इस राज्य के पशुपालकों को मिलेगा भूसे पर 50 फीसदी सब्सिडी, पशु आहार पर भी मिलेगा अब ज्यादा अनुदान

Published on: 04-Dec-2022

उत्तराखंड सरकार अपने राज्य के किसानों का ख्याल रखने में कोई कसर नही छोड़ रही है। राज्य सरकार का प्रयास है, कि राज्य में होने वाली खेती को फायदे का सौदा बनाया जाए तथा जल्द से जल्द किसानों की आय दोगुनी की जाए, ताकि उत्तराखंड के गावों से किसानों और लोगों का पलायन रोका जा सके। इसी कड़ी में उत्तराखंड सरकार नित नई घोषणाएं करती रहती हैं, ताकि किसान अपने आपको इस पर्वतीय राज्य में मजबूती के साथ खड़ा रख पाए। अभी हाल ही में उत्तराखंड सरकार ने पशुपालकों को राहत देते हुए घोषणा की है, कि सरकार की ओर से भूसे की खरीद पर 50 प्रतिशत की सब्सिडी दी जाएगी। सरकार ने यह निर्णय भूसे के बढ़ते हुए दामों को लेकर लिया है। वर्तमान में राज्य में भूसे का दाम 1600 रुपये प्रति क्विंटल है। जिस पर सरकार 800 रुपये प्रति क्विंटल की सब्सिडी देने जा रही है। इस हिसाब से अब राज्य के किसानों और पशुपालकों को 1 क्विंटल भूसे की खरीद पर मात्र 800 रुपये ही चुकाने होंगे। [embed]https://www.youtube.com/watch?v=wdZnodFWSB8&t=17s[/embed] इसके साथ ही सरकार ने पशु आहार पर मिलने वाले अनुदान में भी बढ़ोत्तरी की है। जहां पहले पशु आहार पर 2 रुपये प्रति किलो की सब्सिडी दी जाती थी। उसे बढ़ाकर सरकार ने राज्य के मैदानी क्षेत्रों के लिए 4 रुपये प्रति किलो कर दिया गया है। इसी के साथ अब राज्य के पहाड़ी क्षेत्रों में पशु आहार पर मिलने वाली सब्सिडी को बढ़ाकर 6 रुपये प्रति किलो कर दिया गया है।



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सरकारी अधिकारियों ने नोटिफिकेशन के माध्यम से बताया है, कि सहकारिता विभाग की तरह ही अब दुग्ध विकास विभाग के माध्यम से भी पशुपालकों को साइलेज पर 75 फीसद की सब्सिडी प्रदान की जाएगी। अगर सरकारी आंकड़ों की बात करें तो प्रदेश में 8 लाख से ज्यादा पशुपालक हैं। जो सीधे तौर पर पशुपालन के व्यवसाय से जुड़े हुए हैं। इनमें से लगभग 52 हजार दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों से जुड़े हुए हैं। इन सभी की पहचान करके भूसे पर तथा पशु आहार पर सब्सिडी प्रदान की जाएगी। इस योजना को कैबिनेट की तरफ से मंजूरी मिल गई है। राज्य सरकार का अनुमान है, कि सरकार के इन फैसलों से राज्य के किसानों और दुग्ध उत्पादकों को फायदा होगा। जिससे उनकी आमदनी में भी बढ़ोत्तरी हो सकेगी। जो राज्य में पशुपालन को बड़े स्तर पर बढ़ाने में सहायक होगा। अगर किसानों की खेती और पशुपालन के माध्यम से आमदनी बढ़ती है, तो यह राज्य में लगातार हो रहे पलायन को रोकने में मददगार साबित हो सकता है।

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