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बकरियों पर पड़ रहे लंपी वायरस के प्रभाव को इस तरह रोकें

बकरियों पर पड़ रहे लंपी वायरस के प्रभाव को इस तरह रोकें

लंपी वायरस एक संक्रामक रोग है। यह पशुओं के लार के माध्यम से फैलता है। लंपी वायरस गाय बकरी आदि जैसे दूध देने वाले पशुओं पर प्रकोप ड़ालता है। इस वायरस के प्रकोप से बकरियों के शरीर पर गहरी गांठें हो जाती हैं। साथ ही, यह बड़ी होकर घाव के स्वरूप में परिवर्तित हो जाती हैं। इसको सामान्य भाषा में गांठदार त्वचा रोग के नाम से भी जाना जाता है। बकरियों के अंदर यह बीमारी होने से उनका वजन काफी घटने लगता है। सिर्फ यही नहीं बकरियों के दूध देने की क्षमता भी कम होनी शुरू हो जाती है। 

लंपी वायरस के क्या-क्या लक्षण होते हैं

इस रोग की वजह से बकरियों को बुखार आना शुरू हो जाता है। आंखों से पानी निकलना, लार बहना, शरीर पर गांठें आना, पशु का वजन कम होना, भूख न लगना एवं शरीर पर घाव बनना इत्यादि जैसे लक्षण होते हैं। आपकी जानकारी के लिए बतादें, कि लंपी रोग केवल जानवरों में होता है। यह लंपी वायरस गोटपॉक्स एवं शिपपॉक्स फैमिली का होता है। इन कीड़ों में खून चूसने की क्षमता काफी अधिक होती है।

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लंपी वायरस से बकरियों के शरीर पर क्या प्रभाव पड़ेगा

आपकी जानकारी के लिए बतादें, कि इस वायरस की चपेट में आने के पश्चात बकरियों में इसका संक्रमण 14 दिन के अंदर दिखने लगता है। जानवर को तीव्र बुखार, शरीर पर गहरे धब्बे एवं खून में थक्के पड़ने लगते हैं। इस वजह से बकरियों का वजन कम होने लग जाता है। साथ ही, इनकी दूध देने की क्षमता भी काफी कम होने लगती है। दरअसल, इसके साथ-साथ पशु के मुंह से लार आनी शुरू हो जाती है। गर्भवती बकरियों का गर्भपात होने का भी खतरा बढ़ जाता है। 

लंपी वायरस की शुरुआत किस देश से हुई है

विश्व में पहली बार लंपी वायरस को अफ्रीका महाद्वीप के जाम्बिया देश के अंदर पाया गया था। हाल ही में यह पहली बार 2019 में चीन में सामने आया था। भारत में भी यह 2019 में ही आया था। भारत में पिछले दो सालों से इसके काफी सारे मामले सामने आ रहे हैं। 

बकरियों का दूध पीयें या नहीं

लंपी वायरस मच्छर, मक्खी, दूषित भोजन एवं संक्रमित पाशुओं के लार के माध्यम से ही फैलता है। इस वायरस को लेकर लोगों के भीतर यह भय व्याप्त हो गया है, कि क्या इस वायरस से पीड़ित पशुओं के दूध का सेवन करना चाहिए अथवा नहीं करना चाहिए। आपकी जानकारी के लिए बतादें, कि पशुओं के दूध का उपयोग किया जा सकता है। परंतु, आपको दूध को काफी अच्छी तरह से उबाल लेना चाहिए। इससे दूध में विघमान वायरस पूर्णतय समाप्त हो जाए।

चेतावनी : लंपी वायरस ने फिर से दस्तक देकर बढ़ाई पशुपालकों की चिंता

चेतावनी : लंपी वायरस ने फिर से दस्तक देकर बढ़ाई पशुपालकों की चिंता

प्राकृतिक असंतुलन की वजह से विश्व को कई भयंकर महामारियों का सामना करना पड़ता है। बीते वर्ष गायों में अपना आतंक मचा चुकी खतरनाक बीमारी लंपी वायरस एक बार पुनः चर्चाओं में है। 

मई के महीने में लंपी वायरस पुनः अपने पैर पसार सकता है। ICAR-NIVEDI ने 16 राज्यों में इसको लेकर अलर्ट जारी किया है। 

पशुपालकों और किसान भाइयों के लिए एक आवश्यक समाचार है। भारत में लंपी वायरस का खतरा एक बार फिर से दस्तक दे चुका है। गायों की बीमारी लंपी मई महीने में एक बार पुनः अपने पैर पसार सकती है। 

इसको लेकर 16 राज्यों में अलर्ट भी जारी किया गया है। इस बीमारी से विगत वर्ष भारत में पशुधन को काफी हानि पहुँची थी। कम समयावधि में ही इस बीमारी से सैकड़ों गायों की मृत्यु हो गई थी।

लंपी वायरस पूरे भारतभर में कहर मचा चुका है 

बतादें, कि अन्य दूसरे देशों से आई ये बीमारी भारतभर के बहुत सारे राज्यों में अपना असर दिखा चुकी है। इस बीमारी के फैलने की प्रमुख वजह मच्छर और मक्खी हैं। 

वहीं, अब एक बार पुनः इस बीमारी को लेकर अलर्ट जारी कर दिया गया है। ऐसी स्थिति में पशुपालकों और कृषकों को सावधान रहने आवश्यकता है। 

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बतादें, कि ICAR-NIVEDI की ओर से ये अलर्ट जारी किया गया है.राष्ट्रीय पशु चिकित्सा महामारी विज्ञान और रोग सूचना विज्ञान संस्थान (NIVEDI) भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के तहत एक प्रमुख संस्थान है, जो पशु चिकित्सा महामारी विज्ञान और रोग सूचना विज्ञान के क्षेत्र में अनुसंधान, प्रशिक्षण और शिक्षा के लिए समर्पित है। 

जानिए किन राज्यों में लंपी का अलर्ट जारी है ? 

NIVEDI संस्थान ने 16 राज्यों के 61 शहरों में लंपी के फैलने की चेतावनी दी है। इसमें सर्वाधिक कर्नाटक राज्य के 10 और उत्त‍राखंड राज्य के नौ शहर शामिल हैं। साथ ही, झारखंड के नौ शहर भी इसमें शुमार हैं। 

इसके साथ ही असम के सात, केरल छह, गुजरात के चार शहर शम्मिलित हैं। इसके साथ ही अरुणाचल प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, बिहार, हरियाणा, मध्य प्रदेश और राजस्थान भी इस सूची में शामिल हैं।

लंपी वायरस किस प्रकार से फैलता है ?

