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मनरेगा पशु शेड योजना और इसके लिए आवेदन से संबंधित जानकारी

मनरेगा पशु शेड योजना और इसके लिए आवेदन से संबंधित जानकारी

खेती के उपरांत पशुपालन किसानों के लिए दूसरा सबसे बड़ा कारोबार है। बहुत सारे किसान खेती के साथ पशुपालन करना बेहद पसंद करते हैं, क्योंकि खेती के साथ पशुपालन काफी मुनाफे का सौदा होता है। 

पशुओं के लिए ज्यादा से ज्यादा हरा और सूखा चारा खेती से ही प्राप्त हो जाता है। यही कारण है, कि सरकार पशुपालक किसानों के लिए भी विभिन्न अच्छी योजनाएं लाती हैं, जिससे पशुपालक किसानों को ज्यादा से ज्यादा लाभान्वित किया जा सके। 

किसान की आमदनी का मुख्य साधन कृषि होता है, जिसके माध्यम से भारत के ज्यादातर पशुपालक आवश्यकताओं को भी पूरा कर सकते हैं। अधिकांश किसान कमजोर आर्थिक स्थिति की वजह से पशुओं के लिए मकान निर्मित नहीं कर पाते हैं। 

ठंड के मौसम में समान्यतः पशुओं को परेशानी होती है। क्योंकि ठंड के समय ही मकान की जरूरत सबसे ज्यादा होती है। बारिश और ठंड से पशुओं को बचाने के लिए जरूरी है, कि पशुओं के लिए शेड का निर्माण किया जाए। 

सरकार पशुओं के लिए शेड या घर बनाने के लिए किसानों को 1 लाख 60 हजार रुपए का अनुदान प्रदान कर रही है।

कितना मिलेगा लाभ

मनरेगा पशु शेड योजना से किसानों को व्यापक स्तर पर लाभ मिलेंगे। गौरतलब यह है, कि किसानों को ठंड के मौसम में सामान्य तौर पर दुधारू पशुओं में दूध की कमी का सामना करना पड़ता है। 

दरअसल, इसकी बड़ी वजह पशुओं के लिए ठंड के मौसम में उचित घर या शेड का न होना भी है। मनरेगा पशु शेड योजना के अंतर्गत पशुओं के लिए घर निर्मित पर सरकार द्वारा किसानों को अनुदान उपलब्ध किया जाता है। 

इससे पशुओं की सही तरह से देखभाल सुनिश्चित हो सकेगी। शेड में यूरिनल टैंक इत्यादि की व्यवस्था भी कराई जा सकेगी। इससे पशुओं की देखभाल तो होगी ही साथ ही किसानों की आमदनी में भी बढ़ोतरी होगी। साथ ही, किसानों के जीवन स्तर में सुधार देखने को मिलेगा।

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मनरेगा पशु शेड योजना

पशुपालक किसानों को पशुओं के लिए घर बनाने पर यह अनुदान प्रदान किया जाता है। इस योजना से ठंड या बारिश से पशुओं को बचाने के लिए घर बनाने के लिए धनराशि मिलती है। 

पशुओं का घर बनाकर किसान अपने पशु की देखभाल कर सकेंगे और पशु के दूध देने की क्षमता में भी वृद्धि कर सकेंगे। मनरेगा पशु शेड योजना से किसानों को व्यापक लाभ मिल पाएगा।

मनरेगा पशु शेड से कितना लाभ मिलता है

मनरेगा पशु शेड योजना के तहत किसानों को पशु शेड बनाने पर 1 लाख 60 हजार रुपए का अनुदान दिया जाता है। इस योजना का लाभ किसानों को बैंक के माध्यम से दिया जाता है। इस योजना से मिलने वाला पैसा एक तरह से किसानों के लिए ऋण होता है जिसकी ब्याज दर बहुत कम होती है।

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योजना के तहत किसको लाभ मिलेगा

मनरेगा पशु शेड योजना के तहत मिलने वाले लाभ की कुछ पात्रता शर्तें इस प्रकार है।

इस योजना का फायदा केवल भारतीय किसानों को ही मुहैय्या कराया जाएगा। पशुओं की तादात कम से कम 3 अथवा इससे अधिक होनी आवश्यक है।

योजना के लिए अनिवार्य दस्तावेज

पशुओं के लिए घर बनाने वाली इस योजना में आवेदन करने के लिए कुछ जरूरी दस्तावेजों का होना अनिवार्य है। जैसे कि - आधार कार्ड, पैन कार्ड, कृषक पंजीयन, बैंक पासबुक, मोबाइल नम्बर, ईमेल आईडी (अगर हो)

योजना में आवेदन करने की प्रक्रिया

पशुओं के लिए घर निर्मित करने की योजना में अनुदान लेने के लिए नजदीकी सरकारी बैंक शाखा में संपर्क करें। एसबीआई, इस योजना के अंतर्गत लोन प्रदान करती है। शाखा में ही आवेदन फॉर्म भर कर जमा करें। इस प्रकार इस योजना का लाभ किसानों को प्राप्त हो जाएगा।

ट्रैक्टर(Tractor) किसान का साथी

ट्रैक्टर(Tractor) किसान का साथी

ट्रैक्टर(Tractor) और किसान एक दूसरे के साथी हैं या आप कह सकते है की किसान बिना ट्रेक्टर(Tractor) के अधूरा ही होता है.पुराने समय में लोग हल बैल से खेती करते थे तो सारी जमीं में बुआई नहीं कर पाते थे जिससे की जमीं पड़ी रह जाती थी और उसकी वजह से हम अपने खाद्यान्य के लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहते थे. पहले हालत ये थे की एक जोड़ी ( दो बैल ) बैल रखना ही हो पाता था और जिस किसान के पास तीन से चार जोड़ी बैल होते थे वो आज के किसी 70HP ट्रेक्टर से कम नहीं माने जाते थे यानि जिस किसान के पास एक से अधिक बैलों की जोड़ी होती थी वो जमींदार होते थे, पैसे वाले और उन्नत किसानों में उनकी गिनती होती थी. फसल के उत्पादन का आलम ये था की अगर किसी की 100 मन ( 40 कुंतल) पैदावार हो जाये तो लोगों में उसका अलग ही सम्मान होता था. बोलते थे " देखो उसका सेकरा पूज गया" यानि उसके पास 100 मन अनाज हो गया.धीरे धीरे समय बदला और आज 100 मन गेंहूं 10 बीघे ( छोटा बीघा) खेत में ही हो जाते हैं और आज हल बैलों की जगह ट्रैक्टर(Tractor) ने लेली और बड़े से बड़ा काम एक अकेला आदमी करने लगा.

ट्रैक्टर(Tractor) का काम:

आज ये कहना की ट्रैक्टर का क्या काम है तो बहुत ही अलग हो जायेगा, आज हम ये कह सकते हैं की क्या काम नहीं कर सकता. आज हर छोटे या बड़े किसान की जरूरत है एक
ट्रेक्टर(Tractor) के आने से किसान अब सारी जमीन पर खेती करने लगा है और अब तो जो ग्राम समाज की जमीन पर भी कब्ज़ा करके उसमे भी खेती करने लगा है. कई ऐसे किसान होते है जिन पर हकीकत में जमीन न के बराबर होती है और वैसे उनके पास ग्राम समाज की बहुत जमीन होती है. ट्रैक्टर(Tractor) से आप जुताई , बबाई, पानी , नराई, फसल काटना ,भूसा बनाने से लेकर खेत को समतल करना , मेढ़बंदी करना यानि आप जो सोच सकते है वो काम आप ट्रेक्टर से ले सकते है.

