Ad

मुख्यमंत्री

ट्रैक्टर Tractor खरीदने पर मिलेगी 50 फीसदी सब्सिडी(subsidy), ऐसे उठा सकते हैं इस योजना का लाभ

ट्रैक्टर Tractor खरीदने पर मिलेगी 50 फीसदी सब्सिडी(subsidy), ऐसे उठा सकते हैं इस योजना का लाभ

खेती करने के लिए किसानों को ट्रैक्टर (Tractor) की जरूरत होती है। ऐसे में कुछ किसान तो किराए पर ट्रैक्टर(Tractor) लेकर अपनी खेती कर लेते हैं तो कुछ किसान बैलों के जरिए खेती करते हैं। लेकिन वे किसान जो आर्थिक तंगी के कारण ट्रैक्टर नहीं ले पाते हैं और ना ही इन्हें आसानी से बेल की सुविधा मिल पाती है। ऐसे किसानों के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक स्पेशल योजना निकाली है जिसके चलते 50% सब्सिडी(subsidy) पर कोई भी किसान ट्रैक्टर खरीद सकता है। जी हां यह सब्सिडी(subsidy) 'पीएम किसान ट्रैक्टर(Tractor) योजना' के जरिए दी जाएगी।

ये भी पढ़े: करतार ऐग्रो ने ट्रैक्टर मार्केट में किया धमाका, तीन नये ट्रैक्टर किये लांच

दरअसल, पीएम किसान के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं जिसके चलते किसान को खेती करने में आसानी हो। इतना ही नहीं बल्कि वे लगातार किसानों के लिए नई-नई योजनाएं लेकर आ रहे हैं। बता दें, पीएम किसानों के खाते में हर साल 6 हजार रुपए भी देते हैं। ताकि हर किसान अपनी खेती के लिए बीज, खाद और इस तरह की मशीनें की जरूरत पूरी कर सके। इसी बीच अब केंद्र सरकार ट्रैक्टर(Tractor) पर भी सब्सिडी(subsidy) दे रही है जो किसानों के लिए काफी लाभदायक होगी। आइए जानते हैं पीएम किसान ट्रैक्टर(Tractor) योजना का लाभ आप कैसे उठा सकते हैं?

किसी भी कंपनी का खरीद सकते हैं ट्रैक्टर

Escort Tractor

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि, इस योजना के तहत आप किसी भी कंपनी का ट्रैक्टर(Tractor) खरीद सकते हैं। ट्रैक्टर(Tractor) खरीदने के दौरान आपको आधी कीमत चुकानी होगी जबकि इसका आधा पैसा सरकार सब्सिडी(subsidy) के तौर पर देगी। न सिर्फ केंद्र सरकार बल्कि राज्य सरकार भी किसानों को ट्रैक्टर(Tractor) खरीदने में सहायता करती है। दरअसल, राज्य सरकार अपने अपने स्तर पर ट्रैक्टरों पर 20% से 50% सब्सिडी(subsidy) दे रही है। ऐसे में अब किसानों को ट्रैक्टर(Tractor) खरीदने में आसानी होगी और वे केंद्र सरकार और राज्य सरकार के तहत दोनों ही योजना का लाभ उठा सकते हैं।

 कैसे उठाएं इस योजना का लाभ?

बता दें, इस योजना का लाभ उठाना बेहद ही आसान है। यदि आप भी ट्रैक्टर(Tractor) खरीदना चाहते हैं तो इसके लिए आपको कुछ जरूरी डॉक्यूमेंट की आवश्यकता होगी। खास बात यह है कि, आप सिर्फ इस सब्सिडी(subsidy) का फायदा एक ही ट्रैक्टर(Tractor) खरीदने पर उठा सकते हैं। यदि आप दो ट्रैक्टर(Tractor) की खरीदारी करते हैं तो फिर आपको इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा। इस योजना का लाभ उठाने के लिए आप नजदीकी CSC सेंटर जाकर ऑनलाइन फॉर्म भर सकते हैं।

ये भी पढ़े: कृषि/किसान महोत्सव – त्योहारी सीजन में ट्रैक्टर की खरीद पर आकर्षक छूट

 जरूरी डाक्यूमेंट्स

  • आधार कार्ड
  • बैंक की डिटेल
  • जमीन के कागज
  • पासपोर्ट साइज फोटो

 कैसे करें आवेदन?

इस योजना का लाभ उठाने के लिए आप ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। देशभर में सभी किसानों के लिए ये योजना है। आप चाहे तो ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों ही तरीके से आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए आपको नजदीकी जन सेवा केंद्र जाना होगा या फिर सीएससी डिजिटल सेवा के जरिए भी इसका लाभ उठा सकते हैं। बता दें, इस योजना के तहत सब्सिडी(subsidy) सीधे किसानों के बैंक खातों में डाल दी जाएगी। इस योजना को जारी करने के बाद सरकार का दावा है कि किसानों को खेती करने में आसानी होगी साथ ही खेती में लगने वाली लागत में भी कमी आएगी। ट्रैक्टर(Tractor) और विभिन्न नए कृषि यंत्रों का उपयोग करने से किसान के पास फसल का उत्पादन न सिर्फ अच्छा होता है बल्कि पहले से कई गुना ज्यादा बढ़ जाता है।

Rajasthan ka krishi budget: किसानों के लिए बहुत कुछ है राजस्थान के कृषि बजट में

Rajasthan ka krishi budget: किसानों के लिए बहुत कुछ है राजस्थान के कृषि बजट में

13 महीनों तक चले किसान आंदोलन ने यह साबित किया कि अब सरकारों को उनकी तरफ ध्यान देना होगा अन्यथा सरकारें चल नहीं पाएंगी। उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों में चल रहे चुनावों के मद्देनजर ही, डैमेज कंट्रोल करने के वास्ते प्रधानमंत्री को तीनों कृषि कानून वापस लेने पड़े। यह वापसी इसलिए हुई क्योंकि देश भर के किसान एकजुट हो गए थे। किसानों की एकता का ही यह परिणाम था कि कानून वापस हुए और अब किसान अपने घरों पर हैं। लेकिन, इसके दूरगामी परिणाम को आपने देखा क्या। इसका दूरगामी परिणाम है, 23 फरवरी को राजस्थान में पेश किया गया कृषि बजट। जी हां, जब से राजस्थान बना है, तब से लेकर अब तक ऐसा कभी नहीं हुआ था कि बजट के बाद कोई कृषि बजट पेश किया गया हो। वह भी अलग से। पहले कभी ऐसा नहीं हुआ था। राजस्थान में जो कृषि बजट पेश किया गया, वह किसानों के आंदोलन की ही परिणिति है, ऐसा मानना गलत नहीं होगा।

क्या है कृषि बजट में

अब बड़ा सवाल यह है कि इस किसान बजट में है क्या।

दरअसल, इस किसान बजट में कई व्यवस्थाएं दी गई हैं। इन व्यवस्थाओं को गौर से देखें तो समझ जाएंगे कि राजस्थान सरकार किसानों को लेकर कितनी चिंतित है। हां, सरकारी खजाने की अपनी एक सीमा होती है। कृषि ही सब कुछ नहीं होती पर कृषि को तवज्जो देकर सरकार ने एक सकारात्मक रुख का प्रदर्शन तो जरूर किया है। आइए समझें कि इस कृषि बजट में है क्या।

1. मुख्यमंत्री कृषक साथी का बजट बढ़ गया

दरअसल, 2021 में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने उद्योग क्षेत्र में चलाई जाने वाली योजना को कृषि क्षेत्र में, थोड़े परिवर्तन के साथ लागू कर दिया। अर्थात, अगर आप किसान हैं और कृषि कार्य करते हुए आपके साथ कोई हादसा हो गया तो इस योजना के तहत आपको दो से 5 लाख रुपये तक की तात्कालिक सहायता मिलेगी। यह योजना कई क्लाउजेज की व्याख्या करती है। जैसे, यदि आपकी एक अंगुली कट जाए तो सरकार आपको 5000 रुपये देगी। दो कट जाए तो 10000 रुपये, तीन कट जाए तो 15000 रुपये और चार कट जाए तो 20000 रुपये का भुगतान करेगी सरकार। ऐसे ही अगर आपकी पांचों अंगुलियां कट जाती हैं तो सरकार आपको 25000 रुपये देगी। इस योजना के लिए बीते साल के बजट में 2000 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई थी। अब इसका दायरा बढ़ाने की गरज से सरकार ने इस योजना के लिए 5000 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की है। धनराशि बढ़ाने को किसानों ने बेहद बढ़िया माना है।

ये भी पढ़े : कृषि प्रधान देश में किसानों की उपेक्षा असंभव

2. मुख्यमंत्री जैविक कृषि मिशन

कृषि बजट में सरकार ने घोषणा की है कि इसी सत्र से मुख्यमंत्री जैविक खेती मिशन शुरू कर दिया जाएगा। इसके तहत सरकार उन किसानों को ज्यादा लाभ देगी, जो शुद्ध रूप से जैविक केती के लिए तैयार होंगे। इस योजना के तहत, सरकार उन्हें आर्थिक पैकेज तो देगी ही, जरूरत पड़ी तो उनकी फसलों को भी खरीद लेगी। इसके लिए पहले 600 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। अगले बजट में इस धनराशि को बढ़ाया भी जा सकता है।

3. बीज उत्पादन एवं विपणन तंत्र की घोषणा

इस कृषि बजट में सरकार ने एक ऐसा तंत्र विकसित करने की घोषणा की, जिसके तहत सभी किसानों तक सरकारी योजनाएं पहुंच सकें। खास कर बीज और कृषि के अन्य अवयवों को सरकार एक साथ किसानों तक पहुंचाना चाहती है। सरकार का जोर इस बात पर ज्यादा है कि राज्य के कम से कम दो लाख छोटे किसानों तक मूंग, मोठ और उड़द के प्रमाणित बीजों के मिनी किट्स मुफ्त में उपलब्ध कराए जाएं। इन चीजों के लिए ही बीज उत्पादन एवं विपणन तंत्र की घोषणा की गई है। सरकार एक सिस्टम बनाना चाह रही है जिससे समय पर और सिस्टमेटिक रुप में किसानों तक कृषि संबंधित चीजों की डिलीवरी हो सके। इस किस्म का सिस्टम छत्तीसगढ़ में पहले से चल रहा है।

