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भंडारण

आलू प्याज भंडारण गृह खोलने के लिए इस राज्य में दी जा रही बंपर छूट

आलू प्याज भंडारण गृह खोलने के लिए इस राज्य में दी जा रही बंपर छूट

राजस्थान राज्य के 10,000 किसानों को प्याज की भंडारण इकाई हेतु 50% प्रतिशत अनुदान मतलब 87,500 रुपये के अनुदान का प्रावधान किया गया है। बतादें, कि राज्य में 2,500 प्याज भंडारण इकाई शुरू करने की योजना है। फसलों का समुचित ढंग से भंडारण उतना ही जरूरी है। जितना सही तरीके से उत्पादन करना। क्योंकि बहुत बार फसल कटाई के उपरांत खेतों में पड़ी-पड़ी ही सड़ जाती है। इससे कृषकों को काफी हानि वहन करनी होती है। इस वजह से किसान भाइयों को फसलों की कटाई के उपरांत समुचित प्रबंधन हेतु शीघ्र भंडार गृहों में रवाना कर दिया जाए। हालांकि, यह भंडार घर गांव के आसपास ही निर्मित किए जाते हैं। जहां किसान भाइयों को अपनी फसल का संरक्षण और देखभाल हेतु कुछ भुगतान करना पड़ता है। परंतु, किसान चाहें तो स्वयं के गांव में खुद की भंडारण इकाई भी चालू कर सकते हैं। भंडारण इकाई हेतु सरकार 50% प्रतिशत अनुदान भी प्रदान कर रही है। आपकी जानकारी के लिए बतादें, कि राजस्थान सरकार द्वारा प्याज भंडारण हेतु नई योजना को स्वीकृति दे दी गई है। जिसके अंतर्गत प्रदेश के 10,000 किसानों को 2,550 भंडारण इकाई चालू करने हेतु 87.50 करोड़ रुपए की सब्सिड़ी दी जाएगी।

भंडारण संरचनाओं को बनाने के लिए इतना अनुदान मिलेगा

मीडिया खबरों के मुताबिक, किसानों को विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत प्याज के भंडारण हेतु सहायतानुदान मुहैय्या कराया जाएगा। इसमें प्याज की भंडारण संरचनाओं को बनाने के लिए प्रति यूनिट 1.75 लाख का खर्चा निर्धारित किया गया है। इसी खर्चे पर लाभार्थी किसानों को 50% फीसद अनुदान प्रदान किया जाएगा। देश का कोई भी किसान अधिकतम 87,500 रुपये का फायदा हांसिल कर सकता है। ज्यादा जानकारी हेतु निजी जनपद में कृषि विभाग के कार्यालय अथवा राज किसान पोर्टल पर भी विजिट कर सकते हैं। ये भी पढ़े: Onion Price: प्याज के सरकारी आंकड़ों से किसान और व्यापारी के छलके आंसू, फायदे में क्रेता

किस योजना के अंतर्गत मिलेगा लाभ

राजस्थान सरकार द्वारा प्रदेश के कृषि बजट 2023-24 के अंतर्गत प्याज की भंडारण इकाइयों पर किसानों को सब्सिड़ी देने की घोषणा की है। इस कार्य हेतु राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत 1450 भंडारण इकाइयों हेतु 12.25 करोड रुपये मिलाके 34.12 करोड रुपये व्यय करने जा रही है। इसके अतिरिक्त 6100 भंडारण इकाईयों हेतु कृषक कल्याण कोष द्वारा 53.37 करोड़ रुपये के खर्च का प्रावधान है। ये भी पढ़े: भंडारण की परेशानी से मिलेगा छुटकारा, प्री कूलिंग यूनिट के लिए 18 लाख रुपये देगी सरकार

प्याज की भंडारण इकाई बनाने की क्या जरूरत है

आपकी जानकारी के लिए बतादें, कि इन दिनों जलवायु परिवर्तन से फसलों में बेहद हानि देखने को मिली है। तीव्र बारिश और आंधी के चलते से खेत में खड़ी और कटी हुई फसलें तकरीबन नष्ट हो गई। अब ऐसी स्थिति में सर्वाधिक भंडारण इकाईयों की कमी महसूस होती है। यह भंडारण इकाईयां किसानों की उत्पादन को हानि होने से सुरक्षा करती है। बहुत बार भंडारण इकाइयों की सहायता से किसानों को उत्पादन के अच्छे भाव भी प्राप्त हो जाते हैं। यहां किसान उत्पादन के सस्ता होने पर भंडारण कर सकते हैं। साथ ही, जब बाजार में प्याज के भावों में वृद्धि हो जाए, तब भंडार गृहों से निकाल बेचकर अच्छी आय कर सकते हैं।
धान की कटाई के बाद भंडारण के वैज्ञानिक तरीका

धान की कटाई के बाद भंडारण के वैज्ञानिक तरीका

हमारा देश विश्व का दूसरा सबसे बड़ा धान उत्पादक देश है। हमारे देश में 50 प्रतिशत धान का इस्तेमाल खाने के रूप में होता है। धान की खेती की देखभाल समय से नहीं करने पर काफी नुकसान होता है। विशेषज्ञों के अनुमान के अनुसार धान की फसल की बुआई, सिंचाई, कटाई, मड़ाई, गहाई और भंडारण समय और सही तरीके ने नहीं करने से उत्पादन का 10 प्रतिशत का नुकसान होता है। इसमें थोड़ी सी लापरवाही भंडारण के समय हो जाये तो यह नुकसान काफी बढ़ जाता है। इसलिये किसान भाइयों को चाहिये कि वो धान के भंडारण के समय वैज्ञानिक तरीका अपनायें तो होने वाले नुकसान से बचा जा सकता है। आइये जानते हैं कि धान के भंडारण के समय कौन-कौन सी सावधानियां बरती जानी चाहिये।

Content

  1. क्यों होती है भंडारण की आवश्यकता
  2. धान के भंडारण की प्रथम तैयारी
  3. भंडार गृह के लिए उचित स्थान
  4. भंडार गृह कैसा बनवायें
  5. कीटाणु रहित गोदाम बनवाने के लिए करें ये काम
  6. पुरानी बोरियों का इस तरह से करें इस्तेमाल
  7. कीट प्रबंधन के लिए करें ये काम
  8. बोरों को कीटाणु रहित बनाने के लिए करें ये उपाय
  9. हवा का रुख देखकर करें भंडारण

क्यों होती है भंडारण की आवश्यकता

पूरे साल पर धान यानी चावल मिलता रहे। इसके लिए धान के भंडारण की आवश्यकता होती है। इसके लिए किसान भाइयों को चाहिये कि धान का उचित तरीके से भंडारण करें। भंडारण से पूर्व नमी की मात्रा सुरक्षित कर लें। लम्बी अवधि के लिए धान के भंडारण के लिए उसमें नमी की मात्रा 12 प्रतिशत से कम नहीं होनी चाहिये। यदि कम समय के लिए भंडारण करना है तो धान में नमी का प्रतिशत 14 तक चलेगा।
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धान के भंडारण की प्रथम तैयारी

