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सब्जियों

युवक की किस्मत बदली सब्जियों की खेती ने, कमाया बेहद मुनाफा

युवक की किस्मत बदली सब्जियों की खेती ने, कमाया बेहद मुनाफा

सब्जियों की खेती के लिए काफी समझ और मेहनत की आवश्यकता होती है, क्योंकि सब्जियों की मांग के हिसाब से किसानों को सब्जी उत्पादन करना बेहद आवश्यक होता है, जिससे कि सब्जियों का सही और लाभप्रद मूल्य मिल सके। देशभर में भिन्न भिन्न जगहों पर सब्जी की मांग उस क्षेत्र की भौगोलिक स्तिथि के अनुरूप होती है। अलग अलग जगहों पर सब्जी एवं अन्य खाद्यान्न पदार्थों की अहम भूमिका होती है। इन सभी बातों को ध्यांन में रखकर कश्मीर के शोपियां जिले के मोहम्मद अयूब ने सब्जियों की खेती की और उन सब्जियों को उगाने में प्राथमिकता दी जिन सब्जियों की बाज़ार में अत्यधिक मांग है, और इस वजह से मोहम्मद अयूब काफी मुनाफा कमाते हैं।

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मोहम्मद अयूब की सफलता की कहानी

मोहम्मद अयूब जम्मू कश्मीर के सोपिया जिले में सफा नगरी नामक गांव में रहते हैं। आजीविका के लिए सरकारी और प्राइवेट नौकरियों की तलाश में इधर से उधर प्रयास किया, लेकिन कोई आय का साधन नहीं मिला। उसके बाद मोहम्मद अयूब ने खेती के माध्यम से आय का स्त्रोत बनाने का निश्चय किया और बाजार में कौन सी फसल सबसे अधिक फायदा प्रदान कर सकती है, इस बारे में विचार विमर्श करके अत्याधिक मांग वाली सब्जियों का चयन किया। सब्जियों की अच्छी तरह देखरेख करके अयूब ने बेहतर उत्पादन किया और सब्जिओं के उत्पादन से अच्छा खासा मुनाफा कमाया है।

अयूब प्रति वर्ष कितना मुनाफा कमा लेते हैं ?

मोहम्मद अयूब सब्जियों के उत्पादन से लगभग ६ लाख तक का मुनाफा कमा लेते हैं। उपरोक्त में जैसा कि बताया गया है, अयूब ने अत्यधिक मांग वाली सब्जियों का चयन किया जिससे उन्हें अच्छा मुनाफा कमाने में सहायता हुई। अयूब खुद की २ अकड़ ज़मीन को किसी भी समय खाली नहीं छोड़ते हैं।

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सेब के दाम में भारी गिरावट से सम्बंधित अयूब ने क्या कहा ?

इस सन्दर्भ में अयूब ने बोला है कि सेब के अत्यधिक उत्पादन के चलते सेब के दाम में कमी आयी है, लेकिन मूली के उत्पादन से अच्छा खासा लाभ प्राप्त हो सकता है। उन्होंने कहा कश्मीर की पहचान एक हॉर्टिकल्चर राज्य के रूप में है।
रघुपत सिंह जी कृषि जगत से गायब हुई ५५ से अधिक सब्जियों को प्रचलन में ला ११ नेशनल अवार्ड हासिल किये

रघुपत सिंह जी कृषि जगत से गायब हुई ५५ से अधिक सब्जियों को प्रचलन में ला ११ नेशनल अवार्ड हासिल किये

उत्तर प्रदेश राज्य में मुरादाबाद जनपद के बिलारी निवासी किसान रघुपत सिंह जी ५५ से ज्यादा सब्जियों की गायब हो चुकी किस्मों को पुनः खेती की धारा में लाये। साथ ही १०० से अधिक नवीन किस्म की सब्जियां व वनस्पति की प्रजाति विकसित की हैं। इस सराहनीय कार्य को करते हुए उन्होंने ११ अवार्ड हासिल किये हैं, साथ ही केंद्र सरकार भी उनकी आभारी है। रघुपत ने एक अलग और रचनात्मक सोच को प्रदर्शित किया है, खेती को अलग तरह से करकर उससे अच्छा खासा सम्मान व धन दोनों अर्जित किया जा सकता है। जमीनी तौर पर गायब हो चुकी सब्जियों की प्रजातियों को पुनः अस्तित्व में ला दिया है, साथ ही किसानों के लिए आय के अवसरों की एक नई राह प्रदर्शित की है।

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सही लागत-उत्पादन अनुपात को समझ सब्ज़ी उगाकर कैसे कमाएँ अच्छा मुनाफ़ा, जानें बचत करने की पूरी प्रक्रिया रघुपत जी की दिनचर्या भी अन्य किसानों से बिलकुल भिन्न है व उनकी खेती करने का तरीका व सोच भी, क्योंकि वह असाधारण खेती करके कृषि जगत में अपनी अहम भूमिका निभा रहे हैं। रघुपत का कहना है कि उन्होंने सामान्य खेती प्रणाली की अपेक्षा गायब हो चुकी सब्जियों की किस्मों को विकसित करने की पहल की जिनका अस्तित्व पूर्ण रूप से समाप्त हो चुका था। रघुपत के इस सकारात्मक एवं सराहनीय कार्य से देशभर में उनको खूब सम्मान मिल रहा है।

रघुपत जी द्वारा विकसित किस्मों से क्या लाभ होगा ?

रघुपत जी द्वारा विकसित किस्मों से उन किसानों को बेहद लाभ होगा जो बड़े किसानों की भाँति पैदावार नहीं कर पा रहे हैं। इसलिए लघु किसानों को नए रास्तों पर ध्यान देने की आवश्यकता है। रघुपत जी लगभग ३ लाख से ज्यादा किसानों को खेती के लाभ भी बता चुके हैं, देशभर में खेती से सम्बंधित समस्त संस्थान रघुपत जी के प्रसंशक हो चुके हैं। रघुपत जी खुद के द्वारा फसल का तैयार बीज आर्थिक रूप से कमजोर एवं छोटे किसानों तक पहुँचाने का कार्य कर रहे हैं। इसके पीछे उनका मुख्य उद्देश्य यह है कि वह किसानों को अच्छा मुनाफा प्राप्त करने का जरिया दे सकें। लघु किसान इनके द्वारा विकसित बीजों की सहायता से अच्छा खासा मुनाफा कमा सकते हैं।

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रघुपत जी को विलुप्त हो चुकी सब्जियों की किस्मों को विकसित करने के लिए कितने अवार्ड मिले हैं ?

रघुपत जी अनेकों किसानों को फसल सम्बंधित प्रशिक्षण दे चुके हैं, साथ ही यह भी बताते हैं, कि किसान किस किस्म की फसल से कितना लाभ प्राप्त कर सकते हैं। किसानों को रघुपत द्वारा विकसित किस्मों का प्रयोग करना चाहिए, इससे जमीनी तौर पर गायब हो चुकी फसलों को दुबारा से अस्तित्व में आने का अवसर मिलेगा, साथ ही किसानों को भी बेहतर मुनाफा हासिल होगा। रघुपत जी ने कृषि जगत से गायब हो चुकी ५५ से ज्यादा सब्जियों को पुनः अस्तित्व में लाने के साथ साथ १०० से अधिक सब्जियों व वनस्पतियों की किस्म विकसित की हैं। रघुपत जी इस सराहनीय उपलब्धि के लिए कई पुरस्कार से सम्मानित हो चुके हैं। कृषि के क्षेत्र में रघुपत जैसे किसानों की बेहद आवश्यकता है।
आधुनिक तकनीक से बीन्स व सब्जी पैदा कर नवनीत वर्मा बने लखपति