किस किसान के लिए कौन सा ट्रेक्टर(Tractor) :

वैसे तो आजकल 35HP से कम का ट्रैक्टर कोई किसान लेना पसंद नहीं करता लेकिन ट्रेक्टर का चुनाव कई बातों को देख कर करना चाहिए, जैसे: जमीन की मिट्टी, फसल , और कितनी जमीन पर काम करना है.मसलन आपके पास 100 बीघा जमीं है तो आपको 35HP से 45HP का ट्रेक्टर काम दे देगा. और आपको पानी भी अपने ट्रैक्टर से निकालना है तो आप 20HP से 25HP तक भी जा सकते हो इसमें आपको ज्यादा खर्चा नहीं पड़ेगा. अगर आपके पास जमीन भी ज्यादा है और आप काम भी उससे ज्यादा लेना चाहते है तो आपको 50HP से 60HP का ट्रेक्टर लेना होगा जिससे आप कटर, रीपर , रोटाबेटर , और कंप्यूटर मांझा चला सकते हो अगर आप इससे ऊपर भी जाना चाहते हो तो आप कंबाइन और JCB चलना चाहते हो तो आपको 60HP के ऊपर का ट्रेक्टर चाहिए होगा. जितने बड़ा हॉर्स पावर उतना ही ज्यादा डीज़ल का खर्चा. मेरा अपना मानना है की अगर आपका ज्यादा बड़ा काम नहीं है तो आप 35HP से 50HP का ट्रैक्टर(Tractor) ले सकते है और अपने सारे छोटे बड़े काम कर सकते हैं. ये भी पढ़े: ट्रैक्टर Tractor खरीदने पर मिलेगी 50 फीसदी सब्सिडी(subsidy), ऐसे उठा सकते हैं इस योजना का लाभ

ट्रेक्टर(Tractor) कैसे लें:

Tractor ट्रैक्टर आप दो तरह से ले सकते है, आप ज्यादा ट्रैक्टर के बारे में नहीं जानते और 8 से 10 साल तक चिंता मुक्त होना चाहते हैं तो नया ट्रैक्टर ही लें और अगर आप थोड़ी भी जानकारी रखते हैं और कोई छोटी मोटी समस्या आती है और उसको अपने आप भी देख सकते हैं तो आप पुराना ट्रैक्टर(Tractor) भी ले सकते हैं. ये भी पढ़े: खेती करो या उठाओ भार,एस्कॉर्टस ट्रैक्टर रहे हमेशा तैयार

लोन(Loan) कहाँ से मिलेगा:

जैसा की सभी जानते है किसान के पास इतना पैसा नहीं होता की वो नगद पैसा से कृषि यंत्र खरीद सके तो उसको लोन(Loan) के लिए जाना ही पड़ता है. ज्यादातर किसान बिचौलियों के चक्कर में आकर प्राइवेट कर्ज ले लेते है जिसे पुराने समय में पूंजीपति के कर्ज में किसान फसता था वही आजकल ये प्राइवेट वाले कर रहे है. किसान को कर्ज देने में सरकार कई योजनाए ला रही है जैसे KCC पर लोन , आप SBI , HDFC , ICICI Bank से भी लोन(Loan) ले सकते है. कोशिश करें की आप किसी सरकारी बैंक से ही लोन लेकर ट्रैक्टर(Tractor) लें.आजकल बैंक किसान को कृषि यंत्रों पर भी कर्ज दे रही है. आप ज्यादा जानकारी के लिए निचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके पाता कर सकते हैं या आप हमारे कमेंट बॉक्स में भी पूछ सकते है हम आपकी पूरी सहायता करने की कोशिश करेंगें. SBI: https://sbi.co.in/web/agri-rural/agriculture-banking/farm-mechanization-loan/tractor-loan
आप कृपया कमेंट बॉक्स में बताएं अगली जानकारी किस बारे में चाहते है.
ट्रैक्टर Tractor खरीदने पर मिलेगी 50 फीसदी सब्सिडी(subsidy), ऐसे उठा सकते हैं इस योजना का लाभ

ट्रैक्टर Tractor खरीदने पर मिलेगी 50 फीसदी सब्सिडी(subsidy), ऐसे उठा सकते हैं इस योजना का लाभ

खेती करने के लिए किसानों को ट्रैक्टर (Tractor) की जरूरत होती है। ऐसे में कुछ किसान तो किराए पर ट्रैक्टर(Tractor) लेकर अपनी खेती कर लेते हैं तो कुछ किसान बैलों के जरिए खेती करते हैं। लेकिन वे किसान जो आर्थिक तंगी के कारण ट्रैक्टर नहीं ले पाते हैं और ना ही इन्हें आसानी से बेल की सुविधा मिल पाती है। ऐसे किसानों के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक स्पेशल योजना निकाली है जिसके चलते 50% सब्सिडी(subsidy) पर कोई भी किसान ट्रैक्टर खरीद सकता है। जी हां यह सब्सिडी(subsidy) 'पीएम किसान ट्रैक्टर(Tractor) योजना' के जरिए दी जाएगी।

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दरअसल, पीएम किसान के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं जिसके चलते किसान को खेती करने में आसानी हो। इतना ही नहीं बल्कि वे लगातार किसानों के लिए नई-नई योजनाएं लेकर आ रहे हैं। बता दें, पीएम किसानों के खाते में हर साल 6 हजार रुपए भी देते हैं। ताकि हर किसान अपनी खेती के लिए बीज, खाद और इस तरह की मशीनें की जरूरत पूरी कर सके। इसी बीच अब केंद्र सरकार ट्रैक्टर(Tractor) पर भी सब्सिडी(subsidy) दे रही है जो किसानों के लिए काफी लाभदायक होगी। आइए जानते हैं पीएम किसान ट्रैक्टर(Tractor) योजना का लाभ आप कैसे उठा सकते हैं?

किसी भी कंपनी का खरीद सकते हैं ट्रैक्टर

Escort Tractor

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि, इस योजना के तहत आप किसी भी कंपनी का ट्रैक्टर(Tractor) खरीद सकते हैं। ट्रैक्टर(Tractor) खरीदने के दौरान आपको आधी कीमत चुकानी होगी जबकि इसका आधा पैसा सरकार सब्सिडी(subsidy) के तौर पर देगी। न सिर्फ केंद्र सरकार बल्कि राज्य सरकार भी किसानों को ट्रैक्टर(Tractor) खरीदने में सहायता करती है। दरअसल, राज्य सरकार अपने अपने स्तर पर ट्रैक्टरों पर 20% से 50% सब्सिडी(subsidy) दे रही है। ऐसे में अब किसानों को ट्रैक्टर(Tractor) खरीदने में आसानी होगी और वे केंद्र सरकार और राज्य सरकार के तहत दोनों ही योजना का लाभ उठा सकते हैं।

 कैसे उठाएं इस योजना का लाभ?

बता दें, इस योजना का लाभ उठाना बेहद ही आसान है। यदि आप भी ट्रैक्टर(Tractor) खरीदना चाहते हैं तो इसके लिए आपको कुछ जरूरी डॉक्यूमेंट की आवश्यकता होगी। खास बात यह है कि, आप सिर्फ इस सब्सिडी(subsidy) का फायदा एक ही ट्रैक्टर(Tractor) खरीदने पर उठा सकते हैं। यदि आप दो ट्रैक्टर(Tractor) की खरीदारी करते हैं तो फिर आपको इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा। इस योजना का लाभ उठाने के लिए आप नजदीकी CSC सेंटर जाकर ऑनलाइन फॉर्म भर सकते हैं।

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 जरूरी डाक्यूमेंट्स

  • आधार कार्ड
  • बैंक की डिटेल
  • जमीन के कागज
  • पासपोर्ट साइज फोटो

 कैसे करें आवेदन?

इस योजना का लाभ उठाने के लिए आप ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। देशभर में सभी किसानों के लिए ये योजना है। आप चाहे तो ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों ही तरीके से आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए आपको नजदीकी जन सेवा केंद्र जाना होगा या फिर सीएससी डिजिटल सेवा के जरिए भी इसका लाभ उठा सकते हैं। बता दें, इस योजना के तहत सब्सिडी(subsidy) सीधे किसानों के बैंक खातों में डाल दी जाएगी। इस योजना को जारी करने के बाद सरकार का दावा है कि किसानों को खेती करने में आसानी होगी साथ ही खेती में लगने वाली लागत में भी कमी आएगी। ट्रैक्टर(Tractor) और विभिन्न नए कृषि यंत्रों का उपयोग करने से किसान के पास फसल का उत्पादन न सिर्फ अच्छा होता है बल्कि पहले से कई गुना ज्यादा बढ़ जाता है।

Swaraj Tractor: आ गया खेती का भी Code

Swaraj Tractor: आ गया खेती का भी Code

स्वराज(swaraj) मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और इसे में लेकर रहूँगा. ये वाक्य किसने कहा था हमें नीचे कमेंट करके बताएं किसानों से ज्यादा स्वराज(Swaraj) को कोण समझ सकता है जिसके बेटे सीमा पर और वो खुद खेत में रहता है. swaraj tractor आज हम बात करते हैं स्वराज ट्रेक्टर के नए product Code की. जिसको स्वराज ने अपने किसानों के हिट में बनाया है. स्वराज ट्रेक्टर ( Swaraj Tractor )1974 में शुरू हुआ और आज किसानों के बीच में एक जाना पहचाना नाम बन गया है. हमारे किसान भाइयों को छोटे छोटे काम करने के लिए छोटे tractors की आवश्यकता रहती है. जैसे आलू की फसल में दवाओं का छिड़काव करना हो या सब्जी में निराई गुड़ाई करनी हो या और भी बहुत कुछ. ये भी पढ़े: ट्रैक्टर Tractor खरीदने पर मिलेगी 50 फीसदी सब्सिडी(subsidy), ऐसे उठा सकते हैं इस योजना का लाभ हाथ से चलने वाले यन्त्र को tractor  का रूप दे दिया है Code एक स्मार्ट, बहु-उपयोगी उपकरण है जो कि किसानों को उनकी ज़रूरतों को अत्यंत सक्षमता के साथ पूरा करने में मदद करता है। इसका सुडौल आकार और motorcycle जैसे हैंडल इसे फसल देखभाल के कामकाजों (जैसे कि खरपतवार और छिड़काव) के लिए अतिउत्तम बनाता है। यह किसानों की मजदूरों पर निर्भरता को काफी हद तक घटाता है और कामकाज के खर्चों में काफी कमी लाता है। इससे डीजल और समय की बचत होती है तथा किसान की काफी हद तक मजदूरों पर निर्भरता कम होती है.