धान के भंडारण करने के लिए एक अच्छी जगह तलाश करनी चाहिये। इस स्थान पर भंडार गृह बनाने से पहले जमीन को कीटमुक्त कर लेना चाहिये। उसके बाद भंडारण की तैयारी करनी चाहिये।

भंडार गृह के लिए उचित स्थान

धान के भंडार गृह के निर्माण के लिए उचित स्थान एक ऊंची जगह होनी चाहिये।जहां पर पानी न भरता हो और बरसात आदि का पानी तत्काल निकल जाता हो। इसके साथ ही इस बात का पूरा ध्यान रखना चाहिये कि भंडार गृह में नमी व अत्यधिक गर्मी, धान नाशक कीट, चूहों तथा खराब मौसम का प्रभाव न होता हो। भंडार गृह में जमीन से 20 से 25 सेंटीमीटर की ऊंचाई पर लकड़ी से प्लेटफार्म बनाकर उसमें बोरियों की छल्लियों को लगायें ताकि जमीन से सीलन न आ सके और अनाज को नुकसान से बचाया जा सके।

 भंडार गृह कैसा बनवायें

भंडारण से पहले या बाद में भंडारित कीटों से बचाव करने के लिए भी वैज्ञानिक प्रबंध करने जरूरी हैं। भंडारण के लिए पारंपरिक रूप से विभिन्न आकारों और विभिन्न सामग्रियों के बने बड़े बड़े पात्र प्रयोग किये जाते हैं। इन्हें कोठी, कुठला आदि ग्रामीण भाषा में कहा जाता है। ये पात्र लकड़ी, मिट्टी, बांस, जूट की बोरियों, ईंटों, कपड़ों आदि उपलब्ध वस्तुओं से बनाये जाते हैं। इस तरह के पात्रों में थोडे समय के लिए धान का भंडारण किया जा सकता है जबकि लम्बे समय के लिए भंडारण करने के लिए आधुनिक भंडार गृह बनवाने चाहिये। लम्बी अवधि के लिए धान के भंडारण के लिए पूसा कोठी, धातुओं की कोठी, साइलो स्टील जैसे आधुनिक भंडारण गृह आदि का प्रयोग किया जाता है। इसमें धान को लम्बे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है। ये भी पढ़े: धान की फसल काटने के उपकरण, छोटे औजार से लेकर बड़ी मशीन तक की जानकारी

कीटाणु रहित गोदाम बनाने के लिए करें ये काम

आम तौर पर भवनों में बनने वाले भंडार गृह में धान के बोरों के दो ढेरों के बीच उचित हवा का संचारण के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध करानी चाहिये। साफ मौसम के दौरान उचित हवा संचारण होनी चाहिये जबकि वर्षा के मौसम से इससे बचना चाहिये। गोदाम मं धान या चावल के सुरक्षित भंडारण से पहले उसे उपयुक्त धुआं देकर कीटाणु रहित करना चाहिये। भंडार गृह को अच्छीतरह से साफ कर लेना चाहिये। वहां पर पुराने दाने नहीं रहने देना चाहिये। भंडार गृह की दरारों व छेदों को अच्छी तरह से भर देना चाहिये।

पुरानी बोरियों का इस तरह से करें इस्तेमाल

भंडारण के दौरान धान के नुकसान को कम करने के लिए रोगमुक्त बीट्वील पटसन के थैलों में सूखे हुए धान रखने चाहिये। केवल नयी व सूखी बोरियों का ही धान को रखने में प्रयोग करना चाहिये। यदि पुरानी बोरियों में ही धान की फसल को रखा जाना जरूरी हो तब उस दशा में पुरानी बोरियों को एक प्रतिशत मालाथियान के उबलते हुए घोल में 3 से 4 मिनट तक भिगोएं और फिर उसको धूप में अच्छी तरह से सुखा कर उसमें धान को रखें। यदि विद्युत चालित यंत्र से भी बोरियों को सुखाया जा सकता है तो उसे सुखा लें लेकिन यह तय कर लें कि उनमे नमी न रह जाये।

कीट प्रबंधन के लिए करें ये काम

भंडारण गृह में कीट प्रबंधन करना बहुत जरूरी होता है। इसके लिए गोदाम में साधारण मौसम में प्रत्येक 15 दिन में प्रति 100 वर्ग मीटर क्षेत्र में मालाथियान (Malathiyan) (50 प्रतिशत ईसी) 10 लीटर पानी में एक लीटर मिलाकर छिड़काव करना चाहिये। सर्दियों के दिनों मे इस तरह के घोल का छिड़काव 21 दिन में एक बार अवश्य कर देना चाहिये।
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यदि किसी कारण से मालाथियान न मिल सके तो उसकी जगह पर किसान भाई 40 ग्राम डेल्टामेथ्रिन (Deltamethrin) (2.5 प्रतिशत) चूरन को एक लीटर पानी में मिलाकर  तीन महीने में प्रत्येक 100 वर्ग मीटर के क्षेत्र में छिड़काव करना चाहिये। इसके अलावा डीडीवीपी (DDVP) (75 प्रतिशत ईसी) () को 150 लीटर पानी में एक लीटर मिलाकर छिड़काव करना चाहिये। इन दोनों कीटनाशकों का छिड़काव करते वक्त इस बात का ध्यान रखना चाहिये कि इनका छिड़काव प्रति 100वर्ग मीटर में कम से कम तीन लीटर हो।

बोरों को कीटाणु रहित बनाने के लिए करें ये उपाय

गोदाम या भंडार गृह में बोरियों में धान की फसल को रखने से पहले दूसरी जगह पर बोरों का धूम्रीकरण कर देना चाहिये। उसके बाद 5 से 7 दिनों के लिए 9 ग्राम प्रति मीट्रिक टन के हिसाब से एलुमिनियम फास्फाइड (Aluminium Phosphide) से धुआं दें। केवल पॉलीथिन से ढके गोदाम में किसान भाइयों को चाहिये कि धान की बोरियों में एलुमिनियम फास्फाइड से 10.8 ग्राम प्रति मीट्रिक टन की दर से धूम्रीकरण करें। पुरानी व नई बोरियों को अलग-अलग रखें और उनमें साफ सफाई का पूरा ध्यान रखें। जिससे दानों में किसी प्रकार का रोग न लग सके।

हवा का रुख देखकर करें भंडारण

धान का भंडारण करते समय हवा के रुख को ध्यान से देखना चाहिये। यदि पुरवैया हवा चल रही हो तब धान की फसल का भंडारण नहीं करना चाहिये।
प्याज़ भंडारण को लेकर सरकार लाई सौगात, मिल रहा है 50 फीसदी अनुदान

प्याज़ भंडारण को लेकर सरकार लाई सौगात, मिल रहा है 50 फीसदी अनुदान

देश में फसल उत्पादन के बाद उसे सुरक्षित भंडारण की बहुत बड़ी समस्या है। इस समस्या के कारण भारी मात्रा में फसल खराब हो जाती है। सरकार ने इस समस्या का समाधान निकालते हुए किसानों को सुरक्षित भंडारण के लिए प्रोत्साहित किया और उसके लिए एक योजना बनायी है। इस योजना के तहत सरकार ने किसानों को प्याज के भंडार गृह बनाने के लिए 50 प्रतिशत अनुदान यानी सब्सिडी देने की योजना चलायी है। इस बारे में जानकारी जुटाकर किसान भाई लाभ उठा सकते हैं। आइये जानते हैं कि किसान भाई किस प्रकार इस योजना का लाभ उठा सकते हैं।

