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उत्‍तर प्रदेश बजट 2.0 में यू.पी. के किसानों को क्या मिला ?

उत्‍तर प्रदेश बजट 2.0 में यू.पी. के किसानों को क्या मिला ?

उत्‍तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वर्ष 2022 का बजट पेश किया है। जिसमे यू. पी. के वयस्कों, महिलाओं, गरीब किसानों, बेरोजगारों आदि सभी को लगभग काफ़ी कुछ मिला है। तो आइए हम जानते है कि इस बजट के माध्यम से वहां के किसानों को क्या फ़ायदा मिला ?

उत्‍तर प्रदेश बजट 2.0 के माध्यम से किसानों को फ़ायदा :

- सिंचाई के लिए मुफ़्त बिजली, पी.एम. कुसुम योजना, सोलर पैनल्स, लघु सिंचाई परियोजना

बजट में किसानों को सिंचाई के लिए मुफ़्त बिजली का प्रावधान है। इसके लिए किसानों को पी.एम. कुसुम योजना के अंतर्गत किसानों को मुफ़्त सोलर पैनल्स उपलब्ध कराए जाएंगे। सिंचाई की अवशेष परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के साथ एक हज़ार करोड़ रुपए की लागत से लघु सिंचाई परियोजनाओं को आगे बढ़ाने का विशेष प्रावधान भी इस बजट में है।

- भामाशाह भावस्थिरता कोश की स्थापना के लिए फंड

किसानों के लिए भामाशाह भावस्थिरता कोश की स्थापना के लिए फंड की व्यवस्था की गई है। मुख्यमंत्री जी ने पहले से ही धान, गेहूं, और अन्य फसलों के लिए एम.एस.पी. कला उपलब्ध कराई थी लेकिन आलू, टमाटर, प्याज, आदि फसलों में इस प्रकार की व्यवस्था नहीं थी जो कि इस बजट में कराई गई है।

- जैविक खेती

प्रदेश में अभी भी काफ़ी किसान जैविक खेती से जुड़े हुए हैं, जिनके लिए मुख्यमंत्री जी ने टेस्टिंग लैब के व्यवस्था की है। और अगले 5 वर्षों में संपूर्ण बुंदेलखंड खंड को जैविक खेती से जोड़ने का प्रावधान भी इस बजट में पेश किया गया है।

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- बीजों का वितरण

वर्ष 2021-2022 में 60.10 लाख क्विंटल बीजों का वितरण किया गया था और वर्ष 2022-2023 में इसकी मात्रा बढ़ाकर 60.20 लाख क्विंटल बीजों का वितरण किया जाएगा।

- नलकूप तथा लघु नहर

प्रदेश में 30,307 राजकीय नलकूपों तथा 252 लघु नहरों के माध्यम से मुफ़्त सिंचाई सुविधा की व्यवस्था की गई है।

- लघु सिंचाई परियोजना

मुख्यमंत्री लघु सिंचाई परियोजना के लिए एक हजार करोड़ रुपए की व्यवस्था की गई है।

- उर्वरक का वितरण

वर्ष 2021-2022 में कृषकों के लिए 98.80 लाख मीट्रिक टन उर्वरक का वितरण किया गया था तथा वर्ष 2022-2023 में 119.30 लाख मीट्रिक टन उर्वरक के वितरण का लक्ष्य रखा गया है।

- सोलर पंपों की स्थापना

कृषकों को सिंचाई के लिए डीजल विद्युत के स्थान पर ऊर्जा प्रबंधन के तहत ऊर्जा संरक्षण के लिए कृषकों के लिए सोलर पंपों की स्थापना की जाएगी।

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विपक्ष की ओर से बयान :

इस बजट पर विपक्ष की ओर से मायावती ने अपना बयान देते हुए कहा है कि, इस बजट से मुख्यमंत्री जी आम जनता की आंखों में धूल झोंक रहे हैं। उन्होनें आगे ट्वीट कर के कहा है कि "यूपी सरकार का बजट प्रथम दृष्टया वही घिसापिटा व अविश्वनीय तथा जनहित एवं जनकल्याण में भी खासकर प्रदेश में छाई हुई गरीबी, बेरोजगारी व गड्ढायुक्त बदहाल स्थिति के मामले में अंधे कुएं जैसा है, जिससे यहाँ के लोगों के दरिद्र जीवन से मुक्ति की संभावना लगातार क्षीण होती जा रही है।" उन्होंने आगे कहा है कि किसानों के लिए जो बड़े बड़े वादे किए गए थे, तथा जो बुनियादी कार्य प्राथमिकता के आधार पर करने थे वे कहां किए गए। 

वहीं कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि बीजेपी ने इतने बजट पेश किए है जिसमे केवल नंबर बढ़ाए गए है, इससे किसानों को कोई फायदा नही मिला है। बेरोजगारी और गरीबी अपनी चरम सीमा पर है। बजट के बारे में जो कुछ भी मुख्यमंत्री जी ने कहा है, उससे आम जनता और किसानों को कोई फायदा नही है। साथ ही वे कहते हैं उनके इन कामों से जनता का कोई फायदा नहीं होगा। वहीं यूपी के मुख्यमंत्री योगी जी ने बजट प्रस्तुत करने के बाद अपने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा है कि यह बजट 2022-2023 का है, जिससे यूपी की 25 करोड़ जनता का फायदा होगा और साथ ही यह बजट उत्तर प्रदेश के गरीब किसानों और नौजवानों की इच्छाओं को ध्यान में रख कर बनाया गया है। इसके अलावा उन्होनें कहा है कि यह बजट प्रदेश के उज्जवल भविष्य को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है।

किसान के खर्चो में कमी करने के लिए सबसे अच्छा उपाय है सोलर एनर्जी पर निर्भरता

किसान के खर्चो में कमी करने के लिए सबसे अच्छा उपाय है सोलर एनर्जी पर निर्भरता

खेती किसानी में बढ़ते हुए खर्चों के कारण किसानों की लागत एवं आमदनी में अंतर बढ़ता जा रहा है। पिछले कुछ सालों से देखा गया है कि खेती में लगने वाली लागत में बेतहासा वृद्धि हुई है, लेकिन उस अनुपात में खेती से होने वाली आमदनी में बढ़ोत्तरी नहीं देखी गई है। इसलिए सरकार समय-समय पर किसानों की आय को बढ़ाने के लिए प्रयास करती रहती है। इसी श्रृंखला में आज हम बताने जा रहे हैं सौर ऊर्जा यानी सोलर एनर्जी (Solar Energy) के बारे में, जो परंपरागत बिजली बचाने के साथ-साथ किसानों के खर्चों में लगाम लगाने में सहायक हो सकती है। इसके लिए किसानों को अपनी खेती को परंपरागत बिजली की जगह सोलर एनर्जी से प्राप्त बिजली में स्थानान्तरित करना होगा। किसान सिंचाई के साथ अन्य चीजों में सोलर बिजली का उपयोग कर सकते हैं। इससे एक तरफ तो सरकार द्वारा उपलब्ध करवाई जा रही बिजली की खपत कम होगी, तो दूसरी तरफ बिजली का बिल न आने के कारण किसानों की आमदनी में बढ़ोत्तरी हो सकती है। इसके लिए सरकार ने प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान यानि 'प्रधानमंत्री कुसुम योजना' (Pradhan Mantri Kisan Urja Suraksha evam Utthan Mahabhiyan - 'PM KUSUM Scheme') के नाम से एक योजना भी चलाई है, जिसमें सरकार किसानों को डीजल-पेट्रोल के पम्पों की जगह सौर ऊर्जा से चलने वाले पंपों को लगाने के लिए प्रोत्साहित करती है।


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क्या है प्रधानमंत्री कुसुम योजना?