प्रोडक्ट स्पेसिफिकेशन्स नीचे दी गई हैं.

swaraj tractor

प्रोडक्ट स्पेसिफिकेशन

इंजन पॉवर 8.28 kW (11.1 HP)
डिस्प्लेसमेंट 389 cm3
रेटेड r/min 3600
सिलिंडर्स की संख्या 1
फ्युअल टाइप पेट्रोल (4स्ट्रोक)
स्टार्टिंग सिस्टम सिर्फ़ रिकॉयल स्टार्ट
या
सेल्फ स्टार्ट + रिकॉयल स्टार्ट टाइप
एयर क्लीनर ड्राई
ट्रांस्मिशन और फ्रंट एक्सल गियर बॉक्स टाइप स्लाइडिंग मेश
क्लच टाइप सिंगल क्लच, ड्राई डायाफ्राम टाइप
स्पीड ऑप्शन्स 6F + 3R
फॉरवर्ड स्पीड रेंज 1.9 km/h से 16.76 km/h
फ्युअल टाइप 2.2 km/h से 5.7 km/h
स्टार्टिंग सिस्टम फिक्स्ड
डिफ्रेन्शियल लॉक Yes
स्टियरिंग मैकेनिकल
वेहिकल स्पेसिफिकेशन ग्राउंड क्लियरेन्स (स्टै.) 266 mm
ग्राउंड क्लियरेन्स (हाई कॉन्फिगुरेशन) 554 mm
बाई-डायरेक्शनल 180 degree
चेसीस लैडर फ्रेम टाइप
पीटीओ व हाइड्रॉलिक्स पीटीओ 1000
हाईड्रॉलिक्स टू-वे हाइड्रॉलिक्स
लिफ्टींग क्षमता 220 kg @ hitch
ब्रेक्स ब्रेक तेल में डूबे हुए ब्रेक्स
वेट व डायमेन्शन अगला टायर 101.6 mm x 228.6 mm (4x9)
पिछला टायर 152.4 mm x 355.6 (6x14)
संपूर्ण उंचाई 1180 mm
संपूर्ण चौड़ाई 890 mm
व्हील बेस 1463 mm
मशीन का वजन 455 kg
बाजार भेजने से पूर्व केले को कैसे तैयार करें की मिले अधिकतम लाभ?

बाजार भेजने से पूर्व केले को कैसे तैयार करें की मिले अधिकतम लाभ?

आभासी तने से केले की कटाई के उपरांत , केले को बंच से अलग अलग हथ्थे में अलग करते है। इसके बाद इन हथ्थों को फिटकरी के पानी की टंकी में डालें @ 1 ग्राम फिटकरी प्रति 2.5 लीटर पानी की दर से मिलाते है। केले के इन हथ्थों को लगभग 3 मिनट के लिए डुबाने के बाद निकल लें। फिटकरी के घोल की वजह से केले के छिलकों के ऊपर के प्राकृतिक मोम हट जाती है एवं साथ साथ फल के ऊपर लगे कीड़ों के कचरे भी साफ हो जाते हैं। यह एक प्राकृतिक कीटाणुनाशक के रूप में कार्य करता है। इसके बाद दूसरे टैंक में एंटी फंगल लिक्विड हुवा सान (Huwa San), जिसके अंदर लिक्विड सिल्वर कंपोनेंट्स के साथ हाइड्रोजन पेरोक्साइड होता है जो एंटीफंगल के रूप में काम करता है,जो फंगस को बढ़ने नहीं देता है।

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विदेशों में बढ़ी देसी केले की मांग, 327 करोड़ रुपए का केला हुआ निर्यात हुवा सान एक बायोसाइड है एवं सभी प्रकार के बैक्टीरिया, वायरस, खमीर, मोल्ड और बीजाणु बनाने वालों के खिलाफ प्रभावी है। लीजियोनेला न्यूमोफिला के खिलाफ भी प्रभावी है। पर्यावरण के अनुकूल - व्यावहारिक रूप से पानी और ऑक्सीजन के लिए 100% अपघट्य हो जाता है। इसके प्रयोग से गंध पैदा नहीं होता है , उपचारित खाद्य पदार्थों के स्वाद को नहीं बदलता है। बहुत अधिक पानी के तापमान पर भी प्रभावशीलता और दीर्घकालिक प्रभाव देखे जाते हैं। अनुशंसित खुराक दर पर खपत के लिए सुरक्षित के रूप में मूल्यांकन किया गया। कोई कार्सिनोजेनिक या उत्परिवर्तजन प्रभाव नहीं, अमोनियम-आयनों के साथ प्रतिक्रिया नहीं करता है। इसे लम्बे समय तक भंडारित किया जा सकता है। 3% अनुशंसित दर पर प्रयोग करने से किसी भी प्रकार का कोई भी दुष्प्रभाव नहीं देखा गया है। इस घोल में केला के हथ्थों को 3 मिनट के लिए डूबाते है। हुवा सान @ 1 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में घोलकर , घोल बनाते है। इस तरह से 500 लीटर पानी के टैंक में 250 मिलीलीटर हुवा सैन तरल डालते है । इन घोल से केले को निकालने के बाद केले से अतिरिक्त पानी निकालने के लिए केले को उच्च गति वाले पंखे से अच्छे ड्रेनेज फ्लोर पर जाली की सतह पर रखें। इस प्रकार से केले की प्रारंभिक तैयारी करते है। विशेष तौर से तैयार डिब्बों में पैक करते है। इस प्रकार से तैयार केलो को आसानी से दुरस्त या विदेशी बाज़ार में भेजते है।

हुवा-सैन क्या है?

हाइड्रोजन पेरोक्साइड और सिल्वर स्टेबलाइजर के संयोजन की प्रक्रिया दुनिया भर में अद्वितीय है और मूल हुवा-सैन तकनीक पर आधारित है, जिसे पिछले 15 वर्षों में रोम टेक्नोलॉजी में और विकसित किया गया था।

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केले के उत्पादन को प्रभावित कर रही बढ़ती ठंड
यह तकनीक अद्वितीय है क्योंकि पेरोक्साइड को स्थिर करने के लिए एसिड जैसे किसी अन्य स्थिरीकरण एजेंट की आवश्यकता नहीं होती है। यह सब Huwa-San Technology के उत्पादों को गैर-अवशिष्ट और अत्यंत शक्तिशाली कीटाणुनाशक बनाता है।हुवा-सैन एक वन स्टॉप बायोसाइडल उत्पाद है जो बैक्टीरिया, कवक, खमीर, बीजाणुओं, वायरस और यहां तक ​​कि माइकोबैक्टीरिया के खिलाफ प्रभावी है और इसलिए इस उत्पादों को वाष्पीकरण के माध्यम से पानी, सतहों, औजारों और यहां तक ​​कि बड़े खाली क्षेत्रों को कीटाणुरहित करने के लिए कई क्षेत्रों में उपयोग किया जा सकता है। पिछले 15 वर्षों में, हुवा-सैन उत्पादों का प्रयोगशाला पैमाने पर और दुनिया भर में कई फील्ड परीक्षणों पर बड़े पैमाने पर परीक्षण किया गया था। तकनीकी ज्ञान के साथ हुवा-सैन के व्यापक अनुप्रयोग स्पेक्ट्रम के भीतर जानकारी की प्रचुरता विश्वव्यापी सफलता की कुंजी रही है। Huwa-San को लैब और फील्ड टेस्ट सेटिंग्स में पूरी तरह से शोध और विकसित किया गया है ,यह पूर्णतया सुरक्षित है और ये नतीजतन, हुवा-सैन उत्पाद कीटाणुशोधन के लिए नवीनतम मानकों को पूरा करते हैं ।