प्याज भंडार गृह न होने से होता है किसानों का नुकसान

हमारे देश के महाराष्ट्र के नासिक और राजस्थान के अलवर जिले में सबसे अच्छी प्याज उगाई जाती है। इसकी पैदावार भी अच्छी होती है लेकिन उचित भंडारण के कारण किसान भाई अपनी फसल को सुरक्षित नहीं रख पाते हैं। इसलिये अधिकांश किसान भाई अपनी फसल को औने-पौने दामों में ही बेच डालते हैं। इससे उनकी आमदनी पर काफी असर पड़ता है। इसके अलावा जिस किसान की फसल भंडारण के कारण खराब हो जाती है वो दुबारा प्याज की पैदावार नहीं करता है।

सरकार ने किसानों से मांगे आवेदन पत्र

इस समस्या को देखते हुए मध्य प्रदेश की सरकार ने अपने किसानों को उनकी प्याज की फसल के उचित मूल्य दिलाने के लिए प्याज के भंडार गृह बनाने में 50 प्रतिशत अनुदान देने की घोषणा की है।  मध्य प्रदेश सरकार के उद्यानिकी विभाग ने राज्य के चयनित जिलों से किसानों से प्याज भंडार गृह के निर्माण हेतु आवेदन पत्र मांगे हैं।

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सब्सिडी पाने के लिए कुछ आवश्यक नियम

मध्य प्रदेश सरकार की ओर से जारी इस योजना में राज्य के किसानों के लिए कुछ शर्तें भी रखी गयीं हैं। इन शर्तों को पूरा करने वाले किसान को ही सब्सिडी का लाभ मिल सकता है। आइये जानते हैं कौन-कौन सी हैं शतैं:-
  1. आवेदन करने वाले किसान को कम से कम 2 हेक्टेयर भूमि में प्याज का उत्पादन करना आवश्यक है। इसके साथ ही खेत में बनाये गये इस भंडार का उपयोग प्याज के अलावा किसी दूसरी वस्तु के लिये नहीं किया जायेगा।
  2. प्याज भंडार गृह का निर्माण सरकार द्वारा अधिसूचित संस्थान एनएचआरडीएफ की डिजाईन के अनुसार व निर्धारित मानकों के अनुरूप होना चाहिये। साथ ही आशय पत्र जारी होने के अधिकतम छह माह के भीतर प्याज भंडार गृह का निर्माण कार्य पूरा हो जाना चाहिये।
  3. प्याज भंडारण की क्षमता 50 मीट्रिक टन तक होगी।
  4. आवेदक पूर्व में किसी अन्य योजना में प्याज भंडार गृह के अंतर्गत लाभ न ले रहा हो।
  5. योजना की निष्पक्षता के लिए सरकान ने आदेश दिये हैं कि चयनित जिले के उप/सहायक संचालक उद्यान विभाग द्वारा लाभार्थी किसानों की अनुदान स्वीकृति सूची विभागीय वेबसाइट http://mphorticulture.gov.in/ पर उपलब्ध करायी जायेगी।
  6. प्याज भंडार के निर्माण के समय योजना को लागू करने के लिए ग्रामीण उद्यान विस्तार अधिकारी और वरिष्ठ उद्यान विकास अधिकारी समय समय पर भंडार गृह का निरीक्षण करेंगे तथा जरूरत पड़ने पर किसानों को तकनीकी सलाह भी देंगे।
  7. किसान ने इस निर्माण के संबंध में परामर्शीय सेवा देने के उपरांत जियो टेगिंग की कार्यवाही भी करेंगे लेकिन इस कार्यवाही के दौरान लाभार्थी किसान का उपस्थित होना अनिवाय है।
  8. उद्यान विभाग के संभागीय संयुक्त संचालक भी प्याज भंडार गृह के दस प्रतिशत हिस्से का निरीक्षण कर सत्यापन करेंगे और इसकी रिपोर्ट भी तैयार करेंगे।
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कौन आवेदन कर सकता है

सरकार ने अपनी योजना के पहले चरण में कुछ ही जिलों का चयन किया है। सरकार द्वारा चयनित जिलों के अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के किसान ही अभी आवेदन कर पाऐंगे। इसके अलावा सामान्य या पिछड़े वर्ग के किसान अभी आवेदन नहीं कर सकते हैं। योजना के अगले चरण में अन्य वर्ग के किसानों के आवेदन पर विचार किया जायेगा।

कैसे मिलेगा सब्सिडी का लाभ

सरकार ने यह नियम बनाया है कि कृषकों द्वारा बनाये गये प्याज भंडार गृह का पूरी तरह से भौतिक सत्यापन किया जायेगा। यह जांच पड़ताल जिले के उप/ सहायक संचालक उद्यान विभाग की अध्यक्षता में बनी तीन सदस्यीय समिति करेगी।  इस समिति के मूल्यांकन और भौतिक सत्यापन  के बाद जो सिफारिश की जायेगी उसके आधार पर किसान को अनुदान की राशि का भुगतान एमपी एगो द्वारा डी.बी.टी . के जरिये किया जायेगा। जो किसानों के बैंक खातों में सीधा जायेगा।

सब्सिडी के लिए किसान भाई कहां करें आवेदन

मध्य प्रदेश सरकार द्वारा घोषित प्याज भंडारण की योजना का लाभ राज्य का उद्यानिकी विभाग  उपलब्ध करायेगा। इसलिये  आवेदन करने वाले इच्छुक किसान भाई अपना ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन उद्यानिकी विभाग की वेबसाइट https://mpfsts.mp.gov.in/ पर कर सकते हैं। इस आवेदन को राज्य के उद्यान विभाग के अधिकारियों द्वारा 15 दिन में स्वीकृति दी जायेगी। अधिकारियों द्वारा यदि कोई कमी नहीं बताई गयी तो लाभार्थी का चयन पूर्ण माना जायेगा।

कितने रुपये तक की मिल सकती है सब्सिडी

प्याज भंडार गृह निर्माण पर सब्सिडी की योजना मध्य प्रदेश सरकार की पोषित योजना है। इसलिये किसानों को इस योजना के तहत सब्सिडी देने की जिम्मेदारी राज्य के उद्यानिकी विभाग की है।  इस योजना के तहत लाभार्थी किसानों को प्याज भंडार गृह के निर्माण पर 50 प्रतिशत तक की सब्सिडी दिये जाने का प्रावधान है। मध्य प्रदेश राज्य के उद्यानिकी विभाग की ओर से प्याज के 50 मीट्रिक टन की भंडारण क्षमता वाले भंडार के निर्माण के लिए अधिकतम 3.5 लाख रुपये निर्धारित की गयी है। इसमें किसानों को लागत का अधिकतम 1.75 लाख रुपये की सब्सिडी दी जायेगी। प्याज़ भंडारण योजना से कितना होगा लाभ