इस योजना की घोषणा सबसे पहले पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली ने की थी, जिसमें किसानों को सिंचाई का एक अच्छा माध्यम देने के लिए डीजल-पेट्रोल से चलने वाले पम्पों को सौर ऊर्जा से चलने वाले पम्पों से बदलने के लिए कहा गया था। इस योजना का उद्देश्य किसानों को पूरी तरह से सिंचाई के लिए सौर ऊर्जा पर निर्भर बनाना है। प्रधानमंत्री कुसुम योजना के लिए चालू वित्त वर्ष में 34,422 करोड़ रूपये का आवंटन किया गया है, जिसके तहत किसानों को सोलर पम्प लगाने पर सब्सिडी प्रदान की जाएगी। इस योजना के अंतर्गत सोलर पम्प खरीदने के लिए 60 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार प्रदान करेगी, जबकि 30 प्रतिशत राशि किसान बैंकों से ऋण के रूप में प्राप्त कर सकते हैं। इस ऋण को किसानों को बैंकों को वापस करना होगा। बाकी बची हुई 10 प्रतिशत राशि का खर्च किसान को खुद वहन करना होगा। PM Kusum Yojna : Source: https://pmkusum.mnre.gov.in/landing.html

प्रधानमंत्री कुसुम योजना का उद्देश्य क्या है?

इस योजना का उद्देश्य किसानों को अपने खेतों में सोलर पैनल (Solar Panel) और सोलर पम्प (Solar Pump) लगाने के लिए प्रोत्साहित करना है। इसके लिए सरकार की तरफ से वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। सरकार ऐसे राज्यों के किसानों को सोलर पंप या सोलर पैनल प्रदान करने की कोशिश कर रही है, जहां किसानों की, पानी की कमी की वजह से फसलें उजड़ जाती हैं, साथ ही किसान खुद के पैसों से सोलर पैनल लगवाने में समर्थ नहीं हैं। इन सोलर पैनलों से प्राप्त बिजली का उपयोग किसान सिंचाई के साथ-साथ घर के अन्य कार्यों के लिए भी कर सकते हैं। साथ ही अतिरिक्त बिजली सरकार को बेच सकते हैं, जिनसे किसानों को अतिरिक्त आमदनी हो सकती है।

इस योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए किन-किन दस्तावेजों की जरुरत होती है?

इस योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए आपको आधार कार्ड, मूल निवासी प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, किसान होने का सर्टिफिकेट, बैंक में खाता, जमीन का विवरण, स्थायी निवास प्रमाण पत्र, मोबाइल नंबर और पासपोर्ट साइज फोटो की जरुरत पड़ेगी।

प्रधानमंत्री कुसुम योजना से क्या लाभ हैं?

इस योजना में सोलर पैनल लगवाने पर किसान को लागत का मात्र 10 प्रतिशत ही भुगतान करना होता है। सोलर पैनल लगने के कारण सिंचाई के अलावा अतिरिक्त बिजली का उपयोग घर के अन्य कामों के लिए किया जा सकता है। जिस भूमि पर पानी की कमी के कारण अनाज नहीं उगाया जाता था उस पर अब अनाज उगाया जा सकता है, जिससे किसानों को अतिरिक्त आय होगी। इससे किसानों को आर्थिक तंगी से बचाया जा सकेगा जिससे किसानों की आत्महत्याओं में कमी लाई जा सकेगी।


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सोलर पैनल लगवाने के बाद बार-बार बिजली का बिल भरने की जरुरत नहीं पड़ेगी। इस योजना के तहत लगने वाले सोलर पैनलों से जो अतिरिक्त बिजली बनेगी, उसे किसान सरकार को बेचकर कुछ अतिरिक्त आमदनी प्राप्त कर सकते हैं। इस योजना से प्राप्त बिजली के उपयोग से परोक्ष रूप से किसान पर्यावरण को भी हानि नहीं पहुंचाते हैं।

प्रधानमंत्री कुसुम योजना में आवेदन कैसे करें?

प्रधानमंत्री कुसुम योजना में आवेदन करने के लिए अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग आधिकारिक वेबसाइट हैं, जो सम्बंधित राज्य के कृषि एवं ऊर्जा मंत्रालय द्वारा चलाई जाती हैं। इच्छुक किसान अपने राज्य की ऑफिसियल वेबसाइट पर जाकर इस योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकता है। अप्लाई करने के 90 दिनों के भीतर सहायता राशि मुहैया करवाकर सोलर पम्प चालू कर दिए जाते हैं।
पंजाब सरकार सिचाईं पर करेगी खर्च कम, लेगी सौर ऊर्जा की मदद

पंजाब सरकार सिचाईं पर करेगी खर्च कम, लेगी सौर ऊर्जा की मदद

पंजाब सरकार ने कृषि सिचाईं के खर्च को कम करने के लिए १५ हॉर्स पावर सौर ऊर्जा यानि सोलर एनर्जी (solar energy) की सहायता लेने के लिए केंद्र सरकार से आर्थिक मदद मांगी है। पी एम कुसुम योजना के तहत केंद्र सरकार किसानों के लिए सौर ऊर्जा चलित पंप सेट प्रदान करती है। इसी के अनुरूप पंजाब सरकार भी राज्य के किसानों के लिए हर सम्भव प्रयास कर रही है, जिससे राज्य के किसानों की बिजली का खर्च कम हो सके। पंजाब एक महत्वपूर्ण फसल उत्पादक राज्य है जो कि कृषि जगत में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसी वजह से खरीफ की फसल के उत्तम उत्पादन के लिए राज्य के किसानों को बीज के साथ साथ अधिक बिजली की भी आवश्यकता पड़ती है। यही कारण है कि पंजाब सरकार बिजली के खर्च को कम करने के लिए पी एम कुसुम योजना से वित्तीय सहायता की मांग की है।

पंजाब राज्य को भी पी एम कुसुम योजना में सम्मिलित करने की मांग

पंजाब सरकार के नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा स्त्रोत मंत्री अमन अरोड़ा जी ने बताया कि उन्होंने केंद्र सरकार को लिखित में पत्र भेजा है, जिसमें पंजाब राज्य को पी एम कुसुम योजना में सम्मिलित करने की मांग की है। साथ ही, पंजाब सरकार इस मांग को औपचारिक रूप से केंद्र के समक्ष प्रस्तुत कर चुकी है। हालाँकि, अमन अरोरा जी ने ये भी कहा कि पंजाब राज्य को इस पी एम कुसुम योजना के लाभ से वंचित रखा गया है। साथ ही पंजाब में ज्यादातर पंप सेट की क्षमता १० से १५ एच पी है, किसान उनको वहन करने के लिए सक्षम नहीं हैं, इसलिए किसानों को सी एफ ए यानि केन्द्रीय वित्तीय सहायता की अत्यधिक आवश्यकता है।


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पंजाब राज्य सरकार ने कितने हॉर्स पावर के पंप सेट के लिए माँगा फंड

केंद्र सरकार १ अगस्त २०२२ को पूर्वोत्तर व पहाड़ी राज्यों के किसानों को १५ एच पी क्षमता वाले कृषि पम्पों के लिए सी एफ ए प्रदान करने का प्रावधान किया है, सिर्फ पंजाब राज्य में ही यह ७.५ एच पी तक है। लेकिन पंजाब राज्य सरकार ने १५ एच पी हॉर्स पावर के सौर ऊर्जा पंप सेट की मांग रखी थी।
वैज्ञानिक विधि से करें बेहतर पौधशाला प्रबंधन

वैज्ञानिक विधि से करें बेहतर पौधशाला प्रबंधन

बेहतर पौधशाला प्रबंधन के फायदे और उत्पादन से बढ़ेगी आय

किसान भाइयों को यह बात पता ही है कि किसी भी फसल के बेहतर उत्पादन के लिए एक स्वस्थ पौध का होना अनिवार्य है। केवल बेहतर बीज से तैयार हुई स्वस्थ और गुणकारी पौध समय पर गुणवत्ता युक्त फसल उत्पादन कर सकती है। कुछ सब्जी जैसे कि
बैंगन, मिर्च, टमाटर तथा पत्तागोभी जैसी फसलों में स्वस्थ पौधरोपण के बिना किसी भी हालत में बेहतर उत्पादन नहीं हो सकता है और किसी भी स्वस्थ पौध को तैयार करने के लिए एक बेहतर पौधशाला (nursery; paudhshala) की आवश्यकता होती है।

कैसे तैयार करें बेहतर पौधशाला ?