लंपी वायरस जिसको ज्यादातर लोग डेंगू बुखार के तोर पर भी जानते हैं, जो कि मच्छरों के काटने से फैलता है। यह बीमारी काफी गंभीर हो सकती है। वैक्सीन के साथ ही बॉयो सिक्योरिटी अपनाकर इस बीमारी से आसानी से लड़ा जा सकता है।

लंपी वायरस से बचने के लिए किन बातों का रखें विशेष ध्यान 

गायों की मच्छरों के प्रति विशेष सावधानी 

गायों को मच्छरों से बचाने के लिए, उनको वक्त-वक्त पर मच्छर और मच्छर के काटने से बचाने के उपाय अपनाने चाहिए। इसके लिए गायों के आसपास जल जमाव और मच्छरों के लार्वा को नियंत्रण करना अत्यंत आवश्यक होता है।

गायों का लंपी वायरस से संरक्षण हेतु टीकाकरण 

गायों को लंपी वायरस से बचाने के लिए वैक्सीनेशन कराना एक अहम उपाय है। यह वैक्सीन उपलब्ध होती है और गायों को लंपी बुखार के विरुद्ध संवेदनशील करती है।

अंगदान की स्थिति की जांच बेहद जरूरी  

गायों की अंगदान की हालत की नियमित रूप से जांच करनी बेहद जरूरी है। अंगदान में किसी भी अनियमितता या संकेत के लिए तुरंत वेटरनरी सलाह लेनी चाहिए।

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साफ-सफाई: गायों के आसपास की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है। स्थानीय विकासताओं को नियमित तोर पर साफ किया जाना चाहिए, ताकि मच्छरों का प्रकोप कम हो सके।

लंपी वायरस संक्रमण के क्या-क्या लक्षण हैं ?

गाय का अचानक बुखार एक संभावित लक्षण हो सकता है। वहीं, गाय को असामान्य थकावट का अनुभव हो सकता है। अक्सर गाय अनुचित पानी पीती हैं या पानी का अधिक प्रयोग करती हैं। 

गायों का खाना कम कर देना या उनका अपेटाइट कम हो जाना भी इसका एक प्रमुख लक्षण है। इसके अलावा गायों में अनियमितता और असामान्य थकान की समस्या हो सकती है। 

यदि आपकी गाय में ऐसे किसी भी लक्षण का पता चल रहा है, तो तुरंत वेटरनरी की सलाह लेनी चाहिए, ताकि सही उपचार की शुरुआत की जा सके।

लम्पी स्किन डिजीज (Lumpy Skin Disease)

लम्पी स्किन डिजीज (Lumpy Skin Disease)

- ये लेख हमारे मेरीखेती डॉटकॉम-१४ व्हाट्सएप्प ग्रुप मैं पियूष शर्मा ने दिया है

डॉ योगेश आर्य (पशुचिकित्सा विशेषज्ञ)

'लम्पी स्किन डिजीज' या एलएसडी (LSD - Lumpy Skin Disease) नई चुनौती के रूप में उभरकर सामने आ रही है। यह एक संक्रामक बीमारी है जिसमें दुधारू पशुओं व मवेशियों में गाँठदार त्वचा रोग या फफोले बनने शुरू हो जाते हैं और दुधारू पशुओं का दूध कम होने लगता है। 

इस बीमारी की वैक्सीन भी बाजार में उपलब्ध नही है और गॉट-पॉक्स (बकरी-पॉक्स) वैक्सीन को वैकल्पिक रूप में काम मे ली जा रही है। 

लंपी का ईलाज करना भी पशुपालक के लिए महंगा साबित हो रहा है ऐसे में कुछ देशी इलाज मिल जाये तो पशुपालकों के लिए काफी राहत वाली बात होगी।

'नेशनल डेयरी डवलपमेंट बोर्ड' और 'इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रांसडिसिप्लिनरी हेल्थ साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी' ने प्रो. एन. पुण्यमूर्थी के मार्गदर्शन में कुछ पारंपरिक पद्दति द्वारा देशी ईलाज सुझाए हैं।

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लम्पी स्किन डिजीज का देशी उपचार:-

  • पहली विधि- एक खुराक के लिए
  • पान का पत्ता- 10 पत्ते
  • काली मिर्च- 10 ग्राम
  • नमक- 10 ग्राम
  • गुड़ आवश्यकतानुसार

विधि- उपरोक्त वर्णित सामग्री को पीसकर सबसे पहले पेस्ट बना लेना है, अब इसमे गुड़ मिला लेवें। इन तैयार मिश्रण को पशु को थोड़ी थोड़ी मात्रा में खिलाएं।

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पहले दिन ये खुराक हर 3 घण्टे में देवें और उसके बाद दिनभर में तैयार तीन ताजा तैयार खुराकें 2 हफ्ते तक देवें।

दूसरी विधि- दो खुराक के लिए

  • लहसुन- 2 कली
  • धनियां- 10 ग्राम
  • जीरा- 10 ग्राम
  • तुलसी- 1 मुठ्ठी पत्ते
  • तेज पत्ता- 10 ग्राम
  • काली मिर्च- 10 ग्राम
  • पान का पत्ता- 5 पत्ते
  • छोटा प्याज - 2 नग
  • हल्दी पॉवडर- 10 ग्राम
  • चिरायता के पत्ते का पॉवडर- 30 ग्राम
  • बेसिल का पत्ता- 1 मुठ्ठी
  • बेल का पत्ता- 1 मुठ्ठी
  • नीम का पत्ता- 1 मुठ्ठी
  • गुड़- 100 ग्राम

विधि- उपरोक्त वर्णित सामग्री को पीसकर पेस्ट बना लो, इसमे गुड़ मिला लेवें। थोड़ी थोड़ी मात्रा में पशु को खिलाओ। पहले दिन इसकी खुराक हर 3 घण्टे में खिलाओ। दूसरे दिन से प्रतिदिन ताजा तैयार एक-एक खुराक सुबह शाम पशु को आराम आने तक देवें।

यदि घाव हो तो घाव पर लगाने हेतु मिश्रण:-

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सामग्री-

  • कुप्पी का पत्ता- 1 मुठ्ठी
  • लहसुन- 10 कलियाँ
  • नीम का पत्ता- 1 मुठ्ठी
  • नारियल/तिल का तेल- 500 मिली
  • हल्दी पॉवडर- 20 ग्राम
  • मेहंदी का पत्ता- 1 मुठ्ठी
  • तुलसी का पत्ता- 1 मुठ्ठी

विधि- उपरोक्त वर्णित सामग्री को पीसकर पेस्ट बना लेवें फिर इसमें 500 मिली नारियल/तिल का तेल मिलाकर उबाल लेवें और ठंडा कर लेवें। लगाने की विधि:- घाव को साफ करने के बाद इस मिश्रण को घाव पर लगाएं।

यदि घाव में कीड़े दिखाई दे तो-

पहले दिन नारियल तेल में कपूर मिलाकर लगाएं या सीताफल की पत्तियों को पीसकर पेस्ट बनाकर लगाएं।