आवेदन के लिए बिलकुल देरी न करें किसान भाई

मध्य प्रदेश सरकार की प्याज भंडार गृह निर्माण की सब्सिडी योजना का लाभ उठाने के लिए किसान भाई कतई देर न करें और इसके लिए आवेदन 23 सितम्बर सुबह 11 बजे से करें क्योंकि यह योजना पहले आओ पहले पाओ पर आधारित है। आवेदकों की संख्या सरकार द्वारा जिले को दिये गये लक्ष्य के अनुसार होगी। हालांकि सरकार ने जिले के उप व सह संचालक उद्यान विभाग को लक्ष्य से 10 प्रतिशत अधिक आवेदन लेने को कहा है।

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प्याज भंडार गृह के लिए निर्धारित लक्ष्य

राज्य के एक पोर्टल द्वारा जारी किये गये लक्ष्य की सूचना के अनुसार अभी केवल अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के किसानों को ही आवेदन करने की यह सुविधा दी गयी है। इस योजना में अनुसूचित जाति के कुल 351 किसानों के आवेदन का लक्ष्य जारी किया गया है। वहीं अनुसूचित जनजाति के लिए लक्ष्य 267 आवेदकों का रखा गया है। इस लक्ष्य के अनुसार अनुसूचित जाति के 188 किसानों और अनुसूचित जनजाति के 266 किसानों को इस योजना का लाभ दिया जा सकता है। इसके साथ ही जो किसान भाई इस बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो वे राज्य सरकार की वेबसाइट https://mpfsts.mp.gov.in/mphd/#/new-application पर जाकर विवरण जानें।  इसके अलावा किसान भाई राज्य के उद्यानिकी विभाग व खाद्य विभाग प्रसंस्करण विभाग पर भी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। साथ ही विकास खंड स्तर पर कार्यालय में भी संपर्क करके पूरी जानकारी पायी जा सकती है।

सरकारी योजना से कितना होगा लाभ

राज्य सरकार के लक्ष्य के बारे में एक पोर्टल द्वारा दी जा रही सूचना के अनुसार कम से कम 454 किसानों को लाभ प्राप्त होगा। यदि इस योजना से लाभ प्राप्त करने वालें लाभार्थी किसानों की संख्या औसत रही तो इस योजना के विस्तार के बारे में भी विचार किया जा सकता है।
उपभोक्ता मंत्रालय ने बताया प्याज-टमाटर के दामों में हुई कितनी गिरावट

उपभोक्ता मंत्रालय ने बताया प्याज-टमाटर के दामों में हुई कितनी गिरावट

जानिए एक महीने में कितने कम हो गए प्याज-टमाटर के दाम

आपने सुना होगा "आसमान से गिरे खजूर में अटके"…. लेकिन प्याज-टमाटर के मामले में "खेत में टूटे..मंडी में पिचके" वाली बात साबित हो रही है… जी हां, प्याज-टमाटर की कीमतों में आई गिरावट के बारे में केंद्र सरकार ने जानकारी दी है। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय की जानकारी कहती है कि
मानसूनी बारिश के कारण मंडियों में आवक बढ़ी है। इससे औसत खुदरा मूल्य में पिछले महीने की तुलना में 29 फीसदी गिरावट आई है। मंत्रालय के अनुसार प्याज की खुदरा कीमत भी पिछले साल के मुकाबले 9 प्रतिशत कम यानी काफी हद तक नियंत्रण में है। आम आदमी की बात करें तो पिछले दिनों टमाटर के भाव जहां सुर्ख रहे तो वहीं प्याज की कीमतें नियंत्रण में रहीं। अंतर की बात करें तो टमाटर की खुदरा कीमत में पिछले माह के मुकाबले 29 जबकि प्याज के दाम में 9 फीसदी तक की कमी आई।

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उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के अनुसार टमाटर के अखिल भारतीय औसत खुदरा मूल्य पिछले महीने की तुलना में 29 प्रतिशत कम हुए। मंत्रालय के आंकड़े कहते हैं कि, टमाटर का अखिल भारतीय औसत खुदरा मूल्य मंगलवार को 37.35 रुपए प्रति किलोग्राम था। एक महीने पहले की समान अवधि में टमाटर की कीमत 52.5 रुपए प्रति किलोग्राम थी। बीते दिनों टमाटर के दाम (Tomato Price) में बढ़त के कारण आम जनता को खासी परेशानी हुई थी। टमाटर के मुकाबले हालांकि प्याज की कीमतें (Onion Price) नियंत्रण में रहीं।

बफर स्टॉक का सहारा -

भविष्य में भी प्याज की कीमत पर नियंत्रण के लिए सरकार की ओर से किए जा रहे इंतजाम के बारे में भी जानकारी दी गई है। मंत्रालय ने बताया है कि, सरकार ने चालू वर्ष में प्याज के 2.50 लाख टन भंडारण की व्यवस्था की है। ये भी पढ़े: अत्यधिक गर्मी से खराब हो रहे हैं आलू और प्याज, तो अपनाएं ये तरीके आज यह अभी तक का सबसे अधिक खरीदा गया प्याज का बफर स्टॉक है। मंत्रालय का कहना है कि बफर की खरीद ने कृषि मंत्रालय द्वारा 317.03 लाख टन के रिकॉर्ड उत्पादन के बावजूद इस साल, प्याज के मंडी दाम को टूटने से बचाने में मदद प्रदान की है। बताया गया है कि, अगस्त-दिसंबर के दौरान कीमतों की तेजी को कम करने के लिए प्याज का बफर स्टॉक सुनियोजित तरीके से जारी किया जाएगा। इस संग्रह को लक्षित खुले बाजार में बिक्री के माध्यम से रिलीज़ किया जाएगा। इसे खुदरा दुकानों के माध्यम से आपूर्ति के लिए राज्यों और सरकारी एजेंसियों को प्रदान किया जाएगा। खुले बाजार में जारी करने के लिए उन राज्यों/शहरों को लक्षित किया जाएगा, जहां कीमत पिछले महीने की तुलना में बढ़ रही है।
केंद्र सरकार ने अन्न भंडारण योजना को मंजूरी दी, हर एक ब्लॉक में बनेगा गोदाम

केंद्र सरकार ने अन्न भंडारण योजना को मंजूरी दी, हर एक ब्लॉक में बनेगा गोदाम

केंद्र सरकार की तरफ से भारत के अंदर बढ़ती अन्न की बर्बादी को ध्यान में रखते हुए। अन्न भंडारण योजना को स्वीकृति दी है। इस योजना के अंतर्गत देश के प्रत्येक ब्लॉक में गोदाम निर्मित किए जाएंगे। भारत में अन्न की बर्बादी ना हो इसको लेके केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। सरकार की ओर से अन्न भंडारण योजना को स्वीकृति दे दी गई है। जिसके अंतर्गत हर एक ब्लॉक में 2 हजार टन के गोदाम स्थापित किए जाएंगे। इस व्यवस्था को शुरू करने के लिए त्रिस्तरीय प्रबंध किए जाएंगे। इस योजना का उद्देश्य अन्न की बर्बादी को रोकना है। बतादें, कि फिलहाल भारत में अन्न भंडारण की कुल क्षमता 47 प्रतिशत है। परंतु, केंद्र सरकार की इस योजना से अन्न भंडारण में तीव्रता आएगी। कैबिनेट की बैठक खत्म हो जाने के उपरांत केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर का कहना है, कि सहकारिता मंत्री के नेतृत्व में समिति बनाई जाएगी। योजना की शुरुआत 700 टन अन्न भंडारण के साथ होगी। इस योजना की शुरूआत होने पर भारत में खाद्य सुरक्षा को बल मिलेगा। इस योजना को जारी होने पर अन्न भंडारण क्षमता में इजाफा होगा। वर्तमान में भारत के अंतर्गत अनाज भंडारण की क्षमता 1450 लाख टन है। जो कि फिलहाल बढ़कर 2150 लाख टन हो जाएगी।