कृषि क्षेत्र में काम कर रहे कृषि वैज्ञानिक समय-समय पर पौधशाला के बेहतर प्रबंधन के लिए एडवाइजरी जारी करते हैं। पौधशाला के क्षेत्र की भूमि को हमेशा मुलायम और आसानी से पानी सोखने के लायक बनाया जाना चाहिए। नई तकनीकों का इस्तेमाल करने वाले किसान भाई दोमट मिट्टी का इस्तेमाल कर फसल पर पड़ने वाले अम्लीयता और क्षारीयता के प्रभाव से होने वाले नुकसान को कम करने में भी सफल हुए हैं। दोमट मिट्टी के प्रयोग से मृदा में जल धारण की क्षमता बढ़ने के साथ ही जैविक कार्बन की मात्रा भी बढ़ती है।

कैसे करें बेहतर शोधन मृदा ?

वर्तमान में पौधशाला में इस्तेमाल की जाने वाली मृदा को बेहतर उत्पादन और रोग प्रतिरोधक बनाने के लिए 'मृदा सौरीकरण विधि' (मृदा सूर्यीकरण; Soil Solarization; सॉयल सोलराइजेशन) का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस विधि में पौधशाला की मृदा को सूर्य के प्रकाश की मदद से बेहतर उपज वाली बनाया जाता है। सबसे पहले पौध उगाने के लिए काम में आने वाली मिट्टी की बड़ी-बड़ी क्यारियां बनाकर, जुताई करने के बाद सीमित मात्रा में सिंचाई करते हुए, मृदा की नमी को बरकरार रखने से बेहतर उपज प्राप्त होती है।


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पॉलिथीन की चादर से ढक कर मिट्टी को दबा कर अंदर की हवा और नमी को ट्रैप करके करके रखा जाना चाहिए, इस विधि की बेहतर सफलता के लिए पॉलिथीन की परत को अगले 7 से 10 सप्ताह तक वैसे ही लगा रहने देना चाहिए। अधिक समय तक पॉलिथीन लगी रहने से उसके अंदर के क्षेत्र में स्थित मृदा का तापमान 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है, जिससे मृदा में उपलब्ध कई हानिकारक बैक्टीरिया स्वतः ही नष्ट हो जाते हैं और पौधशाला को भविष्य में होने वाले रोगों से आसानी से बचाया जा सकता है। इसके अलावा दक्षिणी भारत के राज्य और तटीय क्षेत्रों में 'जैविक विधि' की मदद से भी मृदा शोधन किया जाता है। इस विधि का इस्तेमाल मुख्यतः मृदा में उगने वाली फसल में होने वाले आर्द्र-गलन रोग से बचाने के लिए किया जाता है। इस विधि में 'ट्राइकोडरमा' की अलग-अलग प्रजातियों का बीज के बेहतर उपचार करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। कंपोस्ट और उचित कार्बनिक खाद की मात्रा वाले जैविक पदार्थों का उपयोग मृदा के शोधन को और बेहतर बना देता है। वर्तमान में कई किसान भाई जैव पदार्थों का इस्तेमाल भी करते हैं, ऐसे पदार्थों के प्रयोग से पहले ध्यान रखना चाहिए कि उस पदार्थ में जीवित और सक्रिय बीजाणु पर्याप्त मात्रा में होने चाहिए। जैविक पदार्थों के प्रयोग के बाद पौधशाला को ऊपर से ढक देना चाहिए क्योंकि मृदा को बारिश एवं धूप से बचाने की आवश्यकता होती है। जैविक विधि का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें किसी भी तरह के रासायनिक उर्वरकों का इस्तेमाल नहीं किया जाता है, इसलिए किसानों की लागत में भी कमी देखने को मिलती है।


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इसके अलावा 'रासायनिक विधि' की मदद से भी मृदा शोधन किया जाता है, जिसमें फार्मएल्डिहाइड और फॉर्मलीन जैसे रसायनिक उर्वरकों का एक घोल तैयार किया जाता है, जिसे समय-समय पर मृदा के ऊपर अच्छी तरह छिड़का जाता है। इस विधि में भी पॉलिथीन की चादर का इस्तेमाल करके वाष्पीकरण और नमी को ट्रैप किया जाता है। [caption id="attachment_11392" align="alignnone" width="600"]एक पौधशाला का दृष्य एक पौधशाला का दृष्य  (Source-Wiki; Author-NB flickr)[/caption]

पौधशाला प्रबंधन से किसानों को होने वाले लाभ :

खुले खेत की तुलना में पौधशाला में किसी भी फसल की पौध जल्दी तैयार होती है और उसकी गुणवत्ता बेहतर होने के साथ ही उपज भी अधिक प्राप्त होने की संभावना होती है। इसके अलावा पौधशाला में फसल उगाना आर्थिक रूप से कम खर्चीला होता है, इससे किसानों को होने वाला मुनाफा अधिक हो सकता है। पौधशाला प्रबंधन का एक और फायदा यह भी है कि इसमें बीज की बुवाई करने से लेकर अंकुरण तक पौधे के विकास के लिए आवश्यक जलवायु और तापमान को आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है, इससे फसल में होने वाले रोगों से भी बचा जा सकता है। पौधशाला की मदद से घर पर ही पौध तैयार करने से भूमि की जुताई में होने वाले खर्चे को कम किया जा सकता है, साथ ही श्रम पर होने वाला खर्चा भी बचाया जा सकता है। इसीलिए कृषि वैज्ञानिकों की राय में छोटे और सीमांत किसानों को खुले खेत की तुलना में पौधशाला विधि की मदद से ही फसल उत्पादन करना चाहिए। तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के क्षेत्रों में पौधशाला विधि से खेती करने वाले किसानों की राय में उन्हें पूरी फसल से होने वाले मुनाफे से भी ज्यादा फायदा केवल पौधशाला में तैयार नर्सरी से ही हो जाता है।


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कई सब्जी की फसलों के बेहतर उत्पादन के लिए कृषि वैज्ञानिकों के द्वारा तैयार संकर किस्म के बीज बाजार में काफी महंगे बिकते हैं, इसलिए पौधशाला में ही नर्सरी की मदद से बुवाई कर बीजों को भी बचाया जा सकता है। पौधशाला प्रणाली में किसानों को किसी भी प्रकार के बीजों को चुनने की स्वतंत्रता होती है, क्योंकि इस विधि में बीज उपचार के माध्यम से सस्ते बीजों को भी बेहतर उत्पादन लायक बनाया जा सकता है। रासायनिक उर्वरकों का ज्ञान रखने वाले कई किसान भाई फफूंद नाशक और कीटनाशक दवाओं का इस्तेमाल कर बीजों का बेहतर उपचार कर नर्सरी से होने वाली उपज को बढ़ाने में सफल हुए हैं। आशा करते हैं हमारे किसान भाइयों को पौधशाला प्रणाली की मदद से क्यारियां बनाने और बेहतर उपज वाली मृदा और बीज उपचार के बारे में सम्पूर्ण जानकारी मिल गई होगी और Merikheti.com द्वारा उपलब्ध करवाई गई इस जानकारी से, आप भी भविष्य में वैज्ञानिकों के द्वारा बताई गई गुणवत्ता युक्त सब्जी उत्पादन की बेहतर तकनीक का इस्तेमाल कर अच्छा मुनाफा कमा पाएंगे।
अब अपनी बंजर और बेकार पड़ी भूमि से भी किसान कमा सकते हैं पैसा, यहां करें आवेदन