आधुनिक तकनीक से बीन्स व सब्जी पैदा कर नवनीत वर्मा बने लखपति

मध्य प्रदेश के बैतूल निवासी किसान नवनीत वर्मा वर्तमान में बीन्स एवं सब्जियों को देश के साथ साथ विदेशों में भी निर्यात कर रहे हैं। पूर्व में पारंपरिक कृषि से हताश होकर आधुनिक खेती की तरफ रुख किया, जिसके लिए उन्होंने इधर उधर से कर्ज लेकर इसकी तैयारी की। अन्य कई सारे किसान इसी कारण से आधुनिक खेती की तरफ बढ़ रहे हैं। आधुनिक खेती में किसानों को अत्यधिक श्रम नहीं करना पड़ता एवं किसान परंपरागत खेती की अपेक्षा शीघ्र पैदावार अर्जित कर लेते हैं। पारंपरिक खेती की तुलना में किसान बागवानी फसलों के जरिये अधिक बार पैदावार प्राप्त कर सकते हैं। इसलिए कमाई भी पारंपरिक फसलों से अधिक होती है। इन्ही सब पहलुओं को देखते हुए पारंपरिक कृषि प्रणाली की जगह आधुनिक तकनीक से सब्जियों का उत्पादन वर्तमान में किसानों की प्राथमिकता बन गयी है।

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इस बात के एक उदाहरण मध्य प्रदेश के बैतूल निवासी किसान नवनीत वर्मा हैं। सोयाबीन, गन्ना, मूंग, मक्का, गेहूं की कृषि आजमाने के बाद जब आय कम होने लगी तो उन्होंने अपने मित्र की सलाह मानकर सब्जियों व बीन्स की खेती करना प्रारंभ कर दिया। जिसका बेतहर संरक्षण एवं उत्तम पैदावार लेने के लिए आधुनिक तकनीक का प्रयोग किया, जिसके अंतर्गत उन्होंने शेडनेट एवं पॉलीहाउस जैसी आधुनिक तकनीकों का प्रयोग किया। कभी कर्ज लेकर आधुनिक खेती करने वाले नवनीत वर्मा आज मध्य प्रदेश व महाराष्ट्र की मंडियों समेत अन्य अरब देशों तक सब्जियों व बीन्स को बेचकर औसतन १ लाख रुपये माह के हिसाब से अर्जित कर रहे हैं।

नवनीत कितने एकड़ भूमि में सब्जियों का उत्पादन करते हैं ?

आपको बतादें कि नवनीत वर्मा ने 10 एकड़ भूमि में मौसंबी, स्ट्राबैरी, स्ट्राबैरी एवं बेर का उत्पादन प्रारंभ किया था। रोचक बात यह है कि किसान नवनीत वर्मा के ही एक मित्र ने उनको सब्जियों की खेती करने के लिए सलाह दी थी। उन्होंने मित्र की सलाह को बिना किसी भय के मान लिया एवं कर्ज लेकर के सब्जियों की पैदावार प्रारंभ करदी।

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सरकार आधुनिक तकनीकों से खेती करने के लिए किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए कई लाभकारी योजनाओं के अंतर्गत शेडनेट आदि तकनीकों पर अनुदान देती है। जिसका लाभ लेकर नवनीत भी अब तक १ एकड़ भूमि में शेडनेट लगा चुके हैं और आज अच्छा खासा मुनाफा कमा रहे हैं। उन्होंने पहले २० लाख का खर्च कर ककड़ी, गोभी, टमाटर लगाए परन्तु बीन्स के जरिये अधिक आय होने के कारण उन्होंने सिर्फ बीन्स की ही फसल लगाने का निर्णय किया। बीन्स की खेती में २० प्रतिशत रासायनिक उर्वरक व ८० प्रतिशत जैविक खाद का उपयोग होता है। नवनीत वर्मा बीन्स के बीज भी उत्पादित करते हैं।
ऑफ सीजन में गाजर बोयें, अधिक मुनाफा पाएं (sow carrots in off season to reap more profit in hindi)

ऑफ सीजन में गाजर बोयें, अधिक मुनाफा पाएं (sow carrots in off season to reap more profit in hindi)

गाजर जो दिखने में बेहद ही खूबसूरत होती है और इसका स्वाद भी काफी अच्छा होता है स्वाद के साथ ही साथ विभिन्न प्रकार से हमारे शरीर को लाभ पहुंचाती है। गाजर से जुड़ी पूरी जानकारी प्राप्त करने के लिए हमारे इस पोस्ट के अंत तक जरूर बने रहें । जानें कैसे ऑफ सीजन में गाजर बोयें और अधिक मुनाफा पाएं। 

ऑफ सीजन में गाजर की खेती दें अधिक मुनाफा

सलाद के लिए गाजर का उपयोग काफी भारी मात्रा में होता है शादियों में फेस्टिवल्स विभिन्न विभिन्न कार्यक्रमों में गाजर के सलाद का इस्तेमाल किया जाता है। इसीलिए लोगों में इसकी मांग काफी बढ़ जाती है, बढ़ती मांग को देखते हुए इनको ऑफ सीजन भी उगाया जाता है विभिन्न रासायनिक तरीकों से और बीज रोपड़ कर। 

गाजर की खेती

गाजर जिसको इंग्लिश में Carrot के नाम से भी जाना जाता है। खाने में मीठे होते हैं तथा दिखने में खूबसूरत लाल और काले रंग के होते हैं। लोग गाजर की विभिन्न  विभिन्न प्रकार की डिशेस बनाते हैं जैसे; गाजर का हलवा सर्दियों में काफी शौक और चाव से खाया जाता है। ग्रहणी गाजर की मिठाइयां आदि भी बनाती है। स्वाद के साथ गाजन में विभिन्न प्रकार के विटामिन पाए जाते हैं जैसे विटामिनए (Vitamin A) तथा कैरोटीन (Carotene) की मात्रा गाजर में भरपूर होती है। अच्छे स्वास्थ्य के लिए कच्ची गाजर लोग ज्यादातर खाते हैं इसीलिए गाजर की खेती किसानों के हित के लिए काफी महत्वपूर्ण होती है। 

गाजर की खेती करने के लिए जलवायु

जैसा कि हम सब जानते हैं कि गाजर के लिए सबसे अच्छी जलवायु ठंडी होती है क्योंकि गाजर एक ठंडी फसल है जो सर्दियों के मौसम में काफी अच्छी तरह से उगती है। गाजर की फसल की खेती के लिए लगभग 8 से 28 डिग्री सेल्सियस का तापमान बहुत ही उपयोगी होता है। गर्मी वाले इलाके में गाजर की फसल उगाना उपयोगी नहीं होता। 

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ऑफ सीजन में गाजर की खेती के लिए मिट्टी का उपयोग

किसान गाजर की अच्छी फसल की गुणवत्ता प्राप्त करने के लिए तथा अच्छी उत्पादन के लिए दोमट मिट्टी का ही चयन करते हैं क्योंकि यह सबसे बेहतर तथा श्रेष्ठ मानी जाती है। फसल के लिए मिट्टी को भली प्रकार से भुरभुरा कर लेना आवश्यक होता है। बीज रोपण करने से पहले जल निकास की व्यवस्था को बना लेना चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार की जलभराव की स्थिति ना उत्पन्न हो। क्योंकि जलभराव के कारण फसलें सड़ सकती हैं , खराब हो सकती है, जड़ों में गलन की समस्या भी उत्पन्न हो सकती है तथा फसल खराब होने का खतरा बना रहता है। 

गाजर की खेती का सही टाइम

किसानों और विशेषज्ञों के अनुसार गाजर की बुवाई का सबसे अच्छा और बेहतर महीना अगस्त से लेकर अक्टूबर तक के बीच का होता है। गाजर की कुछ अन्य किस्में  ऐसी भी हैं जिनको बोने का महीना अक्टूबर से लेकर नवंबर तक का चुना जाता है और यह महीना सबसे श्रेष्ठ महीना माना जाता है। गाजर की बुवाई यदि आप रबी के मौसम में करेंगे , तो ज्यादा उपयोगी होगा गाजर उत्पादन के लिए तथा आप अच्छी फसल को प्राप्त कर सकते हैं।

ऑफ सीजन में गाजर की फसल के लिए खेत को तैयार करे

किसान खेत को भुरभुरी मिट्टी द्वारा तैयार कर लेते हैं खेत तैयार करने के बाद करीब दो से तीन बार हल से जुताई करते हैं। करीब तीन से 5 दिन के भीतर अपने पारंपरिक हल से जुताई करना शुरू कर देते हैं और सबसे आखरी जुताई के लिए पाटा फेरने की क्रिया को अपनाते हैं।  खेत को इस प्रकार से फसल के लिए तैयार करना उपयुक्त माना जाता है।

