सकता है। इस मशीन की सहायता से सरसों, धान, सोयाबीन, कुसुम आदि की कटाई और सफाई का कार्य कर सकते हैं। इसमें समय और लागत दोनों ही बहुत कम लगती है।

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विशेषताएं और लाभ 

कंबाइन हार्वेस्टर मशीन का प्रयोग कर लागत और समय की बचत की जा सकती है। इससे फसल की कटाई से लेकर फसल के दानों की सफाई तक का काम किया जाता है। इसके उपयोग से मृदा की उर्वरक क्षमता बढ़ती है। इस मशीन के इस्तेमाल से किसान प्राकृतिक आपदाओं से होने वाली हानि से बच सकते हैं और वक्त रहते फसलों की कटाई कर सकते हैं। कंबाइन हार्वेस्टर मशीन से किसान खेत में आड़ी-तिरछी पड़ी फसल को भी काट सकते हैं।

मल्टीक्रॉप थ्रेशर मशीन 

यह मशीन किसानों के लिए एक बहुत बड़ी उपयोगी मशीन मानी जाती है। मल्टीक्रॉप थ्रेशर मशीन से बाजरा, मक्का, जीरा, डालर चना, सादा चना, देशी चना, ग्वार, ज्वार मूंग, मोठ, ईसबगोल, मसूर, राई, अरहर, मूंगफली, गेहूं, सरसों, सोयाबीन और तुअर जैसी फसलों के दाने साफ-सुथरे तरीके से निकाले जाते हैं। इस मशीन के इस्तेमाल से फसल के दाने और भूसे को भिन्न-भिन्न करने के लिए उपयोग किया जाता है। 

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विशेषताएं और लाभ

मल्टीक्रॉप थ्रेशर मशीन की मुख्य विशेषता है, कि इसके उपयोग से फसल की कटाई कर अनाज और भूसे को अलग किया जाता है। यह मशीन फसलों के दाने को साफ-सुथरे ढ़ंग से अलग करता है। मल्टीक्रॉप थ्रेशर मशीन को एक स्थान से दूसरे स्थान पर आसानी से ले जाया जा सकता है।  खेतों में जहाँ मशीन नहीं पहुँच सकती है, वहाँ हाथ का रीपर मशीन का इस्तेमाल किया जाता है।

गेहूं कटाई के बाद खेत की जुताई के लिए आधुनिक कृषि यंत्र

गेहूं कटाई के बाद खेत की जुताई के लिए आधुनिक कृषि यंत्र

आधुनिकता के चलते भारतीय कृषि क्षेत्र में बैलों की जगह कई प्रकार के कृषि यंत्रो और मशीनों ने ले ली है। उपकरण खेती के बहुत सारे बड़े से बड़े कार्यों को आसान बनाते हैं। 

साथ ही, लागत को भी कम करने का कार्य करते हैं। बुवाई से लगाकर कटाई तक के कार्यों को सुगम बनाने में कृषि यंत्र अपनी अहम भूमिका निभाते हैं। बुवाई के लिए खेत को तैयार करने के लिए किसान ट्रैक्टर द्वारा रोटावेटर या कल्टीवेटरका इस्तेमाल करते हैं। 

ये उपकरण मिट्टी की उपरी परत की हल्की जुताई करते हैं, जिससे बुवाई करना काफी सरल हो जाता है। आइए जानते हैं जुताई के लिए कुछ महत्वपूर्ण और लाभदायक कृषि यंत्रों के बारे में। 

मोल्ड बोर्ड हल 

मोल्ड बोर्ड हल को किसानों के बीच मिट्टी पलट हल के नाम से भी जाना व पहचाना जाता है। मिट्टी की उर्वरा शक्ति को बनाये रखने के लिए जरूरी है कि इसे पलटा जाये। 

मिट्टी पलटने तथा खरपतवार को नीचे दबाने के लिए मोल्ड बोर्ड हल (Mould Board Plough) ज्यादा गहरी जुताई करते हैं। मिट्टी को भी पलटते हैं, जिससे सतह पर मौजूद खर-पतवार और अन्य फसल अवशेष बेहतर तरीके से दब जाते हैं। 

बतादें, कि 2 फाल वाले प्लाऊ को संचालित करने के लिए ट्रैक्टर की हॉर्स पावर 35 से 45 हॉर्स पॉवर होनी चाहिए। इस प्लाऊ की कार्य क्षमता 1.5 हेक्टेयर तक प्रति दिन होती है। 

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साथ ही, 3 फाल वाले प्लाऊ को चलाने के लिए ट्रैक्टर की हॉर्स पावर 40 से 50 एचपी होनी चाहिए। इस हल के साथ किसान 2 हेक्टेयर तक प्रति दिन कार्य कर सकते हैं। 

इस कृषि उपकरण का इस्तेमाल गर्मी के मौसम में खेत की गहरी जुताई के लिए, ढैचा/सनई आदि हरी खाद वाली फसल को मिट्टी में पलटकर मिलाने के लिए भी किया जाता है। 

डिस्क प्लाऊ

डिस्क प्लाऊ  (Disc Plough) भी एक मिट्टी पलटने वाला हल है और यह मोल्ड बोर्ड हल की अपेक्षा ज्यादा गहराई तक जुताई करने में सक्षम होता है। किसान इस यंत्र का इस्तेमाल भारी मृदा को पलटने के लिए करते हैं। इसमें आपको दो या तीन फाल देखने को मिल सकते हैं।

खेतों में ज्यादा खरपतवार और गहरे फसल अवशेष को काटने तथा पलटने में इस यंत्र का इस्तेमाल किया जाता है। ट्रैक्टर की क्षमता के अनुसार इस यंत्र से 40 से 50 सेंटीमीटर की गहराई तक जुताई की जा सकती है। इस कृषि यंत्र की कार्य क्षमता प्रतिदिन 1.5 से 2 हेक्टेयर है। 

चिसेल प्लाऊ 

चिसेल हल (Chisel Plough) बिना सतह वाली मृदा को अस्त व्यस्त किये और सतह पर मौजूद फसल अवशेषों को यथावत रखते हुए बहुत गहरी चीरे लगाई जा सकती हैं। इस यंत्र के साथ 1 मीटर की गहराई तक जुताई कर सकते हैं। 