अब अपनी बंजर और बेकार पड़ी भूमि से भी किसान कमा सकते हैं पैसा, यहां करें आवेदन

सरकार किसानों की आय को बढ़ाने के लिए समय-समय पर प्रयास करती रहती है। इसके लिए सरकार किसानों के लिए कई तरह की योजनाएं चलाती है, जिनके द्वारा किसान लाभान्वित हो पाएं। सरकार किसानों को लोन मुहैया कारवाने से लेकर कई योजनाओं के माध्यम से सब्सिडी भी प्रदान करती है, ताकि किसान जल्द से जल्द अपनी आय दोगुनी कर पाएं। इसी कड़ी में आगे बढ़ते हुए अब राजस्थान सरकार ने किसानों को सौर ऊर्जा (Solar Energy; Saur Urja) से जोड़ने के लिए योजना शुरू की है। इसके तहत सरकार ने जयपुर में 'सौर कृषि आजीविका योजना पोर्टल' (Saur Krishi Ajivika Yojna) लॉन्च किया है। पोर्टल लॉन्च के दौरान राज्य ऊर्जा मंत्री भंवर सिंह भाटी मौजूद रहे। उन्होंने बताया कि इस पोर्टल के माध्यम से किसान अपनी खाली और बेकार पड़ी जमीन और बंजर खेतों में सोलर प्लांट (Solar Plant) लगाकार बिजली उत्पन्न कर सकते हैं, साथ ही इस बिजली को बेंच सकते हैं। इसके लिए सरकार जमीनों के मालिक और किसानों को विद्युत् वितरण कंपनी के साथ जोड़ रही है।

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सरकार ने सौर कृषि योजना पोर्टल किया लॉन्च

सरकार ने यह पोर्टल इसलिए लॉन्च किया है ताकि किसानों और जमीन मालिकों को उनकी जमीन में सौर ऊर्जा संयत्रों को स्थापित करने में किसी भी प्रकार की दिक्कत का सामना न करना पड़े। यह पोर्टल किसानों और जमीन मालिकों को सौर ऊर्जा संयत्रों को स्थापित करने में हर प्रकार की मदद करेगा। इस पोर्टल की मदद से सौर ऊर्जा कंपनियां सीधे किसानों और जमीन मालिकों से संपर्क साध सकेंगी, साथ ही इस पोर्टल के माध्यम से जमीन को लीज में लेने की प्रक्रिया भी बेहद आसान हो जायेगी, जिससे किसान और ऊर्जा कंपनियों के अधिकारियों को भी ज्यादा परेशान होने की जरुरत नहीं पड़ेगी। इसके साथ ही सरकार ने बताया है कि पोर्टल में किसानों के लिए खेती बाड़ी से सम्बंधित अन्य जानकरियां भी उपलब्ध करवाई जाएंगी। नए पोर्टल पर विजिट करने के लिए किसान भाई www.skayrajasthan.org.in पर जा सकते हैं और इसी के माध्यम से किसान भाई अपना आवेदन प्रेषित कर सकते हैं। सरकार ने बताया है कि सौर कृषि योजना के अंतर्गत यदि कोई किसान अपनी जमीन में सौर ऊर्जा सयंत्र स्थापित करना चाह रहा है तो सरकार के द्वारा उसे पीएम कुसुम योजना के अंतर्गत 30 प्रतिशत तक की सब्सिडी उपलब्ध करवाई जाएगी।

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अगर राजस्थान में जमीनों की बात करें तो यहां पर बहुत सारी जमीनें पानी के आभाव में पूरी तरह से बंजर हो गईं हैं। ज्यादातर मिट्टी रेतीली है, जहां पर हर मौसम में खेती करना बेहद मुश्किल काम है, इसके साथ ही राजस्थान की बेहद गर्म जलवायु खेती के अनुकूल नहीं है। जिसके कारण राजस्थान में बहुत सारी जमीनें अनुपयोगी पड़ी हुई हैं, जिनका कोई उपयोग नहीं है। ऐसे में इन बेकार पड़ी जमीनों का इस्तेमाल सौर कृषि योजना के अंतर्गत सौर सयंत्र लगाने में किया जा सकता है। जिससे किसानों और जमीन मालिकों की आय बढ़ सकती है। अगर आंकड़ों पर गौर करें तो पिछले कुछ सालों में राजस्थान में सौर ऊर्जा के क्षेत्र में क्रांति हुई है। अभी भारत में राजस्थान राज्य सौर ऊर्जा के क्षेत्र में नंबर 1 स्थान रखता है। वर्तमान में राजस्थान में 142 गीगावाट सौर ऊर्जा का उत्पादन होता है, अब बहुत सारी सरकारी और निजी कंपनियां सौर ऊर्जा से माध्यम से बिजली उत्पादन के लिए राजस्थान की खाली पड़ी जमीन में दिलचस्पी ले रही हैं।
अब खेतों में कीटनाशक की जरूरत नहीं पड़ेगी, अपनाएं यह आधुनिक तरीका

अब खेतों में कीटनाशक की जरूरत नहीं पड़ेगी, अपनाएं यह आधुनिक तरीका

खेती-बाड़ी में कीट पतंगों को भगाने के लिए हमेशा से किसानों की तरफ से कीटनाशक या फिर केमिकल युक्त रसायनों का इस्तेमाल किया जाता रहा है। लेकिन आजकल लोग अपनी सेहत को लेकर बेहद जागरूक हो गए हैं और वह खाने-पीने में ऐसी चीजें इस्तेमाल करना चाहते हैं। जिन पर किसी भी तरह के केमिकल का इस्तेमाल ना किया गया हो। ऐसे में किसानों की समस्या थोड़ी बढ़ गई है। क्योंकि अगर वह किसी भी तरह के केमिकल का इस्तेमाल नहीं करते हैं। तो फसल को कीट पतंगों से नुकसान होने का खतरा रहता है। कभी-कभी पूरी की पूरी फसल भी बर्बाद हो जाती हैं। ऐसे में किसानों के सामने एक बहुत बड़ा सवाल है, कि किस तरह से फसल की इन कीटों से रक्षा की जाए। हाल ही में किसानों की समस्या का हल करने के लिए कई तरह के विकल्प दिए गए हैं। इन्हीं विकल्पों में से एक है लाइट ट्रैप जो फसल को बिना नुकसान पहुंचाए सारे कीटों को नष्ट कर देता है। ये कीटनाशकों का एक अच्छा विकल्प है, जिसे किसानों तक पहुंचाने के लिए सरकार कई योजनाएं और जागरूकता कार्यक्रम भी चलाती है। इसी कड़ी में हरियाणा सरकार भी किसानों को लाइट ट्रैप लगवाने के लिए प्रेरित कर रही है। लाइट ट्रैप का इस्तेमाल करने के लिए किसानों के खेत में सोलर LED लाइट लगवाए जाते हैं, जो सूरज की रोशनी से ही चार्ज हो जाते हैं। कृषि विभाग की ओर से किसानों को सोलर LED लाइट ट्रैप की खरीद पर 75 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है।
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क्या है सोलर LED लाइट ट्रैप

आपको बता दें कि सोलर LED लाइट ट्रैप एक सौर ऊर्जा से चलने वाले उपकरण है। इस उपकरण में सबसे ऊपर सोलर प्लेट लगी होती है, जिसके नीचे लगी बैटरी को दिन के समय चार्ज किया जाता है। इस उपकरण में एक इलैक्ट्रिक रैकिट भी लगा होता है, जिसके ऊपर कई छोटे-छोटे बल्ब भी लगा दिए जाते हैं। ये बल्ब सौर ऊर्जा से चार्ज बैटरी से जलते हैं। इसकी रौशनी में रात के समय कीट आकर्षित होते हैं और इलैक्ट्रिक रैकिट की चपेट में आकर नष्ट हो जाते हैं। इस तरह फसल को भी नुकसान नहीं होता और बिना किसी छिड़काव के कीटों का नियंत्रण भी हो जाता है।
ये भी देखें: अकेले कीटों पर ध्यान देने से नहीं बनेगी बात, साथ में करना होगा ये काम: एग्री एडवाइजरी

सरकार की तरफ से मिल रही है सब्सिडी

सरकार की तरफ से सब्सिडी की बात की जाए तो किसानों को सोलर LED लाइट स्ट्रिप लगाने के लिए हरियाणा सरकार लगभग 75% तक की सब्सिडी दे रही है। हर एक एकड़ में एक सोलर पावर एलईडी लाइट ट्रैप लगाया जाता है और कोई भी किसान अधिकतम 10 एकड़ में लाइट ट्रैप लगा सकता है। साथ ही इस योजना के तहत सबसे अच्छी बात है, कि इस स्कीम के तहत लाभ उठाने के लिए आप आवेदन ऑनलाइन पोर्टल 'मेरी फसल मेरा ब्यौरा' पर ही दे सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए अपने नजदीकी सीएससी सेंटर में जाकर भी आवेदन करवा सकते हैं।