हर एक ब्लॉक में गोदाम स्थापित किए जाऐंगे

आपकी जानकारी के लिए बतादें, कि इस लक्ष्य को हांसिल करने के लिए 5 साल का वक्त लग जाएगा। इसके लिए केंद्र सरकार पांच साल में 1 लाख करोड़ रुपये का खर्चा करने वाली है। योजना के अंतर्गत भारत के हर एक ब्लॉक में गोदाम स्थापित किए जाऐंगे। केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर के मुताबिक, यह योजना सहकारिता क्षेत्र में विश्व का सबसे बड़ा अन्न भंडारण कार्यक्रम है। इस योजना से भारत में रोजगार के अवसर भी उत्पन्न होंगे। इसके अतिरिक्त फसल की बर्बादी भी रुकेगी। यह भी पढ़ें: भंडारण की समस्या से मिलेगी निजात, जल्द ही 12 राज्यों में बनेंगे आधुनिक स्टील गोदाम

खाद्य सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी

केंद्र सरकार के अनुसार, सहकारिता क्षेत्र में गोदाम के अभाव के चलते अन्न की बर्बादी ज्यादा हो रही है। अगर ब्लॉक स्तर पर गोदाम निर्मित होंगे तो अन्न का भंडारण होने के साथ-साथ ट्रांसपोर्टिंग पर आने वाली लागत भी कम आएगी। योजना के अंतर्गत खाद्य सुरक्षा को मजबूती मिलेगी। फिलहाल, भारत में प्रत्येक वर्ष 3100 लाख टन खाद्यान्न की पैदावार होती है। लेकिन, सरकार के पास केवल उत्पादन के 47 प्रतिशत भाग को भंडारण करने की ही व्यवस्था है। जो कि इस योजना के आने के उपरांत ठीक हो जाएगी।
आखिर किस वजह से NAFED द्वारा कच्चे चना भंडारण हेतु बनाई गई विशेष योजना

आखिर किस वजह से NAFED द्वारा कच्चे चना भंडारण हेतु बनाई गई विशेष योजना

NAFED ने अपने 20% कच्चे चना स्टॉक को चना दाल (चना या बंगाल चना) में परिवर्तित करने और रिटेल बाजार में आपूर्ति करने की योजना तैयार की है। नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (नेफेड) ने अपने 20% प्रतिशत कच्चे चना भंडारण को चना दाल (चना या बंगाल चना) में बदलने एवं रिटेल बाजार में सप्लाई करने की योजना निर्मित की है। दो सरकारी अधिकारियों ने कहा है, कि यह विकास ऐसे वक्त में हुआ है, जब सरकार के पास रणनीतिक बफर जरूरत के मुकाबले भारी मात्रा में चना एवं अन्य दालों का कम भंडार है। आज के समय में NAFED के समीप भंडार में तकरीबन 3.6 मिलियन टन (MT) चना है, जिसमें इस वर्ष एग्रीकल्चर मिनिस्ट्री की तरफ से प्राइस सपोर्ट स्कीम (Price Support Scheme (PSS) के अंतर्गत खरीदा गया 3.3 मिलियन टन शामिल है। रिकॉर्ड तोड़ उत्पादन के चलते बाजार की कम कीमतों की वजह से पिछले दो सालों में ज्यादा खरीद का परिणाम है।

किसान अपनी उपज नेफेड (NAFED) को बेच रहे हैं

कृषि मंत्रालय की तरफ से खाद्य उत्पादन के दूसरे अग्रिम अनुमान के मुताबिक, 2022-23 (जुलाई-जून) में चना का उत्पादन 13.5 मीट्रिक टन होने का अंदाजा लगाया गया है। जो कि पिछले साल के तकरीबन समान है। इस साल भी ज्यादा पैदावार की वजह चना की कीमतें न्यूनतम समर्थन मूल्य 5,335 प्रति क्विंटल से नीचे बनी हुई हैं। इससे किसान अपनी पैदावार सरकार की खरीद एजेंसी नेफेड को बेचने के लिए आगे आ रहे हैं, जिससे किसानों को काफी अच्छा-खासा लाभ प्राप्त हो रहा है।

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निफेड ने 2.3 मीट्रिक टन के रणनीतिक मानदंड के तुलनात्मक 4.27 मीट्रिक टन का बफर स्टॉक तैयार किया है। इसके अंतर्गत समस्त 5 घरेलू दालों के साथ-साथ आयातित स्टॉक भी शम्मिलित है। बाजार सूत्रों के अनुसार, दिल्ली के लॉरेंस रोड बाजार में मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान की कच्चे चने की प्रजातियां 5,100 से 5,125 रुपए प्रति क्विंटल में बिकीं हैं।

दाल में 20% प्रतिशत कच्चा चना परिवर्तित किया जाएगा

एक सरकारी अधिकारी का कहना है, कि 20% कच्चे चना भंडार को दाल में बदलना एक प्रयोग है। कच्चा चना जारी करने के अतिरिक्त नेफेड (NAFED) कच्चे चने को पीसकर दाल के तौर पर जारी करने पर विचार कर रहा है। इसके पश्चात यह राज्यों को जारी किया जाएगा अथवा खुले बाजार में यह अभी तक सुनिश्चित नहीं है। इसे खुले बाजार में विक्रय किया जा सकता है अथवा खुदरा विक्रेताओं को दिया जा सकता है।

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सालभर से दालों का भंडारण नहीं किया गया

सरकार राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को अपने भंडार को खत्म करने के लिए करीब एक साल से रियायती दर पर चना दे रही है। क्योंकि दालों को एक साल से ज्यादा समय तक स्टोर नहीं किया जा सकता है। हाल ही में ग्राहकों के मामलों के विभाग ने लिक्विडेशन को प्रोत्साहित करने के लिए छूट की दर को 8 रुपए प्रति किलोग्राम से बढ़ाकर 15 रुपए प्रति किलोग्राम कर दिया है। आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने पिछले वर्ष अगस्त में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को 15 लाख टन चना के आवंटन को रियायती दर पर की कई सारी कल्याणकारी योजनाओं के लिए “पहले आओ, पहले पाओ” के आधार पर आवंटित करने की स्वीकृति दी थी।
भंडारण की उचित व्यवस्था न होने के चलते खाद्यान्न की काफी बर्बादी होती है