ऐसा करने से स्थाई तौर पर सतह के नीचे की जल निकासी सुनिश्चित की जा सकती है। मिट्टी पलट हलों के मुकाबले में चिजेल हल के इस्तेमाल से मिट्टी की सतह पर किसी तरह का कार्य नहीं किया जाता है, जिससे हवा या पानी की वजह मिट्टी के कटाव को रोका जा सकता है। 

लेजर लैंड लेवलर 

खेत की जुताई और सिंचाई करने से जमीन असमतल हो जाती है, जिससे मृदा के पोषक तत्व का असामान्य वितरण और सिंचाई जल में वृद्धि जैसी दिक्कतें खड़ी होने लग जाती हैं। 

समय-समय पर खेत के समतलीकरण की आवश्यकता को सटीक और कम में वक्त में पूरा करने के लिये लेजर लैंड लेवलर (Laser Land Leveler) का इस्तेमाल किया जाता है। इस मशीन में लेजर किरणों की सहायता से पीछे लगे बकेट को काबू करके जमीन को एकसार किया जा सकता है। 

कल्टीवेटर(Cultivator) से खेती के लाभ और खास बातें

कल्टीवेटर(Cultivator) से खेती के लाभ और खास बातें

कल्टीवेटर(Cultivator) को वैसे तो साधारण कृषि यंत्र बताया जाता है लेकिन यदि हम पारंपरिक खेती के तौर-तरीकों को याद करें तो किसान भाइयों को इस बात का अहसास हो जायेगा कि यह कल्टीवेटर खेती-किसानी के लिए बहुत ही लाभकारी यंत्र है। 

किसान भाई जो काम हफ्तों में अपना पसीना बहाकर कर पाते थे वो काम कल्टीवेटर चंद घंटों में ही कर देता है। कल्टीवेटर से किसानों की जहां अनेक परेशानियां कम हुई हैं, वहीं खेती के उत्पादन में लाभ हुआ है और खेतों को बुवाई के लिए तैयार करना आसान हो गया है।

कल्टीवेटर(Cultivator) क्या है

खेती के आधुनिक तरीके आने के बाद खेती करने का स्वरूप ही बदल गया है और खेती करना अब बहुत आसान हो गया है। जब से बैलों की जगह ट्रैक्टर आ गये हैं तब से प्राचीन कृषि यंत्रों की जगह नये कृषि यंत्रों ने जगह ले ली है, इसमें कल्टीवेटर सबसे प्रमुख है। 

जो खेतों की जुताई बैलों व हल से की जाती थी, वो काम इस कल्टीवेटर से किये जाते हैं । साथ ही अनेक अन्य ऐसे काम भी किये जाते हैं जो पैदावार को बढ़ाने में सहायक हैं। 

कल्टीवेटर बैल को जोत कर भी चलाये जा सकते हैं और ट्रैक्टर के पीछे लगाकर खेत की जुताई की जा सकती है। यह कल्टीवेटर 6HP से लेकर 15HP तक आता है।

पशू चालित कल्टीवेटर(Cultivator):

पशु चालित कल्टीवेटर भी होता है। इस कल्टीवेटर को पशु बैल के पीछे जोत कर चलाया जा सकता है। किन्तु वर्तमान समय में ट्रैक्टर की लोकप्रियता के कारण पशुओं वाले कल्टीवेटर का चलन नहीं देखा जाता है।

ट्रैक्टर चालित कल्टीवेटर(Cultivator):

टैक्टर के पीछे हाइड्रोलिक के माध्यम से कल्टीवेटर चलाया जाता है। ये कल्टीवेटर जमीन की जरूरत के मुताबिक इस्तेमाल किये जाते हैं। कंकरीली जमीन के लिए अलग कल्टीवेटर होता है और सामान्य जमीन के लिए अलग कल्टीवेटर होता है। इसके साथ गहरी जुताई करने के लिए अलग कल्टीवेटर होता है और उथली जुताई के लिए अलग कल्टीवेटर होता है। 

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इनमें से प्रमुख कल्टीवेटर(Cultivator) इस प्रकार हैं:-

  1. स्प्रिंग युक्त कल्टीवेटर(Cultivator): पथरीली मिट्टी व या फसलों की ठूंठ वाले खेतों उपयोग किया जाता है। ट्रैक्टर से चलने वाले इस कल्टीवेटर में कई स्प्रिंग लगी होती है। स्प्रिंग की वजह से जुताई करते समय फार पर पड़ने वाले दबाव को कल्टीवेटर सहन कर लेता है और टाइन नहीं टूटने से बच जाता है। इस कारण यह कल्टीवेटर बिना किसी नुकसान के आसानी से मनचाही जुताई कर देता है।
  2. स्प्रिंग रहित कल्टीवेटर (रिजिड लाइन कल्टीवेटर): बिना स्प्रिंग वाले कल्टीवेटर का इस्तेमाल कंकरीली या पथरीली भूमि में नहीं किया जाता है। इसका प्रयोग साधारण भूमि में किया जाता है। इसमें टाइन मजबूती के साथ फ्रेंम से इस प्रकार से लगाये जाते हैं कि जुताई करते समय दबाव पड़ने पर ये टाइन अपने स्थान से हटे नहीं। इस कल्टीवेटर की एक और खास बात यह है कि टाइन की दूरी को अपने  हिसाब से दूर या पास किया जा सकता है। यह कल्टीवेटर खेत में खरपतवार को नियंत्रित करने में भी सहायक होता है।
  3. डक फुट कल्टीवेटर(Cultivator): इन दोनों कल्टीवेटरों की अपेक्षा डक फुट कल्टीवेटर हल्का होता है। इसका मुख्य रूप से इस्तेमाल उथली जुताई करने और खरपतवारों को नष्ट करने के लिए किया जाता है। इसकी बनावट बिना स्प्रिंग वाले कल्टीवेटर की तरह होती है। इसमें फारों की संख्या जरूरत और आवश्यकता के अनुसार कम या ज्यादा की जा सकती है। इसमें टाइन का आकार बत्तख के पैर जैसा होता है इसलिये इस कल्टीवेटर को डक फूट कल्टीवेटर कहा जाता है।

कल्टीवेटर(Cultivator) से जुताई के फायदे

कल्टीवेटर से अनेक तरह की जुताई की जा सकती है। सबसे पहले हम यह जानने की कोशिश करते हैं कि जुताई कितने प्रकार की होती है और कल्टीवेटर(Cultivator) किस जुताई में कितना मददगार साबित हो सकता है। 