सब्जी और नकदी फसलों को होता है कीटों से सबसे ज्यादा नुकसान

राज्य सरकार की जिला बागवानी अधिकारी डॉ. नेहा यादव से हुई बातचीत में उन्होंने बताया कि जैसे ही मौसम बदलने लगता है, तो सब्जियों और दूसरी नकदी फसलों को कीट पतंगों से होने वाला नुकसान बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। ऐसे में इन कीट पतंगों की रोकथाम ना की जाए तो यह पूरी की पूरी फसल को भी बर्बाद कर सकते हैं। ऐसे में किसान इन को मारने के लिए या फिर भगाने के लिए केमिकल युक्त हानिकारक रसायनों का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन इनसे सबसे बड़ी समस्या जो सामने आती है, वह है कि इनका कुछ ना कुछ अंश सब्जियों या फलों पर रह जाता है। जो आगे चलकर इसको इस्तेमाल करने वाले लोगों की सेहत पर गलत असर करता है। साथ ही, बिना जानकारी के इस्तेमाल किए जाने पर यह रासायनिक कीटनाशक फसल को भी बर्बाद कर देते हैं। इन सभी कारणों के चलते ही हरियाणा सरकार कीटों के प्रकोप को रोकने के लिए सोलर एलइडी लाइट ट्रैप का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करने की सलाह किसानों को दे रही है। अलग-अलग योजनाएं बनाकर उन्हें इसके इस्तेमाल के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
अन्न के साथ किसान पैदा कर रहे ऊर्जा, बिना बिजली के खेतों तक पहुंच रहा पानी

अन्न के साथ किसान पैदा कर रहे ऊर्जा, बिना बिजली के खेतों तक पहुंच रहा पानी

क्या आप कभी ऐसा सोच सकते हैं, कि बिना बिजली कनेक्शन के खेतों तक पानी पहुंच जाए? जाहिर है, कि ये बात हर किसी को नामुमकिन लगेगी. आपको बता दें किसानों ने इसी नामुकिन सी बात को मुमकिन कर दिखाया है. आपको बता दें कि, मध्य प्रदेश में एक विकासशील राज्य है. लेकिन वहन अभी भी इसे कई कृषि क्षेत्र हैं, जहां पर बिजली का कनेक्शन नहीं पहुंचा है. ऐसी स्थिति में कृषि क्षेत्रों के लिए एमपी सरकार की सोलर पंप योजना को काफी ज्यादा पसंद की जा रही है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक राज्य में 20 हजार 6 सौ से ज्यादा सोलर पंप क्षेत्रों में स्थापित किये गये हैं. जिसके बाद एमपी के किसान सिर्फ अन्न ही नहीं बल्कि खेतों में उर्जा भी पैदा कर रहे हैं.

एमपी सरकार ने शुरू की योजना

मध्य प्रदेश की सिवराज सिंह चौहान की सरकार ने किसानों के लिए एक बड़ी योजन की शुरुआत की है. इस योजना के तहत
किसानों के लिए सोलर पंप की सौगात दी है. सरकार की इस योजना के पीछे सिर्फ एक ही उद्देश्य है, कि किसान भाई बिजली कनेक्शन के बिना अपने खेतों की फसलों में सिंचाई कर सकें. बिजली की समस्या से राज्य के कई ग्रामीण क्षेत्र के किसान परेशान हैं. बिजली ही एक मात्र ऐसा जरिया है, जिससे खेतों में पानी पहुंचाया जा सके. किसानों की इस समस्या को देखते हुए, सरकार ने नई योजना शुरू करके किसानों के लिए एक विकल्प तैयार कर दिया है. जिससे किसान खेतों में सोलर पंप की मदद सिंचाई करने का फायदा उठा रहे हैं.

बदल गयी सोलर पंप से तक़दीर

राज्य सरकार के मुताबिक 20 हजार 6 सौ से ज्यादा सोलर पंप खेतों में लगाये जा चुके हैं. वहीं सरकार का लक्ष्य 60 हजार सोलर पंप लगाने का है. सबसे अहम बात यह है कि, इस योजना का फायदा उन किसानों को सबसे ज्यादा मिल रहा है, जिनके नदी, तालाब, नलकूप या फिर अन्य स्रोत में पानी था, लेकिन उस पानी का इस्तेमाल करने के लिए बिजली नहीं मिल पा रही थी. जो भी किसान भाई सरकार की सोलर पंप वाली योजना का लाभ लेना चाहते हैं, उन्हें मध्य प्रदेश ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड भोपाल में अपना रजिस्ट्रेशन करना होगा. रजिस्ट्रेशन के लिए 5 हजार रुपये की धनराशी निर्धारित की गयी है. ऐसे में अगर किसी किसान का रजिस्ट्रेशन रिजेक्ट होता है, तब किसान को पूरा अमाउंट लौटा दिया जाएगा.

सरकार देगी अनुदान

सोलर पंप के लिए सरकार की ओर से किसानों को अनुदान दिया जा रहा है. जानकारी के मुताबिक एचपी डीसी समर्सिबल पंप के लिए किसानों को सिर्फ 19 हजार रूपये देने होंगे. जिसके माध्यम से उन्हें करीब 30 हजार का फायदा दिया जाएगा. बात दो एचपी डीसी सरफेस की करें तो, उसके लिए किसान को 23 हजार रुपये देने होंगे. दो एचपी डीसी समर्सिबल के लिए सिर्फ 25 हजार रुपये में किसान को सोलर पंप की सुविधा मिलेगी.

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तीन एचपी के लिए 36 हजार और 5 एचपी के लिए 72 हजार, तो वहीं 7.5 एचपी के लिए एक लाख 35 हजार रुपयों का भुगतान किसानों को करना होगा.

इस योजना के लिए पात्रता

  • मुख्यमंत्री सोलर पंप योजना की पात्रता के लिए किसान आवेदक को एमपी का स्थाई निवासी होना जरूरी है.
  • आवेदक के पास किसान कार्ड भी होना जरूरी है.
  • आधार कार्ड, निवास प्रमाण पत्र, खेती योग्य जमीन के कागज, मोबाइल नंबर और पासपोर्ट साइज़ की फोटो के साथ आवेदक का रजिस्ट्रेशन किया जाएगा.
  • एमपी के किसी भी क्षेत्र का किसान क्यों ना हो, वो मुख्यमंत्री किसान सोलर पंप योजना के लिए रजिस्ट्रेशन कर सकता है.

इन नियमों का जानना जरूरी, वरना नहीं मिलेगा सोलर पंप

  • आवेदक किसान सोलर पंप का इस्तेमाल सिर्फ सिंचाई के लिए ही कर सकता है.
  • सोलर पंप से निकले पानी को बेचा या हस्तांतरित नहीं किया जा सकता.
  • मध्य प्रदेश ऊर्जा विकास निगम से सोलर पंप की स्थापना के लिए सहमती लेनी जरूरी होगी.
  • जहां पर बिजली कनेक्शन नहीं है, यह योजना सिर्फ उन्हीं किसानों के लिए बनाई गयी है.
अब बंजर जमीन से किसानों की होगी भारी कमाई, हर एकड़ में मिल सकते हैं एक लाख रुपये