लंपी स्किन बीमारी से बचाव के लिए राजस्थान सरकार ने जारी किए 30 करोड़ रुपये

लंपी स्किन बीमारी से बचाव के लिए राजस्थान सरकार ने जारी किए 30 करोड़ रुपये

बरसात का मौसम आते ही जानवरों को तमाम तरह की बीमारियां लगने लगती हैं। आज कल देश में लम्पीस्किन बीमारी यानी ‘लम्पी स्किन डिजीज‘ या एलएसडी (LSD - Lumpy Skin Disease) ने जोर पकड़ा हुआ है। 

यह बीमारी सबसे ज्यादा कहर राजस्थान राज्य में बरपा रही है। अच्छी बात ये है कि सरकार ने बीमारी को गंभीरता से लिया है और इससे पशुपालकों को निजात दिलाने के लिए 30 करोड़ रुपये जारी कर दिए हैं, 

ताकि पशुपालक दवाई खरीदते हुए पशुओं का इलाज करवा सकें। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) के इस कदम की सराहना हो रही है। सीएम अशोक गहलोत ने इस राशि को मुख्यमंत्री पशुधन निःशुल्क दवा योजना (Pashudhan Nishulk Dava Yojna) के अंतर्गत जारी किया है। 

यह बीमारी सबसे ज्यादा गायों को लग रही है। सरकार का मानना है कि इस फैसले का असर सकारात्मक होगा और इस बीमारी से बचाव के लिए दवाइयां पशुपालक जल्दी से जल्दी खरीद सकेंगे।

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वैसे इस बीमारी से प्रभावित राजस्थान इकलौता राज्य नहीं है, बल्कि सटे राज्य हरियाणा में भी इस रोग ने कहर बरपाया हुआ है। वैसे हरियाणा सरकार ने भी इस बीमारी को हल्के में नहीं लिया है और वैक्सिनेशन का काम शुरू करवा दिया है।

गौर करने वाली बात है कि हरियाणा देश के उन राज्यों में से एक है जहां ग्रामीण जनता अपनी आमदनी के लिए खेती किसानी और पशु धन पर निर्भर है। 

यही वजह है कि मनोहर लाल खट्टर की सरकार ने इस बीमारी के जल्दी से जल्दी रोकथाम की कोशिशें तेज कर दी हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अब तक 3000 वैक्सीन पशुपालकों को बांटी जा चुकी हैं, 

वहीं अभी 17000 वैक्सीन की जरूरत और आन पड़ी है। अगस्त महीने के अंत तक वैक्सीन के बांटने को लेकर और तेजी देखने को मिलेगी।

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एक आंकड़े के मुताबिक लंपी स्किन रोग देश के 17 राज्यों में अब तक फैल चुका है। लेकिन इस दौरान इसने सबसे ज्यादा प्रभावित राजस्थान और हरियाणा को किया है। 

अच्छी बात है कि राज्य सरकारों ने इसके लिए वैक्सिनेशन का काम शुरू कर दिया है लेकिन वैक्सिनेशन होने में समय भी लग सकता है। ऐसे में जरूरी है कि उसके पहले आप कुछ घरेलू उपचार ज़रूर कर लें। 

घरेलू उपचार क्या हो सकते हैं, इसके बारे में हिमाचल प्रदेश कृषि विश्‍वविद्यालय पालमपुर के पशु चिकित्‍सा विशेषज्ञ डॉ. ठाकुर ने बताया है।

उपचार के लिए क्या चाहिए होगा -

  • 10 ग्राम कालीमिर्च, 10 पान के पत्ते, 10 ग्राम नमक और गुड़ जरूरत के मुताबिक।
  • सभी चीज़ों को अच्छे से पीसें और तब तक पीसते रहें जब तक मिश्रित होकर पेस्ट न बन जाए और अब थोड़ा से गुड़ मिला लें। 
  • अब आपको इसे अपने पशु को थोड़ा-थोड़ा खिलाना है।
  • जब आप पहले दिन इसकी खुराक पशु को दें तो हर तीन घंटे में दें, समय के पाबंद रहें क्योंकि यह जरूरी है। - यह सिलसिला दो हफ्ते तक चलने दें और दिन में तीन खुराक ही खिलाएं।
  • हर एक खुराक ताजा ही तैयार करें, ऐसा न करें कि कल की बनाई खुराक को आज खिला दें, उसका असर नहीं होगा।

उपचार का दूसरा तरीका - इस तरीके में आपको एक मिश्रण तैयार करना होगा, जो आप घाव पर लेप के रूप में लगाएंगे। 

इसके लिए आपको लहसुन की 10 कली, मेहंदी के पत्ते कुछ, तिल का तेल करीब आधा लीटर, कुम्पी के कुछ पत्ते, हल्दी पाउडर, तुलसी के कुछ पत्ते चाहिए होंगे। 

इन सभी को मिक्सी या सिलबट्टे में पीस लें और पेस्ट बना लें । इसके बाद इसमें तिल का तेल मिलाते हुए उबाल लें, ठंडा होने के बाद लेप को आपको पशु के घाव पर लगाना है लेकिन इसके पहले पशु के घाव को अच्छी तरह साफ कर लें।

इसके बाद उसका पेस्ट आप घाव पर लगा दें, आपको हर रोज घाव पर इसे लगाना है और यह दो हफ्ते तक करना है। नेशनल डेयरी डवलपमेंट बोर्ड‘ और ‘इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रांसडिसिप्लिनरी हेल्थ साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी’ ने प्रो. एन. पुण्यमूर्थी के मार्गदर्शन में कुछ पारंपरिक पद्दति द्वारा देशी ईलाज सुझाए हैं, 

जिन्हे आप इस लेख में पढ़ सकते हैं : लम्पी स्किन डिजीज (Lumpy Skin Disease) वैसे अगर आपको वैक्सिनेशन का लाभ मिलता है तो उसे तुरंत लें क्योंकि घरेलू उपचार की अपनी सीमाएं जबकि वैक्सीन शर्तिया काम करती है लेकिन जब तक आपको वैक्सीन न मिले, घरेलू इलाज करते रहें।

लंपी स्किन बीमारी का हरियाणा में कहर, 633 पशुओं की मौत

लंपी स्किन बीमारी का हरियाणा में कहर, 633 पशुओं की मौत

लंपी स्किन बीमारी (Lumpy Skin Disease) अब आए दिन अपना कहर बरपा रही है। इस बीमारी की वजह से हरियाणा और राजस्थान में हालात बद से बदतर हो गए हैं। मीडिया में छपी खबरों के मुताबिक अब हरियाणा में लंपी बीमारी की वजह से 633 पशुओं की जानें गई हैं, जो चौंकाने वाली खबर है। सरकार का कहना है कि वे वैक्सिनेशन पर जोर दे रहे हैं, लेकिन जिस तरह से पशु दिन ब दिन दम तोड़ रहे हैं उससे लग रहा है कि इतने प्रयास काफी नहीं हैं। पिछले दिनों मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा था कि इस बीमारी की रोकथाम के लिए राज्य में 20 लाख टीके लगाए जाएंगे। जिसमें 3 लाख उपलब्ध हैं और बाकी 17 लाख का ऑर्डर दिया जाएगा। प्राप्त आंकड़ों के अनुसार अब तक केवल 245249 पशुओं का ही टीकाकरण हुआ है। ऐसे में एक बात साफ होती है कि जितनी तेजी से काम होना चाहिए, उसे देखते हुए हरियाणा सरकार अपने लक्ष्य से काफी पीछे चल रही है। अगर ऐसा ही रहा तो जल्दी ही राज्य में हालात और भी बदतर हो जाएंगे।