ये भी पढ़े : सरकार के नए कृषि कानूनों से किसानों को कितना फायदा और कितना नुकसान

4. राजस्थान भूमि उर्वरकता मिशन की घोषणा

इस कृषि बजट में सरकार ने राजस्थान भूमि उर्वरकता मिशन की घोषणा की। इस मिशन के तहत राजस्थान के किसान यह जान सकेंगे कि उनकी जो जमीन है, उसकी उर्वरक क्षमता क्या है। किस किस्म की खेती उन्हें कब और कैसे करनी चाहिए। अभी राजस्थान में सभी किसान परंपरागत खेती कर रहे हैं। इस मिशन के शुरू हो जाने के बाद माना जा रहा है कि खेती कार्य में विविधता आएगी। समय-समय पर जब मिट्टी की जांच होगी तो किसानों को यह एडवाइस भी दिया जाएगा कि इसकी उर्वरकता बढ़ाने के लिए उन्हें क्या करना चाहिए।

5. दूध पर 5 रुपये प्रति लीटर अनुदान

राजस्थान सरकार ने अपने कृषि बजट में यह व्यवस्था की है कि जो भी किसान अपना दूध सहकारी दुग्ध उत्पादक संघों को देंगे, उन्हें 5 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से अनुदान भी मिलेगा। यह व्यवस्था इसलिए की गई है ताकि दूध सहकारी दुग्ध उत्पादक संघों के माध्यम से राजस्थान भर में बिके। 

6. कर्ज की व्यवस्था

इस कृषि बजट में घोषणा की गई है कि सरकार वर्ष 2022 में किसानों को फसली ऋण भी देगी। यह फसली ऋण 20000 करोड़ की लिमिट के भीतर होगी। ऐसे लाभार्थी किसानों की संख्या इस साल के लिए पांच लाख तय की गई है। इतना ही नहीं, जो लोग कृषि कार्य से प्रत्यक्ष रुप से नहीं जुड़े हैं, उन्हें भी कर्ज दिया जाएगा। इस साल ऐसे परिवारों की संख्या एक लाख तय की गई है। कर्ज कितना मिलेगा, यह तय नहीं है पर मिलेगा जरूर। कुल मिलाकर, यह किसानों के भीतर हौसला बुलंद करने वाला बजट है। इसे अगर अमली जामा पहना दिया जाए तो राजस्थान के किसानों की स्थिति बेहद सुदृढ़ हो सकती है। जिस भाव से बजट पेश किया गया है, वह बेहतर है। उसी भाव से इस पर अमल हो तो किसानों का सच में भला हो जाएगा।

उत्‍तर प्रदेश बजट 2.0 में यू.पी. के किसानों को क्या मिला ?

उत्‍तर प्रदेश बजट 2.0 में यू.पी. के किसानों को क्या मिला ?

उत्‍तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वर्ष 2022 का बजट पेश किया है। जिसमे यू. पी. के वयस्कों, महिलाओं, गरीब किसानों, बेरोजगारों आदि सभी को लगभग काफ़ी कुछ मिला है। तो आइए हम जानते है कि इस बजट के माध्यम से वहां के किसानों को क्या फ़ायदा मिला ?

उत्‍तर प्रदेश बजट 2.0 के माध्यम से किसानों को फ़ायदा :

- सिंचाई के लिए मुफ़्त बिजली, पी.एम. कुसुम योजना, सोलर पैनल्स, लघु सिंचाई परियोजना

बजट में किसानों को सिंचाई के लिए मुफ़्त बिजली का प्रावधान है। इसके लिए किसानों को पी.एम. कुसुम योजना के अंतर्गत किसानों को मुफ़्त सोलर पैनल्स उपलब्ध कराए जाएंगे। सिंचाई की अवशेष परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के साथ एक हज़ार करोड़ रुपए की लागत से लघु सिंचाई परियोजनाओं को आगे बढ़ाने का विशेष प्रावधान भी इस बजट में है।

- भामाशाह भावस्थिरता कोश की स्थापना के लिए फंड

किसानों के लिए भामाशाह भावस्थिरता कोश की स्थापना के लिए फंड की व्यवस्था की गई है। मुख्यमंत्री जी ने पहले से ही धान, गेहूं, और अन्य फसलों के लिए एम.एस.पी. कला उपलब्ध कराई थी लेकिन आलू, टमाटर, प्याज, आदि फसलों में इस प्रकार की व्यवस्था नहीं थी जो कि इस बजट में कराई गई है।

- जैविक खेती

प्रदेश में अभी भी काफ़ी किसान जैविक खेती से जुड़े हुए हैं, जिनके लिए मुख्यमंत्री जी ने टेस्टिंग लैब के व्यवस्था की है। और अगले 5 वर्षों में संपूर्ण बुंदेलखंड खंड को जैविक खेती से जोड़ने का प्रावधान भी इस बजट में पेश किया गया है।

ये भी पढ़ें: जानिए क्या है नए ज़माने की खेती: प्रिसिजन फार्मिंग

- बीजों का वितरण

वर्ष 2021-2022 में 60.10 लाख क्विंटल बीजों का वितरण किया गया था और वर्ष 2022-2023 में इसकी मात्रा बढ़ाकर 60.20 लाख क्विंटल बीजों का वितरण किया जाएगा।

- नलकूप तथा लघु नहर

प्रदेश में 30,307 राजकीय नलकूपों तथा 252 लघु नहरों के माध्यम से मुफ़्त सिंचाई सुविधा की व्यवस्था की गई है।

- लघु सिंचाई परियोजना

मुख्यमंत्री लघु सिंचाई परियोजना के लिए एक हजार करोड़ रुपए की व्यवस्था की गई है।

- उर्वरक का वितरण

वर्ष 2021-2022 में कृषकों के लिए 98.80 लाख मीट्रिक टन उर्वरक का वितरण किया गया था तथा वर्ष 2022-2023 में 119.30 लाख मीट्रिक टन उर्वरक के वितरण का लक्ष्य रखा गया है।

- सोलर पंपों की स्थापना

कृषकों को सिंचाई के लिए डीजल विद्युत के स्थान पर ऊर्जा प्रबंधन के तहत ऊर्जा संरक्षण के लिए कृषकों के लिए सोलर पंपों की स्थापना की जाएगी।

ये भी पढ़ें: शासन से अनुमति मिलने के बाद ही बेच सकते हैं बीज : जानें यूपी में कैसे मिलेगी बीज बेचने की अनुमति?

विपक्ष की ओर से बयान :

इस बजट पर विपक्ष की ओर से मायावती ने अपना बयान देते हुए कहा है कि, इस बजट से मुख्यमंत्री जी आम जनता की आंखों में धूल झोंक रहे हैं। उन्होनें आगे ट्वीट कर के कहा है कि "यूपी सरकार का बजट प्रथम दृष्टया वही घिसापिटा व अविश्वनीय तथा जनहित एवं जनकल्याण में भी खासकर प्रदेश में छाई हुई गरीबी, बेरोजगारी व गड्ढायुक्त बदहाल स्थिति के मामले में अंधे कुएं जैसा है, जिससे यहाँ के लोगों के दरिद्र जीवन से मुक्ति की संभावना लगातार क्षीण होती जा रही है।" उन्होंने आगे कहा है कि किसानों के लिए जो बड़े बड़े वादे किए गए थे, तथा जो बुनियादी कार्य प्राथमिकता के आधार पर करने थे वे कहां किए गए। 

वहीं कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि बीजेपी ने इतने बजट पेश किए है जिसमे केवल नंबर बढ़ाए गए है, इससे किसानों को कोई फायदा नही मिला है। बेरोजगारी और गरीबी अपनी चरम सीमा पर है। बजट के बारे में जो कुछ भी मुख्यमंत्री जी ने कहा है, उससे आम जनता और किसानों को कोई फायदा नही है। साथ ही वे कहते हैं उनके इन कामों से जनता का कोई फायदा नहीं होगा। वहीं यूपी के मुख्यमंत्री योगी जी ने बजट प्रस्तुत करने के बाद अपने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा है कि यह बजट 2022-2023 का है, जिससे यूपी की 25 करोड़ जनता का फायदा होगा और साथ ही यह बजट उत्तर प्रदेश के गरीब किसानों और नौजवानों की इच्छाओं को ध्यान में रख कर बनाया गया है। इसके अलावा उन्होनें कहा है कि यह बजट प्रदेश के उज्जवल भविष्य को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है।

मुख्यमंत्री लघु सिंचाई योजना में लाभांवित होंगे हजारों किसान

मुख्यमंत्री लघु सिंचाई योजना में लाभांवित होंगे हजारों किसान

लखनऊ। किसानों को सिंचाई के लिए आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री लघु सिंचाई योजना नाम से एक नई योजना शुरूआत की है। 

इस योजना के तहत वर्ष 2022-23 में प्रदेश हजारों किसान लाभांवित होंगे। लघु सिंचाई विभाग ने इसका प्रस्ताव बनाकर शासन को भेज दिया है। अब विभाग को इसकी स्वीकृति का इंतजार है। 

इस योजना के लिए बजट में 216 करोड़ प्रस्तावित हुए हैं। लघु सिंचाई के निःशुल्क बोरिंग योजना, मध्यम नहर नलकूप योजना और गहरी योजना को मिलाकर यह नई योजना शुरू की गई है। 

प्रभारी सहायक अभियंता लघु सिंचाई विनय कुमार ने बताया कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य कृषि उत्पादन में वृद्धि हेतु कृषकों के निजी सिंचाई साधनों का निर्माण कराकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। 

जिससे प्रदेश के हर खेत मे सुनिश्चित सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो सके। तथा प्रदेश के कृषक आधिकारिक खाद्यान्न उत्पादन का प्रदेश व देश के आर्थिक विकास में योगदान कर सकें। 