अब बंजर जमीन से किसानों की होगी भारी कमाई, हर एकड़ में मिल सकते हैं एक लाख रुपये

देश की केंद्र सरकार किसानों की आय बढ़ाने का लगातार प्रयास कर रही है, जिसके लिए कई योजनाएं लागू की गई है जो किसानों को प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से लाभ प्रदान कर रही हैं। इसी तरह की एक योजना है प्रधानमंत्री कुसुम योजना। इस योजना के अंतर्गत सरकार किसानों को अपने खेत में सोलर पंप लगवाने के लिए भारी सब्सिडी दे रही है। इस योजना के अंतर्गत किसान भाई अपने खेत पर या बंजर जमीन पर सोलर पंप लगवा सकते है। जिसके लिए सरकार 60 फीसदी का अनुदान दे रही है। इस योजना को साल 2019 में शुरू किया गया था और अब इस योजना पर लगातार काम किया जा रहा है ताकि किसानों को इस योजना का लाभ पहुंचाया जा सके। इस योजना का मुख्य उद्देश्य प्रदूषण से मुक्त और बेहद कम दामों में किसानों को सिंचाई उपलब्ध करवाना है। सरकार ने अपनी इस योजना के बारे में बताया है कि इस योजना के अंतर्गत किसानों को सोलर पैनल फ्री मिलते हैं, जिससे वो आसानी से बिजली बना सकते हैं। उस बिजली को अपनी अवश्यकतानुसार उपयोग कर सकते हैं तथा बाकी बची बिजली को बेंचकर अतिरिक्त आमदनी हासिल कर सकते हैं। बची हुई बिजली को विद्युत वितरण कंपनी खरीद लेती है, साथ ही अगले 25 सालों तक इनकम की गारंटी भी देती है। लेकिन किसान को ध्यान रखना होगा कि सोलर प्लांट लगवाने के लिए किसान की जमीन विद्युत सब-स्टेशन से 5 किलोमीटर तक दायरे में होनी चाहिए। नवीनीकृत स्रोतों से बनाई जाने वाली बिजली प्रदूषण रहित होती है जिससे पर्यावरण को नुकसान नहीं होता। इसके साथ ही इसको बनाने में लागत भी कम आती है।

प्रति एकड़ एक लाख रुपये तक की हो सकती है कमाई

सरकार की कोशिश है कि किसान भाई इस योजना का लाभ उठाकर अपने खेतों में लगे डीजल पंपों को बंद कर दें और सौर ऊर्जा से चलित पंपों का इस्तेमाल करें। इससे एक ओर प्रदूषण में कमी आएगी वहीं दूसरी ओर डीजल की खपत भी कम होगी। जिससे केंद्र सरकार के ऊपर कच्चे तेल के आयात का बोझ कम होगा। इसके अलावा किसान भाईयों को बची हुई बिजली विद्युत वितरण कंपनी को बेंचने पर हर माह प्रति एकड़ 1 लाख रुपये तक का मुनाफा हो सकता है। यह आमदनी किसान को आगामी 25 वर्षों तक होती रहेगी। ये भी देखें: इस तकनीक के जरिये किसान 1 एकड़ जमीन से कमा सकते है लाखों का मुनाफा

इस प्रकार उठा सकते हैं सब्सिडी का फायदा

केंद्र सरकार ने कहा है कि इस योजना के अंतर्गत सोलर पैनल लगवाने पर किसान को कुल राशि का सिर्फ 10 प्रतिशत ही भुगतान करना होता है। इसके अलावा सरकार किसान को कुल राशि का 60 प्रतिशत देती है, जो सब्सिडी के रूप में होता है। इस राशि में से 30 प्रतिशत केंद्र सरकार की तरफ से तथा 30 प्रतिशत राशि राज्य सरकार की तरफ से वहन की जाती है। बाकी बची हुई 30 प्रतिशत राशि किसान को बैंक लोन के रूप में प्रदान की जाती है, जिसे किसानों को समय पर किस्तों के माध्यम से वापस करना होता है।

प्रधानमंत्री कुसुम योजना से किसान भाइयों को होंगे ये फायदे

  • इस योजना के माध्यम से बिना एकमुश्त राशि दिए आसानी से किसान की भूमि में सोलर पैनल लगाए जाते हैं। जिन्हें बेकार पड़ी जमीन में भी लगवाया जा सकता है।
  • इससे किसानों को फ्री बिजली मिलेगी जिससे सिंचाई में आसानी होगी। फ्री बिजली मिलने से किसानों का सिंचाई में होने वाला व्यय घटेगा।
  • इस योजना से किसानों की डीजल पर से निर्भरता कम होगी।
  • अतिरिक्त बिजली को आगामी 25 सालों तक बेंचकर किसान भाई अपने लिए अतिरिक्त आमदनी कर सकते हैं।
  • इस योजना के माध्यम से पर्यावरण में प्रदूषण कम किया जा सकेगा।

इनको मिलेगा प्रधानमंत्री कुसुम योजना का लाभ

देश में प्रधानमंत्री कुसुम योजना का लाभ किसानों के साथ-साथ सहकारी समितियों को, पंचायतों को, किसानों के समूहों को, किसान उत्पादक संगठनों को और जल उपभोक्ता एसोसिएशनों को भी मिलेगा।

इस योजना का लाभ पाने के ये डाक्यूमेंट्स होंगे जरूरी

इस योजना का लाभ पाने के लिए लाभार्थी के पास आधार कार्ड, आवेदन करने वालों की पासपोर्ट साइज़ की फोटो, पहचान पत्र, राशन कार्ड, रजिस्ट्रेशन की कॉपी, बैंक खाते की डिटेल, जमीन के दस्तावेज और मोबाइल नंबर होना अनिवार्य है। ये सभी डाक्यूमेंट्स आवेदन करते समय लगाने अनिवार्य हैं।

प्रधानमंत्री कुसुम योजना का लाभ पाने के लिए इस प्रकार से करें आवेदन

आवेदनकर्ता प्रधानमंत्री कुसुम योजना का लाभ पाने के लिए योजना की आधिकारिक वेबसाइट mnre.gov.in पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त योजना की विस्तृत जानकारी प्राप्त करने के लिए अपने नोडल ऑफिसर से सम्पर्क कर सकते हैं।
इस राज्य में हिम ऊर्जा सोलर पॉवर यूनिट लगवाने पर 40% प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा

इस राज्य में हिम ऊर्जा सोलर पॉवर यूनिट लगवाने पर 40% प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा

हिमाचल प्रदेश में हिम ऊर्जा का 250 से 5 मेघावाट का भूमि पर पॉवर प्लांट स्थापित करने का प्रोजेक्ट चालू किया गया है, जिसके अंतर्गत 250 से 1 मेघावाट के प्रोजेक्ट के लिए कोई भी हिमाचली युवा इस प्रोजेक्ट को लगवा सकता है। साथ ही, सरकार को बिजली बेच कर बेहतरीन आमदनी कर सकता है। हिमाचल प्रदेश सोलर ऊर्जा के मामले में अग्रणी राज्यों में से एक है। साथ ही, सरकार की तरफ से इसके विकास और उन्नति हेतु बहुत सारे कदम उठाए गए हैं। जिनके अंतर्गत हिम ऊर्जा के 250 मेगावाट से 5 मेघावाट के प्रोजेक्ट के जरिए जहां एक ओर बिजली की परेशानियां दूर की जा सकती हैं। दूसरी तरफ बेरोजगार युवाओं के लिए एक रोजगार का उत्तम विकल्प भी है। यहां हिम ऊर्जा के सोलर पॉवर प्रोजेक्ट की संपूर्ण जानकारी है।

हिम ऊर्जा के रूफ टॉप पावर प्लांट स्थापना हेतु मिलेगा 40% प्रतिशत अनुदान

हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा एक विशेष योजना जारी की गई है। इस योजना का नाम "सौर उत्पादक एवं अधिगम परियोजना" है। इस योजना के अंतर्गत, निजी एवं सरकारी संस्थानों की छत पर सोलर प्लांट स्थापित करने हेतु वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाती है। इस योजना के चलते सरकारी संस्थानों को 70% प्रतिशत तो वहीं निजी संस्थानों को 30% फीसद अनुदान मुहैय्या किया जाता है। इसके अतिरिक्त इस योजना के अंतर्गत कोई भी व्यक्ति अपने घर की छत पर 1 से 3 किलोवाट का पॉवर प्लांट स्थापित कर सकता है। इसके लिए हिमाचल सरकार भी 40% प्रतिशत तक का अनुदान प्रदान करती है। इसके साथ ही, योजना के तहत स्थापित सोलर प्लांट की ऊर्जा उत्पादन भी उस संस्था हेतु निःशुल्क होती है, जिसमें वह लगवाई गई है। यह भी पढ़ें : इस राज्य के किसानों को मिलेगा सोलर पंप पर अब 75% प्रतिशत अनुदान इस योजना का प्रमुख लक्ष्य है, कि हिमाचल प्रदेश के संस्थानों के तरफ से उत्पन्न विघुत खर्च कम किया जा सके। वह स्वतंत्र ऊर्जा के स्रोत का इस्तेमाल करके अपनी ऊर्जा जरूरतों की पूर्ती की सकें। यह योजना हिमाचल प्रदेश के लिए एक काफी बड़ी पहल है, जो कि स्वतंत्रता से विघुत उत्पादन करने में सहायक भूमिका निभाएगा।