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देशभर के आंकड़ों पर नजर डालें तो अब तक 3497 गांव इस विकराल बीमारी की चपेट में आ चुके हैं। साथ ही 52,544 पशु इस बीमारी से संक्रमित हो चुके हैं। अगर आने वाले कुछ दिनों तक तुरत प्रयास नहीं किए जाते, तो मौतों का आंकड़ा और बढ़ेगा। इसके अलावा एक और अफवाह उड़ी है जिससे लोग सकते में हैं। कहा जा रहा है कि लंपी स्किन बीमारी जानवरों से इंसानों को भी लग सकती है। वैसे इस बात तो लेकर राज्य सरकार ने स्पष्टीकरण दिया है और कहा है कि ऐसा कुछ भी नहीं है और अफवाहों पर यकीन न करें।


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मुख्यमंत्री ने कहा है कि इस रोग से पशुओं की मृत्यु होने की आशंका बहुत कम है। और मृत्यु की दर को 1 से 5 प्रतिशत के बीच बताया गया है। कोरोना की तरह इस रोग के लिए भी बताया गया है कि केवल उन पशुओं को खतरा है जो पहले से किसी अन्य बीमारी से बीमार चल रहे हैं। वैसे अगर समय रहते पशुओं को वैक्सीनेशन मिल जाती है, तो पशु 2-3 दिन में ठीक भी हो जाता है। वैसे इस बीमारी से सबसे ज्यादा प्रभावित गौशालाएं हैं, क्योंकि उसमें पशु पास-पास बांधे जाते हैं। आंकड़ों के मुताबिक अब तक 286 गौशालाओं में 7938 गाय, बछड़े और बैल बीमार चल रहे हैं। जिसमें मृत्यु का आंकड़ा 126 है। सरकार का कहना है कि इस रोग की रोकथाम के लिए आप फॉगिंग करें ताकि मक्खी और मच्छर कम से कम पनप सकें।
किसानों की आय बढ़ाने का फॉर्मूला लेकर आई हरियाणा सरकार, किया 100 करोड़ का निवेश

किसानों की आय बढ़ाने का फॉर्मूला लेकर आई हरियाणा सरकार, किया 100 करोड़ का निवेश

गत वर्ष किसान आंदोलन ने केंद्र सरकार को हिला दिया था। वजह साफ थी कि किसान अपनी आय को लेकर बेहद परेशान है और वह MSP को किसी हाल में नहीं छोड़ना चाहता। लेकिन इससे भी जरूरी बात है कि किसानों की आय दूसरे स्रोतों से बढ़े। इन्हीं चीज़ों को ध्यान में रखते हुए हरियाणा सरकार ने घोषणा की है कि वे अब पारंपरिक फसलों के मुकाबले बागवानी फसलों की तरफ अपना रुख कर रहे हैं। इस कदम का मकसद किसानों की आमदनी बढ़ाना है।


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प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर का कहना है कि प्रदेश में किसानों के बीच बागवानी और पशुपालन पहले के मुकाबले बढ़ा है और आने वाले दिनों में इसे और बढ़ाने का लक्ष्य है। बागवानी को तरजीह देने की वजह फसल विविधीकरण नीति को बताया गया है। इस नीति के अंतर्गत फसलों के लिए जमीन हमेशा बेहतर बनी रहेगी। मौजूदा समय में हरियाणा की 7 प्रतिशत कृषि भूमि पर बागवानी होती है। साल 2030 तक बागवानी का प्रतिशत 30 तक करने की संभावनाएं हैं। इसके लिए सरकार ने 14 सेंटर ऑफ एक्सिलेंस बनाए हैं जो बागवानी में इस्तेमाल होने वाली नवीनतम टेक्नॉलजी के बारे में जानकारी देगी। इसमें निवेश की बात करें तो अब तक 100 करोड़ से ज्यादा की राशि सरकार इन्वेस्ट कर चुकी है। इसके अलावा सरकार ने पशुपालन को भी बढ़ावा दिया है। मुख्यमंत्री का कहना है कि वे दूध के उत्पादन में हरियाणा को नंबर 1 बनाना चाहते हैं।


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प्रदेश के पशुओं में इस समय लंपी बीमारी का प्रकोप (Lumpy Skin disease) बढ़ा है जिसके चलते पशुपालक खासे परेशान हैं। लेकिन इसको लेकर सरकार किसानों के साथ खड़ी है और सरकार ने कहा है कि वे 20 लाख पशुओं का वैक्सिनेशन कराएंगे। अभी उनके पास 3 लाख वैक्सीन उपलब्ध हैं जबकि 17 लाख वैक्सीन का ऑर्डर किया गया है। हाल ही में मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने पशुपालन और बागवानी के दो नए केंद्रों को लॉन्च किया है।


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ये अनुसंधान केंद्र खरकड़ी में हैं जिनके नाम क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र व पशुविज्ञान केंद्र हैं। गौर करने वाली बात है कि इन केंद्रों को बनाने के लिए ग्राम पंचायत खरकड़ी ने 120 एकड़ जमीन दी है। इन केंद्रो को बनने में 39 करोड़ रुपये लगेंगे और पूरा प्रोजेक्ट 2 सालों में बनकर तैयार हो जाएगा। इन केंद्रों में आपको देश विदेश की सब्जियों, फलों, औषधीय और सुगंधित पौधों, मसालों की वैराइटी से संबंधित हर चीज उपलब्ध होगी। आप सोच रहे होंगे कि आखिर इन केंद्रों से आपको क्या फायदा होगा, तो आपको बता दें इन केंद्रों में बागवानी फसलों की सबसे बेहतरीन किस्मों का विकास किया जाएगा जो कीटों को लगने नहीं देंगी और फसलों का विकास बेहतरीन ढंग से होगा। साथ ही किसान यहां से बढ़िया क्वालिटी वाले पौधे व बीज ले सकेंगे जिससे उन्हें फसलों में फायदा होगा। साथ ही नई तकनीक को बढ़ाने में भी काम होगा।
लंपी स्किन बीमारी को लेकर राजस्थान सरकार ने कसी कमर, भर्ती होंगे अस्थाई डॉक्टर