उन्होंने इस योजना के तहत 300 बोरिंग कराने का प्रस्ताव शासन को भेजा है। जिसके तहत 60 बोरिंग अनुसूचित जाति व 220 बोरिंग सामान्य जाति के लोगों के लिए लगाए जाएंगे।

ये भी पढ़ें:
भूमि विकास, जुताई और बीज बोने की तैयारी के लिए उपकरण

सामान्य जाति के लघु एवं सीमान्त किसानों हेतु अनुदान

-इन योजना में सामान्य श्रेणी के लघु एवं सीमान्त कृषकों हेतु बोरिंग पर अनुदान की अधिकतम सीमा क्रमशः 5000 रु. तथा 7000 रु. निर्धारित की गई है सामान्य श्रेणी के लाभार्थियों के लिए जोत सीमा 0.2 हेक्टेयर निर्धारित है। 

सामान्य श्रेणी के कृषकों की बोरिंग पर पम्पसेट स्थापित कराना अनिवार्य नहीं है। परंतु पम्पसेट क्रय कर स्थापित करने पर लघु कृषकों की अधिकतम 4500 रु. व सीमान्त कृषकों हेतु 6000 रु. का अनुदान अनुमन्य है।

अनुसूचित जाति/जनजाति कृषकों हेतु अनुदान

- अनुसूचित जाति/जनजाति के लाभार्थियों हेतु बोरिंग पर अनुदान की अधिकतम सीमा 10000 रुपए निर्धारित है। न्यूनतम जोत सीमा का प्रतिवर्ष तथा पम्पसेट स्थापित करने की बाध्यता नहीं है। 

10000 रुपए की सीमा के अंतर्गत बोरिंग से धनराशि शेष रहने पर रिफ्लेक्स वाल्व, डिलीवरी पाइप, बैंड आदि सामिग्री उपलब्ध करने की अतिरिक्त सुविधा भी उपलब्ध है। पम्पसेट स्थापित करने पर अधिकतम 9000रुपए का अनुदान अनुमान्य है। 

ये भी पढ़े: प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना के लाभ तथा इसमें आवेदन करने का तरीका

एच.डी.पी.ई. पाइप हेतु अनुदान

- वर्ष 2012-13 से जल के अपव्यय को रोकने एवं सिंचाई दक्षता में अभिवृद्धि के दृष्टिकोण से कुल लक्ष्य के 25 प्रतिशत लाभार्थियों को 90 एमएम साइज का न्यूनतम 30 मी. से अधिकतम 60 मी. एचडीपीई पाइप स्थापित करने हेतु लागत का 50 प्रतिशत अधिकतम 3000 रुपए का अनुदान अनुमन्य करने जाने का प्रावधान किया गया है। 22 मई 2016 से 110 एमएम साइज के एचडीपीई पाइप स्थापित करने हेतु भी अनुमान्यता प्रदान कर दी गई है।

पम्पसेट क्रय हेतु अनुदान

- निःशुल्क बोरिंग योजना के अंतर्गत नाबार्ड द्वारा विभिन्न अश्वशक्ति के पम्पसेट के लिए ऋण की सीमा निर्धारित है। जिसके अधीन बैंकों के माध्यम से पम्पसेट हेतु ऋण की सुविधा उपलब्ध है। 

जनपदवार रजिस्टर्ड पम्पसेट डीलरों से नगद पम्पसेट क्रय करने की भी व्यवस्था है। दोनों विकल्पों में से कोई भी प्रक्रिया अपनाकर आईएसआई मार्क (ISI Mark) पम्पसेट क्रय करने का अनुदान अनुमन्य है। 

ये भी पढ़े: धान की फसल काटने के उपकरण, छोटे औजार से लेकर बड़ी मशीन तक की जानकारी

कैसे करें आवदेन

- सर्वप्रथम आपको लघु सिंचाई विभाग, उत्तर प्रदेश की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा।

यूपी निशुल्क बोरिंग योजना के अंतर्गत लक्ष्यों का निर्धारण

- लक्ष्य की प्राप्ति प्रत्येक वर्ष जनपद वार लक्ष्य शासन स्तर पर उपलब्ध कराए गए धनराशि के माध्यम से किया जाएगा। - ग्राम पंचायत के लक्ष्यों का निर्धारण क्षेत्र पंचायत द्वारा किया जाएगा।

- लक्ष्य से 25% से अधिक की संख्या में लाभार्थी ग्राम पंचायत द्वारा ग्राम जल संसाधन समिति की सहमति से उपरोक्त अनुसार चयनित किए जाएंगे। - चयनित लाभार्थियों की सूची विकास अधिकारी को प्रस्तुत की जाएगी।

लाभार्थियों का चयन

-सभी पात्र लाभार्थियों को चयन उनकी पात्रता के अनुसार किया जाएगा। इस योजना का लाभ उन किसानों को नहीं प्रदान किया जाएगा जो पूर्व में किसी सिंचाई योजना के अंतर्गत लाभवंती हुए हैं। 

इसके अलावा वर्ष 2000 -01 मैं विभाग द्वारा लघु सिंचाई कार्यों का सेंसस करवाया गया है। इस सेंसस के माध्यम से ऐसे कृषकों की सूची तैयार की गई है जिन की भूमि असिंचित है। 

इस सूची में आय कृषकओ पर खास ध्यान दिया जाएगा। ग्राम पंचायत द्वारा एक अंतिम बैठक का आयोजन किया जाएगा जिसमें लाभार्थियों की सूची तैयार की जाएगी। 

ये भी पढ़े: भेड़, बकरी, सुअर और मुर्गी पालन के लिए मिलेगी 50% सब्सिडी, जानिए पूरी जानकारी

यूपी निःशुल्क बोरिंग योजना की प्राथमिकताएं एवं प्रतिबंध

- बोरिंग के समय इस बात का ध्यान रखा जाएगा कि जहां बोरिंग की जा रही है वहां खेती है या नहीं। बोरिंग के स्थान पर खेती होना अनिवार्य है। अतिदोहित/क्रिटिकल विकास खंडों में कार्य नहीं किया जाएगा। 

बोरिंग के संबंध में इस बात का ध्यान रखा जाएगा कि प्रस्तावित पंपसेट से लगभग 3 हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि की सिंचाई हो सके। 

वह विकास खंड जो सेमी क्रिटिकल कैटेगरी में है उनमें नाबार्ड द्वारा स्वीकृत सीमा के अंतर्गत ही चयन किया जाएगा। पंपसेट के मध्य दूरी नाबार्ड द्वारा जनपद विशेष के लिए निर्धारित दूरी से कम नहीं होनी चाहिए। 

समग्र ग्राम विकास योजना एवं नक्सल प्रभावित समग्र ग्राम विकास योजना के अंतर्गत चयनित किए गए ग्रामों में सर्वोच्च प्राथमिकता के आधार पर बोरिंग का कार्य किया जाएगा। 

उपलब्ध धनराशि से समग्र ग्राम विकास योजना एवं नक्सल प्रभावित समग्र ग्राम विकास योजना के ग्रामों को सर्वप्रथम पूर्ति की जाएगी।

ये भी पढ़ें: अब सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को मिलेगा सरकार की योजनाओं का लाभ

यूपी निशुल्क बोरिंग योजना के अंतर्गत सामग्री की व्यवस्था

इस योजना के अंतर्गत पीवीसी पाइप का प्रयोग किया जाएगा। एमएस पाइप का उपयोग केवल उन क्षेत्रों में किया जाएगा जहां हाइड्रोजियोलॉजिकल परिस्थितियों के कारण पीवीसी पाइप का प्रयोग नहीं किया जा सकता। 

एसएम पाइप का प्रयोग ऐसे जिलों में चिन्हित क्षेत्रों के संबंधित अधीक्षण अभियंता लघु सिंचाई वृत से अनुमोदन प्राप्त करके किया जाएगा। 

पीवीसी पाइप से होने वाली बोरिंग के लिए पीवीसी पाइप एवं अन्य सामग्री की व्यवस्था कृषकों द्वारा की जाएगी। जिलाधिकारी के अंतर्गत एक समिति का गठन किया जाएगा जिसके माध्यम से अनुदान स्वीकृति करने हेतु पीवीसी पाइप तथा अन्य सामग्री की दरें निर्धारित की जाएगी। 

 ----- लोकेन्द्र नरवार

गो-पालकों के लिए अच्छी खबर, देसी गाय खरीदने पर इस राज्य में मिलेंगे 25000 रुपए

गो-पालकों के लिए अच्छी खबर, देसी गाय खरीदने पर इस राज्य में मिलेंगे 25000 रुपए

चंडीगढ़। हरियाणा से गोपालकों के लिए एक अच्छी खबर आ रही है। हरियाणा सरकार ने एक देसी गाय खरीदने पर किसान को 25000 रुपए की सब्सिडी देने की घोषणा की है। 

प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए सबसे बड़ा फैसला लिया गया है। हरियाणा सरकार के मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर ने एक देसी गाय की खरीद पर किसान को 25 हजार रुपए देने का फैसला लिया है। 

साथ ही किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए जीवामृत का घोल तैयार करने के लिए चार बड़े ड्रम निःशुल्क दिए जाएंगे। हरियाणा राज्य इस तरह की घोषणा करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है।

पीएम की मुहिम को सफल बनाने का प्रयास

- हरियाणा सरकार द्वारा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की नेचुरल फार्मिंग वाली मुहिम को सफल बनाने का प्रयास किया जा रहा है। इससे जहरीले केमिकल वाली खेती पर अंकुश लग सके।

ये भी पढ़ें: भारत सरकार द्वारा लागू की गई किसानों के लिए महत्वपूर्ण योजनाएं

50 हजार एकड़ भूमि में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का लक्ष्य

- मनोहरलाल खट्टर सरकार ने प्रदेश की 50 हजार एकड़ भूमि में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखा गया है। इस योजना के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए प्रत्येक ब्लॉक में 'खेत प्रदर्शनी' कार्यक्रम लगाए जाएंगे, 