गाजर की उन्नत किस्में

गाजर की बढ़ती मांग को देखते हुए किसान इनकी विभिन्न विभिन्न प्रकार की  किस्मों का उत्पादन करते हैं। जो ऑफ सीजन भी उगाए जाते हैं। गाजर की निम्न प्रकार की किस्में होती है जैसे:

  • पूसा मेघाली

पूसा मेघाली की बुआई लगभग अगस्त से सितंबर के महीने में होती है। गाजर की इस किस्म मे भरपूर मात्रा में कैरोटीन होता है जो स्वास्थ्य के लिए बहुत ही लाभदायक है। यह फसल उगने में 100 से लेकर 110 दिनों का समय लेते हैं और पूरी तरह से तैयार हो जाती हैं।

  • पूसा केसर

गाजर कि या किस्म भी बहुत ही अच्छी होती है या 110  दिनों में तैयार हो जाती हैं। पूसा केसर की बुआई का समय अगस्त से लेकर सितंबर का महीना उपयुक्त होता है।

  • हिसार रसीली

हिसार रसीली सबसे अच्छी किस्म होती है क्योंकि इसमें विटामिन ए पाया जाता है तथा इसमें कैरोटीन भी होता है। इसलिए बाकी किस्मों से यह सबसे बेहतर किसमें होती है। यह फसल तैयार होने में लगभग 90 से 100 दिनों का टाइम लेती है।

  • गाजर 29

गाजर की या किस्म स्वाद में बहुत मीठी होती है इस फसल को तैयार होने में लगभग 85 से 90 दिनों का टाइम लगता है।

  • चैंटनी

चैंटनी किस्म की गाजर दिखने में मोटी होती है और इसका रंग लाल तथा नारंगी होता है इस फसल को तैयार होने में लगभग 80 से 90 दिन का टाइम लगता है।

  • नैनटिस

नैनटिस इसका स्वाद खाने में बहुत स्वादिष्ट तथा मीठे होते हैं या फसल उगने में 100 से 120 दिनों का टाइम लेती है। 

 दोस्तों हम उम्मीद करते हैं आपको हमारा यह आर्टिकल Gajar (agar sinchai ki vyavastha ho to), Taki off-season mein salad ke liye demand puri ho aur munafa badhe काफी पसंद आया होगा और हमारा यह आर्टिकल आपके लिए बहुत ही लाभदायक साबित होगा। हमारे इस आर्टिकल से यदि आप संतुष्ट है तो ज्यादा से ज्यादा इसे शेयर करें।

जिस स्ट्रोबेरी के है सब दीवाने, उसे उगाकर किस्मत चमकालें

जिस स्ट्रोबेरी के है सब दीवाने, उसे उगाकर किस्मत चमकालें

कन्वेंशनल खेती के माध्यम से हो रही आमदनी में पिछले दस वर्षों में काफी गिरावट देखी गई है, क्योंकि लगातार खराब मौसम और मार्केट में सप्लाई बढ़ने की वजह से आमदनी भी कम प्राप्त हो रही है। जिन किसानों के पास अधिक जमीन है, वह तो फिर भी पारंपरिक खेती के माध्यम से जैसे-तैसे गुजारा कर लेते हैं । परंतु, जिनके पास कम जमीन होती है, उस तरह के किसान अब धीरे-धीरे फलों और सब्जियों की तरफ रुख करते हुए दिखाई दे रहे हैं।

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इन्हीं फलों की श्रेणियों में एक फल है - स्ट्रॉबेरी (Strawberry)

पिछले कुछ समय से भारतीय लोगों की प्रति व्यक्ति आय में बढ़ोतरी होने की वजह से, अब लोग महंगे फल एवं सब्जियां खरीदने में भी रुचि दिखा रहे हैं।

स्ट्रॉबेरी भी भारत की एक महत्वपूर्ण फल वाली फसल है

यह भारत के कुछ राज्यों जैसे कि उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिमी बंगाल, दिल्ली और राजस्थान तथा हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में उगाई जाती है।

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स्ट्रॉबेरी को उगाने से आप केवल आर्थिक रूप से ही संपन्न नहीं होंगे, बल्कि साथ की इस फसल के स्वास्थ्यगत फायदे भी बहुत अधिक होते हैं। चमकीले लाल रंग की दिखाई देने वाली यह स्ट्रॉबेरी विटामिन सी और आयरन की कमी को पूरा करती है। इसके अलावा इसका यूज स्ट्रॉबेरी फ्लेवर वाली आइसक्रीम बनाने में भी किया जाता है।

स्ट्रॉबेरी की खेती ऐसे करें (Strawberry farming information in hindi)

स्ट्रॉबेरी की फसल उगाने के लिए आपको अक्टूबर के महीने को चुनना चाहिए, क्योंकि इस समय भारत में मानसून जैसी कोई हालत नहीं रहती है।

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 भारत में मुख्यतया इसके उत्पादन के लिए हाइड्रोपोनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। इस तकनीक में हरितगृह बनाने पड़ते हैं जिससे कि, जिस जगह पर फसल को उगाया जा रहा है वहां के तापमान को फसल के उत्पादन के अनुकूल बनाया जा सके। स्ट्रॉबेरी फसल को उगाने से पहले जमीन की अच्छी तरीके से जुताई या पलॉगिंग (ploughing) की जाती है, इसके लिए कल्टीवेटर (cultivator) का इस्तेमाल किया जा सकता है। 

 स्ट्रॉबेरी की फसल का सबसे बड़ा फायदा यह है कि, इसे समतल जगह के अलावा पहाड़ी ढलान और ऊंची उठी हुई जमीन पर भी लगाया जा सकता है। पिछले कुछ सालों में ऐसे ही कई युवाओं ने मौसम विभाग के द्वारा जारी की गई एडवाइजरी और उद्यान विभाग के द्वारा दी गई पौध का इस्तेमाल कर, एक से डेढ़ एकड़ की जमीन में भी इस फसल की खेती की शुरुआत की है और उन्हें केवल दो से तीन लाख रुपए की लागत के बाद दस लाख रुपए से भी ज्यादा की बचत हुई है। स्ट्रॉबेरी फसल को उगाने के लिए मुख्यतया आपको नर्सरी से तैयार किए हुए पौधों को लगाना पड़ता है, इसके बाद उसमें गोबर और ऑर्गेनिक खाद का इस्तेमाल किया जाता है।

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आपको ध्यान रखना चाहिए कि स्ट्रॉबेरी को ज्यादा पानी मिलने पर इस में कीड़े लगने की संभावनाएं होती है, इसीलिए इसमें ड्रिप सिंचाई विधि का इस्तेमाल किया जाता है और पौधों के नीचे पॉलिथीन बिछाई जाती है। इसके बाद जो फ़सल पूरी तरह बनकर तैयार हो जाती है, तब आप एक पौधे से 5 किलो तक स्ट्रॉबेरी प्राप्त कर सकते हैं। यदि एक सामान्य अनुमान की बात करें, तो भारत के किसान एक एकड़ जमीन में लगभग 8 टन से भी ज्यादा की स्ट्रॉबेरी का उत्पादन कर सकते हैं। मध्य प्रदेश के सातारा और पश्चिमी बंगाल के कुछ जिलों ने इससे भी ज्यादा ज्यादा यील्ड पैदा करके यह साबित कर दिया है, कि सही मैनेजमेंट और उचित आपूर्ति में डाले गए ऑर्गेनिक खाद की वजह से इस फ़सल से बहुत ही अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है।

वर्तमान में भारत के अलग-अलग राज्यों में इनकी बाजार कीमत 400 रुपये से लेकर 700 रुपए प्रति किलो तक है।

अक्टूबर में इस फसल को उगाने के बाद इसकी कटाई लगभग मार्च-अप्रैल में की जाती है। इनकी कटाई का सबसे उपयुक्त समय सुबह का माना जाता है और एक सप्ताह में लगभग तीन से चार बार इन्हें हार्वेस्ट किया जा सकता है, इसके बाद इन्हें छोटे-छोटे बास्केट में पैक कर दिया जाता है। स्ट्रॉबेरी को खेत में लगाने के दौरान कुछ बातों का ध्यान रखना होता है, सबसे पहले यह है कि इसकी दो पौध के बीच में लगभग 25 सेंटीमीटर की दूरी होनी चाहिए, इस आंकड़े के आधार पर आप एक एकड़ जमीन में करीब बीस हजार पौधे लगा सकते हैं। 