आलू प्याज भंडारण गृह खोलने के लिए इस राज्य में दी जा रही बंपर छूट

आलू प्याज भंडारण गृह खोलने के लिए इस राज्य में दी जा रही बंपर छूट

राजस्थान राज्य के 10,000 किसानों को प्याज की भंडारण इकाई हेतु 50% प्रतिशत अनुदान मतलब 87,500 रुपये के अनुदान का प्रावधान किया गया है। बतादें, कि राज्य में 2,500 प्याज भंडारण इकाई शुरू करने की योजना है। फसलों का समुचित ढंग से भंडारण उतना ही जरूरी है। जितना सही तरीके से उत्पादन करना। क्योंकि बहुत बार फसल कटाई के उपरांत खेतों में पड़ी-पड़ी ही सड़ जाती है। इससे कृषकों को काफी हानि वहन करनी होती है। इस वजह से किसान भाइयों को फसलों की कटाई के उपरांत समुचित प्रबंधन हेतु शीघ्र भंडार गृहों में रवाना कर दिया जाए। हालांकि, यह भंडार घर गांव के आसपास ही निर्मित किए जाते हैं। जहां किसान भाइयों को अपनी फसल का संरक्षण और देखभाल हेतु कुछ भुगतान करना पड़ता है। परंतु, किसान चाहें तो स्वयं के गांव में खुद की भंडारण इकाई भी चालू कर सकते हैं। भंडारण इकाई हेतु सरकार 50% प्रतिशत अनुदान भी प्रदान कर रही है। आपकी जानकारी के लिए बतादें, कि राजस्थान सरकार द्वारा प्याज भंडारण हेतु नई योजना को स्वीकृति दे दी गई है। जिसके अंतर्गत प्रदेश के 10,000 किसानों को 2,550 भंडारण इकाई चालू करने हेतु 87.50 करोड़ रुपए की सब्सिड़ी दी जाएगी।

भंडारण संरचनाओं को बनाने के लिए इतना अनुदान मिलेगा

मीडिया खबरों के मुताबिक, किसानों को विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत प्याज के भंडारण हेतु सहायतानुदान मुहैय्या कराया जाएगा। इसमें प्याज की भंडारण संरचनाओं को बनाने के लिए प्रति यूनिट 1.75 लाख का खर्चा निर्धारित किया गया है। इसी खर्चे पर लाभार्थी किसानों को 50% फीसद अनुदान प्रदान किया जाएगा। देश का कोई भी किसान अधिकतम 87,500 रुपये का फायदा हांसिल कर सकता है। ज्यादा जानकारी हेतु निजी जनपद में कृषि विभाग के कार्यालय अथवा राज किसान पोर्टल पर भी विजिट कर सकते हैं। ये भी पढ़े: Onion Price: प्याज के सरकारी आंकड़ों से किसान और व्यापारी के छलके आंसू, फायदे में क्रेता

किस योजना के अंतर्गत मिलेगा लाभ

राजस्थान सरकार द्वारा प्रदेश के कृषि बजट 2023-24 के अंतर्गत प्याज की भंडारण इकाइयों पर किसानों को सब्सिड़ी देने की घोषणा की है। इस कार्य हेतु राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत 1450 भंडारण इकाइयों हेतु 12.25 करोड रुपये मिलाके 34.12 करोड रुपये व्यय करने जा रही है। इसके अतिरिक्त 6100 भंडारण इकाईयों हेतु कृषक कल्याण कोष द्वारा 53.37 करोड़ रुपये के खर्च का प्रावधान है। ये भी पढ़े: भंडारण की परेशानी से मिलेगा छुटकारा, प्री कूलिंग यूनिट के लिए 18 लाख रुपये देगी सरकार

प्याज की भंडारण इकाई बनाने की क्या जरूरत है

आपकी जानकारी के लिए बतादें, कि इन दिनों जलवायु परिवर्तन से फसलों में बेहद हानि देखने को मिली है। तीव्र बारिश और आंधी के चलते से खेत में खड़ी और कटी हुई फसलें तकरीबन नष्ट हो गई। अब ऐसी स्थिति में सर्वाधिक भंडारण इकाईयों की कमी महसूस होती है। यह भंडारण इकाईयां किसानों की उत्पादन को हानि होने से सुरक्षा करती है। बहुत बार भंडारण इकाइयों की सहायता से किसानों को उत्पादन के अच्छे भाव भी प्राप्त हो जाते हैं। यहां किसान उत्पादन के सस्ता होने पर भंडारण कर सकते हैं। साथ ही, जब बाजार में प्याज के भावों में वृद्धि हो जाए, तब भंडार गृहों से निकाल बेचकर अच्छी आय कर सकते हैं।
योगी सरकार की इस योजना से गौ-पालन करने वालों को मिलेगा अनुदान

योगी सरकार की इस योजना से गौ-पालन करने वालों को मिलेगा अनुदान

नंदिनी कृषक समृद्ध योजना और गौ संवर्धन योजनाओं को संचालित कर रही है। राज्य सरकार इन समस्त योजनाओं के आधार पर किसानों को अथवा डेयरी खोलने वालों को सब्सिड़ी की धनराशि के साथ में कई अन्य तरह की सहायता भी प्रदान कर रही है। 

गौ पालन को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार विभिन्न प्रकार की योजनाओं को संचालित कर रही है। उत्तर प्रदेश सरकार का मुख्य उद्देश्य गौ वंश को प्रोत्साहन देने साथ-साथ राज्य में दुग्ध उत्पादन में बढ़ोतरी करना है। 

प्रदेश सरकार राज्य में गौ वंशों के पालन के लिए राज्य में गोपालक योजना, नंद बाबा योजना, नंदिनी कृषक समृद्ध योजना एवं गौ संवर्धन योजनाओं को संचालित कर रही है। 

प्रदेश सरकार इन समस्त योजनाओं के आधार पर किसानों को अथवा डेयरी खोलने वालों को सब्सिड़ी की बड़ी धनराशि के साथ में विभिन्न अन्य प्रकार की मदद भी प्रदान कर रही है। 

राज्य सरकार फिलहाल नंदिनी कृषक समृद्धि योजना को संचालित कर रही है। योगी सरकार की तरफ से इस योजना के अंतर्गत 62 लाख रुपये के प्रोजेक्ट पर 50 फीसद अनुदान तक तीन हिस्सों में प्रदान करेगी।

प्रमुख नस्लों की गायों पर मिलेगा अनुदान

उत्तर प्रदेश सरकार इस अनुदान धनराशि को तीन हिस्सों में प्रदान करेगी। परंतु, इसके लिए राज्य सरकार की कुछ प्रमुख शर्तें होंगी। इन शर्तों को पूर्ण करने के पश्चात ही कोई भी आदमी इस योजना का फायदा उठा सकता है। 

दरअसल, प्रदेश सरकार दुग्ध उत्पादन की दृष्टि से अधिक दूध देने वाली गायों को पालने पर ही धनराशि को आवंटित करेगी। इन प्रजातियों की गायों में स्वदेशी गाय थारपारकर, गिल नस्ल और साहीवाल की गायों को शम्मिलित किया गया है। 

इस योजना का फायदा उठाने के लिए पशुपालकों को तकरीबन 10 इन्हीं नस्लों के बच्चों को दिखाना पड़ेगा, जिसके पश्चात वह अनुदान धनराशि का तकरीबन 25 फीसद तक ले सकेंगे। इस योजना का लाभ उठाने के लिए आपको 25 अक्टूबर तक आवेदन करना पड़ेगा।

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योजना का लाभ लेने के लिए किस तरह अप्लाई करें

आपको इसके लिए इसकी अधिकारिक वेबसाइट www.animalhusb.upsdc.gov.in पर क्लिक करके फॉर्म को भरना होगा। इसके साथ-साथ उनके पास खुद की अथवा लीज पर पशुपालन संबंधी स्थान को दिखाना आवश्यक है। 

इस योजना का फायदा उत्तर प्रदेश राज्य के पंजीकृत किसान ही उठा पाऐंगे। किसानों के पास गौ-पालन से जुड़ा तकरीबन तीन वर्ष का अनुभव होना चाहिए। इसके साथ-साथ कामधेनु का फायद उठा चुके लाभार्थी इसका फायदा नहीं उठा पाऐंगे।

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योजना का लाभ लेने हेतु किन कागजों की आवश्यकता पड़ेगी

आपकी जानकारी के लिए बतादें, कि आपको इस योजना का फायदा उठाने के लिए राज्य सरकार द्वारा अथवा केंद्र द्वारा प्रदत्त समस्त अधिकारिक आई-डी कार्ड को अपने पास सुरक्षित रख लें, जिससे आपको आवेदन करते समय किसी भी प्रकार की कोई समस्या न हो। 