लंपी स्किन बीमारी को लेकर राजस्थान सरकार ने कसी कमर, भर्ती होंगे अस्थाई डॉक्टर

लंपी स्किन बीमारी जिस तरह से पूरे देश में कहर बरपा रही है, उसे देखते हुए राज्य सरकारें तुरफ फुरत में फैसले ले रही हैं ताकि इस जानलेवा बीमारी से पशुओं को बचाया जा सके। पिछले दिनों राजस्थान और हरियाणा सरकार ने अपने-अपने राज्यों में वैक्सिनेशन की प्रक्रिया तेज कर दी थी। लेकिन जिस तरह से मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, उन्हें और बेहतर तरीके से नियंत्रण करने के लिए राजस्थान सरकार ने एक और महत्वपूर्ण फैसला लिया है। दरअसल, इस काम को मिशन मोड में खत्म करने के लिए राजस्थान सरकार ने 200 डॉक्टरों की अस्थायी तौर पर भर्ती करने का फैसला लिया है। ये डॉक्टर मवेशियों के टीकाकरण में तेजी लाने में अहम भूमिका निभाएंगे।


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इस बात की जानकारी राजस्थान के पशुपालन मंत्री लालचन्द कटारिया ने दी है। उन्होंने कहा है कि राज्य सरकार पशुओं को इस रोग से निजात दिलाने के लिए सभी तरह के प्रयास कर रही है। यही वजह है कि जिस क्षेत्र में ज्यादा रोगों की जानकारी मालूम पड़ रही है, वहां के लिए अस्थायी डॉक्टर नियुक्त किए गए हैं ताकि रोगों के मामलों में रोकथाम लाई जा सके। साथ उन्होंने कहा कि डॉक्टरों को और मुस्तैदी से काम करने की जरूरत है ताकि पशुपालकों का किसी तरह कोई नुकसान न हो। उन्होंने कहा कि राजस्थान में जब भी इस तरह की आपदा आती है, तो स्वयंसेवी संस्थाओं से लेकर समाज के लोगों का खूब सहयोग मिलता है। प्राप्त जानकारी के अनुसार अभी तक राज्य में करीब ढाई लाख पशुओं को वैक्सीन लगाई जा चुकी हैं। डॉक्टर भर्ती के बारे में विस्तार से बताते हुए पशुपालन मंत्री लालचंद कटारिया ने कहा कि राज्य में पशुओं की बेहतरी को देखते हुए 1 हजार 436 पशुध सहायकों की भर्ती की जाएगी। इसके अलावा तत्काल अस्थायी आधार पर 300 पशुधन सहायक होंगे। साथ ही 200 वेटरनरी डॉक्टर अस्थायी तौर पर भर्ती किए जाएंगे।


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मौजूदा हालातों को देखते हुए सभी पशु विभाग के दफ्तरों को छुट्टी के दिनों में भी खुले रहने के आदेश जारी कर दिए गए हैं, ताकि छुट्टी के दिन भी किस तरह की दिक्कत होने पर पशुओं के मालिक डॉक्टरों से संपर्क कर सकें। साथ ही कहा गया है कि इस बीमारी के बारे में हर गांव को जागरूक किया जाए। साथ ही अधिकारियों को कहा गया है कि हर रोज प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करें, ताकि हर तरह की समस्या को हल किया जा सके।


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साथ ही अधिकारियों को कहा गया है कि वे गौशाला वालों को बोलें कि पशुओं के आस-पास जितनी हो सके सफाई रखें, क्योंकि वातावरण अशुद्ध होने की वजह से यह बीमारी ज्यादा फैलती है। प्रदेश में अब तक सबसे ज्यादा संक्रमित पशु जोधपुर से सामने आए हैं, जहां इसकी संख्या 1 लाख के करीब है और करीब 2800 पशुओं की मौत हो चुकी है। ऐसे में ज्यादा प्रभावित जिलों पर प्रशासन ज्यादा ध्यान दे रहा है।
मध्य प्रदेश सरकार ने लंपी रोग को लेकर जारी की एडवाइजरी

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डॉ. आर.के. मेहिया ने बताया कि शासन और प्रशासन की लगातार सतर्कता और ग्रामीणों को दी जा रही समझाइश से लम्पी (LSD – Lumpy Skin Disease) प्रकरणों में स्थिति नियंत्रण में है। उन्होंने कहा कि संतोष की बात है कि प्रकरण बढ़े नहीं है, कुछ हद तक घटे हैं। प्रदेश में लम्पी के विरूद्ध अब तक एक लाख 2 हजार से अधिक गौ-वंश का टीकाकरण किया जा चुका है।


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डॉ. मेहिया ने बताया कि लगातार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पशुपालन विभाग के संभागीय और जिला स्तरीय अधिकारी और लैब प्रभारी को विषय-विशेषज्ञों द्वारा मार्गदर्शन दिया जा रहा है। स्थिति की लगातार समीक्षा कर गौ-वंश में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, निदान और उपचार जारी है।

लक्षण एवं सुझाव

लम्पी रोग से पशुओं को शुरू में बुखार आता है और वे चारा खाना बंद कर देते हैं। इसके बाद चमड़ी पर गाँठें दिखाई देने लगती है, पशु थका हुआ और सुस्त दिखाई देता है, नाक से पानी बहना एवं लंगड़ा कर चलता है। यह लक्षण दिखाई देने पर पशुपालक तुरंत अपने नजदीकी पशु चिकित्सालय या पशु औषधालय से संपर्क कर बीमार पशुओं का उपचार कराएँ। पशु सामान्यत: 10 से 12 दिन में स्वस्थ हो जाता है।


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क्या करें, क्या न करें

संक्रमित पशु को स्वस्थ पशु से तत्काल अलग करें। पशु चिकित्सक से तत्काल उपचार आरंभ कराएँ। संक्रमित क्षेत्र के बाजार में पशु बिक्री, पशु प्रदर्शनी, पशु संबंधी खेल आदि पूर्णत: प्रतिबंधित करें। संक्रमित पशु प्रक्षेत्र, घर, गौ-शाला आदि जगहों पर साफ-सफाई, जीवाणु एवं विशाणु नाशक रसायनों का प्रयोग करें। पशुओं के शरीर पर होने वाले परजीवी जैसे- किलनी, मक्खी, मच्छर आदि को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करें। स्वस्थ पशुओं का टीकाकरण कराएँ और पशु चिकित्सक को आवश्यक सहयोग भी करें।
दिल्ली सरकार ने की लम्पी वायरस से निपटने की तैयारी, वैक्सीन खरीदने का आर्डर देगी सरकार

दिल्ली सरकार ने की लम्पी वायरस से निपटने की तैयारी, वैक्सीन खरीदने का आर्डर देगी सरकार