खेत को तैयार करने के लिए हमें वि•िान्न प्रकार की जुताई करनी होती है । इसमें ग्रीष्म ऋतु की जुताई, गहरी जुताई, छिछली जुताई, अधिक समय तक जुताई, हराई या हलाई की जुताई की जाती है।

  1. कठोर जमीन को उपजाऊ बनाने के लिए गहरी जुताई की जाती है। इस काम में कल्टीवेटर(Cultivator) बहुत काम आता है। इस तरह से खेत की तैयारी गहरी जड़ों वाली फसलों के लिए की जाती है।
  2. इसी तरह जिन फसलों की जड़े अधिक गहराई में नहीं जातीं हैं उनके लिए छिछली जुताई की जाती है। उसमें भी कल्टीवेटर(Cultivator) काम में आता है।
  3. ग्रीष्म ऋतु में अधिक जुताई इसलिये की जाती है ताकि उस मिट्टी में मौजूद हानिकारक कीट और उनके अंडे नष्ट हो जाते हैं। इसके अलावा मृदा में अनेक रोग भी दूर हो जाते हैं। ग्रीष्म ऋतु में अधिक समयतक जुताई करने में कल्टीवेटर बहुत लाभकारी साबित होता है।
  4. एक फसल लिये जाने के बाद नई फसल की तैयारी के लिए कल्टीवेटर(Cultivator) बहुत काम आता है। पहले तो वह खेत की मिट्टी को ढीला करता है और फसल के अवशेष को खेत से बाहर करता है। उसे बुवाई के लिए तैयार करता है।
  5. बुवाई से पहले खेत में यदि नर्सरी लगाने की क्यारियां बनानी होतीं हैं तो कल्टीवेटर(Cultivator) उसमें कभी काम आता है।
  6. हैरों, पॉवर टिलर, रोटावेटर की अपेक्षा कल्टीवेटर सस्ता व हल्का होता है, जिससे कम एचपी वाले ट्रैक्टरों में लगाकर जुताई की जा सकती है।
  7. पारंपरिक तरीके से खेती करने वाले किसानों को कल्टीवेटर(Cultivator) से जुताई करने वा करवाने से पैसा और समय तो बचता ही है । साथ मजदूरों की समस्या से भी छुटकारा मिल जाता है।
  8. छिटकवां विधि से बोई गई बीजों की मिट्टी में एक समान रूप से मिलाने तथा ढकने के लिए इस यंत्र का प्रयोग किया जाता है।
  9. पंक्तियों में बोई फसलों में निराई-गुड़ाई का कार्य भी कल्टीवेटर(Cultivator) से किया जाता है।
  10. इसकी सहायता से फसल की जड़ो पर मिट्टी चढ़ाने का काय किया जा सकता ह।
  11. बुआई से पहले खेत में खाद को मिट्टी में मिलाने में भी कल्टीवेटर(Cultivator) काम करता है।

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कल्टीवेटर

कल्टीवेटर(Cultivator) से मिलने वाले खेती के अन्य लाभ

1.बुआई से पहले कल्टीवेटर के माध्यम से खरपतवार हटाने और गुड़ाई का काम किया जा सकता है। जो काम पहले मजदूर काफी समय में करते थे वो काम कल्टीवेटर अकेला ही चंद घंटों में कर देता है। इससे कृषि लागत में कमी आती है और किसान भाइयों को लाभ मिलता है। 

 2.फसल के बीच में निराई-गुड़ाई कल्टीवेटर(Cultivator) से किये जाने के लिए फसलों को कतार में बोया जाता है। इससे किसान भाइयों को यह लाभ होता है कि कतार में बीज बोने से बीज की बर्बादी नहीं होती है और फसल भी अधिक होती है।

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 3.कल्टीवेटर का प्रयोग मिट्टी की जुताई के लिये किया जाता है। इसके प्रयोग से खेत के खरपतवार व घास जड़ सहित उखड़ कर नष्ट हो जाती है या मिट्टी से अलग होकर जमीन के ऊपर आ जाती है जो बाद में सूर्य की गर्मी से सूख कर नष्ट हो जाती है।

कौन सी फसल के लिए कौन सा कल्टीवेटर(Cultivator) है उपयोगी

  1. स्प्रिंग युक्त कल्टीवेटर मुख्यत: दलहनी व जड़वाली सब्जियों की फसलों के लिए उपयोगी होता है। क्योंकि इससे गहरी जुताई की जा सकती है। स्प्रिंग युक्त कल्टीवेटर से गहरी जुताई से मूंग, मोठ, बरसीम, उड़द, सोयाबीन, मूंगफली, आलू, मूली, गाजर, शकरकद, चना आदि मे अधिक लाभ मिलता है।
  2. डक फुट कल्टीवेटर से उथली जुताई से गेहूं, जौ, ज्वार, जई, सरसों, आदि फसलों में अधिक लाभ मिलता है।

इस राज्य में सुपर सीडर पर 40 प्रतिशत तक का अनुदान दिया जा रहा है

इस राज्य में सुपर सीडर पर 40 प्रतिशत तक का अनुदान दिया जा रहा है

वर्तमान में संभागीय कृषि अभियांत्रिकी विभाग सतना में किसान भाइयों के लिए सुपर सीडर उपलब्ध है। विशेष बात यह है, कि यदि किसान भाई सीडर खरीदते हैं, तो इस पर उन्हें 40 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाएगा। मध्य प्रदेश की राज्य सरकार किसान भाइयों की आमदनी में इजाफा करने के लिए विभिन्न प्रकार की योजनाएं जारी कर रही है। इन योजनाओं के अंतर्गत किसान भाइयों की खेती करने की तकनीक वैज्ञानिक रूप धारण कर गई है। इसके अतिरिक्त मध्य प्रदेश में कृषकों को कृषि यंत्रों पर अच्छा-खासा अनुदान भी दिया जा रहा है। परंतु, फिलहाल रीवा और सतना जनपद के किसानों के लिए काफी अच्छी खुशखबरी है। यहां के कृषकों को सुपर सीडर मशीन खरीदने के लिए अच्छा-खासा अनुदान प्रदान किया जा रहा है। 