किसान भाई अपनी भूमि पर सोलर ऊर्जा प्लांट स्थापित कर अच्छी आय कर सकते हैं

जानकारी के लिए बतादें, कि हिमाचल प्रदेश के अंदर हिम ऊर्जा का 250 से 5 मेघावाट का भूमि पर पॉवर प्लांट लगाने का प्रोजेक्ट चालू किया गया है। इसके अंतर्गत 250 से 1 मेघावाट के प्रोजेक्ट हेतु कोई भी हिमाचली युवा इस प्रोजेक्ट को स्थापित कर सकते हैं। साथ ही, सरकार भी बिजली बेचकर काफी बेहतरीन आमदनी कर सकती है। इसके अतिरिक्त गैर हिमाचली भी 1 से 5 मेघावाट तक का हिम ऊर्जा का प्रोजेक्ट स्थापित कर सकते हैं। लेकिन, ध्यान रहे कि हिमाचल प्रदेश में उसकी स्वयं की भूमि हो अथवा लीज पर ली गई हो। इस प्रोजेक्ट में 1 मेघावाट तक का पॉवर प्लांट स्थापित करवाने हेतु न्यूनतम 1 करोड़ रुपये के खर्चे की आवश्यकता होगी। यह भी पढ़ें : किसान के खर्चो में कमी करने के लिए सबसे अच्छा उपाय है सोलर एनर्जी पर निर्भरता

हिमाचल प्रदेश में समकुल कितने हिम ऊर्जा के प्रोजेक्ट हैं

हिमाचल प्रदेश में समकुल 330 MW का सोलर पॉवर प्रोजेक्ट चालू किया गया है। इनमें से 10 MW की लगवाने हेतु सोलन जनपद में, 100 MW का स्थापित करने ऊना जनपद में वहीं 210 MW की स्थापना कांगड़ा जनपद में की गई हैं। हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा अपने अनुमति पत्र वापस लेने के उपरांत कुछ प्रोजेक्ट हेतु अधिकृत ठहराया है। बाकी प्रोजेक्ट भी चालू होने वाले हैं।

हिमाचल प्रदेश में सोलर ऊर्जा प्रोजेक्ट से होंगे काफी फायदे

सोलर पॉवर प्रोजेक्ट हिमाचल प्रदेश के लिए काफी सहायक भूमिका निभा रहा है। इससे यहां की जनता के साथ सरकार को भी काफी फायदा पहुंच रहा है। जानकारी के लिए बतादें कि इससे रोजगार के विकल्प भी उत्पन्न हो रहे हैं। साथ ही, विघुत आपूर्ति में भी इजाफा हो रहा है। इसकी वजह से राज्य में निवेश भी काफी बढ़ रहा है। सोलर ऊर्जा के माध्यम से सड़कों एवं गलियों में विघुत तारों के जाल से निजात मिलती है। साथ ही, सबसे प्रमुख और विशेष बात यह है, कि सोलर ऊर्जा के माध्यम से जल और जलवायु संरक्षण में सहायता मिलती है। साथ ही, लोगों की जीवन शैली में भी काफी हद तक सुधार होता है।

सोलर पॉवर प्रोजेक्ट पर लगभग कितना खर्च हो सकता है

बतादें, कि सोलर पॉवर प्रोजेक्ट हेतु समकुल निवेश की गणना करना काफी मुश्किल है। हालाँकि, जानकारी साझा करते हुए हिमाचल प्रदेश हिमऊर्जा के प्रोजेक्ट मैनेजर विनीत सूद ने कहा है, कि प्रोजक्ट पर आने वाला खर्चा उसके आकार पर निर्भर करता है। यानी कि प्रोजेक्ट का आकार जितना होगा और इसकी जितनी क्षमता होगी उतना ही लागत पर खर्चा आयेगा। उन्होंने कहा है, कि 1 MW सोलर पॉवर प्रोजेक्ट के लिए समकुल निवेश तकरीबन 1 करोड़ रुपये तक हो सकता है। इस आधार पर यदि MW के आकार में इजाफा होता है, तो लागत में भी इजाफा हो जाता है।
इस राज्य के किसानों को मिलेगा सोलर पंप पर अब 75% प्रतिशत अनुदान

इस राज्य के किसानों को मिलेगा सोलर पंप पर अब 75% प्रतिशत अनुदान

जैसा कि हम सब जानते हैं, कि पीएम कुसुुम योजना केंद्र सरकार की बेहतरीन योजनाओं में से एक महत्वपूर्ण योजना है। फिलहाल, इसके अंतर्गत किसान भाइयों को 75 प्रतिशत अनुदान मुहैय्या कराया जा रहा है। इसकी मदद से किसान भाइयों को बेहद सस्ती दरों पर अपने खेतों में सोलर पंप लगवाने में सहायता मिलेगी। खेती-किसानी के लिए जितना आवश्यक मृदा का उपयुक्त होना है। उतना ही बेहतर बीजों का होना भी रहता है। इनके न होने पर फसल पर काफी बुरा असर पड़ता है। साथ ही, जल रहित कृषि की कल्पना करना भी मुश्किल होता है। खरीफ सीजन की फसलें सामान्यतः जल के अभाव का सामना करती हैं। धान और गन्ना की फसलों को अधिकांश जल की आवश्यकता होती है। ऐसी स्थिति में केंद्र और राज्य सरकारें किसानों की सहायता के लिए खड़ी होती हैं। किसानों को सिंचाई के लिए विभिन्न संसाधन मुहैय्या कराए जाते हैं। किसानोें का सिंचाई पर ज्यादा खर्चा ना हो पाए, इसके संबंध में एक राज्य सरकार बड़ी सहूलियत दे रही है।

हरियाणा सरकार की तरफ से किसानों को सिंचाई के लिए 75 % अनुदान

हरियाणा सरकार की तरफ से किसानों के हित में सिंचाई पर अनुदान दिया जा रहा है। केंद्र सरकार के स्तर से देश के तमाम राज्यों के कृषकों की सहायता कर रही है। प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा एवं सुरक्षा उत्थान महाभियान के अंतर्गत हरियाणा राज्य सरकार किसानों को 75 प्रतिशत तक अनुदान दे रही है। ये भी पढ़े: किसानों के लिए खत्म होगा बिजली का संकट, 2 हजार यूनिट बिजली मिलेगी मुफ़्त

पीएम कुसुम योजना के अंतर्गत 60 प्रतिशत तक अनुदान

केंद्र सरकार की तरफ से प्रधानमंत्री कुसुम योजना चलाई जा रही है। इसके अंतर्गत कृषकों को 60 प्रतिशत तक अनुदान प्रदान किया जाता है। इसके अंतर्गत किसानों को अपने खेतों पर सोलर पंप लगवाने के खर्चे का 30 प्रतिशत तक कर्ज प्रदान करती है। कृषकों को सोलर प्लांट लगाने सिर्फ 10 प्रतिशत तक खर्चा करनी पड़ेगी।

75 प्रतिशत सब्सिडी किस पर मिलेगी

हरियाणा सरकार ने पीएम कुसुम योजना के अंतर्गत किसानों को बड़ी सहूलियत प्रदान की है। एक से 10 हॉर्स पॉवर बिजली आधारित कृषि ट्यूबवेल आवेदकों को 75 प्रतिशत तक अनुदानित दर पर सौर पंप उपलब्ध कराया जाएगा।

आवेदन की आखरी तिथि 15 मई तक है

पीएम कुसुम योजना के अंतर्गत पंजीकरण की प्रक्रिया चालू हो गई है। 28 अप्रैल से पोर्टल पर आवेदन चालू कर दिया है। किसान भाई आवेदन की आखरी तिथि तक 15 मई तक ही कर सकते हैं। आवेदन में लगभग एक सप्ताह का वक्त रह गया है। पीएम कुसुम योजना के लिए आवेदक आधिकारिक वेबसाइट pmkusum.hareda.gov.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं।
योगी सरकार ने किसानों की फसल को आवारा पशुओं से बचाने के लिए प्रस्ताव तैयार किया