भंडारण की उचित व्यवस्था न होने के चलते खाद्यान्न की काफी बर्बादी होती है

भारत में खाद्यान्न की पैदावार काफी हो रही है और इस उपज में साल दर साल बढ़ोतरी भी हो रही हैं। बतादें, कि इसके बावजूद भी कृषकों को उनकी फसल का सही भाव भी नहीं मिलता हैं। भारत में लाखों लोग भूखे सोने के लिए विवश होते हैं। इसकी वजह कहीं कहीं भंडारण के लिए शानदार सुव्यवस्थित सुविधाओं का ना होना भी है। अधिकांश खबरें सुनने को मिलती हैं, कि खुले गगन के नीचे रखा लाखों टन अनाज बेमौसम वर्षा से भीग गया, करोड़ो रूपये का अनाज पूरी तरह सड़ गया और बह गया। इससे बेचारे कृषकों के परिश्रम पर पानी फिर जाता हैं। इसके अतिरिक्त कीड़े, कृन्तकों (चूहे, गिलहरी), सूक्ष्म जीवों और अवैज्ञानिक भंडारण आदि की वजह भी भरपूर मात्रा में फसल की हानि होती हैं। सरकार पैदावार में वृध्दि के विषय में तो बताती हैं, परंतु यह नहीं बताती कि अन्न को सुरक्षित संरक्षण कैसे रखा जायेगा।

अवैज्ञानिक ढ़ंग से सरकार स्वयं भंडारण कराती हैं  

भारत में अवैज्ञानिक तरीकों से भंडारण स्वयं सरकार कराती हैं। खुले आकाश के नीचे बिना ढंके बोरों में या कभी यूं ही ढेरों में पड़ा अनाज सामान्य तौर पर सभी ने देखा है। भारतीय अनाज संचयन प्रबंधन एवं अनुसंधान संस्थान (आईजीएमआरआई), हापुड़ (यू.पी) के आंकड़े कहते हैं, कि वार्षिक भंडारण नुकसान तकरीबन 7,000 करोड़ रुपये का है, जिसमें 14 मिलियन टन खाद्यान्न नष्ट होता है, जिसमें एकमात्र कीड़ों की वजह से लगभग 1,300 करोड़ रुपये की हानि शम्मिलित है। सूक्ष्म जीवों, कीड़े, कृन्तकों और अवैज्ञानिक भंडारण आदि की वजह से फसल कटाई के पश्चात कुल खाद्यान्न का तकरीबन 10% प्रतिशत हानि होती है।

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कुल खाद्यान्न उत्पादन का महज 45 फीसद भंडारण करने की क्षमता

भारत में वित्तीय वर्ष 2022-23 में 3,235 लाख टन अनाज पैदावार का अनुमान हैं। परंतु, सरकारी आंकड़ो के अनुसार भारत में कुल अनाज भंडारण क्षमता 1,450 लाख टन हैं। संयुक्त राष्ट्र खाद्य एंव कृषि संगठन (एफएओ) के मुताबिक देश में वार्षिक अनाज उत्पादन का महज 45 प्रतिशत ही भंडारण करने की क्षमता हैं। इसके अतिरिक्त शेष अनाज का क्या होता है, इसका उत्तर देने में सरकार भी कतराती हैं।

खाद्यान्न बचाओ कार्यक्रम से आप क्या समझते हैं 

भारत में सन 1979 मेंखाद्यान्न बचाओकार्यक्रम चालू किया गया था। इस योजना के अंतर्गत किसानों में जागरुकता उत्पन्न करने और उन्हें सस्ती कीमतों पर भंडारण के लिए टंकियाँ मुहैय्या कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। परंतु, आज भी लाखों टन अनाज बर्बाद होता है।

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फिजूल खर्च को को कम करने के लिए काम 

भारत में विश्व की सबसे बड़ी भंडारण क्षमता विकसित करने की योजना चालू की गई हैं। सरकार इस योजना पर लगभग 1 लाख करोड़ रूपये का खर्चा कर रही है। इससे 5 वर्ष में भंडारण क्षमता 2,150 लाख टन तक हो जाएगी। इसके अतिरिक्त ब्लॉक स्तर पर 500 से 2000 टन के गोदाम निर्मित करने की योजना हैं। इन कोशिशों से कितना अनाज बर्बाद होने से बच पायेगा , यह भविष्य पर निर्भर है l
जानिए अनाज भंडारण के सुरक्षित तरीके

जानिए अनाज भंडारण के सुरक्षित तरीके

किसान भाइयों आपको यह जानकर अवश्य आश्चर्य होगा कि हमारा देश कृषि प्रधान देश है। हम सदियों से अनाज पैदा करते हैं और उसे सुरक्षित भी रखने के अनेक उपाय करते हैं। आज हम आधुनिक खेती करते हैं। इसके बावजूद हमारे देश में अनाज का सुरक्षित भंडारण एक चुनौती बना हुआ है। लगभग 20 से 25 प्रतिशत अनाज उचित भंडारण न होने की वजह से प्रतिवर्ष खराब हो जाता है। इसका खामियाजा किसान भाइयों को उठाना पड़ता है। आज हम अनाज के सुरक्षित भंडारण के खास टिप्स को जानते हैं। इन टिप्स से जहां अनाज भंडारण सुरक्षित रहेगा वहीं आपको नमी, दीमक, चूहों आदि से छुटकारा मिल जायेगा।

अनाज भंडारण पर खतरे के प्रमुख कारण

  1. फसल की कटाई के साथ ही अनाज के भंडारण की सुरक्षा की प्रक्रिया शुरू कर देनी चाहिये। फसल कटाई के काम लाये जाने वाले यंत्रों से व मौसम के उतार चढ़ाव से फसल को नमी व कीट का खतरा उत्पन्न हो जाता है।
  2. अनाज भंडारण की गुणवत्ता को हानि पहुंचाने वाले कारणों में कीड़ों का प्रकोप होते हैं। ये कीड़े बीच व मिट्टी के अतिरिक्त फसलों की गहाई, ढुलाई में इस्तेमाल किये जाने वाले यंत्रों के माध्यम से भंडारण तक पहुंच सकते हैं। इसलिये नमी व कीटों का बचाव यही से शुरू करना चाहिये।
  3. अधिक नमी होने के कारण अनाज में कीड़ों का प्रकोप अधिक होता है। इसके अलावा अनाज में फफूंदी लग जाती है। अनाज सड़ जाता है। अनाज खाने या बेचने योग्य नहीं रहता है।
  4. अनाज में कटाइे समय ही कीट लग जाते हैं जो अनाज पर अंडे देने लगते हैं। बाद में इन अंडों से निकलने वाले इल्ली या लट अनाज को खाकर खोखला कर देती है।
  5. चूहे अनाज के दुश्मन हैं। ये खाते कम खराब अधिक करते हैं। चूहों के मल-मूत्र और बाल अनाज में मिल जाने से अनाज खराब हो जाता है।
  6. भण्डारण गृह, कोठियां व बोरे में साफ सफाई न होने से भी कीट लग जाते हैं। क्योंकि भंडारण में अधिकांश पुराने बोरों का इस्तेमाल किया जाता है। इन पुराने बोरों में कीटों के अंडे हो सकते हैं, जो भंडारण में अनाज को बर्बाद करने लगते हैं।
  7. चार ही मुख्य कीट ऐसे हैं जो अनाज को बरबाद कर देते हैं। ये इस प्रकार हैं
  • गेहूं का खपरा: ये कीट गेहूं के अलावा चावल, मक्का, जौ, ज्वार, बाजरा में भी लगता है। यह कीट अनाज में अधिक नमी आने के कारण होता है।
  • आंटे की सुंडी भी ऐसा ही कीट है जो आटा, सूजी, मैदा में तो लगता ही है। साथ ही गेहूं, मक्का, चावल के दानों को भी बरबाद करदेता है।
  • चावल का घुन भी ऐसा कीट है जो चावल के साथ गेहूं, मक्का, जौ, ज्वार, बाजरा आदि अनाजों में लगता है।
  • दालों का भृंग ऐसा कीट है जो सभी प्रकार की दालों को नष्ट कर देता है। ये अरहर, उड़द, चना, मूंग, मटर, मोठ, चंवला, मसूर आदि दालों को पूरी तरह से नष्ट कर देता है।