देश में लम्पी वायरस ( Lumpy Virus ) कहर मचा रहा है। इस बीमारी के कारण देश में अब तक लाखों मवेशी मारे जा चुके हैं। लम्पी वायरस का सबसे ज्यादा कहर राजस्थान में देखने को मिला है, जहां पर इस वायरस की वजह से रातों रात लाखों गायों ने दम तोड़ दिया। इसके साथ ही राजस्थान की सीमा से लगने वाले राज्यों में भी इस वायरस का प्रकोप देखा जा रहा है। इस वायरस ने दिल्ली को भी अपनी चपेट में ले लिया है, जिससे दिल्ली के किसान बेहद चिंतित हैं। इसके समाधान के लिए अब दिल्ली सरकार ने पहल शुरू कर दी है। इसके तहत दिल्ली सरकार 60 हजार गोट पॉक्स वैक्सीन ( Goat Pox Vaccine ) खरीदने जा रही है। इसकी जानकारी दिल्ली सरकार में कैबिनेट मंत्री गोपाल राय ने दी थी। उन्होंने बताया कि लम्पी वायरस दिल्ली में तेजी से फ़ैल रहा है। अभी तक दिली में इस वायरस के 173 मामले दर्ज किये जा चुके हैं जो बेहद चिंता का विषय है। दिल्ली में लम्पी वायरस के सभी मामले दक्षिण-पश्चिम दिल्ली से सामने आये हैं जहां इस वायरस का प्रकोप दिनों दिन बढ़ता जा रहा है। सरकारी पशु चिकित्स्कों के साथ दिल्ली सरकार की टीम ने गोयला डेयरी, घुम्मनहेड़ा, नजफगढ और रेवला खानपुर इलाके से लम्पी वायरस के ये मामले दर्ज किये हैं। इन इलाकों में बहुत सारी गौशालाएं मौजूद हैं जहां पर हजारों की तादाद में गायें रहती हैं।


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दिल्ली सरकार में कैबिनेट मंत्री गोपाल राय ने बताया कि दिल्ली में लगभग 80 हजार गायें हैं। इस हिसाब से सरकार ने कैलकुलेशन करके 60 हजार गोट पॉक्स वैक्सीन खरीदने की योजना बनाई है। ताकि जल्द से जल्द राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की गायों को लम्पी वायरस से सुरक्षित किया जा सके। गोपाल राय ने बताया कि वैक्सीन खरीददारी अपने अंतिम दौर में है और दवा कम्पनी की तरफ से जल्द से जल्द दिल्ली सरकार को वैक्सीन उपलब्ध करवा दी जाएंगी। गोपाल राय ने बताया कि सरकार इस वायरस से निपटने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। इसके तहत दिल्ली सरकार ने वायरस की रोकथाम में के लिए सैम्पल लेने प्रारम्भ कर दिए हैं और सैम्पलों की जांच जल्दी से जल्दी की जा रही है ताकि समय रहते गायों में वायरस का पता लगाया जा सके। इसके लिए सरकार ने वायरस के नमूने इकट्ठे करने के लिए दो मोबाइल पशु चिकित्सालय भी तैनात किए हैं जो जगह-जगह पर जाकर पशुओं से सैंपल एकत्रित करके जांच के लिए भेज रहे हैं। इसके साथ ही सरकार ने वायरस से निपटने के लिए ग्यारह रैपिड रिस्पांस टीमों का गठन किया है। साथ ही कई अन्य लोगों को नियुक्त किया है जो समूह में जाकर गौ पालकों को लम्पी वायरस से होने वाले नुकसान के बारे में जागरुक करेंगे। गोपाल राय ने बताया कि सरकार ने इस बीमारी से सम्बंधित गौ पालकों और किसानों की समस्याओं को सुनने के लिए एक हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया है। किसान 8287848586 में फ़ोन करके वायरस से सम्बंधित अपनी शंकाओं का समाधान कर सकते हैं। इसके लिए सरकार ने एक अलग से कार्यालय बनाया है जहां पर इसका कॉल सेंटर स्थापित किया गया है।


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पशुओं में फैलने वाला यह लम्पी रोग देश के कई राज्यों में तेजी से पैर पसार रहा है। अभी तक देश के 12 से अधिक राज्यों में 15 लाख से ज्यादा पशु इस रोग से संक्रमित हो चुके हैं। साथ ही हजारों पशुओं की इस वायरस की वजह से मौत हो चुकी है। इसका कहर मुख्यतः राजस्थान, मध्य प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, आंध्र प्रदेश और दिल्ली में देखने को मिल रहा है। हालांकि कई प्रदेशों की सरकारों ने वैक्सीनेशन की रफ़्तार तेज करके इस रोग पर काबू पाने का भरसक प्रयास किया है। फिलहाल सबसे ज्यादा वैक्सीनेशन राजस्थान में किया जा रहा है क्योंकि इस वायरस की वजह से राजस्थान सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य है।

क्या है लम्पी वायरस और यह कैसे फैलता है ?

विशेषज्ञों ने बताया है कि लम्पी वायरस एक त्वचा रोग है। यह पशुओं के बीच तेजी से फैलता है। इस वायरस के माध्यम से स्वस्थ्य पशु, संक्रमित पशु के संपर्क में आने के बाद तुरंत ही संक्रमित हो जाता है। इसके अलावा यह वायरस मच्छरों, मक्खियों, जूं और ततैया के माध्यम से भी फैलता है, क्योंकि इनकी वजह से स्वस्थ्य पशुओं का बीमार पशुओं के साथ संपर्क स्थापित हो जाता है। इसके अलावा यह वायरस पशुओं के एक ही पात्र में पानी पीने से भी तेजी से फैलता है। इस वायरस से संक्रमित होने के बाद मवेशियों में तेज बुखार, आंखों से पानी आना, नाक से पानी निकलना, त्वचा की गांठें और दुग्ध उत्पादन में कमी हो जाना जैसे लक्षण आसानी से देखे जा सकते हैं जो बेहद चिंता का विषय है, क्योंकि इस वायरस से संक्रमित होने के बाद पशु बहुत जल्दी दम तोड़ देते हैं।


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लम्पी वायरस के बढ़ते प्रकोप के कारण देश में हजारों मवेशी प्रतिदिन मारे जा रहे हैं, जिससे देश में जानवरों की कमी हो सकती है। इसका सीधा असर देश में दुग्ध उत्पादन पर पड़ेगा। अगर ऐसा ही चलता रहा तो कुछ दिनों बाद भारत में दूध की कमी महसूस की जाने लगेगी, जो सरकार के लिए एक नया सिरदर्द साबित हो सकती है। क्योंकि दुग्ध उत्पादन में कमी के बाद दूध के दामों में तेजी से बढ़ोत्तरी संभव है और यह बाजार में ग्राहकों को प्रभावित करेगी।
लम्पी वायरस: मवेशियों के लिए योगी सरकार बनाने जा रही है 300 किमी लंबा सुरक्षा कवच

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अभी देश को कोरोना जैसे भयावह और जानलेवा बीमारी से पूर्ण रूप से निजात मिला भी नहीं था, तब तक देश के 12 राज्यों के पशुओं के ऊपर एक भयावह वायरस का प्रकोप शुरू हो गया और वह वायरस है ‘लम्पी स्किन डिजीज‘ या एलएसडी (LSD – Lumpy Skin Disease) वायरस. 