जिससे दूसरे किसान भी जहरीली खेती करने से तौबा करें और जैविक खेती की ओर रुख करें। प्राकृतिक खेती से किसानों की आमदनी में इजाफा होगा और लोगों का स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा।

ये भी पढ़ें: जानिए क्या है नए ज़माने की खेती: प्रिसिजन फार्मिंग

इस तरह किया गया है एलान

- हरियाणा के करनाल स्थित डॉ. मंगलसैन ऑडिटोरियम में प्राकृतिक खेती पर राज्यस्तरीय समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। 

बैठक में मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि पोर्टल पर रजिस्टर्ड 2 से 5 एकड़ भूमि वाले किसानों को स्वेच्छा से प्राकृतिक खेती अपनाने की अपील की गई है। 

ऐसे सभी किसानों को देसी गाय खरीदने के लिए 50 प्रतिशत सब्सिडी देने का प्रावधान तय किया गया है। सीएम ने कृषि वैज्ञानिकों से सीधा संवाद किया और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को जागरूक करने की बात कही। और जिम्मेदार अधिकारियों को इस संबंध में आवश्यक निर्देश भी दिए। ------ लोकेन्द्र नरवार

प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए अब यूपी में होगा बोर्ड का गठन

प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए अब यूपी में होगा बोर्ड का गठन

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए अब यूपी में बोर्ड का गठन करने की बात कही। सीएम योगी का मानना है कि धरती की रक्षा के लिए प्राकृतिक खेती अपनानी होगी। शीघ्र ही यूपी में इसके बोर्ड के गठन की प्रक्रिया शुरू होगी। उन्होंने कहा कि यूपी में सबसे अच्छा जल संसाधन के साथ-साथ सबसे अच्छी उर्वरा भूमि है। पूरे देश का 12 फीसदी भूभाग यूपी में है। पूरे देश में यूपी 20 फीसदी कृषि उत्पादन करता है।

ये भी पढ़ें: जानिए क्या है नए ज़माने की खेती: प्रिसिजन फार्मिंग

लखनऊ में विश्व बैंक एवं एमएसएमई के तत्वावधान में हुई बैठक में सीएम योगी ने कहा कि ऋषि और कृषि एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। गोवंश आधार था। अब फिर से उसी ओर जाना होगा। कम लागत में केवल प्राकृतिक खेती ही किसानों की आमदनी कई गुना बढ़ा सकती है। यदि प्राकृतिक खेती के बढ़ावा मिले तो स्थिति काफी बेहतर हो सकती है। देश में कृषि पहले नम्बर पर है। और एमएसएमई दूसरे नम्बर पर है। आज प्रदेश में 90 लाख एमएसएमई इकाइयां उपलब्ध हैं। यदि दोनों में एक-दूसरे के साथ बेहतर तालमेल हो जाए तो काफी बेहतर परिणाम आ सकते हैं।

इन स्थानों पर अभियान की शुरुआत हो चुकी है

- यूपी में गंगा के दोनों तटों पर पांच किमी तक खास तौर पर तटवर्ती 27 और बुंदेलखंड के 7 यानी कुल 34 जिलों में प्राकृतिक खेती के लिए अभियान शुरु हो चुका है। जल्दी ही पूरे प्रदेश में इसका विस्तार किया जाएगा।

ये भी पढ़ें: उत्तर प्रदेश में जैविक खेती से बढ़ी किसानों की आमदनी

पीएम मोदी देश को चाहते हैं विषमुक्त

- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी चाहते हैं कि पूरा देश विषमुक्त हो जाए। इस अभियान में राज्य सरकारें भी पीएम की मंशा के अनुरूप काम कर रहीं हैं। और लगातार प्रदेश सरकारों की ओर प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रयास किया जा रहा है।

किसानों को जागरूक करने के लिए होंगी किसान गोष्ठी

- प्राकृतिक खेती के बारे में किसानों को जागरूक करने के लिए किसान गोष्ठियों का आयोजन किया जाएगा। जिसमें किसानों को प्राकृतिक खेती के फायदे बताए जाएंगे। जल्दी ही इस पर काम शुरू हो जाएगा। 

 ------- लोकेन्द्र नरवार

एमपी के सीएम शिवराज की समर्थन मूल्य पर मूंग खरीदी घोषणा की टाइमिंग पर सवाल

एमपी के सीएम शिवराज की समर्थन मूल्य पर मूंग खरीदी घोषणा की टाइमिंग पर सवाल

सीएम ने आखिरी दौर में की घोषणा, अब सर्वर डाउन

पहले ही उपज बेच चुके हैं कुछ किसान, चूक गए चौहान मध्य प्रदेश राज्य सरकार ने
न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर मूंग की सरकारी खरीद शुरू करने का निर्णय लिया है। किसान हित में मुख्यमंत्री के इस निर्णय को देर से लिया गया फैसला बताया जा रहा है। मध्य प्रदेश में मूंग की खेती करने वाले किसानों के लिए समर्थन मूल्य पर उपज खरीदने के सरकारी निर्णय की जरूरी खबर आई तो जरूर है, लेकिन देरी से। गुड न्यूज ये भी है कि सरकार ने इस साल समर्थन मूल्य में आंशिक लेकिन वृद्धि जरूर की है।



ये भी पढ़ें:
केन्द्र सरकार ने 14 फसलों की 17 किस्मों का समर्थन मूल्य बढ़ाया

टाइमिंग पर सवाल -

भले ही मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का यह एक किसान समर्थित फैसला हो, लेकिन इसकी टाइमिंग पर भी सवाल उठ रहे हैं। उन पर मूंग के समर्थन मूल्य की घोषणा के संदर्भ में चूक गए चौहान वाली कटूक्तियां की जा रहीं हैं।

उपज बेच चुके किसान -

किसानों का कहना है कि, मध्य प्रदेश सरकार ने समर्थन मूल्य पर खरीदी करने में देर कर दी है। इस घोषणा एवं खरीदी संबंधी रजिस्ट्रेशन आदि की प्रक्रिया पूरी होने के पहले तक अधिकांश किसानों ने कृषि उपज मंडी में ओने-पोने दाम पर मूंग की अपनी उपज बेच दी है।



ये भी पढ़ें:
खरीफ विपणन सीजन 2020-21 के दौरान न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का क्रियान्वयन

प्रक्रिया इस बार -

मध्य प्रदेश में इस साल समर्थन मूल्य पर खरीदी करने का रजिस्ट्रेशन सिर्फ सहकारी सोसायटी के माध्यम से हो रहा है। ऐसी स्थिति में पंजीकरण का अन्य कोई विकल्प न होने से भी किसान असमंजस में हैं, कि वे किस तरह समर्थन मूल्य पर उपज का रजिस्ट्रेशन कराएं। मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के बरेली आदि क्षेत्रों में ग्रीष्म कालीन सीजन में गेहूं, चना, कटाई के फौरन बाद मूंग की खेती शुरू कर दी जाती है। इस चक्र के अनुसार इस बार भी क्षेत्र के कृषकों ने लगभग 18 से 20 हजार हेक्टेयर भूमि में मूंग की बोवनी की थी।



ये भी पढ़ें:
न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कृषि उत्पादों की खरीद जारी रहेगी

तंत्र की खामी -

इंटरनेट आधारित समर्थन मूल्य पर कृषि उपज के रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया तंत्र की सबसे बड़ी समस्या सर्वर डाउन होने की है। किसानों ने जी तोड़ मेहनत कर मूंग उपजाई थी, लेकिन सरकारी खरीद नीति ने फिलहाल किसानों की मुसीबत बढ़ा दी है। कई जगहों पर सर्वर डाउन होने की वजह से पंजीयन नहीं हो पा रहे हैं। पंजीकरण सिर्फ सहकारी सोसायटी से होने के कारण दूसरा विकल्प न होने से भी किसान मूंग की उपज के पंजीकरण से वंचित हैं।



ये भी पढ़ें:
अब सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को मिलेगा सरकार की योजनाओं का लाभ

इनको किया था दायरे में शामिल -

सरकार ने पूर्व में धान, गेहूं, चना आदि उपज के लिए समर्थन मूल्य की घोषणा की थी, लेकिन सरकार के द्वारा हाल ही में मूंग की उपज को समर्थन मूल्य के दायरे में लाया गया।

पिछले माह के मुकाबले अंतर -

पिछले साल सरकार ने मूंग के बारे में 15 जून से समर्थन मूल्य की घोषणा की थी। इस साल सरकार ने 18 जुलाई से समर्थन मूल्य पर मूंग की खरीदी प्रारंभ करने का निर्णय लिया है। हालांकि इस बार सरकार ने समर्थन मूल्य में 79 रुपए की वृद्धि की है।

समर्थन मूल्य तब और अब -

सरकार ने इस वर्ष मूंग का समर्थन मूल्य 79 रुपए बढ़ाकर 7275 रुपए तय किया है। पिछले साल मूंग का समर्थन मूल्य 7196 रुपए था। आंकड़ों के मान से इस बार बाडी क्षेत्र में 18 से 20 हजार हेक्टेयर भूमि में मूंग की बोवनी हुई।
आदत बदलने पर छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री वृक्षारोपण प्रोत्साहन योजना में 3 साल तक मिलेंगे पूरे इतने हजार

आदत बदलने पर छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री वृक्षारोपण प्रोत्साहन योजना में 3 साल तक मिलेंगे पूरे इतने हजार

किसान पंचायत समिति से जुड़ी स्कीम

फसल चक्र बदलने सीएम बघेल का प्लान

इमारती लकड़ी, फल, बाँस, लघु वनोपज बढ़ाने का संकल्प

निरंतर एक सी खेती के लती किसानों को यदि छत्तीसगढ़ सरकार की आर्थिक मदद से जुड़ी एक योजना का तीन सालों तक लाभ हासिल करना है, तो उन्हें पहले अपनी आदतों में भी बदलाव करना होगा। जी हां, छत्तीसगढ़ प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी योजना की यह प्रथम एवं अनिवार्य शर्त है। अब कौन सी आदत किसान मित्र को बदलनी होगी, सरकार के कहने पर चले तो किसान का क्या भला होगा, आदत बदलने पर कितना आर्थिक लाभ होगा, इन सवालों के जानिये जवाब मेरी खेती के साथ। पर्यावरण एवं मृदा संरक्षण के लिए कृषि वैज्ञानिक खेत पर उपज बदल-बदल कर खेती करने की सलाह किसानोें को देते हैं। पारंपरिक फसल चक्र से जुड़े किसानों को अन्य फसलों, पौधों, बागवानी, वानिकी आधारित कृषि आय से जोड़ने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें कई प्रोत्साहन योजनाएं संचालित कर रही हैं।