सुरक्षित अनाज भंडारण के खास उपाय

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1.फसल कटाई व ढुलाई के समय सावधानी

अनाज में कीटों व नमी का प्रभाव फसल की कटाई के साथ ही पड़ने लगता है, जिसकी कोई भी परवाह नहीं करता है। नतीजा यह होता है कि फसल को वहीं से नुकसान होने लगता है और भंडारण में नमी और कीटों का प्रकोप बढ़ जाता है। इसके लिए अनाज की ढुलाई से पहले ट्रैक्टर ट्रॉली को अच्छी तरह से धो कर धूप में सुखा लेना चाहिये। फिर अनाज को भंडारण से पहले 8-10 दिन तक धूप में सुखा लेना चाहिये। सूखे अनाज की पहचान कर लेना चाहिये। अनाज को सूखने के बाद उसे शाम को भंडारण नहीं करना चाहिये। बल्कि रात भर उसे छाया में रख कर ठंडा करना चाहिये। उसके बाद अगले दिन सुबह भंडारण करना चाहिये। ये भी पढ़े: ट्रैक्टर Tractor खरीदने पर मिलेगी 50 फीसदी सब्सिडी(subsidy), ऐसे उठा सकते हैं इस योजना का लाभ

2.भंडारण के समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिये

भंडारण के समय अनाज को भरने से पहले बोरे या कोठियों को अच्छी तरह से साफ सफाई कर लेनी चाहिये। इन्हें कीट मुक्त करने के लिए उपचार भी कर लेना चाहिये। जैसे अनाज भरने से पहले बोरों को एक प्रतिशत मैलाथियॉन के घोल में आधे घंटे डुबो कर रखें और फिर 2 से तीन दिन तक उलट-पलट कर कड़ी धूप में सुखाएं। तैयार अनाज को सीधे जमीन पर नहीं रखना चाहिये। इससे जमीन से लगने वाले कीड़ों व नमी से बचाव होगा। भंडारण से पहले भूसी, कंकर व कटे-फटे अनाज को अलग निकाल कर साफ कर लेना चाहिये तथा अनाज को कम से कम 15 दिन तक सुखाना चाहिये।

3. भंडारगृह की सफाई करें

भंडारण से पहले भंडारगृह की अच्छी तरह से साफ सफाई करें। भंडारगृह की छत, फर्श, खिड़कियां व दरवाजे सभी को अच्छी तरह से साफ करते उसमें तारपीन का तेल लगा देना चाहिये। फर्श में यदि दरारें हों तो उन्हें सीमेंट से भर देना चाहिये। दीवारों और फर्श के जोड़ों को भी अच्छी तरह से भराई कर देनी चाहिये। सीमेंट की दीवारें हों तो अच्छा वरना कच्ची दीवारों में पपड़ी आदि हों तो उनका भी उपचार कर देना चाहिये। इसके अलावा अनाज रखने से दस दिन पूर्व कमरे में आधा प्रतिशत मैलाथियॉन का घोल बनाकर तीन लीटर प्रतिवर्ग मीटर के हिसाब से छिड़काव करके छोड़ देना चाहिये। अच्छी तरह से सूखने क बाद ही गोदाम में अनाज को रखें। चूहों से बचाव के लिए दरवाजों के नीचे की तरफ लोहे की पत्तियां लगवा देना चाहिये।gehu ka bhandaran ये भी पढ़े: गेहूं की अच्छी फसल तैयार करने के लिए जरूरी खाद के प्रकार

4. कैसे करें सुरक्षित भंडारण

अनाज को नमी से बचाने के लिए भण्डारण करते समय कुछ सावधानियां बरतनी चाहिये। अनाज के भरे बोरों को सीधे फर्श पर नहीं रखना चाहिये। लकड़ी के फट्टों को पहले बिछाया जाना चाहिये। बोरो को जमीन से ऊपर और दीवालों से एक-डेढ़ फिट दूर तथा छत से एक या दो फिट नीचे रखा जाना चाहिये। कोठी में अनाज भरने के लिए पहले कोठी को साफ-सफाई करके उपचारित करना चाहिये। अनाज भरकर ढक्कन लगा देना चाहिये। फिर मोम या हवा को रोकने वाला कोई अन्य लेप लगा देना चाहिये। यदि कोठी को उपचारित करने के लिए पेस्टीसाइड लगाया हो तो उस कमरे में उठना-बैठना, सोना सब बंद कर देना चाहिये। बच्चों को उस कमरे से दूर ही रखना चाहिये। जब कभी अनाज निकालने जाना हो तो मुंह पर कपड़ा बांध कर जायें।

5. परम्परागत तकनीक भी अपनाएं

अनाजों को सुरक्षित रखने के लिए हमेशा से अपनाये जा रहे परम्परागत तरीकों को भी इस्तेमाल किया जाना चाहिये। परम्परागत तरीकों के अनुसार अनाज व दालों में सरसों का तेल लगाकर रखना होता है। राख मिला कर रखना होता है तथा नीम व करंज के पत्ते बिछाकर रखने होते हैं । राख को छान कर व सुखाकर ही मिलाया जाना चाहिये। इससे अनाज व दालें खराब नहीं होतीं तथा कीट अपने आप ही मर जाते हैं।