इसके लिए आपके पास आधार कार्ड, मूल निवास प्रमाण, जमीन का विवरण, बैंक अकाउंट विवरण, मोबाइल नंबर और पासपोर्ट साइज फोटो का होना बेहद आवश्यक है।

लघु और सीमांत किसानों को अब सुगमता से मिला ऋण

लघु और सीमांत किसानों को अब सुगमता से मिला ऋण

भारत के लघु कृषकों को वर्तमान में आसानी से कर्जा मिल पाऐगा। बतादें, कि मोदी सरकार शीघ्र ही एक नया प्रोग्राम लॉन्च करने जा रही है, जिसके अंतर्गत ऋण और इससे जुड़ी सेवाओं के लिए एआरडीबी से जुड़े छोटे और सीमांत किसानों को फायदा होगा। देश के लघु कृषकों के लिए केंद्र सरकार शीघ्र ही नवीन योजना जारी करने जा रही है। दरअसल, केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह शीघ्र ही कृषि और ग्रामीण विकास बैंकों (Rural Development Banks) और सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार (Registrar of Cooperative Societies) लिए कम्प्यूटरीकरण परियोजना का आरंभ करने जा रही है। 

आधिकारिक बयान के मुताबिक, अमित शाह राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में एआरडीबी और आरसीएस की कम्प्यूटरीकरण परियोजना को लागू करेंगे। इस कार्यक्रम का आयोजन सहकारिता मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) की मदद से किया जा रहा है। राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के कृषि और ग्रामीण विकास बैंकों (ARDBs) और सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार (RCSs) कार्यालयों का कम्प्यूटरीकरण मंत्रालय द्वारा उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है। 

एनसीडीसी की मदद से सहकारिता मंत्रालय द्वारा आयोजित

यह कार्यक्रम एनसीडीसी (राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम) के सहयोग से सहकारिता मंत्रालय द्वारा आयोजित किया जा रहा है। योजना के अंतर्गत राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के कृषि और ग्रामीण विकास बैंकों (ARDBs) और सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार (RCSs) कार्यालयों का पूर्णतय कंप्यूटरीकरण  किया जाएगा, जो सहकारिता मंत्रालय द्वारा उठाया गया एक अहम कदम है। बयान में कहा गया है, कि इस परियोजना के जरिए सहकारी क्षेत्र का आधुनिकीकरण और दक्षता बढ़ाई जाऐगी। जहां संपूर्ण सहकारी तंत्र को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाया जाऐगा। 

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एआरडीबी की 1,851 इकाइयों को कंप्यूटरीकृत करने का कार्य जारी 

बयान में कहा गया है, कि 13 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में एआरडीबी की 1,851 इकाइयों को कंप्यूटरीकृत किया जाएगा। साथ ही, इन्हें राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (NABARD) के साथ जोड़ा जाऐगा। इसके जरिए सामान्य तौर पर इस्तेमाल होने वाले एक सामान्य राष्ट्रीय सॉफ्टवेयर पर आधारित होंगे। यह पहल कॉमन अकाउंटिंग सिस्टम (सीएएस) और मैनेजमेंट इन्फॉर्मेशन सिस्टम (एमआईएस) के द्वारा व्यावसायिक प्रक्रियाओं को मानकीकृत करके एआरडीबी में कार्य संचालन क्षमता, जवाबदेही और पारदर्शिता को प्रोत्साहित करेंगे। इस कदम से प्राइमरी एग्रीकल्चर क्रेडिट सोसायटीज (पैक्स) के जरिए छोटे और सीमित कृषकों को एकड़ और संबंधित सेवाओं के लिए एआरडीबी से लाभ मिलेगा। 

गोधन न्याय योजना छत्तीसगढ़ की अनूठी पहल

गोधन न्याय योजना छत्तीसगढ़ की अनूठी पहल

कभी कृषि किसान और देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले गौर्धन की दुर्दशा हर राज्य में हो रही है। उत्तर प्रदेश में गोधन को बचाने के लिए आश्रय सदन खोले गए हैं वहीं छत्तीसगढ़ में गोधन न्याय योजना के माध्यम से एक ठोस पहल की गई हुई है। सरकार ₹2 प्रति किलोग्राम की दर से किसानों का गोबर खरीद रही है। इससे गांव धन पालने वाले गरीब किसान करो जान गोपालन की ओर होना तय है। इतना ही नहीं गौ संरक्षण की दिशा में है इस योजना के कई अहम दूरगामी परिणाम सामने आएंगे। विदित हो की मशीनीकरण के चलते गौर्धन विशेषकर नर गोवंश हर राज्य में दुर्दशा का शिकार हो रहा है। पशु शक्ति का कृषि और वजन ढोने वाले कामों में प्रयोग बेहद कम होने के कारण नर पशु का उपयोग खेती में नहीं रहा है। यही वजह है छोटी जोत के किसान और गरीबों के लिए इनका भरण पोषण करना मुश्किल हो गया है। छत्तीसगढ़ राज्य की गोधन न्याय योजना ग्रामीणों और पशुपालकों के लिए अतिरिक्त आय का जरिया बन गई है। राज्य में हरेली पर्व से शुरू हुई गोधन न्याय योजना के अंतर्गत ग्रामीणों से दो रूपए प्रतिकिलो की दर से गोबर की खरीदी की जा रही है। ग्रामीण किसान पशुपालन को लेकर उत्साहित हैं तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण गोबर खरीदी केन्द्र में गोबर बेचने आ रहे हैं। गौठानों में स्थित गोबर खरीदी केन्द्र में गोबर बेचने के लिए सभी हितग्राहियों को गोबर क्रय पत्रक दिया गया है। क्रय पत्रक में गोबर खरीदी की मात्रा, राशि दर्ज की जा रही है। गोबर को दो रूपए प्रतिकिलो की दर से खरीद कर प्रत्येक 15 दिनों में भुगतान हितग्राही के बैंक खाते में सीधे ही किया जाएगा। कोरबा जिले में गोधन न्याय योजना शुरू होने के दो दिनों मे ही किसानों नेे लगभग 11 हजार किलो गोबर की बिक्री की है, जिससे 21 हजार रूपए से अधिक आय हुई है। जनपद कोरबा में सर्वाधिक गोबर की बिक्री हुई है। किसानों ने तीन हजार 975 किलोग्राम गोबर बेचकर सात हजार 950 रूपए की आवक प्राप्त की है। जनपद करतला मे किसानों से एक हजार 817 किलोग्राम गोबर खरीदी की गई जिससे तीन हजार 634 रूपए की आमदनी किसानों को हुई। जनपद कटघोरा के किसानों ने एक हजार 753 किलोग्राम गोबर बेचकर तीन हजार 306 रूपए कमाए। जनपद पाली के किसानों ने एक हजार 216 किलोग्राम गोबर बेची और दो हजार 433 रूपए का लाभ प्राप्त किए। इसी प्रकार जनपद पोड़ी-उपरोड़ा में कुल दो हजार 130 किलोग्राम गोबर की खरीदी की गई जिससे किसानों को चार हजार 260 रूपए का लाभ मिला। इसी तरह उत्तर बस्तर कांकेर जिले के 197 गौठानों में किसानों और पशुपालकों ने 137 क्विंटल तथा नारायणपुर नगर पंचायत क्षेत्र के बखरूपारा और कुम्हार पारा स्थित एसएलआरएम सेंटर में गोधन न्याय योजना के शुभारंभ अवसर पर 3.57 क्विंटल गोबर की खरीदी दो रूपए किलो की दर पर की गई। जांजगीर-चांपा जिले के 216 गौठानों में 13 हजार 771 क्विंटल तथा दंतेवाड़ा जिले के 4 गौठानों में 8.68 क्विंटल गोबर की खरीदी हुई है। जिससे किसानों और पशुपालकों को अतिरिक्त लाभ होने लगा है। विकासखंड पाली के ग्राम रैनखुर्द की महिलाएं गोधन न्याय योजना से बहुत खुश नजर आ रही है। इस योजना को उन्होंने किसान हितैषी और ग्रामीणों की आय का अतिरिक्त जरिया बताया। ग्राम रैनखुर्द की श्रीमती नंदनी यादव ने बताया कि उनके पास सात मवेशी है, जिससे वह लगभग 35 किलो गोबर एक दिन में बेच रही है। श्रीमती यादव बताती है कि पहले गोबर को बिना उपयोगी समझकर फेंक देते थे अब गोबर के दो रूपए प्रतिकिलो पैसा मिलने से और अधिक संख्या में मवेशी रखने को प्रोत्साहित हो रही है। महिलाओं ने बताया कि पहले गोबर से खाद बनाने में तीन महीने लग जाते थे, जिससे गोबर खाद का उपयोग बेहतर तरीके से नहीं हो पाता था।