इस बीमारी की वजह से देश में लगभग 56 हजार से अधिक मवेशी की मौत अब तक हो चुकी है. आपको बताते चले कि उत्तर प्रदेश राज्य में भी इसका प्रकोप काफी बढ़ गया है और अब तक वहां लगभग 200 पशुओं की मौत हो चुकी है.

इसको यूपी सरकार ने काफी गंभीरता से लिया है और इसके लिए काफी महत्वपूर्ण कदम भी उठाए है. आपको मालूम हो की यूपी के योगी सरकार ने वहां के गायों और अन्य मवेशियों को सुरक्षित रखने के लिए सुरक्षा कवच का निर्माण करने का निर्देश दिया है. गौरतलब है की सुरक्षा कवच के रूप 300 किमी का इम्यून बेल्ट (Immune Belt) बनाने का निर्णय लिया गया है.

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पशुपालन विभाग का मास्टर प्लान

खबरों के मुताबिक उत्तर प्रदेश सरकार पशुपालन विभाग के मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र ने इम्यून बेल्ट पर आधारित मास्टर प्लान सरकार के सामने पेश किया है, जिस पर यूपी की योगी सरकार ने सहमति भी जताई है और उस पर कार्य करने को योजना भी तैयार किया है. 

योगी सरकार का मानना है कि इस सुरक्षा कवच यानी इम्यून बेल्ट के निर्माण से वायरस का प्रसार प्रतिबंधित होगा.

क्या है इम्यून बेल्ट ?

इम्यून बेल्ट एक सुरक्षा कवच है जो पीलीभीत और इटावा के बीच बनाई जाएगी. इस इम्यून बेल्ट का दायरा 300 किमी लंबा और 10 किमी चौड़ा होगा. Immune Belt - Pilibhit to Etawah, UP आपको मालूम हो कि लंपी स्किन डिजीज के वायरस का प्रकोप वेस्ट यूपी में सबसे ज्यादा है. यहां सबसे ज्यादा संक्रमण देखा जा रहा है. वेस्ट यूपी के कुछ जिले जैसे अलीगढ़, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर सबसे ज्यादा प्रभावित है. 

वही मथुरा, बुलंदशहर, बागपत, हापुड़, मेरठ में लम्पी स्किन डिजीज के वायरस का संक्रमण काफी तेजी से फ़ैल रहा है. संक्रमण के तेज होने के कारण ही योगी सरकार ने ये सुरक्षा कवच के रूप में 5 जिलों और 23 ब्लॉकों से होकर गुजरने वाली इम्यून बेल्ट बनाने का निर्णय किया है. 

आपको यह भी जान कर हैरानी होगी कि यह इम्यून बेल्ट मलेशियाई मॉडल पर आधारित होगा.

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खबरों के अनुसार इम्यून बेल्ट वाले इलाके में निगरानी के लिए कुछ टास्क फोर्स को सुरक्षा कवच के रूप में तैनात किए जाएंगे. 

यह टास्क फोर्स मवेशियों में वायरस के उपचार और उनके निगरानी पर खास ध्यान देंगे ताकि उस इम्यून बेल्ट से कोई संक्रमित मवेशी बाहर न आए और अन्य मवेशियों को संक्रमित ना करें. 

गौरतलब हो की राज्य में अब तक लगभग 22000 गायों को इस लम्पी वायरस का सामना करना पड़ा है यानी वो संक्रमित हुए हैं. यह राज्य के लगभग 2331 गावों का आंकड़ा है. 

असल में अब तक राज्य के 2,331 गांवों की 21,619 गायें लम्पी वायरस की चपेट में आ चुकी हैं, जिनमें से 199 की मौत हो चुकी है. जबकि 9,834 का इलाज किया जा चुका है और वे ठीक हो चुकी हैं. 

जानलेवा वायरस पर काबू पाने के लिए योगी सरकार बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियान चला रही है. अब तक 5,83,600 से अधिक मवेशियों का टीकाकरण किया जा चुका है. 

यह कदम लम्पी वायरस पर नकेल कसने के दिशा में एक सफल प्रयास है और आशा है की इस तरह के योजना और सुरक्षा कवच (इम्युन बेल्ट) बनाने से जल्द ही यूपी सरकार इस वायरस को भी मात दे देगी.

इम्यून बेल्ट का कार्य

यूपी सरकार की तरफ से बनाई जाने वाली 300 किमी लंबी इम्यून बेल्ट को मलेशियाई मॉडल के तौर पर जाना जाता है. जानकारी के मुताबिक पशुपालन विभाग द्वारा इम्यून बेल्ट वाले क्षेत्र में वायरस की निगरानी के लिए एक टॉस्क फोर्स का गठन किया जाएगा. यह टास्क फोर्स वायरस से संक्रमित जानवरों की ट्रैकिंग और उपचार को संभालेगी.

अन्य राज्यों से होता हुआ अब झारखंड में भी पहुंचा लम्पी रोग, राज्य सरकार हुई अलर्ट

अन्य राज्यों से होता हुआ अब झारखंड में भी पहुंचा लम्पी रोग, राज्य सरकार हुई अलर्ट

देश में कहर बरपा रहा ‘लम्पी स्किन डिजीज‘ या एलएसडी (LSD – Lumpy Skin Disease) रोग, अब कई राज्यों से होता हुआ झारखंड में भी पहुंच गया है। 

ये संक्रमण राज्य के कई जिलों में पैर पसार रहा है, जिसने सरकारी अधिकारियों की रातों की नींद खराब कर दी है। इस लंपी रोग से मवेशी लगातार संक्रमित हो रहे हैं। 

गर इसे नहीं रोका तो यह रोग राज्य में तेजी से फ़ैल सकता है और ज्यादा से ज्यादा मवेशियों को अपनी चपेट में ले सकता है, हालांकि अभी तक राज्य में आधिकारिक तौर पर किसी भी मवेशी के मरने की पुष्टि नहीं हुई है। 

लेकिन इसके बावजूद भी हजारों की संख्या में मवेशी बीमार बताये जा रहे हैं। लम्पी स्किन डिजीज एक संक्रामक रोग है, जो संक्रमित पशुओं के संपर्क में आने से अन्य पशुओं के ऊपर फ़ैल जाता है। 

इसके अलावा यह रोग एक ही बर्तन में पानी पीने से तथा मच्छरों, मक्खियों, जूँ और ततैया के माध्यम से भी एक मवेशी से दूसरे मवेशी तक फैलता है। यह पशुओं के लिए बेहद घातक होता है। संक्रमण ज्यादा फैलने से पशुओं की मौत भी हो सकती है।

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प्रारंभिक तौर पर इस रोग से संक्रमित मवेशी रांची और देवघर में पाए गए हैं, जिनके मामलों को देखते ही सरकार चिंतित हो गई है। 

इसलिए सरकार ने इस बीमारी को और अधिक फैलने से रोकने के लिए राज्य के 24 जिलों में तत्काल एडवाइजरी जारी की है, जिसमें बताया गया है कि किसी भी पशु में लम्पी रोग के लक्षण दिखने पर उसके नमूने तत्काल जांच के लिए भेजें।