 पौध के बीच में अंतराल सही होने की वजह से बड़े होने पर इनकी ग्रोथ अच्छी दिखाई देती है, हालांकि आपको ध्यान रखना होगा कि स्ट्रॉबेरी की फसल को कोल्ड स्टोरेज में भी स्टोर करना पड़ सकता है, इसके लिए फ़सल से तैयार हुए फलों को 27 डिग्री से लेकर 30 डिग्री के तापमान में स्टोर किया जाता है। हमें उम्मीद है कि Merikheti.com के द्वारा दी गई स्ट्रॉबेरी फसल की यह जानकारी आपको पसंद आई होगी और यदि आपका खेत छोटा भी है, तो आप उसमें कृषि विभाग के मार्गदर्शन में दी गई जानकारी का सही फायदा उठाकर अच्छा मुनाफा कमा पाएंगे।

पाकिस्तान को टमाटर और प्याज निर्यात करेगा भारत

पाकिस्तान को टमाटर और प्याज निर्यात करेगा भारत

भीषण बाढ़ की वजह से पाकिस्तान में दिनोंदिन हालात खराब होते जा रहे हैं। इस दौरान पूरे देश में जानमाल का भारी नुकसान हुआ है। भीषण बाढ़ आने के बाद पूरे देश में लगभग 1000 से ज्यादा लोग मारे गए हैं, जबकि कई लाख लोग बाढ़ की वजह से प्रभावित हुए हैं। फिलहाल लगभग आधा देश बाढ़ की चपेट में है, जिससे सरकार ने पूरे देश में आपातकाल की घोषणा की है। अनुमानों के मुताबिक़ पाकिस्तान को इस बाढ़ की वजह से लगभग 10 बिलियन डॉलर से ज्यादा का नुकसान झेलना होगा। बाढ़ की स्थिति को देखते हुए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अंतरराष्ट्रीय मदद की गुहार लगाई है। इस मामले में कई देश पाकिस्तान की मदद कर भी रहे हैं। हाल ही में अमेरिका ने पाकिस्तान को बाढ़ रिलीफ फंड के नाम पर 30 मिलियन डॉलर की मदद दी है। इसके अलावा आपदा की इस घड़ी में कई यूरोपीय देशों के अतिरिक्त दुनियाभर के अन्य देश पाकिस्तान की मदद करने के लिए आगे आ रहे हैं। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पाकिस्तान में बाढ़ पीड़ितों के प्रति संवेदनाएं व्यक्त की हैं। पाकिस्तान में बाढ़ की वजह से बहुत सारे लोग बेघर हो गये हैं। बाढ़ में उनका सामान या तो पानी के साथ बह गया है या खराब हो गया है, ऐसे में पूरे पाकिस्तान में चीजों के दामों में तेजी से इन्फ्लेशन (Inflation) देखने को मिल रहा है। वस्तुओं की कीमतें रातों रात आसमान छूने लगी हैं।


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ऐसे में खाने पीने की चीजों से लेकर सब्जियों के भी दाम आसमान छूने लगे हैं। पाकिस्तान के सिंध और बलूचिस्तान प्रांत में लगातार तीन महीने से हो रही बरसात ने सब्जियों की खेती को तबाह कर दिया है। इससे लाहौर के बाजार में टमाटर 500 रुपये प्रति किलो, जबकि प्याज 400 पाकिस्तानी रुपये प्रति किलो बिक रही है। पाकिस्तान में सब्जियों के दाम लगातार आसमान की ओर जा रहे हैं, ऐसे में पाकिस्तान की मौजूदा सरकार ने भारत से टमाटर और प्याज आयात करने का मन बनाया है, ताकि देश में बढ़ती हुई सब्जियों की कीमतों में लगाम लगाई जा सके। दक्षिण भारत में और इसके साथ ही पहाड़ी राज्यों में अगस्त-सितम्बर में टमाटर की फसल की जमकर पैदावार होती है। ऐसे में अगर भारत सरकार टमाटर और प्याज के निर्यात का फैसला करती है, तो देश में किसानों को टमाटर और प्याज के अच्छे दाम मिल सकते हैं। साथ ही देश में टमाटर और प्याज की गिरती हुई कीमतों को रोका जा सकेगा।


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पाकिस्तान पहले से ही अपनी ज्यादातर खाद्य चीजों का आयात करता रहा है। गेहूं से लेकर चीनी तक के लिए पाकिस्तान दूसरे देशों पर निर्भर है। ब्राजील पाकिस्तान में चीनी का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है। इसी प्रकार प्याज और टमाटर, पाकिस्तान कुछ दिनों पहले तक अफगानिस्तान से खरीद रहा था। लेकिन बलूचिस्तान और सिंध में आई बाढ़ ने पाकिस्तान में प्याज और टमाटर की मांग को बढ़ा दिया है। इसकी आपूर्ति अकेले अफगानिस्तान नहीं कर पायेगा। इसलिए अब पाकिस्तान की सरकार इस मामले में भारत से आस अलगाये हुए है, ताकि भारत पाकिस्तान की जरुरत का प्याज और टमाटर पाकिस्तान को निर्यात करे, जिससे देश में प्याज और टमाटर की कमी न होने पाए और इन चीजों के भाव नियंत्रण में रहें।
सरकार टमाटर की तरह नही बढ़ने देगी प्याज के दाम

सरकार टमाटर की तरह नही बढ़ने देगी प्याज के दाम

आजकल टमाटर और अदरक के भाव बढ़ने से लोगों को लगता है, कि प्याज की कीमतों में भी इजाफा होगा। उपभोक्ता मामलों के सचिव रोहित कुमार सिंह ने रविवार को बताया है, कि सरकार ने 3 लाख टन प्याज खरीदा है, जो पिछले साल के बफर स्टॉक से 20 प्रतिशत ज्यादा है। प्याज की लाइफ बढ़ाने के लिए भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बीएआरसी) के साथ प्याज पर रेडिएशन का परीक्षण भी किया जा रहा है। गगनचुंबी टमाटर की कीमतों ने संपूर्ण भारत को हिलाकर रख दिया है। ऐसे में प्याज को लेकर अभी से तैयारी करनी चालू कर दी है, जिससे आने वाले दिनों में प्याज की कीमतों में कोई बदलाव देखने को नहीं मिले। उपभोक्ता मामलों के सचिव रोहित कुमार सिंह ने रविवार को बताया है, कि सरकार ने 3 लाख टन प्याज खरीदी है, जो कि विगत वर्ष के बफर स्टॉक से 20 प्रतिशत ज्यादा है। साथ ही, प्याज की निजी जिंदगी बढ़ाने के लिए भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बीएआरसी) के साथ प्याज पर रेडिएशन का परीक्षण भी किया जा रहा है। वित्त वर्ष 2022-23 में सरकार ने बफर स्टॉक के रूप में 2.51 लाख टन प्याज रखा था।

प्याज का 3 लाख टन का भरपूर भंडारण

अगर कम आपूर्ति वाले मौसम में कीमतें बेहद बढ़ जाती हैं, तो किसी भी आपात परिस्थिति को पूरा करने के लिए प्राइस स्टेबलाइजेशन फंड (पीएसएफ) के अंतर्गत बफर स्टॉक तैयार किया जाता है। रोहित सिंह का कहना है, कि त्योहारों के मौसम में किसी भी हालात से जूझने के लिए, सरकार ने इस वर्ष 3 लाख टन तक का मजबूत भंडारण विकसित किया है। प्याज को लेकर कोई परेशानी नहीं है। भरपूर भंडारण हेतु जो प्याज खरीदा गया है, वह वर्तमान में समाप्त हुए रबी सीजन का है। ये भी पढ़े: जानें टमाटर की कीमतों में क्यों और कितनी बढ़ोत्तरी हुई है