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अब गौठानों में गोबर बेचने से 45 दिनो में ही वर्मी कम्पोस्ट तैयार हो जाएगी और किसान अपनी सुविधाजनक समय में इसका उपयोग कर सकेंगे। गोधन न्याय योजना से महिला स्व-सहायता समूह की महिलाओं को भी आर्थिक लाभ होगा। जैैविक खाद के उपयोग से विषसहित खाद्यान्न का उत्पादन होगा। रसायनिक खाद के उपयोग में कमी आएगी। खेती की लागत कम होगी। खुले में मवेशी चराई पर रोक लगेगी। लोग अपने मवेशी को घर में ही रखेंगे। गोबर बेचने से होने वाली अतिरिक्त आय से ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति सुधरेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

सरकार की अनूठी और सार्थक पहल

बुंदेलखंड में हजारों गायों को संरक्षण देने वाले एवं पूर्व में यमुना बचाओ आंदोलन की हुंकार दिल्ली दरबार तक पहुंचाने वाले बाबा जय कृष्ण दास कहते हैं कि सरकार ने बेहद सार्थक पहल की है। वह यह मांग तकरीबन एक दशक से करते चले आ रहे हैं। गौ संरक्षण पर काम करने वाले अनेक लोग हुई गाय के गोबर और गोमूत्र के उत्पाद बनाकर वह संरक्षण की वकालत करते रहे हैं।बसंत गाय केवल दूध के लिए नेपाली जाए उसके अन्य उत्पादों की भी कीमत मिले उनके उत्पाद बनें और उनकी मार्केटिंग हो। बाबा कहते हैं कि उत्तर प्रदेश में आश्रय सदनों पर जितनी धनराशि खर्च हो रही है उसका एकांश भी यदि गोबर खरीद जैसी योजनाओं पर खर्च करना शुरू कर दिया जाए तो गांव संरक्षण की दिशा में सार्थक रहेगा। वह कहते हैं कि आश्रय सदनों में काय हो या कोई और उतनी हिफाजत से नहीं रह सकता जितनी फासत से एक पशुपालक पशुओं की देखभाल कर सकता है।
उत्तर प्रदेश के 35 जनपदों के किसानों को राहत, मिलेगा फसल नुकसान का मुआवजा

उत्तर प्रदेश के 35 जनपदों के किसानों को राहत, मिलेगा फसल नुकसान का मुआवजा

पिछले दिनों हुई बारिश से उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में फसलें बुरी तरह बर्बाद हो गई। एक रिपोर्ट की माने तो उत्तर प्रदेश में 2 लाख 35 हजार किसानों की फसलों का नुकसान हुआ है जिसके चलते राज्य सरकार ने फैसला किया है कि, इन किसानों की फसलों का नुकसान वह मुआवजे के रूप में अदा करेगी। दरअसल, उत्तर प्रदेश सरकार ने बारिश से बर्बाद हुई फसलों का आकलन किया जिसके बाद किसानों को लगभग 78 करोड़ 88 लाख रुपए मुआवजा देने के निर्देश दिए हैं। बता दें, इस मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को उच्च स्तर पर बैठक की। इसी दौरान बैठक में शामिल हुए अपर मुख्य सचिव राजस्व मनोज कुमार सिंह के मुताबिक, 35 जिलों में 2,35,122 ऐसे किसान पाए गए जिनकी फसल बारिश के चलते बर्बाद हो गई। कहा जा रहा है कि, जिन किसानों की फसल बर्बाद हुई है उन किसानों को करीब 78 करोड़ 88 लाख रुपए धनराशि दी जाएगी। बता दें, 17, 18 से 19 अक्टूबर के दौरान हुई भारी बारिश के चलते किसानों की फसले बुरी तरह बर्बाद हुई है। ये भी पढ़े: कृषि कानूनों की वापसी, पांच मांगें भी मंजूर, किसान आंदोलन स्थगित इस दौरान किसानों की फसले पूरी तरह से पक गई थी और इसे खेत से काटना भी शुरू कर दिया था लेकिन इसी बीच बारिश किसानों की दुश्मन बन गई और खेत में कटी पड़ी और उगी हुई फसलों को बर्बाद करके चली गई। ऐसे में किसान बुरी तरह परेशान हो रहे थे लेकिन इसी बीच उत्तरप्रदेश सरकार ने किसानों का हौसला बनाए रखा और उन्हें मुआवजा देने की बात कही। आइए जानते हैं किन किसनों को मिलेगा ये मुआवजा? मुआवजा

इन जिलों में हुआ भारी नुकसान

रिपोर्ट की माने तो उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में करीब 37,848 किसानों की फसलें बर्बाद हुई है। वहीं यदि सबसे कम नुकसान के बारे में बात करें तो श्रावस्ती जिले में सबसे कम फसलों का नुकसान हुआ है। इसी को ध्यान में रखते हुए सीएम का कहना है कि वह किसान को जल्द से जल्द इस मुआवजे की राशि प्रदान करेंगे। रिपोर्ट की मानें तो मुख्यमंत्री ने करीब राज्य के 35 जनपदों के किसानों को मुआवजा देने की बात कही है।

इन जिलों के किसानों को मिलेगा मुआवजा

35 जनपदों में महाराजगंज, गोरखपुर, संत कबीर नगर, कुशीनगर, बलिया, सीतापुर, मिर्जापुर, सिद्धार्थनगर, देवरिया, बहराइच, झांसी, बाराबंकी, वाराणसी, गाजीपुर, खीरी, ललितपुर, जालौन, लखीमपुर ,कौशांबी, चंदौली, बस्ती, बिजनौर, गोंडा, अंबेडकर नगर, बांदा, चित्रकूट, बलरामपुर, पीलीभीत, कानपुर देहात, औरैया, फर्रुखाबाद, भदोही, श्रावस्ती, आगरा और सुल्तानपुर जैसी जनपद का नाम शामिल है।

33% से ज्यादा खराब फसलों को ही मिलेगा मुआवजा

बता दें, यह राशि सिर्फ उन्हीं किसानों को प्राप्त होगी जिनकी फसल 33% से ज्यादा खराब हो चुकी है। इतना ही नहीं बल्कि राज्य सरकार की तरफ से सिर्फ उन्हीं किसानों को यह मुआवजा देने का प्रावधान भी है। इसके अलावा किसानों को यह मुआवजा तब मिलता है जब उनकी फसलें ओलावृष्टि, पाला बाढ़ या फिर शीतलहर के चलते बर्बाद हो गई हो। किसानों को 2 हेक्टेयर तक ही मुआवजा मिलता है। बता दें जिन किसानों की सिंचित भूमि होती है उन्हें 4500 रुपए बल्कि असंचित भूमि पर 9 हजार रुपए दिए जाते हैं।

 बीमा कराई  गई फसलों को पहले मिलेगा मुआवजा

बता दें कि, इस तरह का मुआवजा उन किसानों को प्राप्त होता है जिन्होंने अपनी फसल का बीमा करवाया होता है। दरअसल, इसके लिए जब फसलों का आकलन करने के लिए बीमा कंपनी अधिकारी आते हैं तब किसान को अपनी फसल का बीमा करवाना होता है। इसके बाद बीमा अधिकारी द्वारा किसान की फसलों का आकलन किया जाता है, इसके बाद मुआवजे की राशि प्रदान की जाती है। हालांकि यह राशि सिर्फ उन्ही किसानों को प्रदान की जाती है जिनकी फसलें 33% से अधिक खराब हो चुकी।