इस साल इस रोग के मामले देश भर में बेहद तेजी के साथ बढ़ रहे हैं जिसको देखकर राज्य सरकार चिंतित है। झारखंड में एक साल पहले भी इस रोग के मामले आये थे, तब सरकार ने बहुत जल्दी ही इस रोग पर काबू पा लिया था। 

लेकिन इस साल परिस्थियां अलग हैं, सरकार को इन परिस्थियों के साथ रोग पर काबू पाने के लिए कड़ी मशक्कत करनी होगी। 

सरकार ने किसानों को सलाह दी है कि जिन पशुओं में लम्पी रोग के लक्षण दिखें, उन्हें अन्य पशुओं से तुरंत अलग करके आइसोलेट कर दें। 

अभी तक यह स्किन लम्पी रोग देश भर में कहर बरपा रहा है, इस रोग के कारण गायों की त्वचा में गाठें पड़ जाती हैं। मवेशी को तेज बुखार रहता है तथा दुग्ध उत्पादन में भी कमी आती है। 

अभी तक भारत में 3 लाख से ज्यादा मवेशी इस रोग से संक्रमित हो चुके हैं जबकि लगभग 57 हजार मवेशियों की इस रोग की वजह से मौत हो चुकी है।

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हर राज्य की राज्य सरकार इस रोग से निपटने का भरपूर प्रयास कर रही है। इसके तहत मवेशियों को वैक्सीन लगवाई जा रही है। लम्पी रोग की वजह से दुग्ध उत्पादन में भी भारी कमी आई है। 

इसको लेकर आम लोग भी भयभीत हैं, कई राज्यों में लोगों ने इस रोग के डर से दूध पीना बंद कर दिया है। इन घटनाक्रमों को देखते हुए सरकार बेहद चिंतित है और जल्द से जल्द इस रोग से निपटने के उपायों पर विचार कर रही है।

राजस्थान में लंपी के वेरिएंट बदलने की आशंका से पशुपालको में चिंता

राजस्थान में लंपी के वेरिएंट बदलने की आशंका से पशुपालको में चिंता

आजकल पशुओं में लंपी स्किन रोग यानी ‘लम्पी स्किन डिजीज‘ या एलएसडी (LSD – Lumpy Skin Disease) किसान व पशुपालकों के लिए बेहद चिंता का विषय बना हुआ है, जिसके चलते लोग दूध का सेवन तक कम करने के लिए मजबूर हो गए हैं। देश के कई राज्य लंपी स्किन रोग की चपेट में आ गए हैं। हाल ही में राजस्थान सूबे के पशुपालन मंत्री लालचंद्र कटारिया ने लंपी रोग के वेरिएंट बदलने की सम्भावना व्यक्त की है, जिससे निपटने के लिए राजस्थान सरकार ५०० पशु एम्बुलेंस खरीदने व पशु चिकित्सा केंद्र को सुचारु एवं मजबूत बनाने की पुरजोर तैयारी में है। क्योंकि पहले लंपी स्किन रोग सिर्फ गोवंश में ही था, लेकिन अब भैंस भी इसकी चपेट में आ चुकी हैं, इसलिए राज्य सरकार इसको बहुत ही गंभीरता से ले रही है। पशुपालन मंत्री लालचंद्र कटारिया जी ने ये भी बताया कि राजस्थान सरकार गोवंश का मुफ्त में टीकाकरण तेज़ी से करा रही है एवं पशुओं में लम्पी रोग की तबाही को रोकने के लिए पर्याप्त मात्रा में पशु चिकित्सा केंद्रों पर औषधी का पर्याप्त बंदोबस्त भी किया है। पशुपालकों को इससे काफी सहायता प्राप्त होगी और इस रोग से निपटने में भी सहजता होगी। हालाँकि भैसों में इस रोग के पाए जाने से पशुपालक व किसान दोनों की ही समस्या बढ़ गयी है। पशुपालन विभाग भी इस बात को बहुत ही गंभीरता से ले रहा है।

राजस्थान सरकार ने ३० करोड़ की राशि पशु चिकित्सा सुविधा के लिए जारी की

लंपी स्किन रोग से निवारण के लिए सरकार ने पशु चिकित्सा केंद्रों के लिए ३० करोड़ की धन राशि जारी की है, जो कि सहजता से इस रोग से निपटने में काफी हद तक मदद करेगी और पशुपालकों पर भी इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। साथ ही उनके रोगग्रस्त पशुओं को पशु चिकित्सा केंद्र ले जाने के लिए एम्बुलेंस की भी सुविधा प्रदान की जाएगी। पशुपालक सरकार के इस सराहनीय कदम की प्रशंसा कर रहे हैं।
नेशनल डेयरी डवलपमेंट बोर्ड‘ और ‘इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रांसडिसिप्लिनरी हेल्थ साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी’ ने प्रो. एन. पुण्यमूर्थी के मार्गदर्शन में 
कुछ पारंपरिक पद्दति द्वारा देशी ईलाज सुझाए हैं, जिन्हे आप इस लेख में पढ़ सकते हैं : लम्पी स्किन डिजीज (Lumpy Skin Disease)

चिकित्सा केंद्र में कितनी भर्तियां होने की सम्भावना है

तेज़ी से फैलने वाले इस संक्रामक लंपी रोग से निपटने के लिए अधिक मात्रा में कर्मचारियों की आवश्यकता पड़ रही है। इसके अनुरूप सरकार ने अर्जेंट टेम्पररी बेसिस पर काफी नियुक्तियां की है एवं अभी और नियुक्ति करने के विचार में है, क्योंकि पशुओं को लंपी स्किन रोग तीव्रता से चपेट में लेता जा रहा है। उपरोक्त में जैसा बताया गया है कि इसने भैंसों में भी अपनी दस्तक दे दी है, इसके चलते पशु चिकित्सा केंद्रों में पशुधन सहायक व पशु चिकित्सक दोनों की आवश्यक पड़ेगी, इसलिए सरकार द्वारा ३०० पशुधन सहायकों की भर्ती की जा रही है।

गोवंश टीकाकरण को लेकर राजस्थान की रणनीति क्या है

राजस्थान राज्य सरकार ने लंपी स्किन रोग की दस्तक की खबर से ही गंभीरता पूर्वक गोवंश टीकाकरण करना सुचारु रूप से शुरू करा दी थी, साथ ही पशुओं के लिए प्रयाप्त मात्रा में औषधि और पशु चिकित्सकों का प्रबंध भी कर चुकी है। इसके साथ ही गोट पॉक्स टीकाकरण का पूरा खर्चा राज्य सरकार खुद ही वहन कर रही है। हालाँकि केंद्र सरकार से भी इस चिंताजनक पशु रोग से सम्बंधित मदद के लिए राजस्थान सरकार परस्पर वार्ता में है।