मिट्टी के बिना खेती करना नहीं रहा असंभव : पटना के व्यक्ति ने किया यह संभव

Published on: 24-Jun-2022

बिना मिट्टी के खेती करना संभव है. पटना के एक व्यक्ति ने यह करके दिखाया और सालो से कर रहा है

बिना मिट्टी के पेड़ पौधे उगाना एक असंभव काम था. परंतु अब नही, अब बिना मिट्टी के भी पेड़ पौधे उगाना मुमकिन है. एक किसान ने बिना मिट्टी के पेड़ पौधे उगा के दिखाए है. नई तकनीक के सहारे पटना जैसे शहरों में हरियाली को बनाए रखने की कोशिश की है. पर्यावरण को संतुलित रखने के लिए पेड़ पौधों का होना जरूरी है. परंतु अभी के समय लोग अपने फायदे के लिए पेड़ पौधों को काट रहे है, जिससे पर्यावरण असंतुलित हो रहा है. यदि इस तकनीक के सहारे लोग पेड़ पौधे उगाने लगे तो पर्यावरण को संतुलित रखने में मदद मिलेगी. इस तकनीक को हाइड्रोपॉनिक (Hydroponics Farming) कहते है. इस तकनीक से बिना मिट्टी के खेती हो सकती है. इसमें पानी की आवश्यकता पड़ती है.

ये भी पढ़ें: ओडिशा के एक रेलकर्मी बने किसान, केरल में ढाई एकड़ में करते हैं जैविक खेती
इस तकनीक से पटना के एक व्यक्ति जिनका नाम मोहमद जावेद है, उन्होंने बिना मिट्टी के अपने बगीचे में पेड़ पौधे लगाए है. जावेद पटना में कंकड़बाग कॉलोनी में रहते है. यह बिना मिट्टी के कई वर्षो से सफलता के साथ पेड़ पौधे उगा रहे है. इस विधि से पानी में घुले पोशक तत्वों और खनिज से पौधे का विकास होता है. हिंदी में इस तकनीक को जलकृषि भी कहते है. जावेद अपने बारे में बताते है कि वो पटना में स्थित श्री कृष्ण विज्ञान केंद्र में 30 साल से शिक्षक का काम कर रहे थे. वह साल 1992 में जलकृषि में आए थे. उन्होंने बताया कि उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी जलकृषि में रुचि होने के कारण. इसके बाद इस विधि के विकास में काम करने लगे. जहां तक की इस विधि को बढ़ावा देने के लिए वो विदेश तक जा चुके है. इस विधि से जावेद 250 से ज्यादा पौधे उगा चुके है. जावेद का कहना है कि इस तरह की तकनीक से पेड़ पौधे उगाने से वातावरण में शुद्धता बरकार रहती है.

ये भी पढ़ें: जानिए क्या है नए ज़माने की खेती: प्रिसिजन फार्मिंग
जावेद ने नौकरी छोड़ने के बाद बयोफोर्ट एम विकसित कर ली. एक लीटर पानी में एक मिलीलीटर बयोफोर्ट एम को मिलाकर एक घोल तैयार किया जाता है, इससे 30 से 40 सेंटीमीटर तक लंबे पौधे को 1 साल तक पोषण मिलता रहता है. जावेद ने हाइड्रोपोनिक तकनीक को नया आयाम देने के लिए कंकड़, रेत, पत्थर के टुकड़े आदि से जैविक खाद तैयार की है. यदि आपके पास जमीन की कमी है तो इस विधि से विंडो गार्डन, रूम गार्डन, हैगिंग गार्डन, टेबल गार्डन, बालकनी गार्डन, बॉटल गार्डन, वॉल गार्डन और ट्यूब गार्डन आदि विकसित कर रहे है. जावेद चाहते है की सरकार इसे बढ़ावा दे जिससे भारत के ज्यादा से ज्यादातर लोग इस तकनीक से पेड़ पौधे उगाए. जिससे पर्यावरण में शुद्धता आए. लोग कम से कम जगह पर खेती भी कर सके.

श्रेणी
Ad
Ad