खरीफ सीजन में प्याज की बुवाई

आपकी जानकारी के लिए बतादें, कि भारत के विभिन्न इलाकों में प्याज की बुवाई शुरू हो चुकी है। जिसकी फसल की आवक अक्टूबर माह में आनी चालू हो जाएगी। वर्तमान दौर में प्याज की खरीद हाल ही में निकले रबी सीजन से की जा रही है। वर्तमान में खरीफ प्याज की बिजाई चल रही है। बतादें, कि अक्टूबर में इसकी आवक चालू हो जाएगी। सचिव ने बताया है, कि सामान्य तौर पर खुदरा बाजारों में प्याज का भाव 20 दिनों अथवा उसके समीपवर्ती दबाव में रहती हैं। जब तक कि ताजा खरीफ फसल बाजार में नहीं आ जाती। परंतु, इस बार कोई दिक्कत नहीं होगी।

इस तरह बढ़ जाएगी प्याज की जीवनावधि

परमाणु ऊर्जा विभाग एवं भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र के साथ मिलकर उपभोक्ता मामलों का मंत्रालय इस मध्य प्याज भंडारण के लिए एक तकनीक का परीक्षण कर रहा है। रोहित सिंह ने बताया है, कि पायलट बेस पर हम महाराष्ट्र के लासलगांव में कोबाल्ट-60 से गामा रेडिएशन के साथ 150 टन प्याज पर इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे प्याज की जीवनावधि बढ़ जाएगी। 2022-23 में सरकार ने पीएसएफ के अंतर्गत रबी-2022 फसल से रिकॉर्ड 2.51 लाख मीट्रिक टन प्याज की खरीद की थी। वहीं, इसे सितंबर 2022 और जनवरी 2023 के दौरान प्रमुख उपभोक्ता केंद्रों में जारी किया था। ये भी पढ़े: गर्मियों के मौसम में ऐसे करें प्याज की खेती, होगा बंपर मुनाफा

भारत में सबसे सस्ता प्याज मिलता है

भारत का 65 प्रतिशत प्याज उत्पादन अप्रैल-जून के दौरान काटी गई रबी प्याज से होता है। यह अक्टूबर-नवंबर में खरीफ फसल की कटाई होने तक उपभोक्ताओं की मांग को पूर्ण करता है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 15 जुलाई को देश में सबसे सस्ता प्याज 10 रुपये प्रति किलोग्राम के साथ नीमच में मिल रहा था। साथ ही, नगालैंड के शेमेटर शहर में सबसे मंहगा प्याज 65 रुपये किलो पर मिल रहा है। भारत में प्याज का औसत भाव 26.79 रुपये प्रति किलोग्राम देखने को मिला था।
NCR में इस वजह से टमाटर के दाम फिर से बढ़े, मांग की तुलना में सप्लाई मात्र 15 प्रतिशत है

NCR में इस वजह से टमाटर के दाम फिर से बढ़े, मांग की तुलना में सप्लाई मात्र 15 प्रतिशत है

आजादपुर टमाटर एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक कौशिक का कहना है, कि दिल्ली में पिछले तीन दिनों में टमाटर की मांग की तुलना में आपूर्ति काफी गिर गई है। मूसलाधार बारिश की वजह से टमाटर उत्पादक राज्यों में फसल क्षतिग्रस्त हो गई है। संपूर्ण भारत में महंगाई से हड़कंप मच गया है। करेला, लौकी, शिमला मिर्च, परवल और भिंडी समेत तकरीबन समस्त प्रकार की हरी सब्जियां महंगी हो गई हैं। परंतु, टमाटर का भाव सबको परेशान कर रहा है। आज भी भारत के विभिन्न राज्यों में टमाटर 120 से 150 रुपये किलो बिक रहा है। परंतु, देश की राजधानी दिल्ली में टमाटर सबसे ज्यादा महंगा है। यहां पर बुधवार को विभिन्न स्थानों पर 259 रुपये किलो टमाटर बेचा गया।

यह कीमतों में उछाल की मुख्य वजह है

हालांकि, एक सप्ताह पूर्व दिल्ली में टमाटर की कीमतों में कुछ हद तक कमी देखने को मिली थी। राष्ट्रीय राजधानी के विभिन्न बाजारों में टमाटर 120 से 150 रुपये किलो पहुँच गया था। परंतु, मंगलवार से एक बार पुनः कीमतें बढ़ने लगीं है। अब ऐसी स्थिति में लोगों को लग रहा है, कि अन्य राज्यों की तुलना में दिल्ली में ही टमाटर इतना महंगा क्यों है। आखिर कीमतों में गिरावट आने के पश्चात पुनः बढ़ोत्तरी क्यों हुई है। इन सवालों के साथ दिल्ली वासी महंगाई को लेकर काफी चिंता में हैं। परंतु, उनको टेंशन लेने की आवश्यकता नहीं है। कीमतों में तेजी से उछाल की असली वजह सामने आ गई है।

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जानें दिल्ली में कितने ट्रक टमाटर की आवक हुई है

आपकी जानकारी के लिए बतादें, कि टमाटर उत्पादक राज्यों में बारिश के चलते टमाटर का उत्पादन काफी प्रभावित हुआ है। इससे दिल्ली में मांग के अनुसार, टमाटर की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। दिल्ली की आजादपुर मंडी में बुधवार को केवल 6 ट्रक ही टमाटर की आवक हुई, जो कि इसकी मांग का 15 प्रतिशत ही है। इसका अर्थ यह है, कि दिल्ली में आज भी 85 फीसद टमाटर की सप्लाई प्रभावित है। ऐसी स्थिति में मार्केट में टमाटर की उपलब्धता कम होने से कीमतों में वृद्धि हो रही है। वर्तमान में दिल्ली के अंदर कर्नाटक और आंध्र प्रदेश से टमाटर की आपूर्ति हो रही है। ऐसी स्थिति में माल ढ़लाई का खर्चा भी बढ़ रहा है।

मदर डेयरी की सफल रिटेल दुकानों में 259 रुपये किलो टमाटर बेचा गया

साथ ही, आजादपुर टमाटर एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक कौशिक का कहना है, कि दिल्ली में पिछले तीन दिनों में टमाटर की आवक कम हो गई है। भारी बारिश की वजह से टमाटर उत्पादक राज्यों में फसल बर्बाद हो गई है। उन्होंने बताया कि आजादपुर मंडी में बुधवार को टमाटर की केवल 15 प्रतिशत ही आपूर्ति हो पाई है। यही कारण है, कि दिल्ली में टमाटर की कीमतों में एक बार फिर तेजी से बढ़ने लगी हैं। साथ ही, मदर डेयरी ने बुधवार अपनी सफल रिटेल दुकानों में 259 रुपये किलो टमाटर बेचा है।
आईपीएफटी ने सब्जियों और फलों को सूक्ष्म कीटाणुओं से मुक्त करने के लिए नया “कीटाणुनाशक स्प्रे” विकसित किया

आईपीएफटी ने सब्जियों और फलों को सूक्ष्म कीटाणुओं से मुक्त करने के लिए नया “कीटाणुनाशक स्प्रे” विकसित किया

पूरी दुनिया को प्रभावित करने वाली कोविड-19 महामारी के समय में भारत सरकार के रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के रसायन व पेट्रोरसायन विभाग के अंतर्गत आने वाले स्वायत्त संस्थान कीटनाशक सूत्रीकरण प्रौद्योगिकी संस्थान (आईपीएफटी) ने सतह और फल एवं सब्जियों को कीटाणु मुक्त करने के लिए दो नए कीटाणुनाशक स्प्रे सफलतापूर्वक विकसित किए हैं। आईपीएफटी द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि दरवाजों के हैंडल, कुर्सियों पर हाथ रखने वाले स्थान, कंप्यूटर के साथ इस्तेमाल होने वाले की-बोर्ड और माउस इत्यादि से सूक्ष्म विषाणु और जीवाणु के संक्रमण अप्रत्यक्ष संपर्क के जरिए भी फैल सकता है। इसे ध्यान में रखते हुए आईपीएफटी ने अल्कोहल आधारित कीटाणु नाशक स्प्रे विकसित किया है जो वनस्पतिक आधारित विषाणु और जीवाणु रोधी है और यह सूक्ष्म जीवाणुओं-विषाणुओं द्वारा विभिन्न संक्रामक रोगों के नियंत्रण में प्रभावी उपाय हो सकता है। यह स्प्रे तेजी से हवा में उड़ जाता है और किसी सतह, दरवाजे इत्यादि पर स्प्रे करने के बाद इसके धब्बे, महक या नमी नहीं छूटती।