सुपर सीडर किसानों के लिए काफी उपयोगी साबित होता है

मीडिया खबरों के अनुसार, सुपर सीडर एक ऐसा यंत्र है, जिसको ट्रैक्टर के साथ जोड़कर खेती-बाड़ी करने के कार्य में लिया जाता है। इस यंत्र का सर्वाधिक इस्तेमाल फसलों की बुवाई करने हेतु किया जाता है। इसके इस्तेमाल से नरवाई की दिक्कत परेशानी दूर हो चुकी है। अब ऐसी स्थिति में गेहूं एवं चने की खेती करने वाले कृषकों के लिए सुपर सीडर यंत्र बेहद उपयोगी साबित होता है। 

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सुपर सीडर के उपयोग से नरवाई जलाने की आवश्यकता नहीं पड़ती

आपकी जानकारी के लिए बतादें, कि किसी फसल के डंठल को नरवाई कहा जाता है। सुपर सीडर धान एवं गेहूं की डंठल को छोटे- छोटे भागों में विभाजित कर मृदा में मिला देता है। अब ऐसी स्थिति में सुपर सीडर मशीन से फसलों की बिजाई करने वाले कृषकों को नरवाई को आग के जरिए जलाना नहीं पड़ता है। इससे प्रदूषण पर भी रोक लगती है। 

सुपर सीडर पर 40 प्रतिशत तक का अनुदान दिया जाएगा

फिलहाल, संभागीय कृषि अभियांत्रिकी विभाग सतना में किसान भाइयों के लिए सुपर सीडर उपलब्ध हैं। विशेष बात यह है, कि यदि किसान भाई सीडर खरीदेंगे तो 40 प्रतिशत तक अनुदान मिलेगा। मुख्य बात यह भी है, कि यह यंत्र एक घंटे में एक एकड़ भूमि में फैले नरवाई को चौपट कर देती है। इसके पश्चात फसलों की बिजाई करती है। धान के उपरांत गेहूं एवं गेंहू के बाग मूंग की खेती करने वाले कृषकों के लिए सुपर सीडर किसी वरदान से कम नहीं है। किसान भाई सुपर सीडर के माध्यम से वर्षभर में अच्छी-खासी आमदनी की जा सकती है। वैसे तो सुपर सीडर की कीमत लगभग 3 लाख रुपये है। परंतु, कृषि विभाग की तरफ से 40 प्रतिशत प्रतिशत अनुदान मिलने के पश्चात इसकी कीमत काफी हद तक कम हो जाती है।

तेज मशीनी चाल के आगे आज भी कायम बैलों की जोड़ी संग किसान की कछुआ कदमताल

तेज मशीनी चाल के आगे आज भी कायम बैलों की जोड़ी संग किसान की कछुआ कदमताल

रोबोटिक्स मिश्रित जायंट फार्म इक्विपमेंट मशीनरी (Giant Farm Equipment Machinery), यानी विशाल कृषि उपकरण मशीनरी की तेज चाल दौड़ में परंपरागत किसानी की विरासत, गाय-बैल-किसान की पहचान धुंधली पड़ती जा रही है। हालांकि कुछ भूमिपुत्र ऐसे भी हैं, जो बैलों की जोड़ियों के गले में बंधी घंटी की खनक के साथ, खेतों में कछुआ गति से कदम ताल करते यदा-कदा नजर आ ही जाते हैं। जी हां, भारत से इंडिया में तब्दील होते आधुनिक देश में पारंपरिक किसानी के तरीकों में तेजी से बदलाव हुआ है। काम में मददगार कृषि प्रौद्योगिकी उपकरणों की उपलब्धता के कारण मौसम आधारित खेती, अवसर आधारित हो गई है। लेकिन देश के कई हलधर ऐसे भी हैं जिन्होंने पारंपरिक खेती की असल पहचान, हलधर किसान की छवि को बरकरार रखा है।

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भूमि विकास, जुताई और बीज बोने की तैयारी के लिए उपकरण हालांकि कहना गलत नहीं होगा कि, दो बैलों और हल के साथ खेतों की जुताई करते किसान की परंपरा अब शायद अपने अंतिम दौर में है। ट्रैक्टर, मशीनों से किसानी की नई पीढ़ी अब बैल-हल से खेती में रुचि नहीं लेती। मेरे देश की धरती सोना-हीरा-मोती उगले गीत सुनकर यदि कोई अक्स उभरता है, तो वह है हरे-भरे खेत में बैलों की जोड़ी, हल के साथ खेत जोतता किसान। यह वास्तविकता अब सपना बनती नजर आ रही है। मध्य प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान आदि राज्यों के ठेठ ग्रामीण इलाकों में ही, आर्थिक रूप से कमजोर किसानों को ही इस पहचान के साथ खेत में काम करते देखा जा सकता है। इन किसानों को देखकर पता लगाया जा सकता है, कि किस तरह हमारे पूर्वज अन्नदाता किसानों ने हल और बैलों की मदद से, अथक परिश्रम कर देश का पेट, मिट्टी में से अनमोल अनाज उगा कर भरा।

खेत जोतने से लेकर कटाई, सप्लाई सब मशीनी

आज के मशीनी दौर में किसानी के उपयोग में आने वाले मददगार उपकरणों की सुलभता ने भी पारंपरिक किसानी को पीछे किया है। बैलों की शक्ति के मुकाबले कई अश्वों की ताकत से लैस, कई हॉर्सपॉवर का शक्तिशाली ट्रैक्टर चंद घंटे में कई एकड़ जमीन जोत सकता है। दैत्याकार मशीनें अब कटाई-मड़ाई भी पल भर में करने में मददगार हैं। प्रतिकूल मौसम में भी मददगार मशीनी मदद से समय और श्रम की भी बचत होती है। कल्टीवेटर, रोटावेटर, हैरो जैसे तकनीक आधारित हल मिट्टी की जुताई बेहतर तरीके से कर देते हैं। [embed]https://youtu.be/AjPz41c7pls[/embed]

लेकिन हां….बड़े धोखे हैं इस राह में...