6. चूहा नियंत्रण

अनाज को बरबाद करने में चूहे बहुत खतरनाक होते हैं। ये जितना अनाज खाते हैं उससे दस गुना अनाज कुतर के बरबाद कर देते हैं। इसके अलावा इनके बाल झड़ने तथा मल-मूत्र से अनाज सड़ जाता है। इसलिये इनका नियंत्रण करना बहुत जरूरी होता है। चूहा नियंत्रण का काम मई जून माह में करना चाहिये क्योंकि उस समय खेत खाली हो जाते हैं। खेतों में लगने वाले चूहे भी आसपास के घरों में हमला करते हैँ। चूहों की रोकथाम के लिए दो से तीन  प्रतिशत जिंक फॉस्फाइड मिलाकर खाने का सामान देना चाहिये। लेकिन चूहे बहुत चतुर होते हैं। इसलिये पहले उन्हें उस तरह की बिना जहर मिली चीजें खिलाने का देना चाहिये। उसके बाद एक दिन जहर मिली वस्तु देने से वो आसानी से खा लेते हैं । ये भी पढ़े: कैसे करें काले गेहूँ की खेती और कमाएँ मुनाफा भंडार गृह में चूहों की रोकथाम के लिए बाजरा या किसी अनाज का विष आहार बनाना चाहिये। इसके लिए बाजरा या किसी अन्य अनाज में मूंगफली का तेल लगाना चाहिये। इसके बाद एक किलो अनाज को 20 से 30 ग्राम जिंक फॉस्फाइड पाउडर मिलाकर लकड़ी से अच्छी तरह मिला लें। फिर इनके दानों को भंडारघरों में दीवार के किनारे-किनारे बिखेर देना चाहिये। इन दानों को खा कर चूहे मर जायेंगे। अगले दिन बचे हुए दानों को समेटकर उन्हें नष्ट कर देना चाहिये। भंडारगृह यदि आवास में हो तो कम जहरीली एन्टी कोंगुलेट, ब्रोमोडायोलोन का प्रयोग किया जाना चाहिये। चूहों के लिए विष आहार तैयार करते समय मुंह पर रूमाल आदि बांध लेना चाहिये।

7. दीमक नियंत्रण

दीमक का प्रकोप वैसे खेतों में होता है। फिर भी भंडारगृह की दीवारों या दरवाजों, खिड़कियों में दीमक का प्रकोप हो तो 10 लीटर पानी में एक किलो लिंडेन पाउडर का घोल बनाकर उपचार करेंं।

8. कीट नियंत्रण के उपाय

अनाज को सुरक्षित रखने क लिए कीट नियंत्रण बहुत आवश्यक है। कीट नियंत्रण दो तरीके से किया जाता है। पहला अनाज को कीटों से बचाने के लिए और दूसरा अनाज में कीटों के लगने के बाद नियंत्रण किया जाता है। कीटों से बचाने के लिए प्रतिमीट्रिक टन अनाज के लिए 30 मिली लीटर ईडीबी एम्पयूल तथा एल्यूमिनियम फॉस्फाइड यानी सेल्फोस की 3 ग्राम की गोली प्रति मीट्रिक टन के हिसाब से डालनी चाहिये। कीटों का आक्रमण होने के बाद 1 ई डी बी एम्पयूल की 3 मिली लीटर प्रति क्विंटल के हिसाब से डालनी चाहिये। यह बहुत ही घातक व जहरीली दवा है, इसे खुले मुंह या खुले में नहीं डालना चाहिये। इससे स्वास्थ्य को काफी नुकसान भी हो सकता है। यह कार्य विशेषज्ञों की सलाह से किया जाना चाहिये।
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जिस हिसाब से भारत में फसलों का उत्पादन होता है, उस हिसाब से भारत में भंडारण (Storage; silos; bhandaran) की अधोसंरचनाएं मौजूद नहीं हैं, जिसके कारण फसलों का समय पर भंडारण नहीं हो पाता और फसलें खेतों में पड़े-पड़े खराब हो जाती हैं। इसके साथ ही फसलों के ट्रांसपोर्टेशन में भी भारी खर्चा होता है, जिसके कारण लागत बढ़ने के साथ ही किसानों का मुनाफा कम हो जाता है। सरकार इस समस्या का समाधान करने के लिए प्रयास कर रही है। इसके तहत सरकार अब 12 राज्यों में 249 आधुनिक स्टील गोदामों का निर्माण करने जा रही है। इसकी जानकारी आज केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने ट्वीट के माध्यम से दी।

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249 आधुनिक स्टील गोदामों के निर्माण के लिए सरकार निजी क्षेत्र के साथ भागीदारी करने जा रही है। इस निर्माण में करीब 9,236 करोड़ रुपये की लागत आने की संभावना है। भारतीय खाद्य निगम (Food Corporation of India) के सहयोग से जिन 249 आधुनिक स्टील के गोदामों का निर्माण किया जाना है, उनकी भंडारण क्षमता 111.125 लाख मीट्रिक टन के करीब होगी। इन आधुनिक स्टील गोदामों का निर्माण सरकार तीन चरणों में करवाएगी। इसके लिये भारतीय खाद्य निगम 'हब एंड स्पोक' मॉडल (Hub & Spoke model) पर काम कर रहा है, सभी आधुनिक स्टील गोदामों का निर्माण अगले 3-4 साल में कर लिया जाएगा। पहले चरण में सरकार ने 80 स्टील गोदामों के निर्माण का लक्ष्य रखा है। इन गोदामों में 34.875 लाख मीट्रिक टन अनाज का भंडारण हो सकेगा।

सार्वजनिक निजी भागीदारी के माध्यम से वैज्ञानिक भंडारण है लक्ष्य

इन गोदामों के निर्माण के बाद सरकार का लक्ष्य है कि गोदामों में वैज्ञानिक तरीकों से अनाज का भंडारण किया जाए ताकि अनाज खराब न हो और ज्यादा दिनों तक सुरक्षित रखा रहे। इसके अलावा सरकार इन गोदामों में यह सुनिश्चित करेगी कि निर्माण के साथ-साथ इनके संचालन की जिम्मेदारी भी निजी कंपनियां उठायें। सरकार इन आधुनिक गोदामों में सभी प्रकार की मैनेजमेंट सुविधाएं उपलब्ध करवाने की कोशिश करेगी।

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इन राज्यों को मिलेगी स्टील गोदामों की सौगात

पहले चरण में जिन राज्यों में आधुनिक स्टील के गोदाम बनाये जाने हैं उनमें 9 राज्यों के साथ 1 केंद्र शासित प्रदेश को शामिल किया गया है। इनमें पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल और जम्मू-कश्मीर का नाम शामिल है। सरकार ने बताया है कि इन राज्यों में पहले चरण में 80 गोदाम बनाये जाएंगे, जिनमें लगभग 2,800 करोड़ रुपये का निवेश हासिल हो सकता है। इस योजना में राज्य सरकारें, नीति आयोग, वित्त मंत्रालय, रेल मंत्रालय और इस्पात मंत्रालय भी अपना-अपना योगदान दे रहे हैं। सरकार ने बताया है कि स्टील के इन गोदामों का निर्माण खेतों के नजदीक ही किया जाएगा, ताकि ट्रांसपोर्टेशन में आने वाले किसानों के खर्चों को कम किया जा सके। इसके साथ ही ग्रामीण इलाकों के नजदीक होने पर किसानों को भंडारण में भी काफी सहूलियत मिलेगी।

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इन आधुनिक गोदामों में जमीन की भी बचत होती है। अगर हम भंडारण की बात करें तो पारंपरिक भंडारण की तुलना में स्टील गोदाम के भंडारण में मात्र एक तिहाई जमीन की ही जरुरत होती है। सरकार ने बताया है कि ये भंडारण केंद्र बाद में खरीद केंद्र के तौर भी काम करेंगे।