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  आईपीएफटी ने सब्जियों तथा फलों पर छूट जाने वाले कीटनाशकों के बचे हुए दुष्प्रभाव को खत्म करने के लिए भी कीटाणुनाशक स्प्रे विकसित किया है। फल एवं सब्जियां दैनिक पोषण के लिए व्यापक पैमाने पर इस्तेमाल की जाती हैं। कई फलों और सब्जियों पर इस्तेमाल होने वाले कीटाणुनाशक या रोग नाशी दवाओं का असर लंबे समय तक बना रहता है जिसके इस्तेमाल से स्वास्थ्य संबंधी जोखिम हो सकता है। फल और सब्जियों को मानव उपयोग के लिए शत प्रतिशत सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से ही आईपीएफटी ने जल आधारित सूत्रीकरण विकसित किया है। इसका उपयोग बेहद आसान है। इस स्प्रे को पानी में मिलाकर उसमें 15 से 20 मिनट के लिए फल अथवा सब्जी को छोड़ देने के उपरांत उसे स्वच्छ पानी से साफ कर देना होता है। इस सामान्य प्रक्रिया को अपनाने के बाद फल एवं सब्जियां पूरी तरह से रसायन मुक्त हो जाती हैं।

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  हरियाणा के गुरुग्राम स्थित आईपीएफटी की स्थापना मई 1991 में भारत सरकार के रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के रसायन तथा पेट्रोरसायन विभाग के अंतर्गत एक स्वायत्त संस्थान के रूप में की गई थी। तब से यह संस्थान सुरक्षित, प्रभावी और पर्यावरण अनुकूल कीटनाशकों का विकास करता रहा है। आईपीएफटी के चार प्रशासनिक संभाग हैं, जिसमें शुद्धीकरण तकनीकी विभाग, जैव विज्ञान विभाग, विश्लेषण विज्ञान विभाग और प्रक्रिया विकास विभाग शामिल हैं।
छत पर उगाएं सेहतमंद सब्जियां

छत पर उगाएं सेहतमंद सब्जियां

भोजन की थाली में मौजूद हानिकारक रसायनों से ज्यादातर लोग अनभिज्ञ रहते हैं। वजह से खरीदी गई चमकीले और सुंदर फल तथा सब्जियां हम खरीदते तो सेहत के लिए हैं लेकिन कई दफा यह हमारी सेहत से खिलवाड़ का कारण भी बनते हैं। फसलों पर कीड़ों के प्रभाव को कम करने के लिए किसान जहरीले रसायनों का प्रयोग करते हैं। उन्हें इस बात का इल्म नहीं होता की वह जिन फलों को सेहत सुधारने के लिए खा रहे हैं, वही सेहत के लिए लड़ने की वजह बन रहे हैं। इन हालात में लोक अनेक तरह की बीमारियों के शिकार होने लगे हैं। यदि हमें अपने आप को इन बीमारियों से बचाना है तो छोटे छोटे प्रयोग अपनाने होंगे। घर के आंगन एवं छत पर सब्जी उगाने के तरीके इसी कडी के दो अंग हैं। बड़े शहरों, कस्बा व गांव में बहुत लोग ऐसे हैं जिनके पास सब्जियां उगाने के लिए जगह नहीं है। ऐसी हालत में मकान की छत, छज्जा व मकान के चारों ओर की खाली जगह में जैविक तरीके से कुछ मात्रा में सब्जियां तैयार की जा सकती हैं। वह एक ऐसी जगह है जहां हवा और धूप सही मात्रा में मिलती है। छत पर सब्जियां गमलों में उगाई जा सकती हैं। जून के महीने में छत पर लौकी, तुरई, टिंडा, करेला, भिंडी, बैंगन, टमाटर, मटर, ग्वारफली, पालक, मूली, गाजर, जैसी सब्जियां उगाई जा सकती हैं। इस तरह से सब्जियों को बोने से घर के लोगों को कुछ काम भी मिलेगा और घर में दो-तीन दिन जैविक तरीके से सब्जियां भी मिल सकेंगी।

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छत पर सब्जी उगाने का तरीका

छत पर सब्जी उगाने के लिए मिट्टी सीमेंट और प्लास्टिक के गमले इस्तेमाल किए जा सकते हैं। गमले में मिट्टी भरने की क्षमता 10 किलोग्राम से लेकर ढाई सौ किलोग्राम तक होनी चाहिए। गमलों की गहराई फसल के अनुसार 1 से ढाई सौ तक होनी चाहिए। सब्जी के लिए सीमेंट की नालियों का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। नालियों के नीचे थोड़ी थोड़ी दूरी पर पानी निकासी के छेद होने चाहिए। भारी गमलों को दीवार के ऊपर रखना चाहिए और बेल वाली सब्जियों के गमले दीवार के पास नीचे रखने चाहिए। मध्यम में छोटे आकार के गमले छत के पीछे छज्जे पर रखे जा सकते हैं ।अधिक धूप चाहने वाली सब्जियों को छत के दक्षिण दिशा और छाया वाले पौधों को उत्तर दिशा में लगाना चाहिए । सब्जी की नालियां भी दीवार के सहारे घर के दरवाजे और पिछवाड़े की तरफ बनाई जा सकती हैं।

गमलों को भरना

सब्जियों को गमलों में उगाने के लिए पहली प्राथमिकता अच्छी मिट्टी की होती है। उपजाऊ मिट्टी, बालू, वर्मी कंपोस्ट, सड़ी हुई गोबर की खाद, समान मात्रा में गमलों में भरनी चाहिए। गमले की तली में पानी निकलने के लिए बने सुराख के ऊपर कोई पुराना बर्तन का टुकड़ा रखते हैं ताकि अतिरिक्त पानी निकल जाए मिट्टी और बालू रुकी रहे। गमलों में बीज लगाने के बाद अंकुरण के लिए हल्की नमी बनाए रखनी चाहिए। पौध लगाने के बाद हल्की सिंचाई करते रहना चाहिए

सिंचाई

गमलों में किसी भी तरह के पौधों को लगाने के लिए और उनकी अच्छी बढ़वार के लिए अच्छे पानी की बेहद आवश्यकता रहती है। चतुर घर के आंगन में फुलवारी और सब्जियों की खेती करने वाले लोग यदि बरसात के सीजन में बेकार जाने वाले बरसाती पानी को घर के अंदर किसी टैंक में सुरक्षित करना है तो वह पूरे साल के लिए उनके किचन गार्डन की संजीवनी का काम करेगा। पौधों में साबुन और सर्फ वाले पानी का प्रयोग कतई नहीं करना चाहिए।

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पौधों की रक्षा

गमलों में लगाई सब्जियों में कई तरह के कीट व बीमारियां नुकसान पहुंचाते हैं। उनका सही समय पर उपचार करना जरूरी है। गमलों को इस्तेमाल में लेने से पहले उन्हें उपचारित करना चाहिए। बस 15 दिन की अंतर पर सब्जियों के पौधों व पेड़ों पर नीम की पत्तियों का रस व गाय के पेशाब का छिड़काव करना चाहिए। पत्तियों में फूलों का रस चूसने वाले कीड़ों से बचने के लिए तंबाकू या नीम की खली का अर्क बनाकर छिड़काव करना चाहिए। यदि कीटों का असर ज्यादा होने लगे तो नींद वाली दवाओं का 7 से 10 दिन के अंतर पर दो-तीन बार छिड़काव करना चाहिए। जड़ गलन व फोटो भी से लगने वाली बीमारियों से बचने के लिए गमले में 5 से 10 ग्राम ट्राइकोडरमा का इस्तेमाल करना चाहिए। बीमारी से ग्रसित पौधों को उखाड़ कर फेंक देना चाहिए। गिलहरी जैसे जीवो से पौधों को बचाने के लिए नायलॉन की जाली से पौधों को सुरक्षित रखना चाहिए। गमलों में लगी सब्जियों को समय-समय पर तोड़ते रहना चाहिए। ऐसा न करने पर उनका उत्पादन प्रभावित होता है। गमलों में हो गई सब्जी कच्ची और ताजी स्थिति में ही उपयोग में ली जानी चाहिए।
फरवरी में उगाई जाने वाली सब्जियां: मुनाफा कमाने के लिए अभी बोएं खीरा और करेला