सनद रहे तकनीक आधारित काम में प्राकृतिक नुकसान की भी संभावना बढ़ जाती है। पर्यावरण सुरक्षा की दशा में चौकन्ने होते देशों को सोचना होगा कि, इन मशीनों से खेत पर काम करने से मिट्टी की गुणवत्ता में वह सुधार संभव नहीं जो पारंपरिक तरीके की किसानी में निहित है।

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धान की फसल काटने के उपकरण, छोटे औजार से लेकर बड़ी मशीन तक की जानकारी मशीनों आधारित अधिक गहरी खुदाई से जमीन और खेत की गुणवत्ता प्रभावित होती है, जीव-जंतुओं को नुकसान होता है। जबकि खेत में बैलों, जानवरों के उपयोग से प्राकृतिक संतुलन बना रहता है। कहना गलत नहीं होगा कि, तकनीक आधारित ट्रेक्टर के धुएं ने हल-बैल और किसान की परंपरा का गुड़-गोबर कर अतीत की स्मृति को धुंधला दिया है।

छोटी जोत के किसान

छोटी जोत के गैर साधन संपन्न किसानों को हल और बैल आधारित किसानी करते देखा जा सकता है। इसके भी कई गूढ़ कारण हैं।

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पुरानी टेक्नीक

हल-बैल वाली युक्ति में लकड़ी का बना एक जुआ होता है। इसमें बने दो बड़े खानों को बैलों की डील पर पहनाया जाता है। इससे दोनों बैल एक समानांतर दूरी पर खड़े हो जाते हैं। इसके बाद लकड़ी अथवा लोहे की छड़ से लोहे का एक हल जुड़ा होता है। इस हल का जमीन को फाड़ कर उसे पलटने  वाला नुकीला भाग नीचे की ओर होता है। इसे संभाल कर दिशा देने के लिए ऊपर की तरह एक मुठिया बनी होती है, जिसे किसान हाथों से नियंत्रित कर सकता है। बाई ओर चलने वाले बैल से बंधी रस्सी जिसे नाथ बोलते हैं को किसान अपने एक हाथ में पकड़ कर रखता है। इस नाथ से बैलों की दिशा परिवर्तन में मदद मिलती है। खेतों में हल के माध्यम से होने वाली जुताई को  हराई बोलते हैं। पारंपरिक खेती के अनुभवी किसानों के अनुसार छोटी जोत में ट्रैक्टर के माध्यम से जुताई असंभव हो जाती है। जबकि हल-बैल के माध्यम से खेत की अधिक-से अधिक भूमि उपजाऊ बनाई जा सकती है। हालांकि मेकर्स ने छोटी जोत में मददगार मिनी ट्रेक्टरों का दावा भी कर दिया है।
महिला किसानों के लिए कृषि करना हुआ बेहद आसान, जाने कैसे काम करेंगे स्मार्ट कृषि यंत्र

महिला किसानों के लिए कृषि करना हुआ बेहद आसान, जाने कैसे काम करेंगे स्मार्ट कृषि यंत्र

भारत में बहुत सी ऐसी जगह है, जहां पर महिलाएं भी बढ़-चढ़ कर खेती-बाड़ी में लगी हुई है। घर के साथ-साथ खेतों को संभालना बहुत पुराने समय से चला आ रहा है। आंकड़ों की मानें तो लगभग 60 प्रतिशत औरतें खेती बाड़ी का काम करती हैं। यहां पर एक समस्या है, कि महिलाओं द्वारा कृषि करने के पारंपरिक तरीके ही ज्यादातर अपनाए जाते हैं। इसमें पैसा भी ज्यादा लगता है और साथ ही अधिक मेहनत भी लगती है। ऐसी दिक्कत को देखते हुए कुछ इस तरह के स्मार्ट कृषि यंत्र बाजार में लाए जा रहे हैं, जिससे मेहनत भी बचती है और दिनों का काम कुछ घंटों में ही निपटाया जा सकता है। ऐसे में महिलाएं कृषि क्षेत्र में और ज्यादा हिस्सेदारी बढ़ा सकती हैं और मुनाफा भी कमा सकती हैं। आइए जानते हैं, ऐसे कौन से कृषि यंत्र हैं जो महिलाओं के लिए खेती करना आसान बना सकते हैं।

पैडी ट्रांसप्लांटर

बहुत से राज्य ऐसे हैं, जिनमें साल भर धान की खेती की जाती है। हम जानते हैं, कि धान की रोपाई करने में बहुत ज्यादा समय लग जाता है। रोपाई में ज्यादा समय लगने के कारण बहुत ज्यादा उत्पादन भी नहीं मिल पाता है। साथ ही, यह बहुत ज्यादा मेहनत का काम है और अगर महिलाएं इसे करती हैं, तो उनके लिए यह और ज्यादा परेशानी का कारण बन जाता है। लंबे समय तक यही काम करते रहने से उन्हें स्वास्थ्य से जुड़ी हुई कई समस्याएं होने का खतरा होता है। धान की रोपाई को आसान बनाने के लिए भी बाजार में बेहद सस्ता पैडी ट्रांसप्लांटर मौजूद हैं, जो एक लाइन से चटाई की तरह धान की रोपाई कर देती है। इस मशीन में धान पौध खिसकाने वाली ट्रे, हत्था, पौध पकड़ने वाली ट्रे और गहराई कंट्रोल पैनल भी लगा है। इस कृषि उपकरण की मदद से झुककर धान की बुवाई करने का झंझट खत्म हो जाता है और जब कतारों में धान की रोपाई होती है। तो निराई-गुडाई, निगरानी, छिड़काव जैसे काम भी आसान हो जाते हैं।


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गन्ना चिपर

गन्ने के उत्पादन में भारत विश्व में दूसरे नंबर पर आता है। गन्ने के उत्पादन में सबसे बड़ी समस्या है, कि ज्यादातर लोग आज भी इसके रोपण के लिए पारंपरिक तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। गन्ने की रोपाई कुछ ऐसी फसलों में से एक है जो काफी ज्यादा मुश्किल होती है। इसलिए महिलाएं या फिर किसान इसके रोपण के लिए गन्ना बड चिपर का इस्तेमाल कर सकते हैं। इस यंत्र के साथ लगभग 1 घंटे में 100 से ज्यादा गन्ने रोपित किए जा सकते हैं।