छग में भूपेंद्र सरकार की अभिनव पहल

इस तारतम्य में छत्तीसगढ़ सरकार ने कृषि भूमि की उर्वरता की रक्षा एवं वृद्धि के साथ ही पर्यावरण सहेजने के लिए महत्वाकांक्षी चीफ मिनिस्टर ट्री प्लांटेशन इंसेंटिव स्कीम (Chhattisgarh Chief Minister Tree Plantation Incentive Scheme) स्टार्ट की है।


ये भी पढ़ें: CG: छत्तीसगढ़ मिसल बंदोबस्त रिकॉर्ड ऑनलाइन ऑनलाइन ऐसे देखें
इस योजना के तहत, छत्तीसगढ़ राज्य में वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से जारी किए गए दिशा-निर्देशों के अनुसार किसानों, किसान समितियों के साथ ही निजी भूमि में भी पौधरोपण (शासकीय योजनानुसार वृक्षारोपण) से जुड़े खेती-किसानी कार्य को प्रोत्साहित किया जाएगा।

दबाव होगा कम

छत्तीसगढ़ प्रदेश सरकार का मानना है कि इस अभिनव योजना से जंगल की आग से रक्षा, चारा, लकड़ी और औद्योगिक सेक्टर के लिए जरूरी भू-जनित उत्पाद के दबाव को कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही आधुनिक खेती से पर्यावरण पर मंडराने वाले खतरों को कम करने में भी आसानी होगी।

एक साल पहले हुई घोषणा

फसल चक्र में बदलाव के लिए किसानों को प्रेरित करने की दिशा में प्रयासरत देश की राज्य सरकारों के मध्य छत्तीसगढ़ राज्य सरकार (Chhattisgarh State Government) ने बीते साल 1 जून 2021 को अहम योजना की घोषणा की थी। इस दिन छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा आदिवासी बहुल प्रदेश छत्तीसगढ़ राज्य में मुख्यमंत्री वृक्षारोपण प्रोत्साहन योजना का शुभारंभ किया गया। गौरतलब है कि, 18 मई 2021 को मंत्रिमंडल की बैठक में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल (Chief Minister Bhupesh Baghe) ने चीफ मिनिस्टर ट्री प्लांटेशन इंसेंटिव स्कीम (Chief Minister Tree Plantation Incentive Scheme) को छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) राज्य में लागू करने का निर्णय लिया था।

किसका कितना भला

चीफ मिनिस्टर ट्री प्लांटेशन इंसेंटिव स्कीम (Chief Minister Tree Plantation Incentive Scheme) अर्थात मुख्यमंत्री वृक्षारोपण प्रोत्साहन योजना का छत्तीसगढ़ राज्य में किसको, कितना, क्या लाभ हासिल होगा, इन विषयों पर सवाल दर जानिये जवाब।


ये भी पढ़ें: MSP पर छत्तीसगढ़ में मूंग, अरहर, उड़द खरीदेगी सरकार

इनको मिलेगा लाभ

छत्तीसगढ़ प्रदेश सरकार ने यह पेशकश राज्य के सभी किसानों, ग्राम एवं संयुक्त वन प्रबंधन समितियों के हित में जारी की है। निजी भूमि में भी पौधरोपण (शासकीय योजनानुसार वृक्षारोपण) से जुड़े खेती-किसानी कार्य को छत्तीसगढ़ राज्य सरकार द्वारा प्रोत्साहित किया जाएगा।

योजना का मकसद

छत्तीसगढ़ में पौधरोपण (वृक्षारोपण) योजना शुरू करने का मूल मकसद नागरिकों एवं किसानों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करते हुए राज्य में जल, जंगल एवं जमीन का संरक्षण एवं संवर्धन करते हुए पर्यावरण में सुधार लाना है। पिछले वर्ष जून 2021 से शुरू की गई प्लांटेशन स्कीम के तहत छत्तीसगढ़ राज्य सरकार जागरूकता कार्यक्रमों एवं शिविरों के माध्यम से लोगों को जल-जंगल-जमीन के महत्व से परिचित करा रही है। छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री वृक्षारोपण प्रोत्साहन योजना का मूल उद्देश्य वृक्षों की कमी के कारण जल-जंगल-जमीन, प्राणी और पर्यावरण के स्वास्थ्य पर पड़ रहे बुरे प्रभावों को रोककर प्राकृतिक घटक आधारित उत्पाद को मानव एवं पर्यावरण हितकारी बनाना है। छत्तीसगढ़ राज्य सरकार की मंशा पौधरोपण कर वृक्ष का स्वरूप प्रदान करने वाले किसानों को आर्थिक मदद प्रदान करना है, ताकि पारंपरिक कृषि चक्र अपनाने वाले अन्य किसान भी, बदलाव करने वाले कृषकों से सीख लेकर फसल चक्र में बदलाव के लिए प्रेरित हो सकेें। इस योजना को शुरू करने के पीछे राज्य सरकार का उद्देश्य छत्तीसगढ़ राज्य में हो रहे जलवायु परिवर्तन के कुप्रभाव को कम करके, इसे स्थिर करना एवं प्रदूषण को कम करने वृक्षों की संख्या में वृद्धि करना है।

लेकिन बदलना होगी आदत

चूंकि प्रदेश सरकार की योजना का मकसद फसल चक्र में बदलाव करना है, अतः परंपरागत फसल चक्र के बजाए पौधरोपण के जरिए वृक्ष संवर्धन करने वाले किसानों को छग सरकार प्रोत्साहित करेगी। खरीफ वर्ष 2020 में धान की फसल की पैदावार करने वाले किसानों को इस बार अपनी आदत में बदलाव करना होगा। यदि इस बार वे धान के बदले अपने खेतों में वृक्षारोपण (पौधरोपण) करते हैं, तो वे योजना हितग्राही पात्रता की प्रथम अनिवार्य शर्त की पूर्ति कर योजना का लाभ ले सकेंगे। ग्राम पंचायतें भी स्वयं की उपलब्ध राशि से वाणिज्यिक उपयोग के लिए वृक्षारोपण (पौधरोपण) कर मुख्यमंत्री वृक्षारोपण प्रोत्साहन योजना का लाभ प्राप्त कर सकती हैं। यह सुविधा भविष्य में पंचायतों की आय में वृद्धि करने का लाभ भी प्रदान करेगी।

CMTPIS का क्रियान्वन

चीफ मिनिस्टर ट्री प्लांटेशन इंसेंटिव स्कीम (सीएमटीपीआईएस) (Chief Minister Tree Plantation Incentive Scheme/ CMTPIS) अर्थात मुख्यमंत्री वृक्षारोपण प्रोत्साहन योजना का छत्तीसगढ़ राज्य में क्रियान्वयन करने के लिए राज्य सरकार ने विशेष रूपरेखा बनाई है। राज्य स्तर पर योजना के क्रियान्वयन के लिए प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं कृषि उत्पादन आयुक्त की सहभागिता खास तौर पर सुनिश्चित की गई है। जिला स्तर पर स्कीम के सफल क्रियान्वन की जिम्मेदारी क्षेत्रीय वन मंडल अधिकारियों को सौंपी गई है। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री वृक्षारोपण प्रोत्साहन योजना में किसानों को प्रदान करने के लिए उच्च गुणवत्ता के पौधे तैयार किए जा रहे हैं। इन पौधों का रोपण वन अधिकार प्रदत्त वन एवं राजस्व वन भूमि पर हितग्राहियों की सहमति से किया जाएगा।


ये भी पढ़ें: Natural Farming: प्राकृतिक खेती में छिपे जल-जंगल-जमीन संग इंसान की सेहत से जुड़े इतने सारे राज

योजना में शामिल किस्में

मुख्यमंत्री वृक्षारोपण (पौधरोपण) प्रोत्साहन योजना के तहत गैर वन क्षेत्रों में इमारती, गैर इमारती लकड़ी, फलदार वृक्षों, बांस, अन्य लघु वनोपज एवं औषधीय पौधों की खेती करने वाले किसानों को लाभान्वित किया जाएगा। इमारती लकड़ी, फल, बाँस, लघु वनोपज एवं औषधीय पौधे खेत में लगाने वाले किसानों को प्रदेश सरकार से बदले में आर्थिक मदद प्राप्त होगी। इसके अलावा निजी क्षेत्र में तैयार परिपक्व एवं उम्र दराज पेड़ों, वृक्षों को काटने के बारे में लागू अनुमति संबंधी प्रावधानों को अपेक्षाकृत रूप से पहले के मुकाबले और अधिक आसान बनाया गया है। हितग्राही द्वाला लगाए जा रहे पौधों के परिपक्व पेड़ बनने के बाद उसकी कटाई से जुड़े अनुमति के प्रावधानों के बारे में भी राज्य सरकार ने प्रबंध किए हैं।

योजना पात्रता मानदंड

मुख्यमंत्री वृक्षारोपण प्रोत्साहन योजना का लाभ अव्वल तो सिर्फ छत्तीसगढ़ राज्य के स्थाई निवासी को ही प्रदान किया जाएगा। सीएम ट्री प्लांटेशन इंसेंटिव स्कीम के तहत लाभ लेने के इच्छुक किसानों, ग्राम पंचायतों या संयुक्त वन प्रबंधन समितियों के पास कम से कम 1 एकड़ भूमि की अनिवार्यता योजना में एक अन्य अहम शर्त है। मतलब एक एकड़ भूमि के मालिक हितग्राही ही योजना का लाभ ले सकेंगे। कृषक मित्र याद रखें कि छत्तीसगढ़ चीफ मिनिस्टर ट्री प्लांटेशन इंसेंटिव स्कीम 2022 के हितग्राही को योजना का लाभ केवल तब ही प्रदान किया जाएगा जब स्कीम के तहत पौधरोपण का एक साल सफलतम रूप से पूरा हो चुका हो। यह योजना की तीसरी प्रमुख शर्त कही जा सकती है।