फरवरी में उगाई जाने वाली सब्जियां: मुनाफा कमाने के लिए अभी बोएं खीरा और करेला

फरवरी का महीना खेती के लिहाज से बेहद शानदार होता है। वातावरण में कई फसलों के मानक के अनुसार नमी-ठंडी-गर्मी होती है। असल में, फरवरी एक ऐसा माह है जब ठंड की विदाई होती है और गर्मी धीरे-धीरे आती है। सच पूछें तो प्रारंभिक श्रेणी की गर्मी का आगमन फरवरी के आखिरी दिनों में शुरू हो ही जाता है। ऐसे में, किसान भाई क्या करें। किसान भाईयों के लिए यह माह बेहद मुफीद है। इस माह अगर वह ध्यान दे दें तो अनेक नकदी फसलों का अपने खेत में लगाकर बढ़िया पूंजी कमा सकते हैं।

फरवरी में बोएं क्या

पहला सवाल बड़ा मार्के का है। फरवरी में आखिर बोएं क्या। फरवरी में बोने के लिए नकद फसलों की लंबी फेहरिस्त है। आप फरवरी में सब्जियां बो सकते हैं। कई किस्म की सब्जियां हैं जो इस मौसम में ही बोई जाएं तो बढ़िया मुनाफ होता है।

कौन सी सब्जियां

vegetable farming

फरवरी में आप करेला, खीरा, ककड़ी, अरबी, गाजर, चुकंदर, प्याज, मटर, मूली, पालक, गोभी, फूलगोभी, बैंगन, लौकी, करेला, लौकी, मिर्च, टमाटर आदि बो सकते हैं। इनमें बहुत सारी सब्जियां ऐसी हैं जो 90 दिनों का वक्त लेती हैं लेकिन कुछेक सब्जियां ऐसी भी हैं जो मात्र 50 से 60 दिनों में तैयार हो जाती हैं।

खेत की तैयारी

मान लें कि आप अपने खेत में खीरा बोना चाहते हैं। खीरा बोने के पहले आपके खेत की कंडीशन कायदे की होनी चाहिए। पहली शर्त यह है कि जो खेत की मिट्टी होनी चाहिए, वह रेतीली दोमट होनी चाहिए। दोमट मिट्टी में भी शर्त यह है कि उसमें जैविक तत्वों की प्रचुर मात्रा हो और पानी की निकासी उम्दा स्तर की हो। ऐसे, किसी भी जमीन पर आप अगर खीरा उगाना चाहेंगे तो फेल कर जाएंगे। यह बहुत जरूरी है कि दोमट मिट्टी हो और पानी ठहरे नहीं, निकास होता रहे। वैज्ञानिक भाषा में बात करें तो मिट्टी की गुणवत्ता पीएच 6 या पीएच 7 होनी चाहिए।

जमीन कैसे बनाएं

यह बेहद जरूरी है कि खेत में कोई घास-पतवार नहीं हो। यह बिल्कुल साफ-सुथरा होना चाहिए। दोमट मिट्टी को भुभुरा बनाने के लिए पूरे खेत को तीन से चार बार जोत लेना जरूरी होता है। हल-बैल से जोत रहे हैं तो पांच बार। ट्रैक्टर से जोत रहे हैं तो कम से कम 3 या अधिकतम चार बार जोतें। खेत जोतने के बाद मिट्टी में गाय के गोबर को मिलाएं। गाय का गोबर मिलाने के बाद खेत की उर्वरा शक्ति कई गुना बढ़ जाती है। आप अन्य खाद का इस्तेमाल न करें तो बेहतर। जब गोबर मिला दिया गया तो अब आप 2.5 मीटर चौड़े और 60 सेंटीमीटर की लंबाई का फासला रख कर नर्सरी तैयार कर लें।

बिजाई

बिजाई फरवरी माह में करना उचित होता है। बीजों की बिजाई के वक्त 2.5 मीटर चौड़े नर्सरी बेड पर दो-दो बीज बोयें और दोनों बीजों के बीच में कम से कम 60 सेंटीमीटर का फैसला जरूर रखें। बीज की गहराई कम से कम 3 सेंटीमीटर होनी चाहिए। 3 सेंटीमीटर गहराई में आप जब बीज डालते हैं तो उसे पक्षी निकाल नहीं सकेंगे। फिर उन्हें मुकम्मल रौशनी और हवा भी मिल सकेगी।

कैसे करें बिजाई

खीरे की खेती के लिए छोटी सुरंगी विधि का भारत में बहुत प्रयोग किया जाता है। इस विधि के तहत 2.5 मीटर चौड़े नर्सरी के बेड पर बिजाई होती है। बीजों को बेड के दोनों तरफ 45 सेंटीमीटर के फा.ले पर बोया जाता है। बिजाई के पहले 60 सेंटीमीटर लंबे डंडों को मिट्टी में गाड़ देना चाहिए। फिर पूरे खेत को प्लास्टिक शीट से कवर कर देना चाहिए। जब मौसम सही हो जाए तो प्लास्टिक को हटा देना चाहिए। माना जाता है कि खीरे के बीज को गड्ढे में ही बोना चाहिए। आप चाहें तो गोलाकार गड्ढे बना कर भी बीज डाल सकते हैं। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, एक एकड़ खेत में खीरे का एक किलोग्राम बीज काफी है। प्रति एकड़ एक किलोग्राम बीज इसका आदर्श फार्मूला है।

उपचार

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, बिजाई से पहले ही खीरे की फसल को कीड़ों और अन्य बीमारियों से बचाने के लिए अनुकूल रासायनिक का छिड़काव करना चाहिए। बेहतर यह हो कि आप बीजों का 2 ग्राम कप्तान के साथ उपचार कर लें, फिर बिजाई करें।

खीरे की किस्में

khira ki kheti
  • पंजाब खीरा

यह 2018 में जारी की गई किस्म है। इसके फल हरे गहरे रंग के होते हैं। इनका टेस्ट कड़वा नहीं होता। औसतन इनका वजन 125 ग्राम का होता है। इसकी तुड़ाई आप फसल बोने के 60 दिनों के भीतर कर सकते हैं। फरवरी में अगर आप यह फसल बोते हैं तो माना जा सकता है कि प्रति एकड़ 370 क्विंटल खीरा आपको मिलेगा।

  • पंजाब नवीन खीरा

यह आज से 14 साल पुरानी किस्म है। इसका आकार बेलनाकार होता है। इस फसल में न तो कड़वापन होता है, न ही बीज होते हैं। यह 68 जिनों में पक जाने वाली फसल है। इसकी पैदावार 70 क्विंटल प्रति एकड़ ही होती है।

करेले की बुआई

karele ki kheti

करेले की बुआई दो तरीके से होती हैः बीज से और पौधे से। आपकी जिससे इच्छा हो, उस तरीके से बुआई कर लें। बाजार में बीज और पौधे, दोनों मौजूद हैं। करेले के दो से तीन बीज 2.5 से 5 मीटर की दूरी पर बोएं। बोने के पहले बीज को 24 घंटे तक पानी में जरूर भिगोना चाहिए ताकि अंकुरण जल्द हो। जो नदियों के किनारे का इलाका है, वहां करेले की बढ़िया खेती होती है। खेती के पहले जमीन को जोतना बेहद जरूरी है। इसके बाद दो से तीन बार जमीन पर कल्टीवेटर चलवा देना चाहिए। इससे जमीन की उर्वरा शक्ति बढ़ती है, अंकुरण में भी तेजी आती है। उम्मीद है, हमारी दी हुई यह जानकारी आपकी आमदनी बढ़ाने में फायदेमंद साबित होगी।

क्यों है मार्च का महीना, सब्जियों का खजाना : पूरा ब्यौरा ( Vegetables to Sow in the Month of March in Hindi)

क्यों है मार्च का महीना, सब्जियों का खजाना : पूरा ब्यौरा ( Vegetables to Sow in the Month of March in Hindi)

मार्च का महीना किसानों के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है। किसान इस महीने विभिन्न प्रकार की सब्जियों की बुवाई करते है तथा धन की उच्च दर पर प्राप्ति करते हैं। इस महीने किसान तरह तरह की सब्जियों की बुवाई करते है जैसे: खीरा, ककड़ी, करेला, लौकी, तुरई, पेठा, खरबूजे, तरबूजे, भिंडी, ग्वारफल्ली आदि। मार्च के महीने में बोई जाने वाली सब्जियों की जानकारी:

खीरे की फसल कि पूर्ण जानकारी ( Cucumber crop complete information) in Hindi

खीरे की सब्जियों की टोकरी Cucumber crop खीरे की खेती के लिए खेतों में आपको क्यारियां बनानी होती है। इसकी बुवाई लाइन में ही करें।  लाइन की दूरी 1.5 मीटर रखें और पौधे की दूरी 1 मीटर। बुवाई के बाद 20 से 25 दिन बाद गुड़ाई करना चाहिए। खेत में सफाई रखें और तापमान बढ़ने पर हर सप्ताह हल्की सिंचाई करे, खेत से खरपतवार हटाते रहें।

ककड़ी की फ़सल की पूर्ण जानकारी ( Cucumber crop complete information) in Hindi

ककड़ी सब्जियां की बेल kakdi ki kheti ककड़ी की फसल आप किसी भी उपजाऊ जमीन पर उगा सकते हैं।ककड़ी की बुवाई के लिए मार्च का समय बहुत ही फायदेमंद होता है। या सिर्फ 1 एकड़ भूमि में 1 किलो ग्राम बीज के आधार पर उगना शुरू हो जाती है। खेत को आपको तीन से चार बार जोतना होता है ,उसके बाद आपको खेतों में गोबर की खाद डालनी होती है। ककड़ी की बीजों को किसान 2 मीटर चौड़ी क्यारियों में किनारे किनारे पर लगाते है। इनकी दूरी लगभग 60 सेंटीमीटर होती है।

करेले की फ़सल की पूर्ण जानकारी ( Bitter gourd crop complete information) in Hindi

karele ki kheti करेले की खेती दोमट मिट्टी में की जाती है। करेले को आप दो तरह से बो सकते हैं। पहले बीच से दूसरा पौधों द्वारा ,आपको करेले की खेती के लिए दो से तीन दिन की जरूरत पढ़ती है। इसकी बीच की दूरियों को 2.5 से लेकर 5 मीटर तक की दूरी पर रखना चाहिए।किसान करेले के बीज को बोने से पहले  लगभग 24 घंटा पानी में डूबा कर रखते हैं। ताकि उसके अंकुरण जल्दी से फूट सके। पहली जुताई किसान हल द्वारा करते हैं उसके बाद किसान तीन से चार बार हैरो या कल्टीवेटर द्वारा खेत की जुताई करते हैं।

लौकी की फ़सल की पूर्ण जानकारी ( Gourd crop complete information) in Hindi

lauki ki kheti लौकी की खेती आप हर तरह की मिट्टी में कर सकते हैं लेकिन दोमट मिट्टी इसके लिए बहुत ही उपयोगी है। लौकी की खेती करने से पहले आपको इसके बीज को 24 घंटे पानी में डूबा कर रखना है अंकुरण आने तक, एक हेक्टेयर में आपको 4.5 किलोग्राम बीज की आवश्यकता पड़ती है।

तुरई फसल की पूर्ण जानकारी ( Full details of turai crop) in Hindi

turai ki fasal तोरई की फसल को हल्की दोमट मिट्टी में लगाना चाहिए। किसानों द्वारा प्राप्त जानकारियों से यह पता चला है।कि नदियों के किनारे वाली भूमि पर खेती करना बहुत ही अच्छा होता है। खेती करने से पहले जमीन को अच्छे से जोत लेना चाहिए। पहले हल द्वारा उसके बाद दो से तीन बार हैरो या कल्टीवेटर  से जुताई करना चाहिए। एक हेक्टेयर भूमि में कम से कम 4 से 5 किलोग्राम बीज की आवश्यकता होती है।

पेठा फसल की पूर्ण जानकारी( Complete information about Petha crop)

पेठा सब्जियों की बेल Petha crop पेठा यानी कद्दू को दोमट मिट्टी में बोना बहुत ही  फायदेमंद होता है। पेठा की खेती के लिए दो से तीन बार कल्टीवेटर से जुताई करें। मिट्टियों को भुरभुरा बनाएं तथा खेतों की अच्छे ढंग से जुताई करें। एक हेक्टेयर में लगभग 7 से 8 किलोग्राम बीज की आवश्यकता पड़ती है। ये भी पढ़े: छत पर उगाएं सेहतमंद सब्जियां

खरबूजे की फसल (melon crop) in Hindi

melon crop मार्च के महीने में खरबूजा बहुत ही फायदेमंद तथा पसंदीदा फलों में से एक है। किसान इसकी खेती नदी तट पर करते हैं। खेती करने से पहले बालू में एक थाला बनाते हैं और बीज बोने से थोड़ी देर पहले खेत को अपने हल के जरिए जोतते हैं। खरबूजे की फसल बोने के बाद इसकी सिंचाई को कम से कम 2 या 3 दिन बाद से करना शुरू कर देना चाहिए।

तरबूजे की फसल ( watermelon crop) in Hindi

watermelon crop गर्मी में तरबूज को बहुत ही शौक से खाया जाता है।तरबूज में पानी की मात्रा बहुत ही ज्यादा होती है, इसको खाने से आप ताजगी का अनुभव करते हैं। इस फसल में लागत बहुत कम लगती है लेकिन मुनाफा उससे कई गुना होता है। तरबूज की फसल बहुत ही कम समय में उग जाती है, जिससे किसानों को काफी मुनाफा भी मिलता है। लेकिन इस बात का ध्यान रखें ,कि तरबूज में कीट और रोग का प्रकोप काफी बड़ा रहता है। किसानों को चाहिए कि वैज्ञानिकों के मुताबिक तरबूज की फसलों की देखरेख करें। तरबूज की फसलें 75 से 90 दिनों के अंदर पूर्ण रुप से तैयार हो जाती है।

भिंडी की फसल( okra harvest) in Hindi

भिंडी सब्जियां bhindi ki kheti किसान भिंडी की फसल फरवरी से मार्च के दरमियान जोतना शुरू कर देते हैं। भिंडी की खेती हर तरह की मिट्टी में की जाती है। खेती से पूर्व दो तीन बार खेतों की जुताई करें। जिससे मिट्टियों में भुरभुरा पन आ जाए, जमीन को समतल कर दे। खेतों में लगभग 15 से 20 दिन पहले इनकी निराई-गुड़ाई करें। खरपतवार नियंत्रण रहे इसके लिए कई प्रकार का रासायनिक प्रयोग भी किसान करते हैं।

ग्वार फली की फसल( guar pod crop) in Hindi

गुआर सब्जियों की फसल guar ki kheti ग्वार फली किसानों कि आय का बहुत महत्वपूर्ण साधन होता है। किसान ग्वार फली का इस्तेमाल हरी खाद ,हरा चारा ,हरी फली , दानों आदि के लिए करते है। ग्वार फली में प्रोटीन तथा फाइबर का बहुत ही अच्छा स्त्रोत होता है। इनके अच्छे स्त्रोत के कारण इनको पशुओं के चारे के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है। जिससे पशुओं को विभिन्न प्रकार के प्रोटीन की प्राप्ति हो सके। किसान ग्वार फली की खेती दो मौसम में करते हैं पहला बहुत गर्मी के मौसम में तथा दूसरा  बारिश के मौसम में। ग्वार फली की बुवाई किसान मार्च के महीने में 15 से लेकर 25 तारीख के बीच खेती करना शुरू कर देते हैं। ग्वार फली की फसलें 60 से 90 दिन के अंदर पूर्ण रूप से तैयार हो जाती है तथा यहां कटाई के लायक़ हो जाती हैं। ग्वार फली में बहुत तरह के पौष्टिक तत्व भी मौजूद होते हैं इनका उपयोग विभिन्न प्रकार की सब्जियों को बनाने तथा सलातो के रूप में किया जाता है। हम उम्मीद करते हैं कि आपको हमारी इस पोस्ट द्वारा मार्च के महीने में उगाई जाने वाली सब्जियों की पूर्ण जानकारी पसंद आई होगी। आपने इन सब्जियों के विभिन्न प्रकार के लाभ को जान लिया होगा। यदि आप हमारी दी गई जानकारी से संतुष्ट हैं तो आप हमारी इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा सोशल मीडिया पर शेयर करें धन्यवाद।