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दांतेदार हंसिया

फसलों को लगाने में जितनी मेहनत लगती है, उससे कहीं ज्यादा मेहनत फसलों को काटने में भी लग जाती है। जमीन पर बैठे-बैठे फसलों को काटते रहने से कमर से जुड़ी हुई कई तरह की समस्याएं होने का डर रहता है। ऐसे में कृषि अभियांत्रिकी संस्थान, भोपाल ने उन्नत दांतेदार हंसिया यानी सिकल विकसित किया है। जो गेहूं से लेकर सोयाबीन, धान, चना, सरसों और घास आदि पतले डंठल वाली फसलों की कटाई आसानी से कर देता है। इस कृषि यंत्र में दांतेदार ब्लेड, सामी और लकड़ी के हैंडल लगे होते हैं। सबसे अच्छी बात यह है, कि इस स्मार्ट टूल का वजन सिर्फ 180 ग्राम होता है, जिससे कटाई करने पर कलाई पर भी ज्यादा बोझ नहीं पड़ता।


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सीड ड्रिल मशीन (Seed Drill Machine)

पारंपरिक तरीके से बीज उगाने के लिए उन्हें हाथ में लेकर जमीन पर फेंक दिया जाता है। ऐसा करने का सबसे बड़ा नुकसान है, कि इसमें बीजों की खपत भी ज्यादा लगती है और साथ ही उत्पादन भी बहुत ज्यादा नहीं हो पाता है। ऐसे सीड ड्रिल मशीन की मदद से आप एक लाइन में अच्छी तरह से बीज लगा सकते हैं। इस मशीन के जरिए गेहूं से लेकर सोयाबीन, मक्का, चना, और अरहर के बीजों की कतारों की बुवाई कर सकते हैं। इस तरह से इन सभी मशीनों का प्रयोग करते हुए महिला अपनी मेहनत को बचा सकती हैं और मुनाफे को बढ़ा सकती हैं।
किसानों को सस्ते में मिलेंगे कृषि यंत्र, सरकार दे रही 50% सब्सिडी

किसानों को सस्ते में मिलेंगे कृषि यंत्र, सरकार दे रही 50% सब्सिडी

पंजाब के किसानों की आय बढ़ाने के लिए पंजाब सरकार काफी कोशिशों में लगी हुई है. जिसके तहत सीएम भगवंत मान की सरकार ने किसानों के हित में एक बड़ा फैसला किया है. राज्य की सरकार कृषि के क्षेत्र को आगे बढ़ाने के लिए पुरजोर कोशिशें कर रही है. इसकी तर्ज पर वो नई से नई तकनीकों को भी बढ़ावा दे रही है. जिस वजह से किसानों को अब सस्ते में कृषि यंत्र उपलब्ध हो जाएंगे. ऐसा इसलिए क्योंकि पंजाब सरकार ने इन्हीं कृषि यंत्रो पर 50 फीसद तक सब्सिडी देने का फैसला लिया है. बता दें पंजाब सरकार के मुताबिक किसानों को अब परम्परागत खेती की बजाय तकनीकी पर आधारित खेती करने की तरफ रुख करना चाहिए. जिस वजह से उनकी आय में कुछ बढ़ोतरी हो सके. इन्हीं सब बातों को देखते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार ने खेती में उपयुक्त होने वाले यंत्रों की खरीद पर करीब 50 फीसद की सब्सिडी देने का फैसला कर लिया है. ये भी देखें: २०२२-२३ के लिए कृषि यंत्रों पर अनुदान प्राप्त करने के लिए आवेदन की प्रकिया जारी : डा. कर्मचंद, हरियाणा वहीं डीसी गुरदासपुर डॉक्टर हिमांशु अग्रवाल ने कहा कि, राज्य सरकार का किसानों से यह भी आग्रह है कि, किसान अपनी खेती में नये नये यंत्रों का इस्तेमाल करें. ताकि उनकी कमाई पहले से ज्यादा हो सके. इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि, मान की सरकार कृषि यंत्रीकरण के तहत कृषि और किसान कल्याण विभाग किसानों को 28 फरवरी तक सब्सिडी देगा. इसके अलावा ट्रैक्टर अपट्रेंड, असिस्टेंट स्प्रेयर, ऑटोमेटिक और सेमी ऑटोमेटिक पोटैटो पॉटर, न्यूमेटिक प्लांटर लेजर लैंड लेवलर, पावर वीडर जैसे यंत्रों को अगर किसान खरीदते हैं, तो उन्हें इसके लिए 50 फीसद की भारी सब्सिडी दी जाएगी.

पोर्टल पर मिलेगी डीलर्स की सूची

सरकार की इस योजना का फायदा उठाने के लिए सबसे पहले किसानों को इसके लिए आवेदन करना होगा. जिसके लिए उन्हें इससे सम्बंधित आधिकारिक वेबसाइट https://www.agrimachinerypb.com/ पर विजिट करके अपना रजिस्ट्रेशन करवाना होगा. जिसने बाद ही उन्हें सब्सिडी का फायदा मिल सकेगा. इसके अलावा कस्टम हायरिंग सेंटर को स्थापित करने के लिए भी पंजाब सरकार सब्सिडी उपलब्ध करवा रही है. वहीं जानकारी के लिए बता दें कि, लाभार्थियों का चयन वेबसाइट के माध्यम से किया जाएगा. इतना ही नहीं कृषि यंत्रों के निर्माता डीलर्स की सूची भी इसी पोर्टल पर उपलब्ध करवाई जाएगी. ताकि किसानों को यंत्रों को लेने में आसानी हो.

यहां पर मिलेगी जरूरी जानकारी

डीसी ने बताया कि, जो किसान जरनल कैटेगरी के हैं, अगर वो कृषि उपकरण खरीदते हैं, तो इसके लिए उन्हें 40 फीसद की सब्सिडी दी जाएगी. वहीं अन्य कैटेगरी के किसानों को 50 फीसद सब्सिडी का फायदा मिलेगा. इसके अलावा जो भी कस्टम हायरिंग सेंटर्स की स्थापना करना चाहते हैं, उन्हें 40 फीसद की सब्सिडी सरकार की ओर से दी जाएगी. इस योजना से जुड़ी ज्यादा जानकारी के लिए किसान किसी भी प्रखंड कृषि विभाग या कृषि अभियंता ऑफिस में जाकर संपर्क कर सकते हैं.
इन कृषि यंत्रों पर सरकार दे रही है भारी सब्सिडी, आज ही करें आवेदन

इन कृषि यंत्रों पर सरकार दे रही है भारी सब्सिडी, आज ही करें आवेदन

सरकार लगातार किसानों कि आय बढ़ाने पर काम कर रही है। इसके लिए सरकार समय-समय पर किसानों को बहुत सारी मदद प्रदान करती है। 