जिन लोगों ने नहीं करवाया होता है फसल का बीमा

बता दें जिन किसानों ने उनकी फसलों का बीमा नहीं करवाया होता है ऐसे किसानों को मुआवजा मिलने में थोड़ी दिक्कत होती है। हालांकि जांच के बाद हर किसी को मुआवजे की राशि मिल जाती है। रिपोर्ट की माने तो उत्तर प्रदेश के रामपुर में उड़द की फसलें भी बुरी तरह से चौपट हो गई है। दरअसल 17, 18 और 19 अक्टूबर को बारिश के दौरान उड़द की फसलों को ज्यादा नुकसान हुआ। क्योंकि बारिश रुक-रुक कर हो रही थी ऐसे में उड़द पर इसका बुरा प्रभाव हुआ। इतना ही नहीं बल्कि उन किसानों को उड़द का अधिक नुकसान हुआ जिनकी फसलें पहले से ही पक गई थी और उन्होंने इस फसल को काटकर अपने खेत में ही छोड़ दी थी। ऐसे में उड़द खेत में ही बुरी तरह सड़ गया और रुक-रुक कर बारिश होने के चलते इसे धूप भी नहीं मिली जिसके चलते उड़द की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई। रिपोर्ट की माने तो रामपुर में करीब 15% से अधिक उड़द की फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई है। इतना ही नहीं बल्कि इसमें कुछ ऐसे भी किसान शामिल है जिन्होंने अपनी फसल का बीमा नहीं करवाया था। ऐसे में अब सवाल यह उठता है कि इन किसानों की फसल की भरपाई कैसे होगी? हालांकि उत्तर प्रदेश सरकार ने जांच के निर्देश दे दिए हैं। बता दें, उत्तर प्रदेश में बेमौसम बारिश हुई, वहीं रामगंगा जैसी नदी में बाढ़ आने के कारण उड़द की फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई। ये भी पढ़े: हरियाणा में फसल बीमा 31 जुलाई तक कृषि अधिकारी नरेंद्र पाल के मुताबिक, रामपुर जिले में करीब 35 हेक्टेयर पर उड़द की खेती की जाती है। इसी बीच नरेंद्र पाल ने किसानों से मुलाकात की और उनकी फसलों का आकलन भी किया। जिन किसानों की उड़द की फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई उन्हें नरेंद्र पाल ने आश्वासन दिया है कि वह जल्दी ही इसका मुआवजा दिलाने में मदद करेंगे। रिपोर्ट की मानें तो जिन किसानों ने अपनी फसल का बीमा करवाया है उन्हें बीमा कंपनी द्वारा जल्दी ही मुआवजा प्रदान हो जाएगा लेकिन जिन लोगों ने अपनी फसल कम बीमा नहीं करवाया है, इसके लिए पहले तहसीलदार उनकी फसलों का आकलन करेंगे, इसके बाद ही उन्हें किसी प्रकार की मदद मिल पाएगी।

फसल बीमा के नियम में बदलाव

बता दें, जिन फसलों का बीमा हो चुका है उनके लिए नियमों में भी कुछ बदलाव किया गया है। नए नियम के अनुसार यदि किसी किसान की फसल का नुकसान प्राकृतिक आपदा के चलते हुआ हो तो उसे बीमा कंपनी द्वारा मुआवजा प्रदान होगा। यदि किसी किसान का गेहूं काटने से पहले ही आग लग जाती है फिर बारिश हो जाती है जिसके चलते फसल बर्बाद हो जाती है। इस स्थिति में न सिर्फ जिस किसान की फसल बर्बाद हुई है उसे इसका मुआवजा मिलता बल्कि आसपास के किसान भी इस योजना का लाभ उठा लेते हैं। दरअसल जिन लोगों की फसलें बर्बाद नहीं होती है उन किसानों को भी इस योजना में पैसे मिल जाते थे, यही वजह है कि फसल बीमा में नए नियम लागू किए गए हैं। नए नियम के मुताबिक, सिर्फ वही किसान इस योजना का लाभ उठा सकता है जिसका नुकसान हुआ है। इतना ही नहीं बल्कि जिस किसान का नुकसान हुआ है उसे अपने कुछ जरूरी जमीन से जुड़े कागजात भी दिखाने होते हैं। इसके बाद उसे बैंक से भी संपर्क करना होता है तभी कहीं जाकर उसे यह राशि प्राप्त होती है। ये भी पढ़े: फसल बीमा योजना का लाभ लें किसान आपकी जानकारी के लिए बता दें कि, जिन किसानों के पास क्रेडिट कार्ड है उन्हें फसल बीमा योजना की आवश्यकता नहीं होती। इसके लिए सिर्फ जिस किसान की फसल बर्बाद हुई है उसे टोल फ्री नंबर 18001030061 पर अपनी फसल की सूचना देनी होती है। इसके अलावा किसान को कृषि विभाग के अधिकारियों को भी इस बात की जानकारी देनी होती है, जिसके बाद ही वह फसल बीमा योजना का लाभ उठा सकते हैं।
प्रधानमंत्री कुसुम योजना: किसानों को बड़ा तोहफा, सोलर पंप (Solar Pump) पर 90 प्रतिशत तक की सब्सिडी

प्रधानमंत्री कुसुम योजना: किसानों को बड़ा तोहफा, सोलर पंप (Solar Pump) पर 90 प्रतिशत तक की सब्सिडी

केन्द्र सरकार किसानों की आय बढ़ाने व खेती की लागत कम करने योजनाएं लाकर किसानों की तरह-तरह से मदद करना चाहती है।  

केन्द्र सरकार ने इसी कड़ी में प्रधानमंत्री कुसुम योजना के तहत किसानों को सोलर पम्प खरीदने के लिए बहुत अच्छी आकर्षक योजना बनायी है। 

इस योजना के तहत किसानों को सोलर पम्प की लागत का केवल 10 प्रतिशत हिस्सा देना होगा बाकी सरकार और बैंक क्रेडिट से मिलेगा। आइये जानते हैं इस बारे में विस्तार से।

किसानों की समृद्धि में सहायक है ये योजना

PM kusum yojana

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प्रधानमंत्री कुसुम योजना के दूसरे चरण में सोलर पम्प खरीदने की जो सब्सिडी दी जा रही है उससे किसान भाई कम से कम पैसे में अपनी जरूरत को पूरा करने के लिए सिंचाई की सुविधा जुटा सकते हैं। 

इसके अलावा बिजली से चलने वाले छोटे  मोटे काम भी आसानी से कर सकते हैं। इस तरह से किसान भाई अपने परिवार की आर्थिक स्तर उठा सकते हैं। 

साथ ही खेती से जुड़े ऐसे काम भी कर सकते हैं जिनसे किसानों को अतिरिक्त आय मिल सके। इस प्रकार किसान भाई इस योजना से लाभ उठायेंगे तो उनकी कृषि पैदावार भी बढ़ेगी। साथ ही उनके गांव का भी विकास हो जायेगा।

Content

  1. योजना का दूसरा चरण हो गया है शुरू, आवेदन करें
  2. किसानों को क्या लाभ
  3. महाराष्ट्र सरकार दे रही है कितनी सब्सिडी
  4. दूसरे राज्यों में ये है व्यवस्था
  5. पात्रता की शर्तें
  6. आवश्यक दस्तावेज
  7. आवेदन की प्रक्रिया
  8. ऑनलाइन आवेदन ऐसे करें

योजना का दूसरा चरण हो गया है शुरू, आवेदन करें

प्रधानमंत्री कुसुम योजना का दूसरा चरण लागू किया जा रहा है।  योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन करना शुरू हो गया है। जो किसान भाई सोलर पम्प खरीद कर योजना का लाभ प्राप्त करनाचाहते हों तो वे आवेदन कर सकते हैं। 

पीएम कुसुम योजना के दूसरे चरण में किसान भाइयों को सिर्फ 10 प्रतिशत का हिस्सा देना होगा बाकी 90 प्रतिशत की सब्सिडी का लाभ मिलेगा।  

इस योजना का 60 प्रतिशत हिस्सा सरकार की ओर से सब्सिडी के रूप में वहन किया जाता है बाकी 30 प्रतिशत हिस्सा क्रेडिट के रूप में बैंक की ओर से दिया जाता है।

किसानों को क्या हो सकता है लाभ

kusum yojana

सोलर पम्प लगाने से किसान भाइयों को सिंचाई के अलावा अन्य वो कार्य जो बिजली से होते हैं, बिना किसी परेशानी के होंगे। साथ बिजली में आत्मनिर्भरता होगी । 

किसान भाइयों को बिजली कटौती, अधिक बिजली बिल या डीजल की महंगाई की समस्या से भी छुटकारा मिल जायेगा। इसके अलावा यदि किसान भाई अपनी जरूरत से अधिक बिजली पैदा कर लेते हैं तो वे उसे ग्रिड को बेच कर घर बैठे लाभ भी कमा सकते हैं।

महाराष्ट्र सरकार दे रही है कितनी सब्सिडी

केन्द्र सरकार और राज्य सरकारों के सहयोग से यह योजना चलायी जा रही है। इस योजना के तहत राज्य सरकारें अपनी-अपनी सुविधा के अनुसार अपने-अपने राज्य के किसानों को अलग-अलग सब्सिडी दे रहीं है। 

महाराष्ट्र सरकार ने अपने राज्य के किसानों को प्रधानमंत्री कुसुम योजना के तहत सोलर पम्प खरीदने वाले किसान भाइयों को 90 प्रतिशत तक सब्सिडी दिये जाने का प्रावधान किया है।

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दूसरे राज्यों में ये व्यवस्था