योजना आवेदन प्रक्रिया

छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री वृक्षारोपण प्रोत्साहन योजना 2022 का लाभ हासिल करने आवेदन के लिए ऑनलाइन प्रोसेस अभी शुरू नहीं हो पाई है। राज्य के इच्छुक लाभार्थी मुख्यमंत्री वृक्षारोपण प्रोत्साहन योजना लिए लाभ प्राप्त करने फिलहाल ऑफलाइन आवेदन कर सकते हैं। जिले के वन परिक्षेत्र कार्यालय में योजना अहर्ता फॉर्म आवेदक को प्राप्त होंगे। फॉर्म में अनिवार्य जानकारी दर्ज करने एवं जरूरी दस्तावेजों की प्रतिलिपि संलग्न कर आवेदक को कार्यालय में फॉर्म जमा करना होगा।


ये भी पढ़ें: प्राकृतिक खेती ही सबसे श्रेयस्कर : ‘सूरत मॉडल’

अहम सवाल, कितना लाभ मिलेगा

छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री वृक्षारोपण प्रोत्साहन योजना 2022 के तहत योजना की पात्रता रखने वाले किसानों को राज्य सरकार द्वारा अगले 3 सालों तक 10 हजार रुपये प्रति एकड़, प्रति वर्ष की दर से प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। स्वयं के पास उपलब्ध राशि से योजना के तहत पौधरोपण करने वाली ग्राम पंचायतों को एक साल बाद सफल पौधरोेपण की स्थिति में शासन की ओर से योजना के लाभ बतौर 10 हजार रूपये प्रति एकड़ की दर से प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। इससे पंचायतों की आय में वृद्धि के साथ ही पर्यावरण संवर्धन हेतु सामूहिक प्रयास की कोशिश भी साकार होगी। संयुक्त वन प्रबंधन समिति भी स्वयं के खर्चे पर राजस्व भूमि पर व्यवसायिक उपयोग आधार संबंधी पौधरोपण कर योजना का लाभ हासिल कर सकती है। योजना में पात्र वन प्रबंधन समिति को पंचायत की ही तरह एक साल बाद शासन की ओर से 10 हजार रुपये प्रति एकड़ की दर से प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। योजना के तहत तैयार किए जाने वाले पौधों, वृक्षों, पेड़ों की कटाई एवं विक्रय के अधिकार योजना के अनुसार संबंधित समिति के पास सुरक्षित रखे गए हैं। सरकार पात्र हितग्राहियों को चीफ मिनिस्टर ट्री प्लांटेशन इंसेंटिव स्कीम अर्थात मुख्यमंत्री वृक्षारोपण प्रोत्साहन योजना के तहत 3 साल तक 10000 रुपये प्रति वर्ष प्रति एकड़ की दर से प्रदान किए जाएंगे। आपको बता दें राज्य सरकार की योजनाओं के बारे में आधिकारिक वेबसाइट पर महत्वपूर्ण सूचनाएं उपलब्ध हैं : https://chhattisgarh.nic.in/ भू, जल एवं पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन के लिए छत्तीसगढ़ सरकार का यह प्रयास निश्चित ही अनुकरणीय कहा जा सकता है। पेड़ पौधों को सहेजने के लिए भले ही वर्तमान पीढ़ी ने देर कर दी हो, लेकिन इस बारे में ताकीद पहले की अनुभवी पीढ़ी यह कहते हुए पहले ही दे चुकी है कि, “इन टहनियों को मत काटो, ये चमन का जेवर हैं, इन्हीं में से कल आफताब उभरेगा।” छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री वृक्षारोपण प्रोत्साहन योजना 2022 का लाभ हासिल करने आवेदन के लिए ऑनलाइन प्रोसेस अभी शुरू नहीं हो पाई है। इस बारे में पुष्टि जरूर कर लें।
'मोती की खेती' ने बदल दी किताब बेचने वाले नरेन्द्र गरवा की जिंदगी, अब कमा रहे हैं सालाना पांच लाख रुपए

'मोती की खेती' ने बदल दी किताब बेचने वाले नरेन्द्र गरवा की जिंदगी, अब कमा रहे हैं सालाना पांच लाख रुपए

जयपुर (राजस्थान), लोकेन्द्र नरवार

आज हम आपको बता रहे हैं मेहनत और लगन की एक और कहानी। राजस्थान के रेनवाल के रहने वाले नरेन्द्र गरवा जो कभी किताबें बेचकर अपने परिवार का पालन-पोषण करते थे, 

आज खेती से सालाना पांच लाख रुपए से ज्यादा कमा रहे हैं। जी हां, नरेन्द्र गरवा ने किताब बेचना छोड़ मोती की खेती (Pearl Farming) शुरू कर दी। और आज 'मोती की खेती' ने नरेन्द्र गरवा की जिंदगी बदल दी है। 

जो लोग कहते हैं कि खेती-किसानी में कुछ नहीं रखा है। नरेन्द्र गरवा उन लोगों के लिए एक मिशाल हैं। उन्हें नरेन्द्र की मेहनत और लगन से सीखना चाहिए।

राजस्थान में किशनगढ़ रेनवाल के रहने वाले नरेन्द्र गरवा

गूगल से ढूंढा था 'मोती की खेती' का प्लान

- राजस्थान में किशनगढ़ रेनवाल के रहने वाले नरेन्द्र गरवा जब किताब बेचते थे, तो मेहनत करने के बाद भी उन्हें काफी कुछ मुसीबतों का सामना करना पड़ता था। 

एक दिन नरेन्द्र ने गूगल पर नए काम की तलाश की। गूगल से ही उन्हें 'मोती की खेती' का पूरा प्लान मिला और निकल पड़े मोती की खेती करने।

ये भी पढ़ें: केमिस्ट्री करने वाला किसान इंटीग्रेटेड फार्मिंग से खेत में पैदा कर रहा मोती, कमाई में कई गुना वृद्धि!

शुरुआत में पागल समझते थे लोग

- नरेन्द्र गरवा ने सबसे पहले अपने घर की छत पर मोती की बागवानी शुरू की थी। तब लोग नरेन्द्र को पागल समझते थे। बाहर वालों के साथ साथ घर के लोग भी कहते थे कि इसका दिमाग खराब हो गया है। 

परिवार के लोगों ने भी पागल कहना शुरू कर दिया था। लेकिन नरेन्द्र के जज्बे, मेहनत और लगन ने सबको परास्त कर दिया। आज वही लोग नरेन्द्र की तारीफों के पुल बांधते देखे जा सकते हैं।

30-35 हजार में शुरू किया था काम, आज 300 गज के प्लाट में लगा है कारोबार

- तकरीबन चार साल पहले नरेन्द्र गरवा ने सीप (Oyster) की खेती की शुरुआत की थी। हालांकि शुरुआत में उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं थी। 

सबसे पहले नरेन्द्र उडीसा में सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ फ्रेश वाटर एक्वाकल्चर (Central Institute of Freshwater Aquaculture) के मुख्यालय गए और यहां से लौटने के बाद महज 30-35 हजार रुपए की छोटी सी रकम लगाकर सीप से मोती बनाने की एक बहुत छोटी सी इकाई शुरू की। वर्तमान में नरेन्द्र 300 गज के प्लाट में लाखों रुपए का काम कर रहे हैं।

मुम्बई, गुजरात और केरल से खरीदते हैं सीप

- अपने प्लाट में ही नरेन्द्र ने छोटे-छोटे तालाब बना रखे हैं। इन तालाबों के अंदर वो मुम्बई, गुजरात और केरल के मछुआरों से सीप (बीज) खरीदकर लाते हैं। 

वह अच्छी खेती के किये हमेशा 1000 सीप एक साथ रखते हैं, जिससे साल अथवा डेढ़ साल के अंदर डिजाइनर व गोल मोती मिल ही जाते हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री वशुधंरा व पूर्व कृषि मंत्री सैनी कर चुके हैं तारीफ

Vasundhara Raje Scindia 

- अपनी मेहनत और लगन से 'मोती की खेती' में नरेन्द्र गरवा ने महारत हांसिल की है। राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री वशुधंरा राजे सिंधिया और कृषि मंत्री प्रभुलाल सैनी ने नरेन्द्र के प्रयास और सफलता की तारीफ की थी। आज भी नरेन्द्र उन दिनों को अपनी जिंदगी के सबसे यादगार पल मानते हैं।

धान की उन्नत किस्में अपनाकर छत्तीसगढ़ के किसान हो रहे मजबूत

धान की उन्नत किस्में अपनाकर छत्तीसगढ़ के किसान हो रहे मजबूत

रायपुर। छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है। यहां धान फसल के लिए अनुकूल वातावरण होने के कारण किसान साल में दो बार धान की फसल लगाते हैं, जो सदियों से उनकी आय का एक बहुत बड़ा साधन बना हुआ। वहीं नई तकनीकों के उपयोग ने भी धान फसल की पैदावार बढ़ाने में काफी अहम भूमिका निभाई है। यदि बात करें अच्छी किस्मों की तो यहां जवा फूल, दुबराज, विष्णु भोग, लुचई, देव भोग, कालीमूज, बासमती के अलावा कुछ ऐसी किस्में हैं, जिनसे किसान ज्यादा आय अर्जित कर रहे हैं। वहीं रायपुर में स्थित इंदिरा गांधी कृषि महाविद्यालय ने धान की नई-कई किस्मों की खोज की है, जिसको अपनाकर छत्तीसगढ़ के किसान समृद्धि की ओर तेजी से अग्रसर हो रहे हैं। दूसरी ओर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा संचालित की जा रही योजनाओं का लाभ भी किसान बखूबी उठा रहे हैं और अपने सपनों को पंख लगा रहे हैं।