इसमें सीधे तौर पर आर्थिक सहायता और सब्सिडी भी होती है, जिससे देश के किसान भाई लगातार लाभान्वित हो रहे हैं और सरकार द्वारा चलाई जा रही स्कीमों के माध्यम से अपनी आय बढ़ा रहे हैं।

कृषि की मशीनरी पर इस राज्य की सरकार दे रही है बम्पर सब्सिडी

केंद्र सरकार के साथ-साथ अब राजस्थान की सरकार अपने राज्य के किसानों को खेती की मशीनरी पर बम्पर सब्सिडी दे रही है। 

किसान भाई आवेदन करके बहुत आसानी से सीड ड्रिल/सीड कम फर्टीलाइजर ड्रिल, डिस्क प्लाऊ/ डिस्क हैरो, रोटोवेटर, मल्टी क्रॉप  थ्रेसर, रिज फरो प्लांटर/ मल्टी क्रॉप  प्लांटर/ ट्रेक्टर ऑपरेटेड रिपर, चिजल प्लाऊ जैसी मशीनों पर 50 प्रतिशत तक की सब्सिडी प्राप्त कर सकते हैं। 

इसके लिए किसान के नाम खुद की कृषि योग्य भूमि होनी चाहिए, साथ ही यदि कृषि यंत्र ट्रैक्टर द्वारा संचालित होता है तो ट्रैक्टर का रजिस्‍ट्रेशन किसान के नाम होना चाहिए। 

राजस्थान के कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया है कि राज्य सरकार के द्वारा एक प्रकार के कृषि यंत्र पर 3 साल में सिर्फ एक बार ही सब्सिडी दी जाएगी। साथ ही एक किसान एक साल में अधिकतम 3 कृषि यंत्रों पर ही सब्सिडी प्राप्त कर सकेगा। 

साथ ही किसानों को सब्सिडी तब प्रदान की जाएगी जब किसान राज्य सरकार द्वारा अनुमोदित निर्माता या विक्रेता से कृषि यंत्र की खरीदी करेंगे। राज्य सरकार द्वारा अनुमोदित कृषि यंत्रों निर्माता या विक्रेताओं की सूची 'राज किसान साथी' पोर्टल पर उपलब्ध है।

सब्सिडी प्राप्त करने के लिए ऐसे करें आवेदन

किसान भाई कृषि यंत्रों पर सब्सिडी प्राप्त करने के लिए अपने नजदीकी ई-मित्र केंद्र पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। इसके साथ ही किसान भाई सब्सिडी प्राप्त करने के लिए 'राज किसान पोर्टल' में भी आवेदन कर सकते हैं। 

आवेदनकर्ता के पास आवेदन के लिए आधार कार्ड, बैंक खाता, पासपोर्ट साइज़ फोटो, मोबाइल नंबर, जमाबंदी की नकल, जाति प्रमाण पत्र, जमीन के कागजात, ट्रैक्टर का पंजीयन प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज होना जरूरी हैं। आवेदन करते समय इन सभी दस्तावेजों की स्कैन कॉपी किसान को लगानी होगी। 

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कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा बताया गया है कि आवेदन करने के उपरांत कृषि पर्यवेक्षक/सहायक कृषि अधिकारी द्वारा कृषि उपकरण का सत्यापन किया जाएगा। 

साथ ही किसान को उपकरण खरीदी का बिल अधिकारियों को दिखाना होगा। इसके बाद यदि अधिकारी पूर्ण रूप से संतुष्ट होते हैं तो वो किसान का नाम आगे भेज देंगे। 

जिसके कुछ दिनों बाद किसान के बैंक खाते में सब्सिडी की राशि आ जाएगी। सब्सिडी की इस योजना का लाभ उठाकर किसान भाई खेती बाड़ी में काम आने वाले कृषि यंत्र बेहद आसानी से और कम दामों में खरीद सकते हैं। 

यह कृषि यंत्र किसानों को खेती में सहूलियत प्रदान करेंगे, साथ ही इससे किसानों को कृषि कार्य में मेहनत भी कम करनी पड़ेगी, जिससे उत्पादकता बढ़ेगी और किसानों की आय में भी इजाफा होगा।

इस राज्य में किसानों को निःशुल्क पौधे, 50 हजार रुपये की अनुदानित राशि भी प्रदान की जाएगी

इस राज्य में किसानों को निःशुल्क पौधे, 50 हजार रुपये की अनुदानित राशि भी प्रदान की जाएगी

बिहार सरकार बागवानी को प्रोत्साहन दे रही है। कृषकों को बागवानी क्षेत्र से जोड़ने के लिए सब्सिडी दी जा रही है। उनको शर्ताें के मुताबिक फ्री पौधे, आर्थिक तौर पर सहायता भी की जा रही है। भारत के कृषक अधिकांश बागवानी पर आश्रित रहते हैं। बतादें कि देश के राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, बिहार सहित समस्त राज्यों में बागवानी की जाती है। किसान लाखों रुपए की आमदनी कर लेते हैं। साथ ही, राज्य सरकारों के स्तर पर कृषकों को काफी सहायता दी जाती है। इसी कड़ी में बिहार सरकार की तरफ से एक अहम कवायद की गई है। राज्य सरकार से कृषकों को बागवानी हेतु नि:शुल्क पौधे मुहैय्या किए जाऐंगे। साथ ही, उनको मोटा अनुदान भी प्रदान किया जाएगा। राज्य सरकार की इस योजना से किसान काफी खुश नजर आ रहे हैं।

इस प्रकार किसानों को निःशुल्क पौधे दिए जाऐंगे

बिहार सरकार के अधिकारियों के मुताबिक, नालंदा जनपद में निजी जमीन पर 15 हेक्टेयर में आम का बगीचा लगाता है, तो उसको निःशुल्क पौधे दिए जाएंगे। सघन बागवानी मिशन के अंतर्गत 10 हेक्टेयर जमीन में आम का बगीचा लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। एक किसान 8 कट्ठा साथ ही ज्यादा से ज्यादा एक हेक्टेयर में पौधे लगा सकते हैं। 5 हेक्टेयर में अमरूद और 5 हेक्टेयर में केला और बाग लगाने वाले किसानोें को भी सब्सिड़ी प्रदान की जाएगी। ये भी पढ़े: बागवानी के साथ-साथ फूड प्रोसेसिंग यूनिट लगाकर हर किसान कर सकता है अपनी कमाई दोगुनी