योगी सरकार ने किसानों की फसल को आवारा पशुओं से बचाने के लिए प्रस्ताव तैयार किया

सोलर फेसिंग लगाने से किसानों को काफी हद तक फायदा मिलेगा। आवारा या निराश्रित पशु इसकी वजह से किसानों की फसलों को हानि नहीं पहुंचा पाऐंगे। क्योंकि फेसिंग से टच होते ही मवेशियों को हल्का सा करंट महसूस होगा। उत्तर प्रदेश में निराश्रित मवेशी किसानों के लिए एक बड़ी समस्या बन गए हैं। इन आवारा पशुओं के चलते हजारों हेक्टेयर में लगी फसल प्रति वर्ष चौपट हो जाती है। इससे किसानों को बड़े स्तर पर आर्थिक हानि उठानी पड़ती है। परंतु, वर्तमान में उत्तर प्रदेश के किसानों को आवारा मवेशियों को लेकर अब चिंतित होने की कोई आवश्यकता नहीं है। क्योंकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार द्वारा आवारा पशुओं से फसलों का बचाव करने के लिए एक शानदार प्रस्ताव पेश किया है। योगी सरकार का यह दावा है, कि इस प्रस्ताव के जारी होने के पश्चात काफी हद तक आवारा पशुओं के आतंक पर रोक लगेगी और फसल की बर्बादी भी काफी हद तक कम होगी।

योगी सरकार सोर ऊर्जा से संचालित फेसिंग का आधा खर्च उठाएगी

उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से सोलर एनर्जी यानी सौर ऊर्जा से संचालित होने वाले सोलर फेंसिंग लगाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इस प्रस्ताव के अनुसार, सरकार निराश्रित पशुओं के आतंक पर रोक लगाने के लिए खेतों की तारबंदी करेगी। मुख्य बात यह है, कि तारबंदी में 6 से 10 वॉट का करंट बहता रहेगा। इस करंट की आपूर्ति खेत में लगे सोलर पावर के माध्यम से होगी। इसके लिए योगी सरकार किसानों को अच्छा-खासा अनुदान दे सकती है। सोलर पावर और तारबंदी करने पर जो खर्चा आएगा उसका आधा खर्च राज्य सरकार द्वारा उठाया जाएगा।

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बहुत सारे पशुओं की मृत्यु भी हो चुकी है

सोलर फेंसिंग लगाने के उपरांत किसानों को इसका काफी फायदा होगा। आवारा मवेशी उनकी फसलों को चौपट नहीं कर पाऐंगे। क्योंकि, फेंसिंग से टच होते ही मवेशियों को हल्का सा करंट लगेगा। हालांकि, इस करंट की वजह से मवेशियों को कोई भी नुकसान नहीं होगा। हालांकि, पहले भी किसान मवेशियों से फसलों का बचाव करने के लिए खेतों की कटीले तारों से फेसिंग करते थे। कटीले तारों की फेसिंग में करंट की आपूर्ति करना प्रतिबंधित है। क्योंकि, इस की वजह से मवेशियों को काफी हानि पहुंचती थी। वह करंट एवं कटीले तार की चपेट में आने की वजह से घायल हो जाते थे। अब तक उत्तर प्रदेश में इलेक्ट्रिक फेंसिंग की चपेट में आने से बहुत सारे मवेशियों की मृत्यु भी हो चुकी है।

प्रस्ताव कब तक पेश होगा

बता दें, कि उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के आने से पहले आवारा मवेशी बहुत बड़ा चुनावी मुद्दा बन गए थे। यही कारण है, कि कृषि विभाग की तरफ से आवारा मवेशियों से फसलों का बचाव करने के लिए इस प्रकार का प्रस्ताव तैयार किया है। ऐसा कहा जा रहा है, कि सोलर फेंसिंग के लिए सरकार अच्छी-खासी सब्सिडी प्रदान कर सकती है। इसके लिए बजट का आकलन किया जा रहा है। कैबिनेट बैठक के पश्चात यह प्रस्ताव लाया जा सकता है।
हरियाणा सरकार राज्य के किसानों को सोलर पंप लगाने के लिए 75 % अनुदान दे रही है

हरियाणा सरकार राज्य के किसानों को सोलर पंप लगाने के लिए 75 % अनुदान दे रही है

हरियाणा सरकार द्वारा प्रधानमंत्री कुसुम योजना और उत्थान महाभियान के अंतर्गत खेतों में सोलर पंप लगाने का निर्णय किया है। इसके अंतर्गत किसानों को सरकार की तरफ से अच्छा-खासा अनुदान दिया जाएगा। हरियाणा में खेती- किसानी करने वाले कृषकों के लिए बड़ी खुशखबरी है। वर्तमान में उन्हें अपनी फसलों की सिंचाई करने को लेकर चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है। बिजली बिल पर आने वाले खर्चे से उन्हें राहत मिलेगी। क्योंकि, हरियाणा सरकार ने राज्य के किसानों के खेत में सोलर पंप लगाने का निर्णय किया है। हरियाणा सरकार का कहना है, कि सोलर पंप स्थापित करने से किसानों की फसल को वक्त पर पानी मिल सकेगा। इससे फसलों का उत्पादन बढ़ जाएगा। अब ऐसी स्थिति में किसान पहले की तुलना में अधिक मुनाफा कमा सकेंगे।

सिंचाई के लिए डीजल बिजली खर्च करना पड़ता है

दरअसल, किसानों के समक्ष समयानुसार फसलों की सिंचाई करना एक बड़ी चुनौती रहती है। हरियाणा के समस्त इलाकों में नहर का पानी नहीं पहुंचता है। ऐसी स्थिति में किसान ट्यूबवेल की सहायता से सिंचाई करते हैं। ये सारे ट्यूबवेल बिजली अथवा डीजल से चलते हैं। अब ऐसी स्थिति में समस्त किसान डीजल और बिजली बिल का खर्च नहीं उठा पाते हैं। साथ ही, कभी- कभी गांवों में लंबे समय तक बिजली गायब हो जाती है। इससे भी सिंचाई समयानुसार नहीं हो पाती है। इन्हीं समस्त समस्याओं को ध्यान में रखते हुए हरियाणा सरकार ने सोलर पंप लगाने का निर्णय किया है। ये भी पढ़े: सिंचाई समस्या पर राज्य सरकार का प्रहार, इस योजना के तहत 80% प्रतिशत अनुदान देगी सरकार

आवेदन की अंतिम तिथि

हरियाणा सरकार द्वारा प्रधानमंत्री कुसुम योजना और उत्थान महाभियान के अंतर्गत खेतों में सोलर पंप लगाने का ऐलान किया है। इसके अंतर्गत किसानों को सरकार अच्छा-खासा अनुदान देगी। यदि किसान भाई अपने खेत में सोलर पंप लगाना चाहते हैं, तो वह आधिकारिक वेबसाइट pmkusum.hareda.gov.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। आवेदन करने की अंतिम तारीख 12 जुलाई तक ही है। इस वजह से किसान भाई अतिशीघ्र अनुदान का फायदा उठाने के लिए आवेदन करें।

योजना का फायदा लेने हेतु आवश्यक दस्तावेज

मुख्य बात यह है, कि प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा एवं सुरक्षा और उत्थान महाभियान के अंतर्गत किसान भाई अपने खेत में 3 से 10 HP के सोलर पंप स्थापित कर सकते हैं। इसके ऊपर हरियाणा सरकार 75 प्रतिशत तक अनुदान प्रदान करेगी। विशेष बात यह है, कि इस योजना में पहले आओ पहले पाओ के आधार पर किसानों को सोलर पंप हेतु अनुदान का लाभ दिया जाएगा। साथ ही, इस योजना का फायदा उठाने वाले कृषकों के पास हरियाणा परिवार पहचान पत्र, आवेदक के नाम पर बिजली पम्प का कनेक्शन और कृषि भूमि का जमाबंदी अवश्य होना चाहिए।