रोज सामने आ रही आत्मनिर्भरता की कहानी

कभी नक्सली और पिछड़े राज्यों में शुमार छत्तीसगढ़ आज खेती-किसानी के मामले में देश में सिरमौर बना हुआ है। यहां के किसान इतने आत्मनिर्भर हो चुके हैं कि उन्हें अब अपने भविष्य की चिंता कम ही सताती है। वहीं सरकार की ऋण माफी और बोनस जैसी योजनाओं के कारण भी यहां के किसान खेती की ओर और आकर्षित हुए हैं, जिनके आत्मनिर्भर बनने की कहानी अक्सर सामने आती रहती है। कई किसान तो ऐसे थे जिनकी हालत काफी खराब थी, पर धान की उन्नत किस्म अपनाकर उन्होंने न केवल अपना जीवन सुधारा, बल्कि एक प्रकार से राज्य में खेती किसानी का प्रचार-प्रसार कर जो लोग खेती किसानी छोड़ने का मन बना चुके थे, उन्हें फिर से खेती करने के लिए प्रोत्साहित भी किया।


ये भी पढ़ें: पूसा बासमती चावल की रोग प्रतिरोधी नई किस्म PB1886, जानिए इसकी खासियत

नर-नारी धान अपनाकर समृद्ध बन रहे किसान

वहीं छत्तीसगढ़ में एक ऐसी धान की किस्म भी है जिसको अपनाकर किसान अधिक मुनाफा कमा रह हैं। इस किस्म का नाम नर-नारी धान है। धान की इस किस्म को अपनाकर किसान एक एकड़ में एक लाख रुपए तक का फायदा ले रहे हैं। शायद आप में से कईयों ने धान की इस किस्म के बारे में न सुना हो, लेकिन यह काफी मुनाफे की फसल है। इसमें नर व मादा पौधों को खेत में ही क्रास यानी पूरक परागण कराया जाता है। इस दौरान नर पौधों का पराग मादा पौधे में जाता है, जिससे बीज बनता है और इसी से धान के पौधे तैयार किये जाते हैं। धान की इस किस्म की खासियत ये हैं, कि इसकी एक एकड़ खेती में 10 से 15 क्विंटल की पैदावार होती है। धान के इस बीज की मांग मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र में ज्यादा है। छत्तीसगढ़ के किसान भाई इस किस्म को लगाकर तगड़ा मुनाफा ले रहे हैं।

महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश में भी बढ़ी मांग

नर-नारी धान की खासियत है कि यदि आप एक एकड़ में इस धान की बुवाई करते हैं, तो एक एकड़ में 15 क्विंटल धान होता है. प्रति क्विंटल धान की कीमत लगभग 9 हजार रुपए है. यानी एक एकड़ के खेत में आपको 1.35 लाख रुपए मिल जाते हैं. छत्तीसगढ़ के धमतरी, बालोद व दुर्ग जिले में किसान इस किस्म का धान उगा रहे हैं। धमतरी में 5 हजार एकड़ से ज्यादा में इस तरह की धान की खेती की जा रही है। रायपुर में धीरे-धीरे इसका रकबा बढ़ने लगा है। नर-नारी धान का परागण करने के लिए रस्सी या बांस का सहारा लिया जाता है। दो कतार में नर व 6-8 कतारों में मादा पौधे होते हैं। इन्हें सीड पैरेंट्स भी कहा जाता है। इसकी रोपाई का तरीका दूसरी किस्मों से बिल्कुल अलग है। इसके पौधे को रोपाई से तैयार किया जाता है। बोनी या लाईचोपी पद्धति से इस धान का उत्पादन संभव नहीं है। पादप प्रजननन विभाग, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के एचओडी डॉ. दीपक शर्मा ने कहा कि नर-मादा धान की किस्म से किसानों को अच्छा फायदा हो रहा है। इसका रकबा बढ़ रहा है। ये हाइब्रिड धान है जिसका बीज बनता है।


ये भी पढ़ें:
एक शख्स जो धान की देसी किस्मों को दे रहा बढ़ावा, किसानों को दे रहा मुफ्त में देसी बीज

छत्तीसगढ़ में साल दर साल धान खरीदी का नया रिकॉर्ड बन रहा

छत्तीसगढ़ में साल दर साल धान खरीदी का नया रिकॉर्ड बन रहा है। सरकार की ओर से जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक छत्तीसगढ़ के किसानों ने वर्ष 2021-21 में किसानों ने सरकार को धान बेचकर करीब 20 हजार करोड़ रुपये कमाए हैं। दूसरी ओर राज्य सरकार का दावा भी है कि अब खेती-किसानी छत्तीसगढ़ में लाभकारी व्यवसाय बन गया है। आंकड़ों के मुताबिक चालू खरीफ विपणन वर्ष 2021-22 में धान की रिकॉर्ड खरीदी की गई है। इस साल 21.77 लाख किसानों से करीब 98 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा गया है। इसके एवज में किसानों को करीब 20 हजार करोड़ रुपयों का भुगतान राज्य सरकार द्वारा किए जाने का दावा किया गया है।

सुगंधित धान की वैज्ञानिकों ने सहेजी किस्में

वहीं दूसरी ओर छग में जिस धान की मांग ज्यादा बढ़ रही है और सरकार जिस धान को ज्यादा महत्व दे रही है वैसे-वैसे यहां से कुछ धान की किस्में विलुप्त होती जा रही हैं और कुछ तो विलुप्ति की कगार पर भी पहुंच गई थी ऐसे में इंदिरा गांधी एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी ने किसानों के साथ मिलकर इन्हें सहेजा। कृषि विज्ञान केंद्रों ने भी इस काम में पूरी मदद की। महज 10-15 साल पहले तक जवा फूल, दुबराज, विष्णु भोग, लुचई जैसी सुगंधित धान की किस्में राज्य की पहचान थी। हालांकि किसानों को इनकी पैदावार से लाभ नहीं हो रहा था। धीरे-धीरे स्वर्णा, एमटीयू 1010 जैसी किस्मों को सरकार समर्थन मूल्य पर खरीदने लगी। ऐसे सुगंधित धान की कई वैरायटी विलुप्ति की कगार पर पहुंच गई। कई गांवों से तो ये गायब ही हो गई। कुछ किसान अपने उपयोग के लिए सीमित क्षेत्र में उगा रहे थे, लेकिन उनकी संख्या व एरिया सीमित था। इसे गंभीरता से लेते हुए चार साल पहले इंदिरा गांधी एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी रायपुर ने इन्हें सहेजने का बीड़ा उठाया और इन किस्मों को सहेजने में कड़ी भूमिका निभाई। कृषि वैज्ञानिकों ने छत्तीसगढ़ के अलग-अलग इलाकों में जाकर न सिर्फ इन किस्मों को ढूंढा बल्कि उन्हें सहेजने में भी बड़ी भूमिका निभाई।

कृषि के क्षेत्र में छग को मिले कई पुरस्कार

धान की अलग-अलग प्रकार के पैदावार के लिए जाने जाने वाले छत्तीसगढ़ ने राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बनाई है। छत्तीसगढ़ को उन्नत कृषि प्रबंधन और किसानों के लिए बनाई गई योजनाओं के लिए केंद्र सरकार द्वारा कई वर्गो में सम्मानित किया जा चुका है। छत्तीसगढ़ को कई राष्ट्रीय अवार्ड भी अब तक मिल चुके हैं, जिससे विश्व पटल पर छत्तीसगढ़ एक सितारे के रूप में चमक और दमक रहा है।
गौमूत्र से बना ब्रम्हास्त्र और जीवामृत बढ़ा रहा फसल पैदावार

गौमूत्र से बना ब्रम्हास्त्र और जीवामृत बढ़ा रहा फसल पैदावार

छत्तीसगढ़ पहला राज्य जहां गौमूत्र से बन रहा कीटनाशक

इस न्यूज की हेडलाइन पढ़कर लोगों को अटपटा जरूर लगेगा, पर यह खबर किसानों के लिए बड़ी काम की है। जहां गौमूत्र का बड़ा धार्मिक महत्व माना जाता है और गांवों में आज भी लोग इसका सेवन करते हैं, उनका कहना है कि गौमूत्र पीने से कई बीमारियों से बच पाते हैं। वहीं, गौमूत्र अब किसानों के खेतों में कीटनाशक के रूप में, उनकी जमीन की सेहत सुधारकर फसल उत्पादन का बढ़ाने में उनकी काफी मदद करेगा। जैसा कि हम पहले ही बता चुके हैं कि आधुनिकता के युग में खान-पान सही नहीं होने और फसलों में बेतहासा
जहरीले कीटनाशक के प्रयोग से हमारा अन्न जहरीला होता जा रहा है। वैज्ञानिकों ने भी सिद्ध कर दिया है कि जहरीले कीटनाशक के प्रयोग से लोगों के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है और आयु घटती जा रही है। लोगों की इस तकलीफ को किसानों ने भी समझा और अब वे भी धीरे-धीरे जैविक खाद के उपयोग को बढ़ावा दे रहे हैं। इससे वे अपनी आमदनी तो बढ़ा ही रहे हैं, साथ-साथ देश के लोगों और भूमि की सेहत भी सुधार रहे हैं। इसी के तहत लोगों की सेहत का ख्याल रखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने किसान हित में एक बड़ा कदम उठाया है और पशुपालकों से गौमूत्र खरीदने की योजना शुरू की है, जिससे कीटनाशक बनाया जा रहा है। इसका उत्पादन भी सरकार द्वारा शुरू कर दिया गया है।

चार रुपए लीटर में गौमूत्र की खरीदी

पहले राज्य सरकार ने किसानों को जैविक खेती के प्रति प्रोत्साहित किया, जिसके सुखद परिणाम भी सामने आने लगे हैं, इसके बाद पशुपालकों से गौमूत्र खरीदकर उनको एक अतिरिक्त आय भी दे दी। राज्य सरकार पशुपालक किसानों से चार रुपए लीटर में गौमूत्र खरीद रही है। राज्य के लाखों किसान इस योजना का फायदा उठाकर गौमूत्र बेचने भी लगे हैं।