योजना का लाभ पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर मिलेगा

किसान भाई इसका फायदा उठाने के लिए ऑनलाइन माध्यम से आवेदन किया जा सकता है। इसमें पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर चुनाव होगा। मतलब योजना के अंतर्गत जो पहले आवेदन करेगा। उसे ही योजना का फायदा मिल सकेगा। द्यान विभाग के पोर्टल (horticulture.bihar.gov.in) पर ऑनलाइन आवेदन कर आप योजना का फायदा उठा सकते हैं।

धनराशि इस प्रकार से खर्च की जाएगी

बिहार सरकार के मुताबिक, 50 फीसद अनुदान के उपरांत प्रति हेक्टेयर 50,000 रुपये के प्रोजेक्ट पर तीन किस्तों में धनराशि व्यय की जानी है। प्रथम वर्ष में 60 प्रतिशत तक धनराशि प्रदान की जाएगी। जो कि 30,000 रुपये तक होगी। एक हेक्टेयर में लगाए जाने वाले 400 पौधों का मूल्य 29,000 रुपये होगा। शेष धनराशि कृषकों के खाते में हस्तांतरित की जाएगी। द्वितीय वर्ष में 10 हजार, तीसरे वर्ष में भी 10 हजार रुपये का ही अनुदान मिलेगा। हालांकि, इस दौरान पौधों का ठीक रहना काफी जरूरी है। मुख्यमंत्री बागवानी मिशन के अंतर्गत 5 हेक्टेयर में आम का बाग लगाया जाना है। प्रति हेक्टेयर 100 पौधों पर 18 हजार रुपये खर्च किए जाऐंगे। आम की किस्मों में मल्लिका, बंबइया, मालदाह, गुलाब खास, आम्रपाली शम्मिलित हैं।
इस राज्य में कृषकों के लिए 110 तरह के कृषि यंत्रों पर मिल रही बंपर सब्सिड़ी

इस राज्य में कृषकों के लिए 110 तरह के कृषि यंत्रों पर मिल रही बंपर सब्सिड़ी

कृषि यांत्रिकरण योजना के अंतर्गत दिए जाने वाले अनुदान के लिए रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया 10 अक्टूबर, 2023 से शुरू कर दी जाएगी। इस दौरान बिहार राज्य के किसान पंजीकरण कर 110 तरह के कृषि यंत्रों पर अनुदान प्राप्त कर सकते हैं। खेती-किसानी में मशीनीकरण के आने के उपरांत किसानों की स्थिति में निरंतर बदलाव देखने को मिल रहे हैं। कृषि कंपनियों के माध्यम से भी किसानों की सुविधा को मद्देनजर रखते हुए नवीन-नवीन मशीनों का निर्माण किया जा रहा है। साथ ही, भारत सरकार की तरफ से भी कृषि उपकरणों को खरीदने के लिए वक्त-वक्त पर योजनाएं भी जारी की जाती हैं। इसी कड़ी में बिहार सरकार ने प्रदेश के लघु किसानों को कृषि उपकरणों का फायदा उपलब्ध कराने के लिए कृषि यांत्रिकरण योजना की शुरुआत की है।

कृषि यंत्रो पर 40 से लेकर 80 प्रतिशत तक अनुदान

इस योजना के अंतर्गत राज्य के किसानों को कृषि यंत्र खरीदने के लिए 40 से 80 प्रतिशत तक अनुदान की सुविधा मुहैय्या कराई जाती है। आपकी जानकारी के लिए बतादें, कि सरकार की इस योजना के लिए प्रति वर्ष किसानों के आवेदन मांगे जाते हैं। साथ ही, बिहार सरकार ने कृषि यांत्रिकरण योजना को लेकर एक बड़ा ऐलान किया है। बतादें, कि 10 अक्टूबर, 2023 से बिहार राज्य के कृषकों के लिए कृषि यांत्रिकरण योजना में पंजीकरण की प्रक्रिया आरंभ की जाएगी।

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बिहार सरकार की तरफ से 110 कृषि यंत्रों पर अनुदान दिया जा रहा है

कृषि यांत्रिकरण योजना में बिहार के किसानों को समकुल 110 तरह के बेहतरीन कृषि यंत्रों पर सब्सिड़ी प्रदान की जाती है। खेती-किसानी के ये उपकरण खेती से जुड़े तकरीबन प्रत्येक कार्य को सुगम बनाने में संभव हैं। जैसे कि- खेत की जुताई, बुवाई, निराई-गुड़ाई, सिंचाई, कटाई एवं बाकी बहुत सारे कार्यों को मिनटों में पूर्ण कर सकते हैं। बतादें, कि इन कृषि मशीनों के लिए बिहार सरकार ने वर्ष 2023-24 में लगभग 119 करोड़ रुपये की लागत का प्लान तैयार किया है।

पंजीकरण की प्रक्रिया 10 अक्टूबर से शुरू हो जाएगी

बिहार राज्य के किसान कृषि यांत्रिकरण योजना के अंतर्गत लाभ उठाना चाहते हैं, तो वह 10 अक्टूबर, 2023 से कृषि यंत्रों की खरीद पर अनुदान पाने के लिए पंजीकरण की प्रक्रिया को पूर्ण कर दें। दरअसल, पंजीकरण की यह प्रक्रिया 1 महीने मतलब कि 10 नवंबर, 2023 तक जारी रहेगी। इस दौरान इच्छुक किसान भाई इस योजना के लिए आवेदन कर सकते हैं।

योजना के लिए बेहद महत्वपूर्ण दस्तावेज

  • आधार कार्ड
  • बैंक पासबुक
  • मोबाइल नंबर
  • ईमेल आईडी
  • कृषि यांत्रिकरण योजना में पंजीकरण की प्रक्रिया
  • इस योजना का फायदा पाने हेतु इच्छुक कृषकों को बिहार कृषि विभाग पोर्टल की अधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा।
  • वेबसाइट पर जाने के बाद आपको होम पेज के कृषि यांत्रिकरण योजना विकल्प पर क्लिक करना है। फिर आपको कृषि यांत्रिकरण योजना के अंतर्गत पंजीकरण की प्रक्रिया को पूर्ण करना है।