PM kusum yojana

इसके अलावा राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश भी अपने-अपने किसानों को प्रधानमंत्री कुसुम योजना के तहत सोलर पम्प खरीदने वालों को 90 प्रतिशत सब्सिडी दिये जाने की व्यवस्था की है जबकि हरियाणा सरकार ने अपने किसानों को इस योजना के तहत सोलर पम्प खरीदने के लिए 75 प्रतिशत सब्सिडी दिये जाने का प्रावधान किया है।

पात्रता की शर्तें:-

प्रधानमंत्री कुसुम योजना के दूसरे चरण में सोलर पम्प खरीदने वाले किसान भाइयों की पात्रता के लिए कौन-कौन सी शर्ते तय की गयी हैं, जानिये वे इस प्रकार हैं:-

  1. भारत का स्थायी निवासी होना चाहिये
  2. इस योजना में 0.5 मेगावाट से 2 मेगावाट तक की क्षमता वाले सोलर प्लांट के लिए आवेदन किया जा सकता है।
  3. किसानों द्वारा स्वयं निवेश करने पर किसी प्रकार की वित्तीय योग्यता की जरूरत नहीं है। लेकिन यदि आवेदक किसी डेवलपर कीमदद लेता है तो उस डेवलपर के लिए 1 करोड़ रुपये प्रति मेगावाट की नटवर्ध होना जरूरी होगा।
  4. आवेदनकर्ता के लिए अपनी भूमि के अनुपात में 2 मेगावाट का सोलर प्लांट लगाने क्षमता है तो कोई बात नहीं वरना वितरण निगम द्वारा अधिसूचित क्षमता के अनुसार ही आवेदन किया जा सकता है।

आवश्यक दस्तावेज

  1. आवेदनकर्ता का आधार कार्ड होना चाहिये
  2. आवेदक का राशन कार्ड भी होना चाहिये
  3. आवेदक के पास ऐसा मोबाइल नंबर होना चाहिये जो आधार कार्ड से लिंक हो।
  4. बैंक खाता की डिटेल देनी होगी, बैंक खाता की पासबुक की कॉपी चाहिये।
  5. किसान की जमीन की जमाबंदी की कॉपी
  6. रजिस्ट्रेशन की प्रति
  7. यदि डेवलपर से मदद ली जा रही है तो उसकी सीए द्वारा जारी नेटवर्थ सर्टिफिकेट जरूरी होगा।

आवेदन की प्रक्रिया

प्रधानमंत्री कुसुम योजना के तहत सोलर पम्प खरीद पर सब्सिडी लेने के लिए किसान भाइयों को ऑनलाइन आवेदन करना होगा। आपको इसके लिए केन्द्र सरकार की अधिकृत वेबसाइट पर जाना होगा या फिर अपने राज्य की वेबसाइट पर भी जाकर आवेदन कर सकते हैं। 

इसकी पूर्ण प्रक्रिया इस प्रकार होगी। -आपको ऑनलाइन आवेदन के लिए केन्द्र सरकार की वेबसाइट https://mnre.gov.in पर जाना होगा। -यदि आप महाराष्ट्र सरकार के समक्ष आवेदन करना चाहते हैं तो आपको उनकी वेबसाइट  https://kusum.mahaurja.com/solar/benf_login पर जाकर लॉगिन करना होगा। 

इसी तरह अन्य राज्यों की अलग-अलग वेबसाइट पर जाकर भी प्रधानमंत्री कुसुम योजना मे सोलर पम्प खरीदने का आवेदन किया जा सकता है। ऑनलाइन आवेदन ऐसे करें -

जब आप वेबसाइट पर लॉगइन करेंगे तो आपको होम पेज पर आवेदन पत्र का लिंक दिखाई देगा। जिसको क्लिक करें। 

क्लिक करते ही आपको आवेदन पत्र सामने ही दिख जायेगा। जिसको पढ़कर उसमें मांगी गयी जानकारी को भर दें।

आपकी जानकारी के अनुसार मांगे गये दस्तावेजों की डिटेल और उनकी स्कैन कॉपी अपलोड कर दें।

इसके बाद फार्म और अपलोड किये जाने वाले दस्तावेजों को एक बार ध्यान से चेक करने के बाद सबमिट कर दें। इस तरह से आपका आवेदन फार्म सरकार के पास जमा हो जायेगा। बाद बाकी सरकार की ओर से कार्रवाई की जायेगी।

पीएम कुसुम योजना में पंजीकरण करने का दावा कर रहीं फर्जी वेबसाइट : नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की एडवाइजरी

पीएम कुसुम योजना में पंजीकरण करने का दावा कर रहीं फर्जी वेबसाइट : नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की एडवाइजरी

पीएम कुसुम योजना को लेकर नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने जारी की अपनी एडवाइजरी

पीएम कुसुम योजना में पंजीकरण करने का दावा कर रहीं फर्जी वेबसाइट को लेकर नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने जारी की अपनी एडवाइजरी नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ( एमएनआरई ) ( Ministry of New and Renewable Energy (MNRE) )  ने अपना सुझाव देते हुए कहा है कि अपने व्हाट्सएप/एसएमएस पर ऐसी किसी भी लिंक पर क्लिक ना करें जो प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पीएम-कुसुम) योजना के लिए पंजीकरण का दावा करते हैं अन्यथा इससे आपको भरी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

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क्या है पीएम-कुसुम योजना ?

नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा जारी की गई इस योजना के तहत आपको अपना सोलर पंप स्थापित करने और कृषि पंपों के सोलाराइजेशन के लिए सब्सिडी दी जाती है। 

जिससे आपको अधिक रुपए खर्च करने की जरूरत नहीं होगी। लेकिन इस योजना के लागू होने के बाद से ही कई सारी फर्जी वेबसाइट पीएम कुसुम योजना में पंजीकरण करने दावा कर रहीं हैं जिसका नुकसान कई बार आम लोगों को उठाना पड़ता है। 

इन फर्जी वेबसाइट के माध्यम से आम जनता को नुकसान ना हो इसके लिए मंत्रालय-एमएनआरआई परामर्श जारी किया गया है।

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एनएमआरआई एडवाइजरी

एनएमआरआई ने अपनी एडवाइजरी में कहा है कि योजना लागू होने के बाद कुछ वेबसाइट द्वारा स्वयं को पीएम कुसुम के लिए पंजीकरण पोर्टल होने का दावा किया गया है। 

सी वेबसाइट लोगों को आर्थिक नुकसान पहुंचा रही हैं जो लोग इन वेबसाइट में रुचि लेते हैं उन लोगों से यह वेबसाइट धन की वसूली कर रही हैं और उनके बारे में जानकारी एकत्र कर रही हैं। 

नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा वेबसाइटों से होने वाले नुकसान को टालने के लिए पहले भी सार्वजनिक नोटिस जारी करके लोगों को सलाह दी थी कि वे इस तरह की वेबसाइटों में पंजीकरण फीस न जमा करें और ना ही उन्हें अपनी जानकारी दें। 

जिसके चलते शिकायतें प्राप्त होने पर इन फर्जी वेबसाइटों के खिलाफ कार्रवाई की गई है और अनेक पंजीकरण पोर्टलों को ब्लॉक कर दिया गया है, लेकिन इसके बावजूद भी व्हाट्सएप और अन्य साधनों के द्वारा लाभार्थियों को बहकाया जा रहा है। 

इसलिए मंत्रालय यह परामर्श देता है कि इस योजना में रुचि रखने वाले लोग ऐसी किसी भी फर्जी वेबसाइट में जाकर व्यक्तिगत जानकारी देने या धन जमा करने से बचें और वेबसाइट के बारे में संपूर्ण जानकारी प्राप्त करके उसकी प्रमाणिकता की जांच करें।

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मंत्रालय प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा और उत्थान महाअभियान योजना लागू कर रहा है जिसके अंतर्गत कृषक को सोलर पंप स्थापित करने और कृषि पंपों के सौरकरण के लिए सब्सिडी दी जाती है। 

किसान 2 मेगावाट तक ग्रिड से जुड़े सौर विद्युत संयंत्रों को भी स्थापित कर सकते हैं। यह योजना राज्य सरकारों द्वारा निर्धारित विभागों के द्वारा लागू की जा रही है जिसकी संपूर्ण जानकारी एमएनआरआई की वेबसाइट www.nmre.gov.in. पर उपलब्ध है। 

योजना में भाग लेने के लिए पात्रता और क्रियान्वयन प्रक्रिया संबंधी जानकारी प्राप्त करने के लिए मंत्रालय द्वारा जारी की गई वेबसाइट http://www.mnre.gov.in या पीएम-कुसुम सेंट्रल पोर्टल https://pmkusum.mnre.gov.in पर उपलब्ध है और अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए टोल फ्री नंबर 1800-180-3333 डायल करके इस योजना संबंधी संपूर्ण जानकारी आप प्राप्त कर सकते हैं।