ये भी पढ़ें:
पशुपालन के लिए 90 फीसदी तक मिलेगा अनुदान

हरेली पर मुख्यमंत्री ने गौमूत्र खरीद कर की थी शुरूआत

हरेली पर्व पर 28 जुलाई से गोधन न्याय योजना के तहत गोमूत्र की खरीदी शुरू की गई है। मुताबिक छत्तीसगढ़ गौ-मूत्र खरीदी करने वाला देश का पहला राज्य है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में हरेली (हरियाली अमावस्या) पर्व के अवसर पर गोमूत्र खरीदा और वे पहले ग्राहक बने। वहीं मुख्यमंत्री ने खुद भी गौमूत्र विक्रय किया था।

अन्य राज्य भी अपना रहे

छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है, जो पशुपालक ग्रामीणों से चार रुपए लीटर में गोमूत्र खरीद रहा है। गोधन न्याय योजना के बहुआयामी परिणामों को देखते हुए देश के अनेक राज्य इसे अपनाने लगे हैं। इस योजना के तहत, अमीर हो या गरीब, सभी को लाभ मिल रहा है।


ये भी पढ़ें:
प्राकृतिक खेती के साथ देसी गाय पालने वाले किसानों को 26000 दे रही है सरकार

गौमूत्र से बने ब्रम्हास्त्र व जीवामृत का किसान करे उपयोग

अब आते हैं गौमूत्र से बने कीटनाशक की बात पर। विदित हो कि किसान अब जैविक खेती को अपना रहे हैं। ऐसे में गौमूत्र से बने ब्रम्हास्त्र व जीवामृत का उपयोग किसान अपने क्षेत्र में करने लगे हैं। राज्य की महत्वकांक्षी सुराजी गांव योजना के अंतर्गत, गोधन न्याय योजना के तहत अकलतरा विकासखण्ड के तिलई गौठान एवं नवागढ़ विकासखण्ड के खोखरा गौठान में गौमूत्र खरीदी कर, गोठान समिति द्वारा जीवामृत (ग्रोथ प्रमोटर) एवं ब्रम्हास्त्र (जैविक कीट नियंत्रक) का उत्पादन किया जा रहा है।


ये भी पढ़ें:
Cow-based Farming: भारत में गौ आधारित खेती और उससे लाभ के ये हैं साक्षात प्रमाण
गौठानों में सैकड़ों लीटर गौमूत्र की खरीदी की जा चुकी है। जिसमें निर्मित जैविक उत्पाद का उपयोग जिले के कृषक कृषि अधिकारियों के मार्गदर्शन में अपने खेतों में कर रहे हैं। इससे कृषि में जहरीले रसायनों के उपयोग के विकल्प के रूप में गौमूत्र के वैज्ञानिक उपयोग को बढ़ावा मिलेगा, रसायनिक खाद तथा रसायनिक कीटनाशक के प्रयोग से होने वाले हानिकारक प्रभाव में कमी आयेगी, पर्यावरण प्रदूषण रोकने में सहायक होगा तथा कृषि में लगने वाली लागत में कमी आएगी।

50 रुपए लीटर ब्रम्हास्त्र और जीवामृत (वृद्धि वर्धक) का मूल्य 40 रुपए लीटर

गौमूत्र से बनाए गए कीट नियंत्रक ब्रम्हास्त्र का विक्रय मूल्य 50 रूपये लीटर तथा जीवामृत (वृद्धि वर्धक) का विक्रय 40 रूपये लीटर है। इस प्रकार गौमूत्र से बने जैविक उत्पादों के दीर्घकालिन लाभ को देखते हुए जिले के कृषक बंधुओं को इसके उपयोग की सलाह कृषि विभाग द्वारा दी जा रही है।
लंपी स्किन बीमारी से बचाव के लिए राजस्थान सरकार ने जारी किए 30 करोड़ रुपये

लंपी स्किन बीमारी से बचाव के लिए राजस्थान सरकार ने जारी किए 30 करोड़ रुपये

बरसात का मौसम आते ही जानवरों को तमाम तरह की बीमारियां लगने लगती हैं। आज कल देश में लम्पीस्किन बीमारी यानी ‘लम्पी स्किन डिजीज‘ या एलएसडी (LSD - Lumpy Skin Disease) ने जोर पकड़ा हुआ है। 

यह बीमारी सबसे ज्यादा कहर राजस्थान राज्य में बरपा रही है। अच्छी बात ये है कि सरकार ने बीमारी को गंभीरता से लिया है और इससे पशुपालकों को निजात दिलाने के लिए 30 करोड़ रुपये जारी कर दिए हैं, 

ताकि पशुपालक दवाई खरीदते हुए पशुओं का इलाज करवा सकें। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) के इस कदम की सराहना हो रही है। सीएम अशोक गहलोत ने इस राशि को मुख्यमंत्री पशुधन निःशुल्क दवा योजना (Pashudhan Nishulk Dava Yojna) के अंतर्गत जारी किया है। 

यह बीमारी सबसे ज्यादा गायों को लग रही है। सरकार का मानना है कि इस फैसले का असर सकारात्मक होगा और इस बीमारी से बचाव के लिए दवाइयां पशुपालक जल्दी से जल्दी खरीद सकेंगे।

ये भी पढ़ें: अपने दुधारू पशुओं को पिलाएं सरसों का तेल, रहेंगे स्वस्थ व बढ़ेगी दूध देने की मात्रा 

वैसे इस बीमारी से प्रभावित राजस्थान इकलौता राज्य नहीं है, बल्कि सटे राज्य हरियाणा में भी इस रोग ने कहर बरपाया हुआ है। वैसे हरियाणा सरकार ने भी इस बीमारी को हल्के में नहीं लिया है और वैक्सिनेशन का काम शुरू करवा दिया है।

गौर करने वाली बात है कि हरियाणा देश के उन राज्यों में से एक है जहां ग्रामीण जनता अपनी आमदनी के लिए खेती किसानी और पशु धन पर निर्भर है। 

यही वजह है कि मनोहर लाल खट्टर की सरकार ने इस बीमारी के जल्दी से जल्दी रोकथाम की कोशिशें तेज कर दी हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अब तक 3000 वैक्सीन पशुपालकों को बांटी जा चुकी हैं, 

वहीं अभी 17000 वैक्सीन की जरूरत और आन पड़ी है। अगस्त महीने के अंत तक वैक्सीन के बांटने को लेकर और तेजी देखने को मिलेगी।

ये भी पढ़ें: जानिए खुरपका-मुंहपका रोग के लक्षण और उसका बचाव 

एक आंकड़े के मुताबिक लंपी स्किन रोग देश के 17 राज्यों में अब तक फैल चुका है। लेकिन इस दौरान इसने सबसे ज्यादा प्रभावित राजस्थान और हरियाणा को किया है। 

अच्छी बात है कि राज्य सरकारों ने इसके लिए वैक्सिनेशन का काम शुरू कर दिया है लेकिन वैक्सिनेशन होने में समय भी लग सकता है। ऐसे में जरूरी है कि उसके पहले आप कुछ घरेलू उपचार ज़रूर कर लें। 

घरेलू उपचार क्या हो सकते हैं, इसके बारे में हिमाचल प्रदेश कृषि विश्‍वविद्यालय पालमपुर के पशु चिकित्‍सा विशेषज्ञ डॉ. ठाकुर ने बताया है।

उपचार के लिए क्या चाहिए होगा -

  • 10 ग्राम कालीमिर्च, 10 पान के पत्ते, 10 ग्राम नमक और गुड़ जरूरत के मुताबिक।
  • सभी चीज़ों को अच्छे से पीसें और तब तक पीसते रहें जब तक मिश्रित होकर पेस्ट न बन जाए और अब थोड़ा से गुड़ मिला लें। 
  • अब आपको इसे अपने पशु को थोड़ा-थोड़ा खिलाना है।
  • जब आप पहले दिन इसकी खुराक पशु को दें तो हर तीन घंटे में दें, समय के पाबंद रहें क्योंकि यह जरूरी है। - यह सिलसिला दो हफ्ते तक चलने दें और दिन में तीन खुराक ही खिलाएं।
  • हर एक खुराक ताजा ही तैयार करें, ऐसा न करें कि कल की बनाई खुराक को आज खिला दें, उसका असर नहीं होगा।

उपचार का दूसरा तरीका - इस तरीके में आपको एक मिश्रण तैयार करना होगा, जो आप घाव पर लेप के रूप में लगाएंगे। 

इसके लिए आपको लहसुन की 10 कली, मेहंदी के पत्ते कुछ, तिल का तेल करीब आधा लीटर, कुम्पी के कुछ पत्ते, हल्दी पाउडर, तुलसी के कुछ पत्ते चाहिए होंगे। 

इन सभी को मिक्सी या सिलबट्टे में पीस लें और पेस्ट बना लें । इसके बाद इसमें तिल का तेल मिलाते हुए उबाल लें, ठंडा होने के बाद लेप को आपको पशु के घाव पर लगाना है लेकिन इसके पहले पशु के घाव को अच्छी तरह साफ कर लें।

इसके बाद उसका पेस्ट आप घाव पर लगा दें, आपको हर रोज घाव पर इसे लगाना है और यह दो हफ्ते तक करना है। नेशनल डेयरी डवलपमेंट बोर्ड‘ और ‘इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रांसडिसिप्लिनरी हेल्थ साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी’ ने प्रो. एन. पुण्यमूर्थी के मार्गदर्शन में कुछ पारंपरिक पद्दति द्वारा देशी ईलाज सुझाए हैं, 

जिन्हे आप इस लेख में पढ़ सकते हैं : लम्पी स्किन डिजीज (Lumpy Skin Disease) वैसे अगर आपको वैक्सिनेशन का लाभ मिलता है तो उसे तुरंत लें क्योंकि घरेलू उपचार की अपनी सीमाएं जबकि वैक्सीन शर्तिया काम करती है लेकिन जब तक आपको वैक्सीन न मिले, घरेलू इलाज करते रहें।